भास्कर एक्सप्लेनर:100 लाख करोड़ के मास्टर प्लान में 61% पैसा राज्य और प्राइवेट प्लेयर्स लगाएंगे, कई पुरानी योजनाओं की री-पैकेजिंग है 'गति शक्ति'

7 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह

'PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान' लॉन्च हो गया है। 100 लाख करोड़ रुपए की ये योजना कई पुरानी योजनाओं की री-पैकेजिंग है। योजना की लागत का 61% पैसा राज्य सरकारों और प्राइवेट प्लेयर्स से लिया जाएगाा। प्रधानमंत्री पिछले तीन साल से हर स्वतंत्रता दिवस पर इस योजना को शुरू करने का ऐलान कर रहे थे।

आखिर गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान है क्या? 100 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट में क्या-क्या होना है? सरकार कहां-कितना खर्च करेगी? कौन-कौन सी पुरानी योजनाएं इस प्लान में शामिल हैं? PM मोदी ने पिछले तीन स्वतंत्रता दिवस पर इस योजना के बारे में क्या बातें कीं ? आइए जानते हैं...

गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान का ऐलान किया था। ये योजना अलग-अलग मंत्रालयों के बीच गतिरोध को खत्म करेगी। इसके प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग की अप्रोच समग्रता वाली होगी। कहा जा रहा है कि ये प्लान औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। इससे एयरपोर्ट, सड़क और रेल यातायात की व्यवस्था में सुधार होगा। इसके जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जाएंगे।

इस मास्टर प्लान के तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। ये प्लेटफॉर्म रेल और रोडवेज समेत 16 मंत्रालयों को साथ जोड़ेगा, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की इंटीग्रेटेड प्लानिंग और इम्प्लीमेंटेशन हो सके। इससे डेवलपमेंट के कामों को स्पीड देने की कोशिश की जाएगी। इससे जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स को जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) मोड में डाल दिया गया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है।

100 लाख करोड़ रुपए आएंगे कहां से?

2019 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 100 लाख करोड़ का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि ये पैसे अगले पांच वित्त वर्ष (2019-20 से 2024-25 तक) में खर्च किए जाएंगे। इस नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) का प्लान बनाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई गई थी। जिसने अप्रैल 2020 में अपनी रिपोर्ट सब्मिट की। इस टास्क फोर्स ने प्रोजेक्ट के लिए 111 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट की जरूरत बताई है।

NIP में खर्च होने वाले पैसों में से 39% केंद्र सरकार देगी, 40% खर्च राज्य सरकारों को करना होगा और बचे हुए 21% का फंड प्राइवेट सेक्टर से जुटाया जाएगा।

किस सेक्टर के कितने % प्रोजेक्ट NIP में शामिल हैं?

एनर्जी सेक्टर के सबसे ज्यादा 24% प्रोजेक्ट NIP में शामिल हैं। इसके बाद 19% रोड, 16% इन्फ्रास्ट्रक्चर और 13% रेलवे के प्रोजेक्ट की हिस्सेदारी है। यानी, NIP के पूरे प्रोजेक्ट में 72%हिस्सेदारी इन्हीं चार सेक्टर की होगी।

कौन-कौन सी पुरानी योजनाएं इस प्लान में शामिल हैं?

NIP या गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान कोई नई योजना नहीं है। ये एक तरह का फ्रेमवर्क है जिसके जरिए प्लांड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर नजर रखी जाएगी। इससे इन योजनाओं के बेहतर तरीके से इम्प्लीमेंटेशन में मदद मिलेगी।

अगस्त 2020 में वित्त मंत्रालय ने बताया था कि NIP में शामिल प्रोजेक्ट्स में से 40% प्रोजेक्ट्स पर पहले से काम चल रहा है। 30% प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनका कॉन्सेप्ट तैयार है। 20% प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जिन्हें चिह्नित करके उनकी डीटेल तैयार कर ली गई है, लेकिन उनके लिए अभी फंड नहीं जुटाया जा सका है। वहीं, 10% प्रोजेक्ट्स को अभी चिह्नित किया जाना बाकी है।

2019 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस प्रोजेक्ट का जिक्र किया था, लेकिन इसमें शामिल कई योजनाएं ऐसी हैं जो 2019 से पहले से चल रही हैं। जैसे भारतमाला प्रोजेक्ट 2017 में, सागरमाला प्रोजेक्ट 2015 में, उड़ान योजना 2016 में, रेल नेटवर्क, इनलैंड वाटरवे और भारत नेट जैसी योजनाएं 2015 में लॉन्च की गई थीं। इनमें भी कुछ योजनाएं ऐसी हैं जो मोदी सरकार से पहले किसी और नाम से चल रही थीं।

इस मास्टर प्लान का लक्ष्य क्या है?

ये प्लान इकोनॉमिक फील्ड की मल्टी-मॉडल इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी की एक योजना है। जिसकी टैग लाइन गति से शक्ति है। इसमें कई मौजूदा योजनाएं शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है। जैसे भारतमाला प्रोजेक्ट, सागरमाला प्रोजेक्ट, उड़ान, रेल नेटवर्क का विस्तार, भारत नेट और इनलैंड वाटरवे आदि।

अधिकारियों का कहना है कि मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी से लोगों और समान की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

ये योजना सरकार के कई महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की भी पूर्ति करेगी, जिन्हें सरकार 2024-25 तक हासिल करना चाहती है। इनमें 200 से ज्यादा एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट का निर्माण, नेशनल हाईवे नेटवर्क को 2 लाख किलोमीटर तक बढ़ाना, गैस पाइप लाइन नेटवर्क को 35 हजार किलोमीटर करना शामिल है।

गति की शक्ति से ये हासिल करना चाहती है सरकार

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