भास्कर एक्सप्लेनर:पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मायने क्या हैं? आपके स्मार्टफोन में घुसकर कैसे ये जासूसी करता है ? जानें सब कुछ

एक वर्ष पहलेलेखक: जयदेव सिंह
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पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन इसके अध्यक्ष होंगे। कमेटी गठित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर किसी की प्राइवेसी की रक्षा होनी चाहिए।

मामला सामने आने के बाद से ही केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है। इस मामले में कई पत्रकारों और एक्टिविस्ट ने अर्जियां दायर की थीं। इनकी मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच करवाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर किसी की प्राइवेसी की रक्षा होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है? याचिका लागने वाले कौन हैं? इस मामले में सरकार का क्या कहना है? पेगासस क्या है? ये कैसे काम करता है? केंद्र सरकार क्यों इस मामले में घिरी हुई है? आइए जानते हैं…

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है ?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पेगासस जासूसी कांड में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई। कमेटी में अध्यक्ष जस्टिस आरवी रवींद्रन के साथ पूर्व IPS अफसर आलोक जोशी और डॉक्टर संदीप ओबेरॉय शामिल हैं। डॉक्टर ओबेरॉय इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ स्टैंडर्डाइजेशन से जुड़े हैं। कोर्ट ने इस कमेटी से कहा है कि पेगासस से जुड़े आरोपों की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे। 8 हफ्ते बाद फिर इस मामले में सुनवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क की निंदा की। कोर्ट ने कहा कि केंद्र हर मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताकर मुक्त नहीं हो सकता है। केंद्र को यहां अपने पक्ष को रखना चाहिए। कोर्ट केवल मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती है। इससे पहले केंद्र सरकार ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताकर आधिकारिक एफिडेविट फाइल करने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने किस आधार पर कमेटी बनाने का फैसला किया?

कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने अपने जवाब में पेगासस के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है। इसलिए हमारे पास याचिकाकर्ता की याचिका मंजूर करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी किन बातों की जांच करेंगी?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी इन बिंदुओं पर जांच करेगी...

  • क्या भारत के लोगों के फोन या किसी दूसरी डिवाइस में पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल हुआ है।
  • वो लोग कौन हैं जो इस स्पाइवेयर के हमले का शिकार हुए हैं।
  • 2019 में पेगासस स्पाइवेयर से वॉट्सऐप अकाउंट हैक करने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए।
  • क्या केंद्र या किसी राज्य सरकार या फिर किसी सेंट्रल या स्टेट एजेंसी ने देश के लोगों की जासूसी के लिए पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया।
  • अगर किसी एजेंसी ने लोगों की जासूसी में इसका इस्तेमाल किया है तो किस कानून, नियम, गाइडलाइन, प्रोटोकॉल या कानूनी प्रक्रिया के तहत ऐसा किया गया।
  • अगर किसी अन्य व्यक्ति या संस्था ने इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया है तो क्या वो इसके लिए अधिकृत है।

​​​​​​कोर्ट ने किसकी याचिका पर ये आदेश दिया है?

कुछ समय पहले न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत सरकार ने 2017 से 2019 के दौरान करीब 300 भारतीयों की जासूसी की। इन लोगों में पत्रकार, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, विपक्ष के नेता और बिजनेसमैन शामिल थे। सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर के जरिए इन लोगों के फोन हैक किए थे। इसके बाद ही सरकार के खिलाफ कई लोगों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी।

याचिका लगाने वालों में एडवोकेट एमएल शर्मा, राज्यसभा सांसद और पत्रकार जॉन ब्रिटास, हिंदू ग्रुप के डायरेक्टर एन राम, एशियानेट समूह के फाउंडर शशि कुमार, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, पत्रकार रुपेश कुमार सिंह, प्रांजय गुहा ठाकुरता, इप्सा शताक्षी, एसएनएम आबिदी और प्रेम शंकर झा शामिल हैं। याचिका दायर होने के बाद 17 अगस्त को कोर्ट ने केंद्र को इस मामले में नोटिस जारी किया था।

इस मामले में केंद्र सरकार का क्या कहना है?

मामला सामने आने के बाद सरकार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने कहा है कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और अपने नागरिकों के निजता के अधिकार के लिए पूरी तरह समर्पित है। सरकार पर जो जासूसी के आरोप लग रहे हैं वो बेबुनियाद हैं।

कोर्ट के नोटिस देने के बाद केंद्र ने कहा कि वो सारी जानकारी एक एक्सपर्ट कमेटी के सामने रखने को तैयार है। राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए वो इसे कोर्ट के सामने पब्लिक नहीं कर सकता है।

मामला क्यों सुर्खियों में आया?

दुनियाभर में इजराइली कंपनी एनएसओ (NSO) के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस से 10 देशों में 50 हजार लोगों की जासूसी हुई। बीते जुलाई में खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय ग्रुप ने ये दावा किया। भारत में भी 500 से ज्यादा नाम सामने आए, जिनके फोन की निगरानी की गई। इनमें सरकार में शामिल मंत्री, विपक्ष के नेता, पत्रकार, वकील, जज, कारोबारी, अफसर, वैज्ञानिक और एक्टिविस्ट शामिल हैं।

पेगासस क्या है?

  • पेगासस एक स्पाइवेयर है। स्पाइवेयर यानी जासूसी या निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर। इसके जरिए किसी फोन को हैक किया जा सकता है। हैक करने के बाद उस फोन का कैमरा, माइक, मैसेजेस और कॉल्स समेत तमाम जानकारी हैकर के पास चली जाती है। इस स्पाइवेयर को इजराइली कंपनी NSO ग्रुप ने बनाया है।

इससे पहले पेगासस कब सुर्खियों में था?

  • पेगासस सबसे पहले 2016 में सुर्खियों में आया था। UAE के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को अनजान नंबर से कई SMS मिले थे, जिसमें कई लिंक भेजी गई थीं। अहमद को जब इन मैसेज को लेकर संदेह हुआ तो उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स से इन मैसेजेस की जांच करवाई। जांच में खुलासा हुआ कि अहमद अगर मैसेज में भेजी लिंक पर क्लिक करते तो उनके फोन में पेगासस डाउनलोड हो जाता।
  • 2 अक्टूबर 2018 को सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या हो गई थी। इस हत्याकांड की जांच में भी पेगासस का नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों ने शक जताया था कि जमाल खशोगी की हत्या से पहले उनकी जासूसी की गई थी।
  • 2019 में भी पेगासस सुर्खियों में था। तब वॉट्सऐप ने कहा था कि पेगासस के जरिए करीब 1400 पत्रकारों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के वॉट्सऐप की जानकारी उनके फोन से हैक की गई थी। इस मामले को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में जोर-शोर से उठाया था और सरकार पर कई आरोप भी लगाए थे।
  • इसके अलावा मैक्सिको सरकार पर भी इस स्पाइवेयर को गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।

इस मामले में सरकार की क्या भूमिका है?

  • पेगासस को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि वो किसी निजी कंपनी को यह सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है, बल्कि इसे केवल सरकार और सरकारी एजेंसियों को ही इस्तेमाल के लिए देती है। इसका मतलब है कि अगर भारत में इसका इस्तेमाल हुआ है, तो कहीं न कहीं सरकार या सरकारी एजेंसियां इसमें शामिल हैं।

पेगासस काम कैसे करता है?

  • साइबर सिक्योरिटी रिसर्च ग्रुप सिटीजन लैब के मुताबिक, किसी डिवाइस में पेगासस को इंस्टॉल करने के लिए हैकर अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। एक तरीका ये है कि टारगेट डिवाइस पर मैसेज के जरिए एक “एक्सप्लॉइट लिंक” भेजी जाती है। जैसे ही यूजर इस लिंक पर क्लिक करता है, पेगासस अपने आप फोन में इंस्टॉल हो जाता है।
  • 2019 में जब वॉट्सऐप के जरिए डिवाइसेस में पेगासस इंस्टॉल किया गया था तब हैकर्स ने अलग तरीका अपनाया था। उस समय हैकर्स ने वॉट्सऐप के वीडियो कॉल फीचर में एक कमी (बग) का फायदा उठाया था। हैकर्स ने फर्जी वॉट्सऐप अकाउंट के जरिए टारगेट फोन पर वीडियो कॉल किए थे। इसी दौरान एक कोड के जरिए पेगासस को फोन में इंस्टॉल कर दिया गया था।

एक बार आपके फोन में आने के बाद पेगासस के पास आपकी क्या-क्या जानकारी होती है?

  • एक बार आपके फोन में इंस्टॉल होने के बाद पेगासस को हैकर कमांड एंड कंट्रोल सर्वर से इंस्ट्रक्शन दे सकता है।
  • आपके पासवर्ड, कॉन्टैक्ट नंबर, लोकेशन, कॉल्स और मैसेजेस को भी रिकॉर्ड कर कंट्रोल सर्वर पर भेजे जा सकते हैं।
  • पेगासस आपके फोन का कैमरा और माइक भी अपने आप चालू कर सकता है। आपकी रियल टाइम लोकेशन भी हैकर को पता चलती रहेगी।
  • साथ ही आपके ई-मेल, SMS, नेटवर्क डिटेल्स, डिवाइस सेटिंग, ब्राउजिंग हिस्ट्री की जानकारी भी हैकर को होती है। यानी एक बार अगर आपके डिवाइस में पेगासस स्पाइवेयर इंस्टॉल हो गया तो आपकी सारी जानकारी हैकर को मिलती रहेगी।

पेगासस इतना फेमस क्यों है?

  • इंस्टॉल होने के बाद पेगासस फोन में किसी तरह के फुटप्रिंट नहीं छोड़ता। यानी आपका फोन हैक होगा तो भी आपको पता नहीं चलेगा।
  • ये कम बैंडविड्थ पर भी काम कर सकता है। साथ ही फोन की बैटरी, मेमोरी और डेटा का भी कम इस्तेमाल करता है, जिससे कि फोन हैक होने पर किसी तरह का शक न हो।
  • एंड्रॉयड के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित माने जाने वाले आईफोन के iOS को भी हैक कर सकता है।
  • फोन लॉक होने पर भी पेगासस अपना काम करता रहता है।
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