• Hindi News
  • Db original
  • Explainer
  • Russia Ukraine War VS Poland ; Russia Should Attack Poland, US Deploys Two Patriot Missile Defense System In Poland, Lviv Missile Attack, Putin

क्या रूस अब पोलैंड पर हमला करेगा:पैट्रियट मिसाइल की तैनाती से बढ़ी पुतिन की बेचैनी, यह 100 किमी दूर मार गिराएगी रूसी मिसाइल

5 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

यूक्रेन पर रूस के हमले के लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं। हालांकि, अब तक रूस यूक्रेन के सबसे बड़े शहर कीव पर कब्जा नहीं कर पाया है। इस जंग के दौरान NATO सदस्य देश पोलैंड पश्चिमी देशों और यूक्रेन के बीच एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।

पश्चिमी देश पोलैंड के रास्ते ही यूक्रेन को सैन्य मदद भेज रहे हैं। वहीं, अमेरिका ने यूक्रेन से सटे पोलैंड में अपने 2 पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तैनात किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस इसे रोकने के लिए पोलैंड पर भी हमला कर सकता है। रूस ने रविवार को पोलैंड सीमा से 16 किमी दूर लीव शहर में भी मिलिट्री एयरबेस पर क्रूज मिसाइलें दागीं हैं।

ऐसे में आइए जानते हैं कि पोलैंड में अमेरिका अपनी मिलिट्री को क्यों बढ़ा रहा है? पोलैंड में तैनात अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्या है? पोलैंड पर रूस के हमले का कितना खतरा है?

पोलैंड में तैनात की गई अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्या है?

  • अमेरिका ने पोलैंड में 2 पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती की है। पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी- 3 यानी PAC-3 मिसाइल दुनिया की सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम में से एक है।
  • यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों को पल भर में मार गिराने में सक्षम है। सभी मौसम में दागी जाने वाली इस मिसाइल का निर्माण लॉकहीड मॉर्टिन ने किया है।
  • पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम 100 किलोमीटर दूर दुश्मन की मिसाइल को ट्रैक कर इसे नष्ट कर सकता है।
  • अमेरिका के रक्षा मंत्रालय की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, पैट्रियट को पहली बार 1982 में तैनात किया गया था। 2003 में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम में यह अमेरिकी सेना का हिस्सा भी थी।
  • 1991 में खाड़ी के दूसरे युद्ध के दौरान इस डिफेंस सिस्टम ने सोवियत एरा के कई स्कड रॉकेटों को हवा में मार गिराया था। ये रॉकेट सद्दाम हुसैन ने सऊदी अरब और इजराइल के लिए छोड़े थे।
  • UAE, कुवैत और सऊदी अरब ने भी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम का यूज करते हैं। इसके साथ ही जर्मनी, ग्रीस, इजराइल, जापान में भी यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद है।
1991 में खाड़ी के दूसरे युद्ध के दौरान पैट्रियट डिफेंस सिस्टम ने सोवियत एरा के कई स्कड रॉकेटों को हवा में मार गिराया था।
1991 में खाड़ी के दूसरे युद्ध के दौरान पैट्रियट डिफेंस सिस्टम ने सोवियत एरा के कई स्कड रॉकेटों को हवा में मार गिराया था।

पोलैंड पर रूस के हमले का खतरा क्यों मंडरा रहा है?

  • पोलैंड पश्चिमी देशों और यूक्रेन के बीच काफी अहम कड़ी है। पोलैंड की सीमा यूक्रेन से लगी हुई है। ऐसे में पश्चिमी देशों को अगर यूक्रेन को मिलिट्री मदद पहुंचानी है तो वह पोलैंड के रास्ते ही हो सकती है।
  • पश्चिमी हथियारों के चलते ही रूस को यूक्रेन में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। जंग शुरू हुए लगभग 3 हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन रूस अब तक कीव पर कब्जा नहीं कर पाया है।
  • यूक्रेन के साथ पोलैंड की काफी करीबी है। NATO ने यूक्रेन से लगती पोलैंड की सीमा के पास भारी संख्या में खतरनाक हथियारों को तैनात किया है। इसमें अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल भी है।
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि NATO की प्रतिक्रिया से बौखलाया रूस अब पोलैंड को भी निशाना बना सकता है।
  • ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो पहले वर्ल्ड वॉर तक पोलैंड सोवियत रूस का हिस्सा रहा है।
  • वहीं दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान के पोलैंड नाजी जर्मनी और रूस की सेनाओं के बीच फंस गया था। इस दौरान दोनों देशों ने आपस में क्षेत्र को बांट लिया था।
  • 1991 में सोवियत सैनिक पोलैंड छोड़कर जाने लगे। इसके बाद पोलैंड में पहली बार आम चुनाव हुए।
  • यूक्रेन पर हमले के बाद एक बार फिर पोलैंड पर रूस के हमले का डर सताने लगा है। पोलैंड के नेताओं ने आशंका जताई है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उनके क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।

अमेरिका क्यों पोलैंड में अपनी मिलिट्री स्ट्रेंथ बढ़ा रहा है?

  • बेलारूस में रूस ने पिछले साल से ही काफी ज्यादा संख्या में सैन्य तैनाती कर रखी है। पोलैंड और बेलारूस की सीमा मिली हुई है। साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्ते भी तनावपूर्ण रहे हैं। इस वजह से भी पोलैंड पर रूस के हमले का खतरा बना हुआ है।
  • 2020 में अलेक्जेंडर लुकाशेंको छठीं बार बेलारूस के राष्ट्रपति बने। हालांकि, उन पर चुनावों धांधली कर सत्ता में वापस आने के आरोप लगाए गए। पोलैंड ने लुकाशेंको के खिलाफ कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए।
  • 2021 में पोलैंड ने लुकाशेंको पर देश में माइग्रैंट क्राइसिस पैदा करने का आरोप भी लगाया। पोलैंड ने कहा था कि लुकाशेंको इसके जरिए अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का सौदा करना चाहते थे।
  • पिछले महीने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले लिथुआनियाई राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा ने भी रूस को लेकर चेताया था। उन्होंने कहा था कि बेलारूस में मौजूद रूसी सैनिक पोलैंड और अन्य बाल्टिक देशों के लिए खतरा हैं।
  • पालैंड के विदेश मंत्री जबिग्न्यू राउ ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से भी कहा कि खतरे की स्थिति को देखते हुए इस क्षेत्र में NATO के और सैनिकों की तैनाती की जानी चाहिए।
  • इन खतरों को देखते हुए अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने इस हफ्ते वारसा का दौरा किया था। साथ ही उन्होंने पोलैंड को 2 पैट्रियट मिसाइल देने की घोषणा की। इसके साथ ही 4700 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की भी बात कही।
  • यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा ने अमेरिका की इस घोषणा का स्वागत भी किया है। उन्होंने कहा था कि यदि दुनिया इस पर प्रतिक्रिया नहीं देगी। नाटो सख्त रुख नहीं दिखाएगा तो हमें रूस की ओर से और अधिक हमले देखने को मिलेंगे, जिसका शिकार पोलैंड भी हो सकता है।

क्या पोलैंड यूक्रेन की मदद कर रहा है?

  • यूक्रेन को मानवीय और मिलिट्री मदद देने में पोलैंड सबसे आगे रहा है। इसकी पुष्टि अमेरिकी पेंटागन के अफसरों ने भी की है। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के तुरंत बाद जर्मनी में मौजूद सैन्य भंडार को पोलैंड भेज दिया गया। जहां से वे यूक्रेन पहुंच गए।
  • हाल में पोलैंड ने यूक्रेन को अपने मिग-29 जेट विमानों को देने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अमेरिका ने पोलैंड के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। अमेरिका ने कहा था कि यह प्रस्ताव तनाव को और बढ़ा सकता है जो कि नाटो के लिए सही नहीं है।
  • पोलैंड ने अपने दम पर युद्ध प्रभावित यूक्रेन को सैन्य सहायता भेजी है। हालांकि अधिकांश सरकारों की तरह, पोलैंड ने भी यूक्रेन को भेजी सैन्य मदद का खुलासा नहीं किया है।
  • हालांकि पोलैंड ने यूक्रेन पर रूसी हमले के एक दिन बाद 25 फरवरी को कहा था कि हमने जो गोला-बारूद यूक्रेन को भेजा था वह उसे मिल गया है। हम रूस के आक्रमण का दृढ़ता से विरोध करते हैं। साथ ही यूक्रेन के लोगों के समर्थन में एकजुटता के साथ खड़े हैं।
  • NATO सदस्य देश पोलैंड यूक्रेन से आए हजारों रिफ्यूजियों को भी देश में आने दे रहा है। UNHCR के मुताबिक, 11 मार्च तक 25 लाख से ज्यादा लोग यूक्रेन छोड़कर जा चुके हैं। इनमें 15 लाख लोग पोलैंड में गए हैं।
  • यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को पोलिश नेशनल असेंबली को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि हम बाल्टिक देशों के लिए और पोलैंड के लिए लड़ रहे हैं ताकि उन्हें रूस सामना न करना पड़े।

इतना आसान भी नहीं है पोलैंड पर हमला करना?

  • पोलैंड NATO यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन का सदस्य है। NATO यूरोप और उत्तरी अमेरिकी देशों का एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है।
  • NATO की स्थापना के समय अमेरिका समेत 12 देश इसके सदस्य थे। अब 30 सदस्य देश हैं, जिनमें 28 यूरोपीय और दो उत्तरी अमेरिकी देश हैं।
  • इस संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी NATO देशों और उसकी आबादी की रक्षा करना है। NATO के आर्टिकल 5 के मुताबिक, इसके किसी भी सदस्य देश पर हमले को NATO के सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
  • ऐसे में रूस यदि पोलैंड पर हमला करता है तो इसे NATO पर हमला माना जाएगा। इसके चलते अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस समेत सभी NATO सदस्य देश इस युद्ध में शामिल होंगे।
  • इसलिए माना जा रहा है कि रूस सीधे तौर पर इन देशों से नहीं भिड़ना चाहेगा।