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भास्कर एक्सप्लेनर:कौन है मो धालीवाल, जिसकी बनाई टूलकिट थनबर्ग ने शेयर की थी? क्या है उसका खालिस्तान कनेक्शन? जानें सबकुछ

2 महीने पहले
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स्वीडन की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के पक्ष में सोशल मीडिया पर लिखा। साथ ही उन्होंने टूलकिट नाम का एक डॉक्यूमेंट भी शेयर किया। इसमें आंदोलन करने के तरीकों को बताया गया था। लेकिन, इस टूलकिट को बनाने का शक पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) पर है। इसका को-फाउंडर मो धालीवाल है। कहा जा रहा है कि धालीवाल खालिस्तान समर्थक है और कनाडा से भारत विरोधी एजेंडा चला रहा है।

धालीवाल आखिर है कौन? उसका खालिस्तान से क्या कनेक्शन है? धालीवाल की फर्म PJF क्या करती है? PJF ने इन आरोपों पर क्या सफाई दी है? जिस टूलकिट को लेकर विवाद हो रहा है, वो क्या है? इस टूलकिट का इस्तेमाल क्या पहले कहीं हुआ है? आइए जानते हैं...

कौन है मो धालीवाल?

मो धालीवाल कनाडा के वैनकूवर बेस्ड डिजिटल ब्रैंडिंग क्रिएटिव एजेंसी Skyrocket का को-फाउंडर और चीफ स्‍ट्रैटीजिस्‍ट है। 2011 में इस कंपनी की शुरुआत हुई थी। उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल के मुताबिक उसने ब्रिटिश कोलंबिया की यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रेशर वैली से पढ़ाई की है। यहां से उसने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में दो साल का डिप्लोमा किया है।

धालीवाल को जिस PJF से जुड़ा बताया जा रहा है, उसके बारे में धालीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि इसकी फाउंडर उसकी दोस्त अनीता लाल हैं। कनाडा की सिख और पंजाबी सर्किल में वो अपनी आंत्रप्रेन्योरियल स्किल्स के लिए जाना जाता है।

उसका खालिस्तान से क्या कनेक्शन है?

सितंबर 2020 में धालीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘मैं खालिस्तानी हूं। आप शायद मेरे बारे में ये नहीं जानते। क्यों? क्योंकि खालिस्तान एक विचार है। खालिस्तान एक जीता जागता, सांस लेता मूवमेंट है।' सितंबर में ही उसने लोगों से एक पिटिशन पर साइन करने की अपील की। ये पिटिशन ओटावा बेस्ड पब्लिक थिंक-टैंक मैकडोनाल्ड-लॉरियर इंस्टीट्यूट के खिलाफ थी, जिसने ‘खालिस्तान: अ प्रोजेक्ट ऑफ पाकिस्तान’ नाम से रिपोर्ट पब्लिश की थी।

हाल ही में सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में मो धालीवाल खालिस्तान मूवमेंट के समर्थन में बोल रहा है। इसी वीडियो में वो बताता है कि उसने खालिस्तान मूवमेंट में अपने चाचा को खोया है। और कहता है कि उसका चाचा खालिस्तानी आतंकी था। जिसे 1984 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मारा था। वीडियो में वो दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर कहता है कि कृषि कानून वापस ले लिए जाते हैं तो वह जीत नहीं। वो दावा करता है कि इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट से जुड़ी लड़ाई शुरू होगी। हालांकि, इस वीडियो में कितनी सच्चाई है ये जांच का विषय है।

धालीवाल की फर्म PJF क्या करती है?

कनाडा की यह फर्म खुद को उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था बताती है। इसकी वेबसाइट के होमपेज पर AskIndiaWhy.com नाम की वेबसाइट का जिक्र है जिस पर जाने पर भारत के खिलाफ बहुत सारा प्रोपेगेंडा कंटेंट मौजूद है। वेबसाइट पर लिखा गया है कि भारत एक 'फासीवादी, हिंसक दमनकारी शासन' की ओर बढ़ रहा है। साथ ही प्रो-खालिस्‍तान और प्रो-पाकिस्‍तान कनाडाई सांसद जगमीत सिंह के कई बयान वेबसाइट पर मौजूद हैं।

ये फर्म दावा करती है कि वो भारत में हो रहे किसान आंदोलन से एक्टिवली जुड़ी हुई है। फर्म का ट्विटर पेज फरवरी 2020 में तो फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज जून 2020 में बनाया गया था। इन पर भी किसान आंदोलन और भारत सरकार के कथित अत्याचार से जुड़े कंटेंट डाले गए हैं।

PJF ने इन आरोपों पर क्या सफाई दी है?

PJF ने शनिवार को एक बयान जारी कर पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी। फाउंडेशन का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शन के लिए उन्होंने न ही कोई कॉर्डिनेशन किया और न ही रिहाना, ग्रेटा जैसे हस्तियों को ट्वीट करने के लिए कॉन्टैक्ट किया। फाउंडेशन का कहना है कि वो 26 जनवरी को दिल्ली और लालकिले में हुई हिंसा में शामिल नहीं था। हालांकि, फाउंडेशन का कहना है कि वो किसानों के मुद्दों की वकालत दुनियाभर में करता रहेगा।

अब ये टूलकिट क्या है?

टूलकिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसमें आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाया जाए, किस तरह के हैशटैग का इस्तेमाल किया जाए, प्रदर्शन के दौरान अगर कोई दिक्कत आए तो कहां कॉन्टैक्ट करें? इस दौरान क्या करें और क्या करने से बचें? ये सब इस टूलकिट में बताया गया है। ग्रेटा थनबर्ग ने यही टूलकिट शेयर की थी। इसॉमें एक ‘पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन’ भी था, जिसमें ‘पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ था।

क्या पहली बार इस तरह की टूलकिट चर्चा में आई है?

नहीं ऐसा नहीं है। दरअसल, पिछले साल अमेरिका में पुलिस ने एक अश्वेत जॉर्ज फ्लायड की सड़क पर हत्या कर दी थी। इसके बाद 'ब्लैक लाइफ मैटर' कैंपेन शुरू किया गया था। भारत समेत दुनियाभर में लोगों ने अश्वेत लोगों के पक्ष में आवाज उठाई थी। इस आंदोलन को चलाने वालों ने एक टूलकिट तैयार की थी।

इसमें आंदोलन को लेकर कई बातें बताई गईं थीं, जैसे- आंदोलन में कैसे जाएं, किस जगह पर जाएं, कहां न जाएं, पुलिस एक्शन ले तो क्या करें? प्रदर्शन के दौरान किस तरह के कपड़े पहनें, जिससे मूवमेंट में आसानी हो। पुलिस पकड़ ले तो क्या करें। इस बारे में आपके अधिकार क्या हैं? इसके अलावा हांगकांग में भी चीन के खिलाफ चल रहे आंदोलन में टूलकिट को शेयर किया गया था।

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