भास्कर एक्सप्लेनर:किम-जोंग की सनक से दुनिया में बढ़ा कोरोना का खतरा, नॉर्थ कोरिया में 20 दिनों में 20 लाख को रहस्यमयी बुखार

4 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

करीब ढाई साल तक कोरोना वायरस से बचे रहने के दावे के बाद नॉर्थ कोरिया इन दिनों रहस्यमयी बुखार से जूझ रहा है। अप्रैल के अंत से इस देश में करीब 20 लाख लोग रहस्यमयी बुखार से पीड़ित हो चुके हैं। 12 मई को नॉर्थ कोरिया ने पहली बार अपने देश में कोरोना वायरस पाए जाने की घोषणा की।

इस बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने नॉर्थ कोरिया के हालात पर चिंता जताते हुए कहा है कि वहां जिस अंदाज में कोरोना केस से निपटा जा रहा है उससे दुनिया में कोरोना का नया वैरिएंट फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है नॉर्थ कोरिया में फैल रहा रहस्यमयी बुखार? क्यों इसे कोरोना वायरस का संक्रमण माना जा रहा है? आखिर कैसे चीन की तरह नॉर्थ कोरिया की लापरवाही बन सकती है कोरोना के नए वैरिएंट के फैलने की वजह?

नॉर्थ कोरिया में फैला रहस्यमयी बुखार कोरोना ही है?
WHO ने मार्च 2020 में कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया था। पिछले करीब ढाई साल से नॉर्थ कोरिया अपनी सीमाओं को सील करते हुए इस घातक वायरस से बचे रहने का दावा करता रहा, लेकिन इस साल अप्रैल के अंत से 2.6 करोड़ की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहस्यमयी बुखार से पीड़ित है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया में अप्रैल से अब तक 20 लाख लोग इस रहस्यमयी बुखार से पीड़ित हो चुके हैं। नॉर्थ कोरिया ने 12 मई को अपने यहां पहली बार कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन के संक्रामक सब-वैरिएंट BA.2 पाए जाने की पुष्टि की, लेकिन बेहद कम टेस्टिंग की वजह से उसने कोरोना संक्रमित की सटीक संख्या नहीं बताई।

नॉर्थ कोरिया की स्टेट मीडिया कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी, यानी KCNA के मुताबिक, अप्रैल के अंत से अब तक 20 लाख से ज्यादा लोग बुखार के लक्षणों के साथ बीमार हो चुके हैं। टेस्टिंग की कमी की वजह से नॉर्थ कोरिया ने बहुत कम संख्या में इन मामलों के कोरोना केसेज होने की पुष्टि की है। वहीं विदेशी एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्थ कोरिया में फैले बुखार की वजह कोरोना वायरस ही है।

यानी तमाम दावों के बावजूद नॉर्थ कोरिया अब कोरोना वायरस के भयंकर प्रकोप से जूझ रहा है। हालांकि, नॉर्थ कोरिया का सरकारी मीडिया अब भी पीड़ितों की संख्या बताते समय 'बुखार के मामले' कहकर आंकड़े जारी कर रहा है।

नॉर्थ कोरिया की ओर से 19 मई को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वहां पिछले 24 घंटों में 2 लाख 62 हजार 270 बुखार के मामले आए और एक व्यक्ति की मौत हुई। इससे हाल के दिनों में फैले बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 63 हो गई। इस न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी 7.40 लाख लोग क्वांरटाइन हैं।

किम जोंग ने लगाया सभी शहरों में लॉकडाउन
बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ने और पहला कोरोना केस मिलने के बाद नॉर्थ कोरिया ने इसे राष्ट्रीय आपातकाल की तरह लिया है। वहां के ताशानाह किम जोंग ने सभी शहरों में लॉकडाउन लगा दिया है। बुखार और असामान्य लक्षण वाले लाखों लोगों को क्वारैंटाइन कर दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया का मेडिकल सिस्टम बेहद कमजोर है, इसीलिए दवाओं के सही डिस्ट्रिब्यूशन के लिए राजधानी प्योंगयोंग में मेडिकल सेंटर्स पर सेना तैनात कर दी गई है। माना जा रहा है कि जितने बड़े पैमाने पर वहां कोरोना फैल रहा है, उससे निपट पाने में नॉर्थ कोरिया का मेडिकल सिस्टम सक्षम नहीं है।

नॉर्थ कोरिया नहीं देता दुनिया को सही जानकारी
नॉर्थ कोरिया के उस दावे पर सवाल उठ रहे हैं कि महज कुछ हफ्ते के अंदर ही उसके 10 लाख लोग कोरोना माने जा रहे रहस्यमयी बुखार से ठीक हो गए। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी एक वजह ये हो सकती है कि नॉर्थ कोरिया बुखार कम होते ही लोगों को क्वारैंटाइन से रिलीज कर दे रहा है।

नॉर्थ कोरिया हमेशा से ही दुनिया से खुद से जुड़ी जानकारी छिपाता रहा है। उसने ये कभी नहीं बताया कि 1990 के दशक में वहां पड़े भीषण अकाल में कितनी मौतें हुई थीं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस भीषण अकाल में नॉर्थ कोरिया में 20 लाख लोगों की जान गई थी। 2006-2007 के दौरान वहां फैले खसरा के दौरान भी उसने दुनिया को सही जानकारी नहीं दी थी।

यहां तक कि जब 12 मई को नॉर्थ कोरिया ने देश के पहले कोरोना केस की पुष्टि की तो ये भी नहीं बताया कि कितने लोगों में ये संक्रमण मिला है। उसने बस इतना कहा कि 8 मई को बुखार से पीड़ित कुछ लोगों के सैंपल्स लिए गए थे, जिनमें संक्रामक ओमिक्रॉन वैरिएंट पाया गया।

यही वजह है कि कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्थ कोरिया में कोरोना की स्थिति बहुत भयावह हो सकती है, जो कि दुनिया के लिए भी कतई अच्छा संदेश नहीं है।

नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग की कोरोना से निपटने के तरीके की आलोचना हो रही है
नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग की कोरोना से निपटने के तरीके की आलोचना हो रही है

नॉर्थ कोरिया कैसे कोरोना से बचा रहा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना से बचने के लिए जनवरी 2020 से ही नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम-जोंग-उन ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया था। कोरोना के खतरे को देखते हुए उसने टोक्यो और बीजिंग ओलंपिक में अपनी टीमें ही नहीं भेजीं।

यहां तक कि उसने अपने सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर और अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले चीन से भी लगभग सभी व्यापार पर रोक लगा दी। अभी ये स्पष्ट नहीं है कि देश की सीमाओं की इतनी कड़ी सीलबंदी के बावजूद कोरोना वायरस नॉर्थ कोरिया में प्रवेश कैसे कर गया।

क्यों उठ रहे नॉर्थ कोरिया के दावे पर सवाल
कई एक्सपर्ट्स नॉर्थ कोरिया के पिछले ढाई वर्षों से कोरोना से बचे रहने के दावे पर सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये संभव ही नहीं है कि नॉर्थ कोरिया में अब तक कोरोना केस आए ही न हों, जबकि वह चीन का सीमावर्ती देश है। साथ ही चीन के साथ उसके करीबी संबंधों को देखते हुए दोनों देशों के लोगों की आवाजाही से भी उसके वहां कोरोना जरूर पहुंचा होगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये भी संभव है कि अब जबकि नॉर्थ कोरिया में कोरोना बेकाबू हो चुका है, इसीलिए उसने कोरोना की मौजूदगी को स्वीकार कर लिया है।

WHO ने क्यों जताई नया कोरोना वैरिएंट फैलने की आशंका
WHO इमर्जेंसीज के डायरेक्टर माइक रेयान ने कहा कि हमने बार-बार कहा है कि जिस जगह कोरोना के अनियंत्रित ट्रांसमिशन का खतरा हो, वहां नए वैरिएंट्स के आने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है। माना जा रहा है कि कोरिया की कुल 2.6 करोड़ की लगभग पूरी आबादी का ही कोरोना वैक्सीनेशन ही नहीं हुआ है। यानी वहां कोरोना के अनियंत्रित प्रसार और उससे नए वैरिएंट्स आने का खतरा बहुत ज्यादा है।

WHO के डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस ने नॉर्थ कोरिया से अपील की है कि वो कोरोना महामारी से जुड़े डेटा और जानकारी साझा करे। टेड्रोस का कहना है कि WHO इस बात को लेकर बहुत चिंतित है कि नॉर्थ कोरिया में कोरोना फैलने का खतरा बहुत अधिक है, क्योंकि वहां की लगभग पूरी आबादी अनवैक्सीनेटेड है, जिससे उनके गंभीर रूप से बीमार पड़ने और मौत का खतरा है।

उत्तर कोरिया और इरिट्रिया ही यूनाइटेड नेशंस के ऐसे सदस्य देश हैं जिन्होंने अब तक कोरोना वैक्सीन का कार्यक्रम नहीं शुरू किया है। वहीं, WHO का कहना है कि इन दोनों में से किसी भी देश ने उसके वैक्सीन, दवाओं, परीक्षणों और टेक्निकल सपोर्ट के प्रस्तावों का जवाब नहीं दिया है।

साथ ही नॉर्थ कोरिया पहले भी UN के लाखों कोरोना वैक्सीन देने के ऑफर को ठुकरा चुका है, क्योंकि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी की जरूरत थी।

चीन ने भी शुरू में छिपाई थी जानकारी, फिर तेजी से फैला कोरोना
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्थ कोरिया चीन की राह पर चल रहा है। चीन ने भी शुरू में कोरोना केस को दुनिया से छिपाया था। आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस का पहला केस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में मिला था। माना जाता है कि चीन में उससे पहले ही कोरोना के केस मिल चुके थे, लेकिन उसने दुनिया से इसे छिपाए रखा था।

शुरुआत में कोरोना को फ्लू और बुखार जैसी बीमारी बताकर चीन ने इसकी गंभीरता को दुनिया से छिपाया था। जनवरी 2020 में पहली बार WHO ने कोरोना वायरस मिलने की पुष्टि की थी, लेकिन जब तक दुनिया इसकी गंभीरता समझ पाती, ये चीन से निकलकर पूरी दुनिया में फैल चुका था। पिछले ढाई वर्षों में कोरोना के 52 करोड़ से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं जबकि इससे 62 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

चीन पर यह आरोप भी लगता रहा है कि कोरोना वायरस उसकी वुहान लैब से लीक हुआ और दुनियाभर में फैल गया। इतना ही नहीं माना जाता है कि चीन ने कोरोना से मौतों का असली आंकड़ा भी हजारों गुना कम करके बताया। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने कोरोना से मौतों का आंकड़ा 17000% कम बताया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कोरोना से 5200 नहीं, बल्कि करीब 17 लाख लोगों की मौत हुई है।

ऐसे में जब चीन की तरह ही दुनिया से अपनी चीजों को छिपाकर जीने वाला नॉर्थ कोरिया तेजी से बढ़ते कोरोना केसेज को लेकर जानकारी छिपा रहा है, तो दुनिया के सामने कोरोना के नए वैरिएंट्स आने का खतरा बढ़ गया है।

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