भास्कर एक्सप्लेनर:ओमिक्रॉन के केस 2 दिन में हो रहे दोगुने, डेल्टा में लग रहे थे 4 दिन; भारत को भी कर सकता है बेहाल

एक महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से पहली मौत ब्रिटेन में हुई है। 13 दिसंबर को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस नए वैरिएंट से दुनिया में पहली मौत की पुष्टि की। ओमिक्रॉन का दुनिया के बाकी देशों में फैलना जारी है। 24 नवंबर को सबसे पहले साउथ अफ्रीका में पाया गया यह नया वैरिएंट अब तक भारत समेत 60 से अधिक देशों में फैल चुका है। अब एक नई बात ये सामने आई है कि ओमिक्रॉन के केस 2 दिन में ही दोगुने हो रहे है जबकि डेल्टा के केस दोगुने होने में 4 दिन लग रहे थे। ओमिक्रॉन को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने डेल्टा की तुलना में अधिक फैलने वाला और वैक्सीन के असर को कम करने वाला वैरिएंट करार दिया है।

चलिए जानते हैं कि आखिर कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन? कितनी तेजी से फैलता है, वैक्सीन का इस पर कितना असर है और आने वाले महीनों में भारत समेत दुनिया पर ओमिक्रॉन का क्या असर पड़ेगा?

क्या है ओमिक्रॉन वैरिएंट?

ओमिक्रॉन कोरोना वायरस का नया वैरिएंट है, जो 24 नवंबर को सबसे पहले साउथ अफ्रीका में मिला था। 26 नवंबर को WHO ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित कर दिया। WHO कोरोना के वैरिएंट्स को ग्रीक अल्फाबेट के अक्षरों पर नाम देता रहा है, जैसे अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और अब ओमिक्रॉन। दुनिया में ओमिक्रॉन से पहली मौत 13 दिसंबर को ब्रिटेन में हुई।

ओमिक्रॉन में बड़ी संख्या में होने वाले म्यूटेशन इसे तेजी से फैलने में सक्षम बना रहे हैं और इसी वजह से दुनिया भर के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इस वैरिएंट को लेकर चिंतित हैं। ओमिक्रॉन में अब तक 50 से ज्यादा म्यूटेशन जबकि इसके स्पाइक प्रोटीन में 37 म्यूटेशन हो चुके हैं।

क्या ओमिक्रॉन अन्य वैरिएंट्स से ज्यादा तेजी से फैल रहा है?

अब तक की स्टडी यह बता रही है कि ओमिक्रॉन किसी भी अन्य वैरिएंट, यहां तक कि डेल्टा की तुलना में भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है। अब तक डेल्टा ही सबसे अधिक तेजी से फैलने वाला वैरिएंट था। इस बात के संकेत साउथ अफ्रीका में मिले ओमिक्रॉन के मामलों से भी मिले हैं। साथ ही दुनिया के कुछ अन्य देशों के केस भी ओमिक्रॉन के तेजी से फैलने का संकेत दे रहे हैं।

शुरुआती स्टडी के मुताबिक, ओमिक्रॉन के केस हर दो से तीन दिन में डबल हो रहे हैं, जो कि डेल्टा वैरिएंट (4.6-5.4 दिन) की तुलना में कम समय है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमिक्रॉन के संक्रमण के खतरे को देखते हुए ब्रिटेन के रिसर्चर्स ने इससे संक्रमित हो चुके 121 परिवारों पर रिसर्च की। इसमें उन्होंने पाया कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन से परिवार में 3.2 गुना अधिक संक्रमण फैलने का खतरा है।

क्या पहले हो चुका कोविड इन्फेक्शन ओमिक्रॉन को रोक सकेगा?

शुरुआती रिपोर्ट्स से तो ऐसा नहीं लगता है कि अगर किसी को पहले से कोविड हो चुका है तो उसे ओमिक्रॉन नहीं होगा। यानी ओमिक्रॉन से री-इन्फेक्शन का खतरा बरकरार है। साउथ अफ्रीका के उदाहरण से भी इसे समझा जा सकता है। साउथ अफ्रीका में पहले से ही अन्य वैरिएंट्स से लोग बड़ी संख्या में कोविड से संक्रमित हो चुके थे, लेकिन इसके बावजूद वहां कई लोगों में ओमिक्रॉन तेजी से फैला है।

NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश रिसर्चर्स की 10 दिसंबर को पब्लिश हुई ऐसी ही एक स्टडी में पाया गया कि कई ऐसे लोगों को ओमिक्रॉन हुआ है, जो पहले से ही कोविड के किसी अन्य वैरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं। इस रिसर्च के मुताबिक, किसी अन्य वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से री-इन्फेक्शन का खतरा पांच गुना अधिक है।

WHO की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन भी कह चुकी हैं कि दुनिया को मुश्किल में डाल चुके डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से री-इन्फेक्शन का खतरा तीन गुना से ज्यादा है।

वैक्सीन से ओमिक्रॉन के खिलाफ कितनी सुरक्षा मिलेगी?

ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के असर को लेकर ज्यादातर स्टडी के अभी शुरुआती नतीजे ही आए हैं। इसके मुताबिक, मौजूदा कोरोना वैक्सीन अन्य वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन को रोक पाने में कम कारगर रही हैं। ब्रिटिश रिसर्चर्स के मुताबिक, मौजूदा वैक्सीन के दो डोज भी ओमिक्रॉन के खिलाफ काफी कम सुरक्षा प्रदान करते हैं। हालांकि बूस्टर डोज लगवाने वालों में ज्यादा एटीबॉडीज पैदा हुईं, जिसने ओमिक्रॉन के खतरे को वैक्सीन की तुलना में ज्यादा कम किया।

WHO ने भी 12 दिसंबर को कहा कि ओमिक्रॉन डेल्टा स्ट्रेन की तुलना में अधिक तेजी से फैलने में सक्षम है और साथ ही यह वैक्सीन के असर को कम कर देता है।

वैक्सीन के ओमिक्रॉन के खिलाफ कम असरदार रहने की आशंका के बीच दुनिया भर में इससे निपटने के लिए बूस्टर डोज लगवाए जाने की वकालत हो रही है। अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 से अधिक देशों में पहले से ही बूस्टर डोज दिए जा रहे हैं। भारत ने 10 दिसंबर को बूस्टर डोज को लेकर कोवीशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के आवेदन को तुरंत स्वीकार करने से मना करते हुए इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल डेटा पेश करने को कहा है।

क्या वैक्सीन से घटती है कोविड की गंभीरता?

ओमिक्रॉन भले ही वैक्सीन के असर को कम कर सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीनेटेड लोगों को इस वैरिएंट की वजह से गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा कम रहेगा।

दरअसल, वैक्सीन न केवल कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज पैदा करती हैं, बल्कि T सेल के ग्रोथ को भी बढ़ाती हैं, जिससे बीमारी के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलती है।

T सेल यह पहचानना सीखती हैं कि अन्य सेल कब कोरोना वायरस से संक्रमित होती हैं और ऐसा होने पर वे वायरस को नष्ट कर देती हैं, जिससे संक्रमण धीमा हो जाता है। ओमिक्रॉन म्यूटेशन की वजह से भले ही वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडीज से बच निकले, लेकिन उसके T सेल कोशिकाओं से बचने की आशंका काफी कम है।

ऐसे में जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हैं या जो बूस्टर डोज भी ले रहे हैं, उनके ओमिक्रॉन से गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा कम होगा।

क्या ओमिक्रॉन का इलाज है?

वैसे ओमिक्रॉन के इलाज के लिए दवाओं की रिसर्च जारी है, लेकिन ब्रिटिश कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (GSK) ने हाल ही में कहा है कि उसकी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ड्रग सोट्रोविमाब (sotrovimab) ओमिक्रॉन स्पाइक प्रोटीन के सभी 37 म्यूटेशन के खिलाफ कारगर रही है।

मर्क, फाइजर और अन्य कंपनियां कोविड के खिलाफ एंटीवायरल दवाइयां विकसित कर रही हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक ओमिक्रॉन के खिलाफ इन दवाइयों का टेस्ट नहीं किया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इनमें से कोई ओमिक्रॉन के खिलाफ भी असरदार हो सकती है।

ओमिक्रॉन से आने वाले महीनों में दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

ओमिक्रॉन के आने वाले महीनों में दुनिया पर असर को लेकर रिसर्च जारी है। इन रिसर्च के मुताबिक, इस साल के अंत में या 2022 की शुरुआत में ओमिक्रॉन के दुनिया के कई देशों में प्रभावी कोरोना वैरिएंट बन जाने की आशंका है। यहां तक कि अगर ओमिक्रॉन से माइल्ड या हल्की बीमारी ही होती है तब भी बड़ी संख्या में हॉस्पिटलाइजेशन का खतरा हो सकता है, लेकिन अगर ओमिक्रॉन से पिछले वैरिएंट की तुलना में अधिक मामले फैले, तो गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

भारत के लिए कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन?

ओमिक्रॉन के अब तक के सबसे संक्रामक वैरिएंट होने की आशंका ने भारत जैसे देशों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। ओमिक्रॉन को लेकर हाल ही में IIT कानपुर के विशेषज्ञों ने अपनी रिसर्च में आशंका जताई थी कि इस नए वैरिएंट से देश में तीसरी लहर आने का खतरा है, जो जनवरी 2022 तक आ सकती है। वहीं डेढ़ लाख डेली कोविड केसेज के साथ तीसरी लहर का पीक फरवरी में आने की आशंका है। अप्रैल 2021 में डेल्टा की वजह से आई दूसरी लहर के दौरान भारत में डेली केसेज की संख्या 4 लाख को पार कर गई थी।

सरकार ने हालांकि बूस्टर डोज पर और रिसर्च की बात कहते हुए फिलहाल इसे टाल दिया है, लेकिन भारत में आधी से कम आबादी के फुली वैक्सीनेटेड होने पर ओमिक्रॉन फैलने की सूरत में स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। भारत में करीब 60 फीसदी आबादी को वैक्सीन की एक डोज और 40 फीसदी से कम आबादी को ही दोनों डोज लगी हैं।

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