भास्कर एक्सप्लेनर:GST काउंसिल कर सकती है पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने पर विचार, ऐसा हुआ तो आपको कितना फायदा? सरकार को कितना नुकसान? जानें सबकुछ

एक महीने पहलेलेखक: आबिद खान

कल लखनऊ में GST काउंसिल की मीटिंग है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मीटिंग में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा सकता है। कोरोना महामारी के बाद GST काउंसिल की यह पहली फिजिकल बैठक है। GST काउंसिल की इस 45वीं बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।

जून में केरल हाईकोर्ट ने काउंसिल से आग्रह किया था कि वो पेट्रोलियम प्रोडक्ट को GST के दायरे में लाने पर विचार करें। हाईकोर्ट के आग्रह के बाद GST मंत्री समूह ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। यदि मंत्री समूह में सहमति बनती है तो इस प्रस्ताव को GST काउंसिल को सौंपा जाएगा। फिर काउंसिल इस पर फैसला लेगी।

समझते हैं, अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं? GST के दायरे में आने से केंद्र, राज्य और जनता पर क्या असर होगा? अगर पेट्रोलियम प्रोडक्ट GST के दायरे में आते हैं, तो किस तरह की व्यवस्था अपनाई जा सकती है? और इस फैसले को लागू करने में अड़चनें क्या हैं...

अभी कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था, लेकिन 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल को कीमतों का निर्धारण ऑइल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया।

इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑइल कंपनियों को सौंप दिया।

यानी कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमत निर्धारित करने में सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। ये काम ऑइल मार्केटिंग कंपनियां करती हैं। ऑइल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।

राजस्व में कमी का डर पेट्रोल-डीजल को GST में नहीं लाने की सबसे बड़ी वजह
एक बड़ी वजह राज्य सरकारों और केंद्र में इच्छाशक्ति की कमी है। दरअसल, पेट्रोल-डीजल को GST में लाने से सरकारों को राजस्व का नुकसान होगा और सरकार अपनी कमाई के किसी भी सोर्स में कोई बदलाव नहीं करना चाहती।

किसी भी सामान या सेवा पर GST रेट तय करने से पहले यह देखा जाता है कि वर्तमान व्यवस्था में उस पर केंद्र और राज्य मिलाकर कितना टैक्स लगा रहे थे। तकनीकी भाषा में इसे Revenue Neutral Rate (RNR) कहते हैं। इसका कैलकुलेशन इसलिए किया जाता है ताकि केंद्र और राज्यों को किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़े। पेट्रोल-डीजल पर GST नहीं लागू करने में यह भी एक बड़ी बाधा है।

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