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भास्कर एनालिसिस:370 हटने के बाद हमारे एक जवान की शहादत के बदले में सेना 4 आतंकियों का सफाया कर रही

14 दिन पहलेलेखक: प्रियंक द्विवेदी
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  • पिछले साल 5 अगस्त को कश्मीर को खास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटा लिया गया था
  • मनमोहन सरकार में हर दिन औसतन 2 आतंकी घटनाएं होती थीं, मोदी के समय दो दिन में 1 हो रही

जम्मू के नरगोटा में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। चारों आतंकी गोला-बारूद और हथियार लेकर श्रीनगर जा रहे थे। इनके पास से जो हथियार मिले हैं, उससे पता चलता है कि ये चारों किसी बड़े हमले को अंजाम देने जा रहे थे। लेकिन इससे पहले कि कोई हमला होता, सेना ने उन्हें मार गिराया।

आतंकवाद रोकने के लिए सेना ने अब यही पैटर्न अपना लिया है। कोई भी घटना या हमला होने से पहले ही आतंकियों को मार दिया जाए। नतीजा, आतंकी घटनाएं कम हुईं और आतंकियों की मरने की संख्या ज्यादा। आंकड़े भी यही बताते हैं। मनमोहन सिंह की 10 साल की सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर में 9,739 आतंकी घटनाएं हुई थीं। मोदी के 6 साल में 2,302 आतंकी घटनाएं हुईं।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के पास इस बात का डेटा है कि 5 अगस्त 2019 यानी जिस दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा, इसके बाद कितनी आतंकी घटनाएं हुई हैं और कितने आतंकी मारे गए हैं। हालांकि, ये डेटा 9 सितंबर 2020 तक का ही है। इस डेटा के मुताबिक, 5 अगस्त 2019 से लेकर 9 सितंबर 2020 तक इन 402 दिनों में 211 आतंकी घटनाएं हुईं हैं, जिसमें 194 आतंकी मारे गए हैं। इन घटनाओं में सेना के भी 49 जवान शहीद हुए हैं। यानी, अब आतंकी एक जवान को शहीद करते हैं, तो सेना बदले में 4 आतंकियों को मार रही है।

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी घटनाओं में भी 50% से ज्यादा की गिरावट आई है। 29 जून 2018 से 4 अगस्त 2019 तक के 402 दिनों में 455 आतंकी घटनाएं हुई थीं। यानी, हर दिन 1 से ज्यादा घटनाएं। लेकिन, उसके बाद 5 अगस्त 2019 से 9 सितंबर 2020 तक 402 दिनों में ही 211 घटनाएं हुईं। यानी, 2 दिन में 1 बार।

9 सितंबर तक 168 आतंकी मारे गए, 2019 में सालभर में 157 मारे गए थे

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी घटनाओं में भले ही कमी आई हो, लेकिन पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ बढ़ी है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 5 अगस्त 2019 से 2 जुलाई 2020 तक पाकिस्तान की तरफ से 176 बार घुसपैठ की कोशिश की गई, जिसमें से 111 में आतंकी घुसपैठ करने में कामयाब भी रहे।

आतंकी भले ही घुसपैठ करने में कामयाब हो जाते हों, लेकिन सेना उन्हें मार ही देती है। यही वजह है कि इस साल 1 जनवरी से 9 सितंबर तक 252 दिनों में ही सेना 168 आतंकियों को मार चुकी है। जबकि, पिछले साल 365 दिनों में 157 आतंकी मारे गए थे।

कश्मीर में आतंकवाद के 3 दशक में 70,830 आतंकी घटनाएं

जम्मू-कश्मीर में 1990 से आतंकवाद पनपना शुरू हुआ। इस साल कश्मीर में 4,158 आतंकी घटनाएं हुईं। 564 आतंकी मारे गए। 155 जवान शहीद हुए। 1990 से लेकर 2019 तक कश्मीर में आतंक की 70,830 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 24,915 आतंकी मारे गए हैं। हमने 5,294 जवानों को खोया है। 13,779 आम लोग भी मारे गए हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 से लेकर दिसंबर 2001 तक हर साल औसतन 4,300 आतंकी घटनाएं होती थीं। 2001 के बाद इनमें कमी आनी शुरू हुई।

मनमोहन के 10 सालः 9739 घटनाएं हुईं, 4005 आतंकी मरे

मनमोहन सिंह का कार्यकाल मई 2004 से मई 2014 तक रहा। 2004 से 2013 तक के आंकड़े देखें तो इन 10 सालों में 9,739 आतंकी घटनाएं हुईं जिसमें 4,005 आतंकी मारे गए। 1,055 जवान शहीद हुए और 2,081 आम लोगों की जान गई। मनमोहन के 10 साल में हर दिन औसतन 2 से ज्यादा आतंकी घटनाएं हुईं और हर दिन 1 आतंकी मारा गया।

मोदी के 6 सालः 2302 घटनाएं हुईं, 995 आतंकी मरे

मई 2014 से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उनके अब तक के 6 साल यानी 2014 से लेकर 2019 तक आतंक की 2,302 घटनाएं हुईं, जिसमें 995 आतंकी मारे गए। 419 जवान शहीद हुए और 177 आम नागरिकों की जान गई। मोदी सरकार के 6 साल में हर दिन औसतन 1 आतंकी घटना हुई और हर दो दिन में 1 आतंकी मारा गया।

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