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भास्कर एक्सप्लेनर:प्रॉविडेंट फंड में अंशदान, उस पर मिलने वाले ब्याज पर लगेगा टैक्स; जानिए आप पर कितना और कैसे पड़ेगा असर?

15 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 31 अगस्त को प्रॉविडेंट फंड (PF) में किए गए अंशदान और उससे मिलने वाले ब्याज को लेकर नए नियम जारी किए हैं। अब इसकी सीमा तय की गई है और अगर सीमा से ऊपर अंशदान या ब्याज मिलता है तो उस पर टैक्स चुकाना होगा। अब तक PF को टैक्स बचाने का साधन माना जाता था, जब इस पर ही टैक्स लगेगा तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है।

आइए समझते हैं कि नया नियम क्या है? इसका आप पर कितना और कैसे असर पड़ेगा? आपके फंड मैनेजर को क्या करना होगा?

नया नियम क्या है?

फाइनेंस एक्ट 2021 में स्पष्ट प्रावधान बनाया था कि अगर कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड में 2.5 लाख रुपए से अधिक अंशदान करता है तो उस पर टैक्स लगेगा। हालांकि, अगर कर्मचारी के प्रॉविडेंट फंड में कंपनी का योगदान नहीं रहता है तो यह सीमा 2.5 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपए हो जाएगी।

इस तरह कानून में यह बदलाव बताता है कि प्रॉविडेंट फंड के भीतर भी दो अकाउंट बन जाएंगे- 1. टैक्सेबल और, 2. नॉन-टैक्सेबल कम्पोनेंट का। CBDT ने नोटिफिकेशन नंबर 95/2021 जारी कर रूल 9D को नोटिफाई किया, जिसमें प्रॉविडेंट फंड या मान्यता प्राप्त प्रॉविडेंट फंड में अंशदान पर मिले टैक्सेबल ब्याज की गणना के तरीके बताए गए हैं।

रूल 9D बताता है कि प्रॉविडेंट फंड में दो अलग-अलग खाते मेंटेन करने होंगे, जो इस प्रकार होंगे-

टैक्सेबल अंशदानः PF में होने वाले अंशदान का टैक्सेबल कम्पोनेंट (यानी सीमा से अधिक राशि PF में जमा करने पर) और उस पर मिला ब्याज। इस तरह के अकाउंट से विड्रॉ की गई राशि को उसमें से घटाना होगा।

नॉन-टैक्सेबल अंशदानः EPF खाते का 31 मार्च 2021 का क्लोजिंग बैलेंस। अंशदान में किया गया नॉन-टैक्सेबल हिस्सा और उस पर प्राप्त ब्याज। इस तरह के अकाउंट से विड्रॉ की गई राशि को उसमें से घटाना होगा।

यह नया नियम किसी व्यक्ति की ओर से टैक्सेबल अंशदान और नॉन-टैक्सेबल अंशदान पर वित्त वर्ष 2021-22 में और उसके बाद के वर्षों में लागू होगा। नया रूल 9D यह साफ करता है कि टैक्सेबल ब्याज कम्पोनेंट की गणना कैसे होगी। प्रत्येक व्यक्ति के दो अलग-अलग अकाउंट्स मेंटेन करना EPFO पर बोझ बढ़ाएगा। साथ ही उन कंपनियों के लिए भी जो अपने कर्मचारियों के EPF अकाउंट्स मैनेज करते हैं।

सरकार के इस कदम के पीछे क्या तर्क है?

इस साल के बजट तक प्रॉविडेंट फंड से आय पर टैक्स नहीं लगता था। ताकि रिटायरमेंट के समय लोगों को एकमुश्त राशि का लाभ मिल सके। फाइनेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग किया जा रहा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि कुछ लोग हर महीने अपने PF अकाउंट में 1 करोड़ रुपए तक का अंशदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि 1 करोड़ रुपए का अंशदान करने वाले की तुलना 2 लाख रुपए कमाने वाले और PF सेविंग्स पर 8% रिटर्न पाने वाले से नहीं की जा सकती। इस लाभ की ऊपरी सीमा तय होनी चाहिए ताकि उन पर टैक्स लगाया जा सके जो इन फंड्स में अपनी आय का अधिकांश हिस्सा डाल रहे हैं।

जब इसकी आलोचना हुई, तब राजस्व विभाग ने विस्तार से जवाब दिया। उसने कहा कि 1.23 लाख हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने 2018-19 में अपने इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) में 62,500 करोड़ रुपए जमा कराए। एक अकाउंट में तो 103 करोड़ रुपए का बैलेंस मिला है। वहीं, टॉप 20 HNIs का कुल बैलेंस 825 करोड़ रुपए है। 4.5 करोड़ EPF अकाउंट्स में सिर्फ 0.27% सदस्यों का औसत कॉर्पस फंड 5.92 करोड़ रुपए है। ये लोग बिना टैक्स चुकाए PF के बहाने 50 लाख रुपए सालाना तक कमा रहे हैं।

यह दूसरी बार है जब NDA सरकार ने EPF सेविंग्स पर टैक्स लगाया है। 2016 में बजट में घोषणा की गई थी कि विड्रॉल के समय 60% EPF अकाउंट बैलेंस पर टैक्स लगाया जाएगा। विरोध के बाद यह प्रस्ताव रद्द हो गया था। पिछले साल के बजट में EPF या नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) या सुपरएनुएशन प्लान जैसी इम्प्लॉई वेलफेयर स्कीम्स में नियोक्ता की ओर से योगदान को 7.5 लाख रुपए प्रतिवर्ष पर सीमित किया था।

नए नियम से किस तरह के PF अकाउंट्स प्रभावित होंगे?

EPF अकाउंट्स उन लोगों के लिए अनिवार्य है जो हर महीने 15 हजार रुपए से कम कमाते हैं और उनकी कंपनी में 20 से अधिक कर्मचारी हैं। कर्मचारियों के बेसिक पे और महंगाई भत्ते का 12% अंशदान के तौर पर काट लिया जाता है और 12% अंशदान उनकी कंपनी करती है।

प्राइवेट सेक्टर के ज्यादातर EPF अकाउंट्स को इम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) मैनेज करता है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के EPF अकाउंट्स जनरल प्रॉविडेंट फंड (GPF) मैनेज करता है। इन सभी अकाउंट्स पर नए नियम लागू होंगे।

कुछ बड़ी कंपनियां अपने ‘एग्जेम्प्ट’ EPF ट्रस्ट बनाती है ताकि अपने वर्कफोर्स की रिटायरमेंट सेविंग्स को मैनेज कर सके। इनका उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटने से बचाने का होता है।

हालांकि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत जमा होने वाली रिटायरमेंट सेविंग्स पर नए टैक्स का कोई असर नहीं पड़ेगा।

आपको क्या करना चाहिए?

फिलहाल कुछ नहीं। पीएफ अकाउंट होल्डर के तौर पर आपको अभी कुछ नहीं करना है। अगर एक कर्मचारी के रूप में आपका EPF अंशदान प्रति माह ₹20,833.33 या कंपनी की ओर से अंशदान के बिना ₹41,666.66 या इससे कम है, तो नए टैक्स नियमों का आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर आपका अंशदान इससे अधिक है तो आपको दोबारा विचार करने की जरूरत है कि ऐसा स्वैच्छिक अंशदान जारी रखा जाए या नहीं? बैंक डिपॉजिट्स पर इंटरेस्ट बहुत ज्यादा मिल नहीं रहा, ऐसे में आपको अपने अकाउंटेंट या इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से बात करनी चाहिए कि क्या टैक्स लगने के बाद भी EPF अकाउंट्स में अधिक राशि मिलानी है?

IT एक्ट के तहत अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी भुगतान से पहले TDS के तौर पर टैक्स काटती है तो उसे TDS सर्टिफिकेट जारी करना होता है। अगर EPFO, GPF या कंपनियों के EPF ने टैक्स काटा तो उसे कर्मचारी को TDS सर्टिफिकेट जारी करना होगा।

क्या EPFO के लिए टैक्स लगा पाना आसान होगा?

नहीं। EPFO में 24.77 करोड़ सदस्यों के EPF खाते हैं। इनमें से 14.36 करोड़ को 2019-20 तक यूनिक अकाउंट नंबर (यूएएन) बांटे गए हैं। 5 करोड़ सदस्य 2019-20 में अपने EPF खातों में पैसा मिला रहे थे। भले ही नए सिस्टम में प्रत्येक सदस्य के दो EPF खाते बनाने के लिए टेक्निकल सॉल्युशन बनाया गया है, कई तरह की चिंताएं बनी हुई हैं।

PF के ट्रस्टियों को ऐसे सभी सदस्यों के लिए TDS या आईटी फॉर्म 26AS जारी करना हहोगा। लगभग 15 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ देश के सबसे बड़े रिटायरमेंट फंड मैनेजर EPFO की इस संबंध में क्या तैयारी है, सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है।

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