भास्कर एक्सप्लेनर:क्या पुतिन गैस की सप्लाई रोक यूरोप को झुका पाएंगे? जानिए, कैसे जर्मनी जैसे यूरोपीय देश इससे हो सकते हैं तबाह

13 दिन पहलेलेखक: नीरज सिंह

रूस ने पोलैंड और बुल्गारिया की गैस सप्लाई रोकने का ऐलान किया है। रूस ने अपनी मुद्रा रूबल में पेमेंट न करने पर यह कार्रवाई की है। साथ ही उसने बाकी यूरोपीय देशों को भी रूबल में पेमेंट नहीं करने पर गैस सप्लाई बंद करने की धमकी दी है।

कई देशों ने रूस की मांगें मान ली हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि धीरे-धीरे ही सही यूरोप के कुछ देश व्लादिमिर पुतिन के सामने झुकने पर मजबूर हो रहे हैं। माना जा रहा है कि पुतिन गैस और तेल के दम पर यूरोपीय देशों पर और दबाव बनाएंगे।

इस बीच यूरोपियन यूनियन (EU) का कहना है कि रूस ने ब्लैकमेल करने के लिए ऐसा किया है। EU इस साल के अंत तक रूस से तेल का आयात करना बंद कर देगा।

ऐसे में आइए जानते हैं कि रूस पर बैन के बावजूद कैसे यूरोपीय देश गैस और तेल खरीद रहे हैं? रूस ने गैस के बदले पेमेंट रूबल में करने को क्यों कहा है? रूस यूरोप को कितनी मात्रा में गैस सप्लाई करता है? यूरोपीय देशों के सामने विकल्प क्या हैं?

इन सवालों के जवाब जानने से पहले चलिए एक पोल में हिस्सा लेते हैं...

रूबल में पेमेंट नहीं करने पर पोलैंड और बुल्गारिया की गैस सप्लाई रोकी
यूक्रेन पर हमले के बावजूद रूस ने यूरोपीय देशों को गैस आपूर्ति जारी रखी है। पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि गैर-मित्र देशों को गैस खरीदने के लिए रूसी मुद्रा रूबल में ही पेमेंट करना होगा।

रूस की सरकारी ऊर्जा कंपनी गैजप्रॉम ने कहा कि रूबल में पेमेंट नहीं करने पर उसने पोलैंड और बुल्गारिया को गैस सप्लाई बंद कर दी है। EU कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेताया कि यूरोप में ऊर्जा मुहैया कराने वाली कंपनियां रूस की मांगों के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे संभवतः EU की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा।

रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव का कहना है कि रूबल में पेमेंट की मांग पश्चिमी देशों के रूसी मुद्रा संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई के कारण पैदा हुई है।

रूस ने गैस के बदले पेमेंट रूबल में करने को कहा है
अमेरिका ने यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस के तेल, गैस और कोयला आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही EU ने भी रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।

EU के प्रतिबंध लगाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस ने 1 अप्रैल से आपूर्ति के लिए सभी देशों को रूबल में भुगतान करने को कहा है। हालांकि, यूरोपीय संघ के कई देशों ने ऐसा करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि इससे रूस पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा।

EU के प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप के कई देश गैस सप्लाई के लिए रूस को रूबल में पेमेंट करना शुरू भी कर चुके। इन देशों में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। यूरोप की 10 कंपनियों ने गैजप्रॉम बैंक में अकाउंट खोल लिया है। रूस की भुगतान संबंधी मांगों को पूरा करने के लिए ये खाता खुलवाना जरूरी है, यानी ये भी रूबल में पेमेंट करने को तैयार हैं।

ब्रसेल्स में ब्रगूल थिंक टैंक के एनर्जी एक्सपर्ट सिमोन टैगलीपिएट्रा कहते हैं पुतिन EU के बंटे होने का लाभ उठा रहे हैं। वह सीधे-सीधे फूट डालो और शासन करो की स्ट्रैटजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए यूरोप को एक साझा प्रतिक्रिया देने की जरूरत है।

41% गैस यूरोप को रूस से ही मिलती है
रूस दुनिया भर में तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब का नंबर है। 2019 में EU के कुल नेचुरल गैस इंपोर्ट यानी आयात में से 41% रूस से ही आता था।

अगर यूरोप को रूस की ओर से होने वाली गैस सप्लाई बंद हो जाएगी तो इटली और जर्मनी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि ये दोनों देश सबसे ज्यादा गैस आयात करते हैं।

ब्रिटेन जरूरत का सिर्फ 5% गैस ही रूस से आयात करता है और अमेरिका रूस से बिल्कुल भी गैस आयात नहीं करता है। पोलैंड का गैस भंडार 76% भरा है, लेकिन बुल्गारिया के पास सिर्फ 17% गैस ही बची है। सिमोन टैगलीपिएट्रा कहते हैं कि ये कुछ दिनों का मसला नहीं है। समस्या अगली सर्दियों में होगी, इसलिए रिजर्व को दोबारा भरने की जरूरत है।

गैस और तेल सप्लाई रोकने पर यूरोप में मंदी आने का खतरा
रूसी नेचुरल गैस के बिना यूरोप की इकोनॉमी काफी प्रभावित हो सकती है। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन से देश इसका कितना यूज करते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स की राय इस पर अलग-अलग है।

मूडीज के विश्लेषकों ने हाल में हुई रिसर्च के आधार पर कहा कि रूस से गैस और तेल की सप्लाई रोकने से यूरोप में मंदी के हालात पैदा हो जाएंगे। यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी है और यह रूसी एनर्जी पर बहुत अधिक निर्भर है। जर्मनी के केंद्रीय बैंक ने कहा है कि टोटल सप्लाई रोकने से महंगाई चरम पर पहुंच सकती है।

ब्रूगल थिंक-टैंक ने अनुमान लगाया कि आने वाले दिनों में यूरोप सामान्य मांग से 10% से 15% कम होगा, जिसका मतलब है कि गैस के उपयोग को कम करने के लिए असाधारण उपाय करने होंगे।

रूस को भी नए मार्केट खोजने पड़ेंगे
रूस हर दिन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात करता है। प्रतिबंधों के ऐलान से पहले तक इसका आधा हिस्सा यूरोप को जाता था। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के अनुसार, अप्रैल महीने में रूस का तेल उत्पादन घटकर 7 लाख बैरल प्रतिदिन ही रह गया। IEA का कहना है कि अप्रैल महीने के आखिर तक उत्पादन घटकर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है और मई तक ये करीब 30 लाख बैरल हो जाएगा।

इसके पीछे कारण ये है कि मार्च महीने से ही यूरोपीय खरीदार रूस का विकल्प खोज रहे हैं और अमेरिका ने भी रूसी ऑयल के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। रूस को अब अपने तेल के लिए एशिया या और कहीं नए मार्केट खोजने पड़ेंगे। अगर मार्केट नहीं मिला तो इसका उसकी इकोनॉमी पर असर पड़ेगा।

यूरोप के लिए ये देश रूस का विकल्प हो सकते हैं
बुल्गारिया का कहना है कि वो अजरबैजान से मिलने वाली गैस सप्लाई को बढ़ाने पर विचार कर रहा है और साथ में तुर्की-ग्रीस से भी सौदे कर रहा है। पोलैंड, नॉर्वे की गैस रिजर्व से जोड़ने के लिए नई पाइपलाइन बना रहा है, जो कि अक्टूबर 2022 तक बन जाएगी।

पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने कहा है कि हमारे पास अमेरिका और खाड़ी देशों सहित दूसरे सहयोगियों से गैस खरीदने का विकल्प है। यूरोप भी कतर, अल्जीरिया या नाइजीरिया जैसे मौजूदा निर्यातकों के पास भी जा सकता है, लेकिन कम समय में उत्पादन बढ़ाने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गैस सप्लाई के लिए दूसरे विकल्प देखना मुश्किल है, क्योंकि हमारे पास ये बड़ी पाइप लाइन्स हैं, जो रूस से सीधे यूरोप तक गैस ला रही हैं।

अमेरिका इस साल के आखिर तक यूरोप को अतिरिक्त 15 अरब क्यूबिक मीटर लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) देने को तैयार है। इसके बावजूद 2030 तक हर साल 50 अरब क्यूबिक मीटर अतिरिक्त गैस सप्लाई की जरूरत होगी।

यूरोप एनर्जी के अन्य स्रोतों के इस्तेमाल को भी बढ़ा सकता है, लेकिन ऐसा करने में समय लगेगा और ये उतना आसान भी नहीं है।

यूरोप के तेल नहीं खरीदने पर रूस को हर दिन 45 करोड़ डॉलर का नुकसान होगा
युद्ध का भारी विरोध करने के बावजूद रूसी तेल और गैस का यूरोपीय देशों में बहाव जारी है। EU हर दिन तेल के लिए 45 करोड़ डॉलर और गैस के लिए 40 करोड़ डॉलर रूस को देता है। जाहिर है कि एनर्जी से होने वाली कमाई रूस के बजट को मजबूती दे रही है। इससे उसका विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ रहा है जो रूबल को मदद देने के साथ ही उसके लिए बड़ा सहारा है, क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण देश के बाहर मौजूद विदेशी मुद्रा तो ज्यादातर जब्त हो गई है।

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