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भास्कर डेटा स्टोरी:2015 से 2019 तक 'एक्ट ऑफ गॉड' से हर साल 7,916 मौतें; 30 साल में 4.96 लाख की जान गई

नई दिल्ली16 दिन पहलेलेखक: आदित्य सिंह
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  • प्रकृति के प्रकोप से तीन दशक में हर दिन औसतन 45 लोगों की मौत
  • भारत में पिछले 30 साल में आसमानी बिजली से हर दिन 6 लोगों की मौत

भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत प्राकृतिक आपदा की वजह से होती है। प्राकृतिक आपदा यानी बाढ़, आकाशीय बिजली, लू और ठंड से होने वाली मौतें, जिन्हें एक्ट ऑफ गॉड भी कहा जा सकता है। लेकिन कई आपदाएं ऐसी होती हैं, जो प्राकृतिक तो होती हैं, लेकिन उनके लिए सिस्टम भी दोषी है। ज्यादा पीछे क्या जाना, इसी साल बाढ़ की चपेट में आने से एक हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों पर अपनी रिपोर्ट पेश की है। इसमें तीन दशक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इसके अनुसार, 2019 में 4.21 लाख लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई। इनमें भी दो प्रतिशत मौतें कुदरत के कहर की वजह से हुई। इसमें भी आसमानी बिजली ने सबसे ज्यादा जानें ली हैं। इसके बाद लू, बाढ़, ठंड या लैंडस्लाइड वजहें रहीं। यह 2018 की तुलना में 18% ज्यादा है। राज्यों की बात करें तो बिहार (1,521) और ओडिशा (1,466) में कुदरत के कहर की वजह से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। इन दोनों राज्यों में हुई मौतों का आंकड़ा देश में हुई कुल मौतों का 35% है। इसी तरह, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड में भी एक हजार के आसपास ऐसी मौतें रही हैं।

35% मौतें आसमानी बिजली से

  • 2019 में प्राकृतिक आपदा से बिहार में हुई मौतों का एक तिहाई यानी 480 मौतें बाढ़ की वजह से हुई, जबकि 400 मौतें आसमानी बिजली की वजह से हुई हैं। छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में प्राकृतिक आपदा यानी आसमानी बिजली ही है क्योंकि यहां 80% मौतों की वजह आसमानी बिजली ही है। गोवा में भी दो-तिहाई मौतों की वजह आकाशीय बिजली रही।
  • 2019 में पूरे देश में आसमानी बिजली की वजह से दो हजार 876 मौतें हुई हैं। किसी भी प्राकृतिक आपदा से हुई मौतों से तुलना करें तो यह उसका 35% बनता है। बाढ़ से 16% मौतें, लू और धूप से 12% मौतें, ठंड से 10% मौतें हुई हैं।

आसमानी बिजली से दो हजार 874 मौतों के अलावा, लू और धूप दूसरी सबसे बड़ी वजह रही। इससे एक हजार 272 मौतें हुईं। बाढ़ से 948, ठंड से 790, लैंडस्लाइड से 264 और अन्य कारणों से लगभग दो हजार मौतें हुईं। सबसे ज्यादा 77% यानी छह हजार 301 मौतें पुरुषों की हुई है और 13% यानी एक हजार 844 मौतें महिलाओं की हुई है।

30 साल में यानी 1990 से लेकर 2019 तक 4 लाख 96 हजार प्राकृतिक आपदाओं की वजह से असामयिक मौतें हुई हैं। पिछले तीन दशक में प्राकृ़तिक आपदाओं से होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह आसमानी बिजली रही है। पिछले 30 साल में आसमानी बिजली की वजह से 13% यानी 64 हजार 277 मौतें हुई हैं। पिछले 30 साल में हर दिन 6 लोगों की मौत आसमानी बिजली से हुई है। पिछले तीस साल में प्राकृतिक आपदा में हुई कुल मौतों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मौतें ज्यादा हुई हैं।

पिछले तीन दशक से हर दिन 45 लोगों की मौतें प्राकृतिक आपदा की वजह से हुई है। पांच साल में होने वाली कुल मौतों का सालाना औसत देखें तो तो 1990 से 1994 के बीच पांच साल में हर साल औसतन 5 हजार 751 मौतें हुई थीं। 1995-99 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर हर साल औसतन 18 हजार 377 हो गया। 2000 से 2004 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर हर साल औसतन 20 हजार 926 हो गया और 2005 से 2009 के बीच पांच सालों में 23 हजार के औसत से मौतें हुईं। 2010 से 2014 के बीच मौतों का आंकड़ा थोड़ा घटकर औसतन 22 हजार 935 हो गया और 2015 से 2019 के बीच यह आंकड़ा घटकर हर साल औसतन 7 हजार 916 रहा। 2000 से 2004 के बीच मरने वालों का औसत ज्यादा रहने की सबसे बड़ी वजह 2001 में भुज भूकंप और 2004 में सुनामी रही।

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