90,000 वर्ग KM यूक्रेनी इलाका रूस में मिलाने का मास्टरप्लान:पुतिन ने 3 लाख सैनिक लामबंद किए, तबाही मचाने वाले हथियारों की धमकी

2 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

‘हम निश्चित रूप से रूस और अपने लोगों की रक्षा के लिए अपने सभी हथियारों का इस्तेमाल करेंगे। हमारे पास तबाही मचाने वाले हथियार हैं। मैं सेना की लामबंदी के प्रस्ताव का समर्थन करता हूं।'

ये शब्द हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के।

सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद रूस की ये सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी है। इसके तहत रूस करीब 3 लाख सैनिकों को इकट्ठा कर रहा है। मकसद है- यूक्रेन से जंग जीतना और पश्चिमी देशों को जवाब देना।

पुतिन के 3 लाख सैनिकों को इकट्ठा करने का प्लान क्या है

पुतिन ने 21 सितंबर को राष्ट्र के नाम जारी संदेश में 3 लाख सैनिकों की लामबंदी का आदेश जारी किया। रूस के पास करीब 20-25 लाख रिजर्व सैनिक हैं। हालांकि, रूस का दावा है कि उसके पास 2.5 करोड़ लोगों की रिजर्व फोर्स है।

पुतिन ने अमेरिकी दबदबे वाले NATO को चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस रूस पश्चिमी देशों की 'परमाणु ब्लैकमेलिंग' के खिलाफ अपने जखीरे में मौजूद किसी भी हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।
पुतिन ने अमेरिकी दबदबे वाले NATO को चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस रूस पश्चिमी देशों की 'परमाणु ब्लैकमेलिंग' के खिलाफ अपने जखीरे में मौजूद किसी भी हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।

इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों को इकट्ठा करने को पुतिन ने आंशिक लामबंदी कहा है। पुतिन ने कहा कि इसमें केवल वही रूसी नागरिक शामिल होंगे, जो अभी रूस की रिजर्व सेना में हैं या पहले भी सेना में काम कर चुके हैं और जिनके पास सेना की ट्रेनिंग का अनुभव है।

पुतिन का ये आदेश ऐसे समय में आया है, जब हाल के दिनों में जंग से रूसी सेना को भारी नुकसान हुआ है।

3 लाख सैनिकों को इकट्ठा कर क्या हासिल करना चाहते हैं पुतिन?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूस इस कदम के पीछे 5 प्रमुख वजहें हैं:

1. जनमत संग्रह के नाम पर 4 यूक्रेनी इलाकों को रूस में मिलाने का प्लान

रूस ने अब तक यूक्रेन के जिन चार प्रमुख इलाकों पर कब्जा जमाया है, वहां वो जनमत संग्रह करा रहा है। ये इलाके हैं-पूर्वी यूक्रेन यानी डोनबास इलाके में मौजूद डोनेट्स्क और लुहांस्क और दक्षिण में खेरसॉन और जपोरिजिया। इन चारों इलाकों में रूस 23 सितंबर से 27 सितंबर के बीच जनमत संग्रह करा रहा है।

इनमें डोनेट्स्क और लुहांस्क के कुछ इलाकों पर 2014 से ही रूस समर्थित अलगाववादियों का कब्जा है और इस साल की जंग में रूस ने इस कब्जे को और आगे बढ़ाया है। वहीं खेरसॉन पर रूसी सेनाओं ने जंग की शुरुआत में और जपोरिजिया शहर पर पिछले महीने कब्जा किया है।

इंस्टीट्यूट ऑफ स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, रूस का यूक्रेन के करीब 15% इलाकों यानी करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाके पर कब्जा है। ये इलाका पुर्तगाल के क्षेत्रफल (92 हजार वर्ग किमी) के बराबर है। भारत के संदर्भ में ये इलाका पश्चिम बंगाल (88 हजार वर्ग किमी) जितना बैठता है।

माना जा रहा है कि जनमत संग्रह के बाद रूस इन इलाकों को अपने में मिला लेगा।

मैप में देखिए किन इलाकों में हो रहा जनमत संग्रह

8 साल पुरानी क्रीमिया वाली स्ट्रैटजी अपना रहा रूस

2014 में रूस समर्थित हथियारबंद फौज ने क्रीमिया पर अचानक धावा बोला और कब्जा जमा लिया। इसके बाद वहां जनमत संग्रह करवाया और कहा कि क्रीमिया की 97% आबादी रूस में शामिल होना चाहती है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने क्रीमिया में हुए जनमत संग्रह को अमान्य घोषित कर दिया था। UN में इसे लेकर हुए मतदान में 193 में से 100 देशों ने जनमत संग्रह को अमान्य घोषित करने के पक्ष में 11 ने इसके खिलाफ वोट दिया था,जबकि 58 ने वोटिंग नहीं की थी।

अब 8 साल बाद वो फिर से जनमत संग्रह करा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है यूक्रेन की कुल आबादी में से करीब 20% रूसी मूल के लोगों का होना। क्रीमिया में तो 65% रूसी मूल के लोग हैं।

जिन चार इलाकों में रूस जनमत संग्रह कराने जा रहा है, उनमें से लुहांस्क और डोनेट्स्क में भी करीब आधी आबादी रूसी मूल के लोगों की है। वहीं दो अन्य इलाकों खेरसॉन और जपोरिजिया में भी रूसियों की अच्छी-खासी संख्या है।

2. जंग में रूसी सैनिकों को हुए भारी नुकसान की भरपाई

पुतिन के 3 लाख सैनिकों को इकट्ठा करने की एक वजह यूक्रेन युद्ध में रूस को हुआ भारी नुकसान भी है। रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के मुताबिक रिजर्व सैनिकों का प्रमुख काम यूक्रेन में करीब एक हजार किलोमीटर लंबा मोर्चा संभालना होगा।

शोइगु के हालिया बयान के अनुसार यूक्रेन युद्ध में रूस के 5937 जवानों की मौत हुई है। वहीं ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्ध में 25 हजार रूसी सैनिक मारे गए हैं।

यूक्रेन का दावा है कि इस जंग में अब तक 50 हजार रूसी सैनिकों की मौत हुई है। इनमें रूस के 1000 से ज्यादा एलीट ऑफिसर, कई पायलट, स्पेशल फोर्सेज के जवान और खुफिया एक्सपर्ट्स शामिल हैं।

ये नुकसान 1979-89 के दौरान हुए अफगानिस्तान युद्ध से भी ज्यादा है, जिसमें सोवियत रूस के 15 हजार सैनिक मारे गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस को यूक्रेन जंग में इतना नुकसान हुआ है कि वह युद्ध लड़ने के लिए अपनी सेना में कैदियों को भर्ती कर रहा है। (रूसी सेना की फाइल फोटो)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस को यूक्रेन जंग में इतना नुकसान हुआ है कि वह युद्ध लड़ने के लिए अपनी सेना में कैदियों को भर्ती कर रहा है। (रूसी सेना की फाइल फोटो)

3. दोतरफा घिरे पुतिन की खतरनाक दिखने की कोशिश

7 महीने की जंग के बाद भी रूस की कामयाबी यूक्रेन के पूर्व में और दक्षिण के कुछ इलाकों तक ही सिमटी रही है। हाल के दिनों में यूक्रेन ने जोरदार पलटवार करते हुए उत्तर पूर्व में खार्किव इलाके में रूस से 6 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाका छीन लिया है।

इसके बाद से रूस समर्थक भी पुतिन की नीति पर सवाल उठाने लगे हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुतिन की योजना जीते हुए इलाकों को यूक्रेन के फिर से पलटवार से पहले ही रूस में मिला लेने की है। इससे पुतिन युद्ध में कमजोर पड़ने की आलोचना को भी टालने में काफी हद तक कामयाब हो जाएंगे।

रूस में फ्रांस के राजदूत रहे सिल्वी बरमैन का कहना है- 'ये स्थिति बहुत खतरनाक है क्योंकि पुतिन जाल में फंसे हैं।'

मैप में देखिए सितंबर महीने में ही यूक्रेन ने रूस से किन इलाकों को छीना

4. रूस के लिए न्यूक्लियर हमले का रास्ता खुलेगा

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस यूक्रेन के जीते हुए इलाकों का खुद में विलय करके एक साथ दो निशाने साधना चाहता है।

1. पुतिन को यूक्रेन के इन इलाकों में पूरी तरह से रूसी सेना तैनात करने की छूट मिल जाएगी। रूस इन इलाकों को अपना बताते हुए यूक्रेन की कार्रवाई को अपनी सीमा का अतिक्रमण मानेगा।

2. यूक्रेन को अपने ही इलाकों को आजाद कराने को रूस अपने खिलाफ हमले के तौर दिखा पाएगा। इससे उसके पास रूस की अखंडता की रक्षा के नाम पर किसी भी हथियार यहां तक कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का भी विकल्प खुला रहेगा।

पुतिन ने कहा है- 'अगर हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा होता है, तो हम निश्चित रूप से रूस और अपने लोगों की रक्षा के लिए अपने सभी हथियारों का इस्तेमाल करेंगे।'

2008 से 2012 तक रूस के राष्ट्रपति रहे और अब रशियन सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है- 'रूसी इलाके में अतिक्रमण अपराध है, जो हमें सेल्फ डिफेंस में सारी ताकत झोंकने की इजाजत देता है।'
2008 से 2012 तक रूस के राष्ट्रपति रहे और अब रशियन सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है- 'रूसी इलाके में अतिक्रमण अपराध है, जो हमें सेल्फ डिफेंस में सारी ताकत झोंकने की इजाजत देता है।'

5. अमेरिका और NATO देशों को कड़ा संदेश

यूक्रेन के इतने लंबे समय तक जंग टिके रहने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और पश्चिमी देशों का हथियार और आर्थिक समर्थन है। रूस यूक्रेन को मिलने वाले पश्चिमी देशों के समर्थन का शुरू से विरोध करता रहा है।

अब यूक्रेन के 4 इलाकों को खुद में मिलाकर रूस पश्चिमी देशों को ये संदेश देना चाहता है कि उसे रोकना मुश्किल है। 2014 में रूस ने इसी तरह क्रीमिया पर कब्जा जमाया था, जिसका पश्चिमी देशों ने विरोध किया था। इसके बाद भी क्रीमिया पर रूस का ही कब्जा है।

रूस में फ्रांस के राजदूत रहे सिल्वी बरमैन का कहना है-'न्यूक्लियर हमले की धमकी एक झांसा है, लेकिन ये पुतिन को पश्चिमी देशों को यूक्रेन को हथियार देने को लेकर डराने का मौका उपलब्ध कराती है, इससे उनमें से कुछ देश इसे (हथियार देने को) बहुत खतरनाक मान सकते हैं।’

पुतिन ने कहा- 'हमारे पास सामूहिक विनाश के कई हथियार हैं और NATO देशों की तुलना में कई आधुनिक हथियार हैं। ये झांसा नहीं है।'
पुतिन ने कहा- 'हमारे पास सामूहिक विनाश के कई हथियार हैं और NATO देशों की तुलना में कई आधुनिक हथियार हैं। ये झांसा नहीं है।'

रूस के 3 लाख सैनिकों को जुटाने का नतीजा क्या हो सकता है

यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने रूस की जनमत संग्रह कराने की योजना को ढकोसला करार दिया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा-'रूस यूक्रेनी जमीन के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा जमाने वाला हमलावर है।’

कुछ एक्सपर्ट्स को डर है कि जनमत संग्रह के बाद रूस और NATO आमने-सामने आ सकते हैं। इसकी बड़ी वजह है कि इन चार इलाकों के रूस में विलय के बाद यूक्रेन उन्हें आजाद कराने की कोशिश करेगा। ऐसे में अगर NATO उसका साथ देता है, तो रूस इसे अपने इलाके पर हमला मानेगा।

इससे रूस और NATO की सेनाओं या सीधे रूस और अमेरिका के बीच बीच युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

रूस-अमेरिका युद्ध के किसी भी खतरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पहले ही चेता चुके हैं कि इससे तीसरा वर्ल्ड वॉर छिड़ सकता है।
रूस-अमेरिका युद्ध के किसी भी खतरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पहले ही चेता चुके हैं कि इससे तीसरा वर्ल्ड वॉर छिड़ सकता है।

पुतिन के आदेश के बाद देश छोड़कर भाग रहे हजारों की संख्या में रूसी

पुतिन के 3 लाख सैनिकों को इकट्ठा करने के आदेश का रूस में भारी विरोध हो रहा है। वहां के युवाओं को डर है कि उन्हें सेना में जबरन भर्ती करके यूक्रेन भेजा जा सकता है।

पुतिन के सेना के मोबिलाइजेशन के आदेश के विरोध में सैकड़ों की संख्या में रूसी लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
पुतिन के सेना के मोबिलाइजेशन के आदेश के विरोध में सैकड़ों की संख्या में रूसी लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मास्को से इस्तांबुल, येरेवन, ताशकंद और बाकू के लिए अगले हफ्ते की डायरेक्ट फ्लाइट्स की सभी टिकटें बिक चुकी हैं। इनमें से तीन शहर येरेवन, ताशकंद और बाकू क्रमश: अर्मेनिया, उज्बेकिस्तान और अजरबैजान की राजधानियां हैं, जबकि इस्तांबुल तुर्की का सबसे बड़ा शहर है। ये सभी देश रूसियों को वीजा-फ्री एंट्री देते हैं।

वहीं मॉस्को से दुबई की फ्लाइट की कीमत 3.70 लाख रूबल यानी 5 लाख रुपए से ज्यादा हो गई है, जो आम तौर पर 30 हजार से 2 लाख रुपए तक होती है।

रूस-जॉर्जिया और रूस-मंगोलिया बॉर्डर पर भी बड़ी संख्या में रूसियों के पहुंचने से सीमा पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। फिनलैंड यूरोपीय यूनियन का एकमात्र देश है, जो रूसियों को वीजा-फ्री एंट्री देता है

फिलनैंड सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, रातों-रात सीमा पार कर फिनलैंड पहुंचने वाले रूसी नागरिकों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। तस्वीर में फिनलैंड की सीमा पर रूसी लोगों की गाड़ियों की लाइन लगी दिख रही है।।
फिलनैंड सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, रातों-रात सीमा पार कर फिनलैंड पहुंचने वाले रूसी नागरिकों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। तस्वीर में फिनलैंड की सीमा पर रूसी लोगों की गाड़ियों की लाइन लगी दिख रही है।।

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