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भास्कर एक्सप्लेनर:5जी को लेकर जियो ने की बड़ी घोषणा, जानिए भारत में इसे लेकर सरकार और कंपनियों की क्या है तैयारी और कब तक आम लोगों को मिलेगी 5जी सुविधा

एक महीने पहले

हाल ही में रिलायंस ने घोषणा की है कि वो अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल सिस्टम बना रही है। इसे भारत और पूरे भारतीय रीजन की डेटा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। रिलायंस जियो समुद्र में दो केबल डालेगा, जिनकी लंबाई 16 हजार किलोमीटर होगी। इन दो केबलों को IAX और IEX नाम दिया गया है। IAX यानी इंडिया एशिया एक्सप्रेस जो भारत को पूर्व की ओर सिंगापुर और उससे आगे जोड़ेगा वहीं IEX यानी इंडिया यूरोप एक्सप्रेस जो भारत को पश्चिम की ओर मध्य-पूर्व और यूरोप से जोड़ेगा। इससे भारत में और भारत से बाहर डेटा और क्लाउड सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी। 2024 तक इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की संभावना है। कंपनी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद भारत के बड़े शहर यूरोप के बड़े शहरों से सीधे जुड़ पाएंगे और 200Tbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलेगी। जियो के इस दावे के बाद एक बार फिर 5जी सुर्खियों में आ गया है।

आइए, समझते हैं क्या है 5जी, इसके आने के बाद कितना कुछ बदल जाएगा और हमें कब तक 5जी सर्विस मिलने लगेगी...

5जी होता क्या है?
मोबाइल इंटरनेट की पांचवी पीढ़ी को ही 5जी कहा जाता है। इसकी स्पीड अभी के 4जी के मुकाबले कहीं ज्यादा होगी। इसका बड़ा फायदा वीडियो स्ट्रीमिंग और डेटा ट्रांसफर में मिलेगा। 5जी आने के बाद लोगों को हाई-स्पीड इंटरनेट मिलेगा जो कि स्मार्ट सिटी, स्मार्ट होम और सभी स्मार्ट डिवाइस के लिए वरदान साबित होगा। दावा है कि 4जी के मुकाबले 5जी में इंटरनेट डेटा की स्पीड 20 गुना तक ज्यादा होगी।

5जी आने के बाद कितना कुछ बदल जाएगा?
5जी आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव इंटरनेट की स्पीड में होगा। एयरटेल ने इस साल की शुरुआत में हैदराबाद में 5जी का ट्रायल किया था। इस ट्रायल में कंपनी ने दावा किया कि 5जी की स्पीड 4जी से 10 गुना ज्यादा थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 5जी की स्पीड 1Gbps तक हो सकती है। यानी एक GB डेटा डाउनलोड करने में आपको एक सेकंड का समय लगेगा। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि आप 2 घंटे की एक मूवी को कुछ ही सेकंड्स में डाउनलोड कर सकेंगे।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स एक्सपर्ट साजिद खान के मुताबिक, 5जी आने के बाद न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी बल्कि इंटरनेट को इस्तेमाल करने का तरीका भी बदल जाएगा। आप अपने स्मार्टफोन से ही घर के सभी स्मार्ट डिवाइस कनेक्ट कर पाएंगे। इनमें फ्रिज, वाशिंग मशीन, AC से लेकर टीवी तक शामिल है। इस पूरे जाल को इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहा जाता है। उदाहरण के लिए कल सुबह 7 बजे आपको ट्रेन पकड़नी हैं। आपने 6 बजे का अलार्म लगाया, लेकिन अलार्म 7 बजे बजा। अब आप सोच रहें होंगे कि अलार्म 1 घंटे लेट बजेगा तो ट्रेन ही निकल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल ट्रेन 1 घंटा लेट थी और आपकी स्मार्ट वाच ने ट्रेन का रनिंग स्टेट्स पता कर खुद-ब-खुद ही अलार्म को 1 घंटे आगे बढ़ा दिया।

इस तरह से आपके इस्तेमाल में आने वाले सभी डिवाइस एक साथ सिंक्रोनाइज होकर काम करने लगेंगे। इसके साथ ही ये अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स, हेल्थ खेती-किसानी, पढ़ाई से लेकर खरीदारी करने के तरीकों को भी बदल देगा। यानी जहां-जहां इंटरनेट का इस्तेमाल आप करते हैं, वहां-वहां बड़े बदलाव होंगे।

भारत में 5जी को लेकर कितना काम हुआ है?
वैसे तो काफी समय से 5जी पर काम चल रहा है, लेकिन इसी साल 3 बड़ी खबरें आई हैं। पहली ये कि 4 मई को सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को 5जी के ट्रायल करने की अनुमति दी है। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग, सी-डॉट और रिलायंस जियो की तकनीक और उपकरण को ही इस्तेमाल की इजाजत दी है। चीन से सीमा पर हुए विवाद के बाद चीनी कंपनी हुवावे को भारत में 5जी ट्रायल से पूरी तरह दूर ही रखा गया है।

इसी साल जनवरी में एयरटेल ने हैदराबाद में लाइव नेटवर्क पर सफलतापूर्वक 5जी ट्रायल किए थे। इस ट्रायल के बाद कंपनी ने दावा किया था कि एयरटेल 5जी के लिए पूरी तरह से तैयार है और ऐसा करने वाली वो भारत में पहली कंपनी है। आने वाले कुछ समय में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भी कंपनी इसी तरह के ट्रायल करने की तैयारी में है।

हाल ही में भारत की सबसे बड़ी मोबाइल ब्रॉडबैंड कंपनी रिलायंस जियो ने घोषणा की है कि वो अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल सिस्टम बना रही है। इसे भारत की डेटा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। जियो ने इसके लिए कई प्रमुख वैश्विक साझेदारों और विश्व स्तरीय सबमरीन केबल सप्लायर सबकॉम से हाथ मिलाया है। कंपनी का दावा है कि इससे 5जी को पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे भारत दुनिया के बड़े शहरों के साथ फास्ट स्पीड इंटरनेट के जरिए जुड़ सकेगा। इसके साथ ही जियो 5जी के लिए खुद की स्वदेशी तकनीक पर भी काम कर रही है।

क्या-क्या है चुनौतियां?
सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्किंग के पूरे सिस्टम को बदलना है। दरअसल 5जी के लिए ऑप्टिकल फायबर केबलों की जरूरत होती है। लिहाजा अभी जितनी भी पुरानी केबल्स हैं, उनमें से कम से कम 60% को ऑप्टिकल फायबर केबलों से बदलना होगा। ये काम बेहद खर्चीला है और इसमें टाइम भी लगेगा। साथ ही 5जी हाई फ्रीक्वेंसी वेव्स पर काम करता है। ये वेव्स ज्यादा दूर तक नहीं जा सकती। इसका मतलब है कि टावरों की संख्या भी बढ़ानी होगी। अभी जहां एक टावर से काम चल जाता है, हो सकता 5जी के लिए वहां 5 टावर लगाने पड़ें।

हाल ही में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में सरकार ने 700, 800, 900, 1800, 2100, 2300 और 2500MHz के स्पेक्ट्रम की ही नीलामी की। इनमें से कुछ स्पेक्ट्रम से 5जी सर्विसेज दी तो जा सकती है, लेकिन इन्हें 5जी के लिए बेस्ट नहीं माना जाता। दरअसल 5जी के लिए 3.3 से लेकर 3.6Ghz के स्पेक्ट्रम को किफायती माना जाता है। इसी स्पेक्ट्रम में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) और रक्षा मंत्रालय भी अपना कामकाज करता है। टेलिकॉम कंपनियों के लिए परेशानी की एक वजह ये भी है। हालांकि सरकार ने कहा है कि जल्द ही 5जी स्पेक्ट्रम की भी नीलामी की जाएगी।

साथ ही स्पेक्ट्रम की कीमतें भी टेलिकॉम कंपनियों के लिए परेशानियां पैदा कर रही हैं। भारत सरकार ने 3.3-3.6GHz स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए एक MHz की बेस प्राइस 492 करोड़ रुपए निर्धारित की है। टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि ये बेहद महंगी कीमत है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी स्पेक्ट्रम के लिए यूके में 70 करोड़, ऑस्ट्रेलिया में 35 करोड़ और इटली में 182 करोड़ रुपए की कीमत सरकार ने तय की थी। इस लिहाज से भी दूसरे देशों के मुकाबले ये काफी महंगा है।

5जी के लिए जरूरी उपकरण और तकनीक भी दुनिया में चंद कंपनियों के पास ही है, उनमें से कई कंपनियां चीन की है। साथ ही चीनी कंपनियां दूसरी कंपनियों के मुकाबले सस्ती भी हैं, लेकिन चीनी कंपनियों के साथ उठे प्राइवेसी के मसले के बाद कई देशों ने चीनी कंपनियों पर रोक लगा दी है। भारत ने भी चीन से सीमा विवाद के बाद चीनी कंपनी हुवावे को 5जी के ट्रायल की अनुमति नहीं दी है। इससे भी खर्च बढ़ा है।

दुनिया के किन-किन देशों में 5जी इस्तेमाल हो रहा है?
ग्लोबल मोबाइल सप्लायर्स एसोसिएशन के मुताबिक फिलहाल 61 देशों में 5जी इस्तेमाल किया जा रहा है। साउथ कोरिया ने सबसे पहले कॉमर्शियल 5जी लॉन्च किया था। एक अनुमान के मुताबिक 2025 तक साउथ कोरिया के लगभग 60% मोबाइल 5जी नेटवर्क से जुड़े होंगे।

इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत कहां है?
​​​​​​ओक्ला के मुताबिक भारत में इंटरनेट की औसत स्पीड 12.81 Mbps है। इस लिहाज से भारत दुनियाभर में 130वें नंबर पर है। श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देश भी भारत से आगे हैं। दुनियाभर में सबसे तेज मोबाइल इंटरनेट यूएई में चलता है। वहां औसत इंटरनेट स्पीड 190 Mbps है।

भारत में 5जी कब तक आ सकता है?
इसका जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आम लोगों के लिए 2022-23 से पहले 5जी सर्विस उपलब्ध नहीं हो पाएगी। फरवरी 2021 में पार्लियामेंट के एक पैनल ने भी कहा था कि 5जी के लिए भारत की तैयारी अभी पूरी नहीं हुई है। पैनल ने कहा कि 2021 के अंत या 2022 की शुरुआत में विशेष जरूरतों के लिए कहीं-कहीं 5जी की शुरुआत हो सकती है, लेकिन पूरे देश में 5जी सर्विस शुरू करने में 5-6 सालों का समय भी लग सकता है।

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