भास्कर एक्सप्लेनर:नए वैरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ पर वैक्सीन कितनी असरदार? WHO ने क्या कहा? हमारे लिए क्या चिंता की बात?

8 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

साउथ अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। कोरोना के इस नए वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VoC) की कैटेगरी में रखते हुए WHO ने इसे ओमिक्रॉन नाम दिया है। यह कोरोना का अब तक का सबसे अधिक म्यूटेशन करने वाला वैरिएंट माना जा रहा है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे 'डरावना' बता रहे हैं। इस वैरिएंट को भारत में दूसरी लहर और दुनिया के कई देशों में तीसरी लहर की वजह बने डेल्टा वैरिएंट से कहीं ज्यादा म्यूटेशन और तेजी से फैलने वाला करार दिया गया है।

आइए जानते हैं कि कोरोना के नए खतरनाक वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितनी कारगर है? वैक्सीनेटेड लोगों को इस नए वैरिएंट से कितना खतरा है? WHO ने इस बारे में क्या कहा है? भारत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है ओमिक्रॉन? और भारत ने ओमिक्रॉन से निपटने के लिए कौन सी तैयारियां की हैं?...

कोरोना के नए वैरिएंट के बारे में हम क्या-क्या जानते हैं?

  • कोरोना के नए वैरिएंट B.1.1.529 को WHO ने वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखते हुए इसे ओमिक्रॉन नाम दिया है। WHO के मुताबिक, ओमिक्रॉन का पहला मामला 24 नवंबर 2021 को साउथ अफ्रीका में मिला।
  • ओमिक्रॉन बहुत तेजी से म्यूटेशन करने वाला वैरिएंट है जो 50 से अधिक म्यूटेशन पहले ही कर चुका है। साथ ही इसके स्पाइक प्रोटीन में भी 30 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस इंसान की कोशिकाओं में प्रवेश के द्वार खोलता है और वही इसे फैलने में मदद करता है और इसी से वह संक्रमण फैलाता है। ज्यादातर वैक्सीन का टारगेट भी स्पाइक प्रोटीन ही होती हैं।
  • ओमिक्रॉन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में भी 10 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं, जबकि पूरी दुनिया में तहलका मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट में केवल दो ही म्यूटेशन हुए थे। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन ही वायरस का वह हिस्सा होता है जो इंसान के शरीर की कोशिकाओं से सबसे पहले संपर्क में आता है।
  • साउथ अफ्रीका में पहला केस मिलने के कुछ ही दिनों के अंदर ओमिक्रॉन के अफ्रीका के साथ-साथ यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों समेत कुल 13 से ज्यादा देशों में केस मिल चुके हैं।
  • साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बोत्सवाना, ब्रिटेन, डेनमार्क, जर्मनी, हॉन्ग कॉन्ग, इजराइल, इटली, नीदरलैंड, फ्रांस, कनाडा और चेक रिपब्लिक समेत 13 से अधिक देशों में ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं। चिंता की बात ये है कि बोत्सवाना में सामने आए चारों मामले पूरी तरह से वैक्सीनेटेड लोगों में सामने आए हैं।
  • माना जा रहा है कि साउथ अफ्रीका के गौतेंग प्रांत के 90 फीसदी मामले पहले ही ओमिक्रॉन के हो सकते हैं और इसका मतलब इस नए वैरिएंट की साउथ अफ्रीका के अन्य प्रांतों में भी मौजूदगी हो सकती है।
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार, ओमिक्रॉन किसी ऐसे मरीज से आया जिसके शरीर में यह लंबे समय तक रहा और उसका इम्यून सिस्टम इसे मात देने में नाकाम रहा। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार यह किसी एचआईवी एड्स से संक्रमित व्यक्ति से आया।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रॉन में डेल्टा की तुलना में फैलने की क्षमता (R वैल्यू) छह गुना अधिक है।

ओमिक्रॉन के खिलाफ वैक्सीन कितनी असरदार?

  • बोत्सवाना में मिले ओमिक्रॉन के चारों केस ऐसे लोगों में सामने आए हैं जिन्हें कोरोना की दोनों डोज लग चुकी थी। यानी नया वैरिएंट वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित कर रहा है।
  • ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के बेअसर होने की बात इसलिए भी की जा रही है क्योंकि कोरोना की वैक्सीन चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस के ओरिजनल स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, जबकि ओमिक्रॉन उस स्ट्रेन से कहीं अलग है।
  • साथ ही ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में ही 30 म्यूटेशन होने की वजह से भी ये वैक्सीन को चकमा दे सकता है। वैक्सीन का टारगेट भी स्पाइक प्रोटीन ही होती है, लेकिन ओमिक्रॉन में हो रहे म्यूटेशन इस पर वैक्सीन को एकदम बेअसर या काफी कम असरदार बना सकते हैं।

यही वजह है कि इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही है कि ऐसा भी संभव है कि कोरोना के नए वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन असरदार न हो।

ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के असर को लेकर WHO ने क्या कहा है?

ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के असर को लेकर डब्ल्यूएचओ की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, ''कोई भी वैरिएंट ऐसा नहीं होता है जो वैक्सीन को पूरी तरह निष्प्रभावी बना दे।''

'अगर शरीर में वायरस के किसी भी वैरिएंट के लिए तैयार की गई वैक्सीन की वजह से एंटीबॉडी हैं तो वायरस से बचाव जरूर करेंगी। वैक्सीन हर वैरिएंट की मारक क्षमता को कुछ कम तो करता ही है। लेकिन पूरी तरह बेअसर नहीं कर सकता।'' लिहाजा जिन लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है, उन्हें बिना देरी के लगवा लेनी चाहिए, क्योंकि ऐसे ही लोगों में ओमिक्रॉन से संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।

ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के असर को लेकर एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से वर्तमान सभी वैक्सीनों की इसके खिलाफ एफिकेसी के तुरंत आकलन किए जाने की जरूरत है।

भारत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है ओमिक्रॉन?

ओमिक्रॉन के केस उन लोगों में भी पाए गए हैं जो पूरी तरह वैक्सीनेटेड थे। ऐसे में यह भारत जैसे विशाल देश के लिए चिंता की बात हो सकती है। भारत में अब तक कुल 1 अरब 22 करोड़ से अधिक कोरोना की डोज लगाई गई हैं। इनमें से 78 करोड़ (56 फीसदी) से अधिक लोगों को कोरोना की सिंगल डोज लग चुकी हैं, जबकि 43 करोड़ (32 फीसदी) से लोगों को ही कोरोना की दोनों डोज लगी हैं।

भारत की महज 32 फीसदी आबादी का ही फुली वैक्सीनेटेड होना हमारे लिए चिंता की बात है। भारत में करीब 12 करोड़ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दूसरी डोज की तारीख निकल जाने के बावजूद भी टीका नहीं लगवाया है। ऐसे लोगों की लपरवाही भी ओमिक्रॉन जैसे कोरोना के नए वैरिएंट के आने पर खतरनाक साबित हो सकती है।

किन लोगों को है ओमिक्रॉन से सबसे अधिक खतरा?

कोरोना के अन्य वैरिएंट की तरह ही ओमिक्रॉन से भी सबसे अधिक संक्रमण का खतरा उन लोगों को हैं, जिन्होंने अब तक कोरोना वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगवाई है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ओमिक्रॉन अगर वैक्सीनेटेड लोगों को हो सकता है तो ऐसे लोग जिन्होंने कोरोना की सिंगल डोज ली है या अभी तक एक भी डोज नहीं ली है उन्हें इससे संक्रमित होने का खतरा कई गुना अधिक है।

भारत ने ओमिक्रॉन से निपटने के लिए कौन सी तैयारियां की हैं?

भारत सरकार ने ओमिक्रॉन की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीएम मोदी ने कोरोना के इस नए वैरिएंट को लेकर आपात बैठक की है, जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ओमिक्रॉन के खिलाफ सर्तकता को लेकर सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर चुका है।

सरकार ने ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए साउथ अफ्रीका, बोत्सवाना और हॉन्गकॉन्ग समेत उन सभी जगहों से भारत आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग और टेस्टिंग करने के आदेश दिए हैं, जहां कोरोना का ये नया वैरिएंट फैला है।