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जल्द मिलेगी तीसरी वैक्सीन:रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V के इमरजेंसी यूज को एक्सपर्ट कमेटी की मंजूरी, गेमचेंजर साबित होगी 92% इफेक्टिव ये वैक्सीन

2 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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कोरोना वायरस इन्फेक्शन की दूसरी लहर तेज हो चली है। इस बीच सोमवार को एक्सपर्ट कमेटी ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) इस पर फैसला लेगा। मंजूरी मिलने पर यह भारत के कोरोना टीकाकरण अभियान में शामिल होने वाली तीसरी वैक्सीन बन जाएगी। इस बीच, रसियन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड (RDIF) ने बयान जारी कर बताया कि भारत दुनिया का 60वां देश हो गया है जिसने स्पुतनिक-V को यूज के लिए मंजूरी दी है। ये दुनिया की दूसरी वैक्सीन है जिसे ज्यादा देशों में यूज किया जा रहा है।

भारत में 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू हुआ था और इसके लिए इसी साल की शुरुआत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को मंजूर किया गया था। कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया है। भारत में पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इसका प्रोडक्शन कर रहा है। कोवैक्सिन को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के साथ मिलकर बनाया है।

पिछले हफ्ते रिपोर्ट आई थी कि ज्यादातर बड़े राज्यों में वैक्सीन डोज खत्म हो गए हैं। जिस रफ्तार से टीके लगाए जा रहे हैं, उस रफ्तार से बन नहीं रहे। इस वजह से तीसरी वैक्सीन को मंजूरी देना बेहद जरूरी हो गया है।

हर साल 85 करोड़ वैक्सीन तैयार होगी
RDIF ने बताया कि भारत में स्पुतनिक-V का ट्रायल 1600 लोगों पर किया गया था। इनकी उम्र 18 से 99 साल तक की थी। ट्रायल का रिस्पांस काफी बेहतर रहा। अब भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। भारत में इसे डॉ. रेड्‌डी फार्मा करेगी। कंपनी का दावा है कि यहां हर साल 85 करोड़ वैक्सीन तैयार होगी। इससे करीब 40 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा सकती है।

आइए जानते हैं कि कितनी खास है स्पुतनिक-V?

  • मॉर्डना और फाइजर की mRNA वैक्सीन ही 90% तक इफेक्टिव साबित हुई हैं। इसके बाद स्पुतनिक-V ही सबसे अधिक 91.6% इफेक्टिव रही है। इसे रूस के गामालेया इंस्टीट्यूट ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) की फंडिंग से बनाया है।
  • यह दो एडेनोवायरस वेक्टर से बनी है यानी कोवीशील्ड जैसी है। कोवीशील्ड में चिम्पैंजी में मिलने वाले एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, रूसी वैक्सीन में दो अलग-अलग वेक्टरों को मिलाकर इस्तेमाल किया है। एस्ट्राजेनेका और रूसी वैक्सीन के कम्बाइंड ट्रायल्स की बात भी चल रही है।
  • स्पुतनिक-V को 1 अप्रैल की स्थिति में दुनिया के 59 देशों में अप्रूवल मिला है। सबसे पहले अगस्त 2020 में रूस ने इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद बेलारूस, सर्बिया, अर्जेंटीना, बोलिविया, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, वेनेजुएला, पैराग्वे, यूएई, तुर्कमेनिस्तान में भी इसे अप्रूवल दिया गया था। है। यूरोपीय यूनियन के ड्रग रेगुलेटर से भी इसे जल्द ही अप्रूवल मिल सकता है।

भारत में कैसे हो सकती है गेमचेंजर?

  • भारत में इस समय दो ही वैक्सीन उपलब्ध हैं। उनमें कोवैक्सिन का एफिकेसी रेट 81% है, जबकि कोवीशील्ड का कुछ शर्तों के साथ 80% तक। ऐसे में 91.6% इफेक्टिवनेस के साथ रूसी वैक्सीन सबसे ज्यादा इफेक्टिव वैक्सीन हो जाएगी।
  • इस समय दोनों उपलब्ध वैक्सीन का प्रोडक्शन 4 करोड़ डोज प्रतिमाह का है। अभी 35 लाख डोज रोज दिए जा रहे हैं। ऐसे में कम से कम 7 करोड़ डोज हर महीने चाहिए होंगे। डिमांड पूरी करने के लिए फिलहाल स्पुतनिक-V को मंजूरी देना जरूरी हो गया है।
  • RDIF के सीईओ किरिल दिमित्रेव के अनुसार यह वैक्सीन सब तक पहुंच सके, इसके लिए इसकी कीमत 10 डॉलर से कम रखी गई है। यानी 700 रुपए से भी कम में यह उपलब्ध होगी। दुनियाभर में 90% से ज्यादा इफेक्टिवनेस साबित करने वाली अन्य वैक्सीन के मुकाबले यह बेहद सस्ती है। अच्छी बात यह है कि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर किया जा सकता है जो मौजूदा सप्लाई चेन में आसानी से उपलब्ध है।
  • भारत में रुसी वैक्सीन को डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी विकसित कर रही है और इसके 1,500 वॉलंटियर्स पर फेज-3 ब्रिजिंग ट्रायल्स किए हैं। इसी आधार पर स्पुतनिक के लिए मंजूरी मांगी है। इसके साथ-साथ हिटरो बायोफार्मा और ग्लैंड फार्मा में भी प्रोडक्शन होगा। भारत में 35.2 करोड़ डोज सालाना प्रोडक्शन हो सकेगा।

91.6% इफेक्टिव है वैक्सीन, इम्यून रिस्पॉन्स तेजी से बढ़ाती है

  • इस वैक्सीन को रशियन फेडरेशन में स्वास्थ्य मंत्रालय के गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ मिलकर बनाया गया है। स्पुतनिक-V एक एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनी वैक्सीन है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के डोज की तरह ही है, पर इसमें अलग एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है।
  • डेवलपर्स का कहना है कि स्पुतनिक-V ज्यादा जल्दी और इफेक्टिव तरीके से इन्फेक्शन के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स बढ़ाती है। अंतरिम एफिकेसी एनालिसिस 19,866 वॉलंटियर्स पर की गई स्टडी के आधार पर है। इसमें 14,964 को वैक्सीन लगाई गई थी, जबकि 4,902 लोगों को प्लेसिबो (सलाइन वॉटर)। स्टडी में 2,144 वॉलंटियर्स 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के थे। इनमें भी वैक्सीन ने अच्छी इफेक्टिवनेस दिखाई है। वैक्सीन पहले ही 59 देशों में अप्रूवल पा चुकी है।
  • अगस्त 2020 में जब रूस ने स्पुतनिक-V को अप्रूवल दिया तो पूरी दुनिया में इसे संदेह की नजर से देखा गया था। तब तक इसकी इफेक्टिवनेस के आंकड़े सामने नहीं आए थे। इसके बाद ट्रायल्स के नतीजे सामने आए तो पता चला कि यह वैक्सीन वाकई में इफेक्टिव है।
  • यह वैक्सीन गंभीर लक्षणों या मौत रोकने में 100% इफेक्टिव है। यह बहुत महत्वपूर्ण पैरामीटर है, क्योंकि यह लोगों की जान बचा सकती है। सिंगल डोज भी बीमारी के खिलाफ 87.6% तक प्रोटेक्शन देता है।

इसके अलावा और कौन-सी वैक्सीन बन रही हैं?

1. जायकोव-डी (ZyCov-D)
कंपनीः जायडस कैडिला, अहमदाबाद ने यह वैक्सीन डेवलप की है। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के बाद यह दूसरी पूरी तरह से स्वदेशी वैक्सीन होगी।
इफेक्टिवनेसः शुरुआती दो ट्रायल्स में सुरक्षित साबित हुई है। इफेक्टिवनेस के आंकड़े आने हैं।
क्षमताः 15 करोड़ डोज प्रतिवर्ष
स्टेटसः इस समय भारत में फेज-3 ट्रायल्स चल रहे हैं।

2. कोवोवैक्स (नोवावैक्स)
कंपनीः सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नोवावैक्स के साथ डील की है।
इफेक्टिवनेसः ओरिजिनल वायरस स्ट्रेन के खिलाफ 96.4% इफेक्टिव है।
क्षमताः 4-5 करोड़ डोज प्रतिमाह
स्टेटसः 3 फरवरी को सीरम इंस्टीट्यूट को ब्रिजिंग स्टडी करने की अनुमति ली है। यह वैक्सीन नोवावैक्स ने तैयार की है और शुरुआती ट्रायल्स विदेशों में हुए हैं। इसकी पुष्टि के लिए भारत में ब्रिजिंग स्टडी होने वाली है।

3. BECOV2A, BECOV2B, BECOV2C, BECOV2D
कंपनीः बायोलॉजिकल E ने बेयर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के साथ मिलकर इसे बनाया है।
इफेक्टिवनेसः 2 डोज वाली वैक्सीन के फेज-3 ट्रायल्स अभी शुरू नहीं हुए हैं।
क्षमताः 10 करोड़ डोज प्रतिवर्ष
स्टेटसः फेज-1 और फेज-2 ट्रायल्स भारत में हो चुके हैं। नतीजों के आधार पर कंपनी फेज-3 ट्रायल्स के लिए अनुमति मांगेगी।

4. BV154 (इंट्रा-नैजल वैक्सीन)
कंपनीः भारत बायोटेक ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ मिलकर इस पर काम किया है।
इफेक्टिवनेसः ट्रायल्स पूरे नहीं हुए हैं।
क्षमताः पता नहीं।
स्टेटसः 3 फरवरी को भारत बायोटेक ने 175 वॉलंटियर पर फेज-1 ट्रायल्स के लिए मंजूरी हासिल की थी। अभी फेज-2 और फेज-3 ट्रायल्स होने हैं। साल के अंत तक मार्केट में आ सकती है।

5. HGCO19 (mRNA वैक्सीन)
कंपनीः जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स
इफेक्टिवनेसः फेज-3 ट्रायल्स अभी शुरू नहीं हुए हैं। अमेरिका में मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन इसी प्लेटफॉर्म पर बनी है।
क्षमताः 36 करोड़ डोज प्रतिवर्ष
स्टेटसः 11 दिसंबर को फेज-1 और फेज-2 ट्रायल्स के लिए मंजूरी मिली थी। रेगुलेटर को डेटा सौंपना है। उसके बाद अगले फेज के ट्रायल्स शुरू होंगे।

6. जेनसेन फार्मा की Ad26.CoV2.S
कंपनीः बायोलॉजिकल E ने जॉनसन एंड जॉनसन की जैनसेन बायोफार्मास्युटिकल्स के साथ डील की है।
इफेक्टिवनेसः 66% अमेरिका और अन्य देशों में हुए ट्रायल्स के आधार पर।
क्षमताः 60 करोड़ डोज सालाना, जिसे 100 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
​​​​​​​स्टेटसः भारत में ब्रिजिंग स्टडी शुरू होने वाली है। अभी यह साफ नहीं है कि भारत इस वैक्सीन को भारत के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए खरीदेगी या नहीं।

7. अरबिंदो फार्मा वैक्सीन
​​​​​​​कंपनीः अरबिंदो फार्मा ने अमेरिकी सहायक कंपनी ऑरो वैक्सीन के साथ मिलकर इस वैक्सीन पर काम शुरू किया है। इसे प्रोफेक्टस बायोसाइंसेस ने विकसित किया है।
इफेक्टिवनेसः यह वैक्सीन इस समय प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स में है। इस वजह से इफेक्टिवनेस नहीं पता।
क्षमताः पता नहीं।
​​​​​​​स्टेटसः क्लीनिकल ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं। लैबोरेटरी में जांच हो रही है।
कब मिलेगीः सब कुछ ठीक रहा तो इसके ट्रायल्स छह से सात महीने चल सकते हैं। यानी इस साल के अंत तक।

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