पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Db original
  • Explainer
  • Pfizer COVID Vaccine Booster Dose Timing; India Israel | Why Booster Needed? India Israel America And World Health Organization

भास्कर एक्सप्लेनर:फाइजर और इजराइल की पहल के बाद शुरू हुई वैक्सीन के बूस्टर डोज पर बहस, आखिर कितना जरूरी है बूस्टर डोज और क्या कहते हैं एक्सपर्ट

6 दिन पहले

वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों के भी कोरोना संक्रमित होने के बाद फाइजर ने कहा है कि वो वैक्सीन का तीसरा बूस्टर डोज देने की तैयारी कर रहा है। कई देशों में लोगों को तीसरा बूस्टर डोज दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। इजराइल ने तो अपने ऐसे नागरिकों को वैक्सीन का तीसरा डोज देना शुरू भी कर दिया है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। इजराइल के इस फैसले के बाद बूस्टर डोज और उसकी जरूरत को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

आखिर बूस्टर डोज कितना जरूरी है? कब दिया जाना चाहिए? किन लोगों को दिया जाना चाहिए? एक्सपर्ट्स का फाइजर के दावे पर क्या कहना है? फिलहाल दुनिया में बूस्टर डोज को लेकर क्या चल रहा है? आइए जानते हैं...

बूस्टर डोज की जरूरत क्यों है?

दुनियाभर में इस वक्त कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की वजह से केस बढ़ रहे हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। अब तक की रिसर्च से ये पता नहीं चला है कि वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी आपके शरीर में कब तक रहती है।

हालांकि माना जा रहा है कि शरीर में 9 महीने से 1 साल तक एंटीबॉडी रहती है। उसके बाद आपको बूस्टर डोज लेना होगा। कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट पर वैक्सीन की इफेक्टिवनेस भी कम हो रही है। इस वजह से बूस्टर डोज देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस बारे में अभी और रिसर्च की जा रही है।

वैक्सीन के बूस्टर डोज पर देशों का क्या रुख है?

  • अमेरिका ने कहा है कि लोगों को बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन अभी इस संबंध में और रिसर्च की जा रही है। वैक्सीन की मिक्स एंड मैच स्ट्रैटजी पर भी विचार किया जा रहा है। रिसर्च के रिजल्ट के बाद ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा।
  • इजराइल ने वैक्सीन का बूस्टर डोज देने का फैसला लिया है। हालांकि वहां केवल ऐसे नागरिकों को ही वैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जाएगा जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इस बात की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है कि वैक्सीन का बूस्टर डोज कितना जरूरी है। संगठन ने ये भी कहा है कि विकसित देशों को वैक्सीन का बूस्टर डोज देने की बजाय ऐसे देशों को वैक्सीन देना चाहिए जहां वैक्सीन की कमी है।
  • भारत का टारगेट पहले अपनी आबादी को ज्यादा से ज्यादा वैक्सीनेट करना है। उसके बाद ही रिसर्च के नतीजों के आधार पर वैक्सीन के बूस्टर डोज के बारे में फैसला लिया जाएगा।

क्या वाकई बूस्टर डोज जरूरी है?

  • पिछले 1-2 हफ्तों से दुनियाभर में डेल्टा वैरिएंट की वजह से नए मामले बढ़ने लगे हैं। अमेरिका में भी ऐसा हो रहा है, लेकिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक नए मामले उन इलाकों से सामने आ रहे हैं जहां वैक्सीनेशन कम हुआ है।
  • अमेरिका में कोरोना की वजह से हो रही लगभग सभी मौतें ऐसे लोगों की हैं जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी।
  • जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, उसके बाद भी संभावना है कि वे कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि उनमें कोरोना के गंभीर लक्षण नहीं देखने को मिल रहे हैं।
  • CDC के डॉक्टर जे बटलरे के मुताबिक, जिन लोगों ने दिसंबर-जनवरी में ही वैक्सीन लगवा ली थी, उन लोगों में हाल ही में वैक्सीनेट हुए लोगों के मुकाबले गंभीर लक्षण कम देखे जा रहे हैं।
  • एक्सपर्ट कहते हैं कि शरीर में एंटीबॉडी नहीं होना और कम होना दो अलग-अलग बातें हैं। आपके शरीर में एंटीबॉडी की संख्या समय के साथ भले ही कम हो जाए, लेकिन आपके शरीर की मेमोरी सेल्स वायरस के स्ट्रक्चर को स्टोर कर लेती हैं। अगली बार आपके शरीर में जैसे ही वायरस आता है ये सेल्स वायरस की पहचान कर एंटीबॉडी को काम पर लगा देती हैं।
  • वायरस के अलग-अलग वैरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी भले ही कम बने, लेकिन ये कम एंटीबॉडी भी आपको हॉस्पिटलाइजेशन और कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचा सकती है।

क्या वैक्सीन अलग-अलग वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं है?

वैक्सीन सभी वैरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी बना रही है। ब्रिटेन में फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन की इफेक्टिवनेस पर की गई स्टडी में ये सामने आया है कि फाइजर के दोनों डोज डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति को हॉस्पिटलाइजेशन से बचाने में 96% कारगर हैं।

भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल डेटा में डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 65% बताई है।

रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V भी डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ 90% इफेक्टिव है। हालांकि स्पुतनिक ओरिजिनल वायरस पर 92% इफेक्टिव थी।

चीनी वैक्सीन सिनोवेक की डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ इफेक्टिवनेस कम हुई है। इसके बाद थाईलैंड ने घोषणा की है कि चीनी वैक्सीन लेने वाले हेल्थवर्कर को एस्ट्राजेनेका की तीसरा डोज दी जाएगी।

तो क्या पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने से पहले ही कुछ लोगों को बूस्टर डोज दिया जाएगा?

ऐसा हो सकता है। इजराइल की 66% आबादी को ही वैक्सीन लगी है, लेकिन इजराइल ने कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को बूस्टर डोज देने की तैयारी कर ली है।

इसी तरह फ्रांस में 53% आबादी को वैक्सीन लगी है, लेकिन वहां भी बूस्टर डोज देने की तैयारी चल रही है। अगस्त से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को बूस्टर डोज दिया जाएगा।

बूस्टर डोज किसे और कब दिया जा सकेगा?
वैक्सीन कंपनी फाइजर-बायोएनटेक का दावा है कि तीसरा यानी बूस्टर डोज डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ और ज्यादा प्रभावी होगा। हालांकि बूस्टर डोज केवल कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को दिया जाएगा।

विशेषकर वे लोग जो हृदय, फेफड़े या कैंसर की बीमारी से पीड़ित हैं। फाइजर के मुताबिक दूसरे डोज के छह महीने बाद तीसरा डोज दे सकते हैं। यह डोज दूसरे डोज के बाद छह से 12 महीने के भीतर दिया जाना चाहिए।

खबरें और भी हैं...