ओमिक्रॉन Vs डेल्टा:कौन है ज्यादा खतरनाक वैरिएंट, किस पर वैक्सीन का कितना असर, किससे मौत का खतरा ज्यादा? जानें सब कुछ

5 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने देश में दस्तक दे दी है। 2 दिसंबर को कर्नाटक में दो ओमिक्रॉन केस पाए जाने की स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि कर दी है। 24 नवंबर को साउथ अफ्रीका में पाए जाने के महज एक हफ्ते के अंदर ही अब ओमिक्रॉन भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के 29 देशों में दस्तक दे चुका है।

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक रिसर्च में जुट गए हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा तेजी से फैलने में सक्षम कोरोना के इस नए वैरिएंट (B.1.1.529) को वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किए जाने के बाद से ही दुनिया में चिंता की नई लहर पैदा हो गई है। ओमिक्रॉन को दुनिया भर में तहलका मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट से भी अधिक तेजी से फैलने वाला वैरिएंट कहा जा रहा है। इसकी वजह इसकी डेल्टा से भी तेज म्यूटेशन की क्षमता है।

आइए जानते हैं कि कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनिया को परेशान कर चुके डेल्टा से कितना अलग और खतरनाक है? क्यों डेल्टा से भी ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है ओमिक्रॉन?

दोनों वैरिएंट के केस सबसे पहले कहां मिले?

डेल्टा वैरिएंट सबसे पहले अक्टूबर 2020 में भारत में सामने आया था, लेकिन इसने भारत में कहर कुछ महीनों के बाद अप्रैल 2021 में मचाया, जिससे देश में कोरोना की दूसरी लहर आई। डेल्टा न केवल भारत बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के 163 देशों तक फैल चुका है। येल मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट अभी कोरोना का सबसे प्रबल वैरिएंट है, जो वर्तमान में दुनिया भर के कुल कोरोना केसेज में से 99 फीसदी के लिए जिम्मेदार है।

ओमिक्रॉन का पहला केस 24 नवंबर 2021 को साउथ अफ्रीका में मिला। WHO के मुताबिक ओमिक्रॉन के पहले ज्ञात संक्रमण का सैंपल 9 नवंबर 2021 को लिया गया था। पहल केस मिलने के महज एक हफ्ते के अंदर ही ओमिक्रॉन भारत बोत्सवाना, हॉन्ग कॉन्ग, इजराइल, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड समेत दुनिया के 25 देशों में फैल चुका है।

किसमें कितना म्यूटेशन?

शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमिक्रॉन दुनिया में कहर बरपा चुके डेल्टा वैरिएंट से कहीं ज्यादा तेजी से म्यूटेशन करने वाला वैरिएंट है।

ओमिक्रॉन में कुल 50 म्यूटेशन हो चुके हैं, जिनमें से 30 म्यूटेशन तो उसके स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही कोरोना वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश के रास्ते खोलता है। इसकी तुलना में डेल्टा के S प्रोटीन में 18 म्यूटेशन हुए थे।

ओमिक्रॉन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में भी 10 म्यूटेशन हो चुके हैं, जबकि डेल्टा वैरिएंट में केवल 2 ही म्यूटेशन हुए थे। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन वायरस का वह हिस्सा है जो इंसान के शरीर के सेल से सबसे पहले संपर्क में आता है।

किस पर कितनी असरदार है वैक्सीन?

लैंसेट की एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि अप्रैल-मई 2021 में भारत में कोविड की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वैरिएंट पर कोविशील्ड वैक्सीन काफी प्रभावी रही थी। इस रिसर्च के मुताबिक पूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों पर वैक्सीन की एफिकेसी 63 फीसदी रही, जबकि डेल्टा से होने वाली मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की एफिकेसी 81 फीसदी रही।

वहीं, ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीनों के असर को लेकर फिलहाल कोई रिसर्च मौजूद नहीं है, लेकिन इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर मौजूदा वैक्सीनों के बहुत कम प्रभावी रहने या एकदम ही बेअसर रहने की आशंका है। अधिकतर वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ ही एंटीबॉडीज तैयार करती हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में तेज म्यूटेशन की क्षमता से मौजूदा वैक्सीन इसके खिलाफ बेअसर हो सकती हैं। हालांकि ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीन की एफिकेसी के आकलन को लेकर रिसर्च जारी है और इस नए वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी कारगर होगी, इसके बारे में कुछ दिनों में पता चल पाएगा।

कौन कितना खतरनाक?

कोई वायरस कितना खतरनाक है, इसको पता लगाने का एक तरीका ये है कि वो कितनी तेजी से फैल रहा है। वायरस की इस क्षमता को R वैल्यू कहा जाता है। कोरोना के शुरुआती स्ट्रेन की R वैल्यू 2-3 थी, जबकि डेल्टा वैरिएंट की R वैल्यू 6-7 थी। इसका मतलब ये है कि डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति इस वायरस को 6-7 व्यक्तियों में फैला सकता है।

वहीं, ओमिक्रॉन की R वैल्यू डेल्टा से करीब छह गुना अधिक मानी जा रही है, जिसका मतलब है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित अकेला मरीज ही इस वायरस को 35-45 लोगों में फैला सकता है। अब तक ओमिक्रॉन 19 देशों में फैल चुका है। डेल्टा से अधिक संक्रामक क्षमता के कारण इसे कहीं अधिक खतरनाक माना जा रहा है।

किसमें मौत का कितना खतरा?

अक्टूबर 2021 में आई कनाडा की एक स्टडी के मुताबिक, पिछले सभी वैरिएंट की तुलना में डेल्टा वैरिएंट से हॉस्पिटलाइजेशन का खतरा 108 फीसदी, ICU में जाने का खतरा 235 फीसदी और मौत का खतरा 133 फीसदी बढ़ गया।

अभी ओमिक्रॉन से किसी की मौत का मामला सामने नहीं आया है, लेकिन ओमिक्रॉन की संक्रामक क्षमता दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत की वजह बने डेल्टा से कहीं अधिक है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि ओमिक्रॉन अगर फैला तो न केवल गंभीर रूप से बीमारों बल्कि मौतों का आंकड़ा भी डेल्टा से अधिक हो सकता है।

दोनों के लक्षणों में क्या है अंतर?

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओमिक्रॉन के लक्षण डेल्टा से कुछ अलग हो सकते हैं - जैसे ओमिक्रॉन में स्वाद या गंध नहीं जाती है, जबकि डेल्टा में ऐसा होता है। हालांकि निश्चित रूप से ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) का कहना है कि फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ओमिक्रोन के लक्षण कोरोना के पहले के वैरिएंट से अलग हैं। मतलब स्वाद और गंध जाने को छोड़कर डेल्टा और ओमिक्रॉन के प्रमुख लक्षण: जैसे-गले में खराश, बुखार, थकान और सिरदर्द, एक जैसे ही हैं।