भास्कर एक्सप्लेनर:पैंडोरा पेपर्स क्या है, किन भारतीयों का नाम इस लिस्ट में है, कैसे किया गया पूरा खेल और किस तरह हुआ खुलासा? जानें सब कुछ

16 दिन पहलेलेखक: जयदेव सिंह/आबिद खान

सचिन तेंदुलकर, पॉप सिंगर शकीरा और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर समेत दुनियाभर के सैकड़ों सेलिब्रिटीज के बेनामी निवेश का दावा किया जा रहा है। खोजी पत्रकारों की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इससे जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स जारी की हैं।

इसमें 64 लाख डॉक्युमेंट्स, 10 लाख से ज्यादा ईमेल, 30 लाख से ज्यादा तस्वीरें और करीब 5 लाख स्प्रेडशीट लीक हुई हैं। इनमें दावा किया गया है कि इन हस्तियों ने टैक्स बचाने और कुछ मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस तरह के बेनामी निवेश किए हैं। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की रिपोर्ट्स को 'पैंडोरा पेपर्स' का नाम दिया जा रहा है।

पैंडोरा पेपर्स क्या है? पैंडोरा पेपर्स में किस तरह के खुलासे हुए हैं? इस पूरी धोखाधड़ी का खुलासा कैसे हुआ? इन खुलासों में अब तक कितने भारतीयों के नाम सामने आए? आइए जानते हैं ...

सबसे पहले समझिए पैंडोरा पेपर्स क्या हैं?

पैंडोरा पेपर्स 14 ग्लोबल कॉर्पोरेट फर्म्स की 1 करोड़ 19 लाख लीक फाइलें हैं। इस लीक को पैंडोरा पेपर्स का नाम दिया गया है। इन फर्म्स ने करीब 29 हजार ऑफ-द-शेल्फ कंपनियां और प्राइवेट ट्र्स्ट बनाए। इन्हें टैक्स बचाने के लिए बनाया गया था। रिकॉर्ड छिपाने के लिए टैक्स हैवन देशों के साथ सिंगापुर, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों का भी इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट वॉशिंगटन के इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने जारी की है।

इसमें किन लोगों का नाम शामिल है?

इस लीक में 90 देशों के 330 लोगों के नाम हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, जॉर्डन के राजा, अजरबैजान का एक रसूखदार परिवार, चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री, केन्या के राष्ट्रपति के साथ पूर्व ब्रिटिन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर तक का नाम है।

क्या भारतीय लोगों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं?

इस लीक में जिन भारतीयों का नाम है, उनमें सचिन तेंदुलकर सबसे बड़ा नाम हैं। सचिन के साथ उनकी पत्नी अंजली, ससुर आनंद मेहता, बिजनेसमैन अनिल अंबानी के साथ कुछ नेताओं के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही नीरव मोदी, उनकी बहन, किरण मजूमदार शॉ जैसे बिजनेस पर्सन भी इस लिस्ट में हैं। साथ ही एक्टर जैकी श्रॉफ, गांधी परिवार से जुड़े सतीश शर्मा, कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया भी इसका हिस्सा हैं।

ये कंपनियां और ट्रस्ट क्यों बनाए गए?

पैंडोरा पेपर्स की जांच के बाद यह सामने आया है कि अमीरों ने ट्रस्ट्स के जरिए विदेश में अपनी वित्तीय लेन-देन की जानकारियां छिपाईं। इनमें से कई पहले से ही वित्तीय एजेंसियों की निगाह में हैं। इसकी 2 बड़ी वजहें हैं।

  • बाहरी देशों में निवेश के दौरान अपनी असल पहचान छिपाने और विदेशी संस्थाओं से खुद को बचाने के लिए, ताकि टैक्स अधिकारियों की पहुंच से दूर रहें।
  • अपने नगद, शेयर होल्डिंग, रियल एस्टेट और बाकी निवेशों को लेनदारों और कानूनी एजेंसियों से बचाने के लिए।

निवेश किस तरह किया गया?

निवेश के लिए ऑफशोर कंपनियां खड़ी की गईं। ऑफशोर कंपनीज वो होती हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे देश में किया जाता है और ये कारोबार किसी दूसरे देश में करती हैं। इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन ऐसे देशों में किया जाता है, जहां इन्हें बनाने में आसानी होती है, ऐसे कानून होते हैं जो कंपनी के मालिक की पहचान को उजागर करना मुश्किल कर देते हैं और कॉर्पोरेशन टैक्स कम होता है या बिल्कुल नहीं होता है। ऐसे देशों को टैक्स हैवंस कहा जाता है।

इस तरह की ज्यादातर कंपनियां गुमनाम होती हैं। इनका मालिक कौन है, किसके पैसे लगे हैं, जैसी सभी बातें गुप्त रखी जाती हैं। ये कंपनियां केवल कागजों पर होती हैं। इनका न कोई ऑफिस होता है न कर्मचारी।

क्या ऑफशोर कंपनियां बनाना गैरकानूनी है?

बिजनेस के लिए ऑफशोर कंपनियां बनाना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन अक्सर ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल टैक्स की चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि जिन लोगों का नाम इस लिस्ट में है, उनका उद्देश्य भी यही हो सकता है। साथ ही इस लिस्ट में कई ऐसे लोगों के नाम हैं, जो पब्लिक फिगर हैं और टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कैंपेनिंग करते रहे हैं।

इस पूरे घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?

पैंडोरा पेपर्स से जुड़े पूरे डेटा को वॉशिंगटन के इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने जारी किया है। ICIJ दुनियाभर के 140 से ज्यादा मीडिया ऑर्गेनाइजेशंस के साथ मिलकर इस ग्लोबल इन्वेस्टिगेशन पर पिछले 2 साल से काम कर रहा था। पूरे इन्वेस्टिगेशन में दुनियाभर के 650 से ज्यादा पत्रकार शामिल थे।

ये घोटाला कितना बड़ा है?

ICIJ के अनुमान के मुताबिक ऑफशोर कंपनियों में निवेश की गई कुल रकम 417.32 लाख करोड़ रुपए से लेकर 2,384.44 लाख करोड़ तक हो सकती है। हालांकि ये केवल अनुमान है। अभी इन्वेस्टिगेशन जारी है इसलिए बस अनुमान ही लगाया जा सकता है।

भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर क्या कहा है?

पैंडोरा पेपर्स में भारतीयों का नाम आने के बाद भारत सरकार ने फैसला लिया है कि इस मामले की जांच करवाई जाएगी। यह जांच कई एजेंसियों का समूह मिलकर करेगा। इसकी अध्‍यक्षता केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन करेंगे। समूह में CBDT, प्रवर्तन निदेशालय (ED), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्‍तीय खुफिया यूनिट के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

इसी संस्था ने पांच साल पहले लीक किए थे 'पनामा पेपर्स'

इसी संस्था ने 5 साल पहले 'पनामा पेपर्स' लीक किए थे। उनमें बताया गया था कि कैसे नामचीन हस्तियों ने कथित तौर पर सरकारी एजेंसियों की नजरों से दूर विदेश में संपत्तियां जुटाई थीं। पनामा पेपर्स में भी कई भारतीयों का नाम शामिल था।

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