भास्कर एक्सप्लेनर:कोरोना से बचाने अब वैक्सीन की जगह ओरल पिल; अमेरिका ने दी मंजूरी, जानिए भारत में कब आएगी?

एक वर्ष पहले

अमेरिका ने फाइजर की कोविड-19 दवा को मंजूरी दे दी है। ये दवा गंभीर बीमारी की स्थिति में 12 साल के बच्चों और बड़ों को दी जा सकती है। इसे पैक्सलोविड (Paxlovid) नाम दिया गया है। कोरोना से लड़ने वाली ये दुनिया की पहली ओरल एंटीवायरल पिल होगी। पैक्सलोविड को मंजूरी देने के एक दिन बाद ही अमेरिका ने एक और कोरोना पिल मोलनुपिराविर को भी मंजूरी दे दी है।

सबसे पहले समझते हैं ये दवा क्या है?

ये एक एंटीवायरल दवा है जिसे PF-07321332 नाम दिया गया है। इस एंटीवायरल दवा को HIV मेडिसिन रीटोनाविर के लो डोज के साथ मिक्स कर दिया जाता है। यानी कोविड-19 की एक नई दवा को पहले से मौजूद रीटोनाविर के साथ दिया जाएगा। दवाओं के कॉम्बिनेशन के इस कोर्स को पैक्सलोविड नाम दिया गया है।

ये कितनी सेफ है? ट्रायल में क्या सामने आया है?

  • ट्रायल में ये दवा कोरोना के खिलाफ बेहद कारगर रही है। कंपनी ने इसकी इफेक्टिवनेस जानने के लिए 2,250 लोगों पर ट्रायल किए थे। लक्षण नजर आने के 3 दिन बाद ये दवा हल्के लक्षणों से पीड़ित मरीजों को हॉस्पिटलाइजेशन और मौत से रोकने में दवा 89% कारगर रही है। लक्षण नजर आने के 5 दिन बाद लेने पर हॉस्पिटलाइजेशन और मौत रोकने में 88% कारगर है।
  • फाइजर ने जब दवा के ट्रायल किए थे तब ओमिक्रॉन वैरिएंट नहीं आया था। ओमिक्रॉन वैरिएंट के आने के बाद कंपनी ने दोबारा टेस्ट किए। कंपनी ने इसके लिए लैब में एक ऐसे प्रोटीन को विकसित किया था, जिसका इस्तेमाल ओमिक्रॉन रिप्रोडक्शन के लिए करता है। टेस्ट के नतीजों में सामने आया कि ये दवा ओमिक्रॉन पर भी असरदार है।

अमेरिका में अभी किसे ये दवा दी जा रही है?

अमेरिका में दवाई के इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) को मंजूरी मिली है। जिन कोरोना पॉजिटिव मरीजों को हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत है या मौत हो जाने का खतरा है उन्हें ये दी जा सकती है। ये मरीज उम्र में 12 साल से बड़े और 40 किलोग्राम से ज्यादा वजनी होने चाहिए। दवाई लेने के लिए डॉक्टर का प्रेस्क्रिप्शन भी जरूरी है।

क्या भारत में इस दवा का प्रोडक्शन हो सकता है?

हां। पैक्सलोविड का जेनेरिक वर्जन बनाने के लिए कई इंडियन ड्रग मैन्युफेक्चरर तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें सन फार्मा, डॉक्टर रेड्डी और ऑप्टिमस फार्मा के नाम शामिल हैं।

भारत में दवा के आने के लिए क्या प्रॉसेस होगा?

16 नवंबर को फाइजर ने यूनाइटेड नेशंस के मेडिसिन पेटेंट पूल (MPP) के साथ डील की है। डील के तहत, दुनिया भर के जेनेरिक मेडिसिन मैन्युफेक्चरर को पैक्सलोविड के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे। फाइजर का लक्ष्य है कि उनकी ये दवा 95 देशों की 53% आबादी तक पहुंच जाए। इन 95 देशों में लो और मिडिल इनकम देश शामिल हैं, जिसमें भारत का भी नाम है।

डील के तहत लो इनकम देशों से फाइजर इस दवा की रॉयल्टी भी नहीं लेगा। भारतीय ड्रग मैन्युफेक्चरर को भी इसी तरह की डील साइन करनी होगी।

यानी उम्मीद है कि जल्द ही इस दवा का जेनेरिक वर्जन बनाने के लिए किसी भारतीय ड्रग मैन्यूफेक्चरर के साथ डील की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत में भी जल्द ही दवा के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा।

क्या भारत में आने के बाद दवा के क्लिनिकल ट्रायल भी होंगे?

हां। अभी जो नियम-कायदे हैं उनके हिसाब से तो भारत में भी दवा के क्लिनिकल ट्रायल करने होंगे।

कंपनी इस दवा का कितना प्रोडक्शन कर रही है?

कंपनी का कहना है कि वो फिलहाल 8 करोड़ डोसेज का प्रोडक्शन कर रही है, जिसे 2022 तक बढ़ाकर 12 करोड़ करने की तैयारी है। करीब 1 करोड़ डोसेज के लिए अमेरिकी सरकार ने फाइजर से एग्रीमेंट भी किया है। इन 1 करोड़ में से 65 हजार डोसेज दिसंबर अंत तक सप्लाई कर दिए जाएंगे। अमेरिका के कई राज्यों में कंपनी ने दवा की सप्लाई शुरू भी कर दी है। कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और टैक्सास में 3 हजार से ज्यादा डोसेज सप्लाई हो चुके हैं।

क्या कोरोना से निपटने को कोई और दवा भी मार्केट में है?

हां। अमेरिका ने पैक्सलोविड के बाद मर्क कंपनी की मोलनुपिराविर को भी मंजूरी दे दी है। इसे कोरोना से संक्रमित 18 साल से ज्यादा उम्र के गंभीर मरीजों को दिया जाएगा। मोलनुपिराविर दवा वायरस के जेनेटिक कोड में गड़बड़ी कर उसकी फोटोकॉपी होने से रोकती है। ये भी 40 गोलियां का एक कोर्स है, जिसे 5 दिन में मरीज को दिया जाता है।