रूस की सड़कों से गायब हो रहे हैं पुरुष:कुछ जंग में गए तो कुछ डर से भागे; अकेली पड़ीं लाखों महिलाएं

एक महीने पहलेलेखक: अनुराग आनंद

साल 1942 की बात है। रूस के लेनिनग्राद शहर पर कब्जे के बाद हिटलर के 3 लाख नाजी सैनिक स्टालिनग्राद शहर की तरफ बढ़ रहे थे। शहर बचाना मुश्किल था। तभी सोवियत सरकार ने लामबंदी का आदेश दिया। लाखों रूसियों को फौज में भर्ती करके जंग में भेज दिया गया। शहर की सड़कें मर्दों से सूनी पड़ गईं।

80 साल बाद रूस में फिर वैसे ही हालात बन रहे हैं। शहर की सड़कों पर पुरुष कम दिखाई देते हैं। जो दिख भी रहे हैं, उन्हें पुलिस पकड़ रही है। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि आखिर कहां गायब हो रहे हैं रूस के पुरुष?

सबसे पहले इस वीडियो को देखिए….

सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि मॉस्को के एक मेट्रो स्टेशन के बाहर तैनात पुलिस मर्दों को पकड़-पकड़ कर सेना में भर्ती कर रही है।

अब सवाल उठता है सड़क से पकड़कर सेना में भर्ती करने की नौबत क्यों आई? इसके पीछे 21 सितंबर 2022 को पुतिन की आंशिक लामबंदी की घोषणा है…

7 लाख से ज्यादा रूसी पुरुषों ने छोड़ा देश
लामबंदी की घोषणा के बाद से रूस के पुरुष देश छोड़कर जाने लगे हैं। तीन हफ्तों में इनकी संख्या 7 लाख से ज्यादा हो गई। 2 लाख कजाकिस्तान, 1.19 लाख यूरोपीय देश और 49 हजार जॉर्जिया चले गए। इसके अलावा अर्मेनिया, अजरबैजान, इजराइल और अर्जेंटीना जैसे देशों में भी लाखों पुरुषों ने पलायन किया है। हालांकि पुतिन सरकार ने इस डेटा को गलत बताया है।

बीबीसी के मुताबिक नोवाया गैजेट अखबार ने दावा किया है कि आंशिक लामबंदी के तहत रूस 3 लाख नहीं बल्कि 10 लाख से ज्यादा पुरुषों की सेना में भर्ती कर रहा है। अखबार का कहना है कि रूस सरकार के आदेश का एक पैराग्राफ जारी नहीं किया गया है, जिसमें ये बात कही गई है।

तीन कहानियों से जानिए, पुरुषों के रूस छोड़ने की वजहें
NYT ने एक रिपोर्ट में तीन महिलाओं की कहानी छापी है, जिससे वजहें साफ हो जाती हैं…

1. मॉस्को में चॉप-चॉप सैलून की मैनेजर ओला बताती हैं कि सैलून में आमतौर पर काफी भीड़ होती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से खाली रहता है। उसके पार्टनर तक ने जंग में भेजे जाने की डर से देश छोड़ दिया है।

इस तस्वीर में लैपटॉप लेकर बैठी महिला का नाम ओला है जो इस सैलून की मैनेजर है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि 5 में से 4 सीटें खाली हैं। Source: Nyt
इस तस्वीर में लैपटॉप लेकर बैठी महिला का नाम ओला है जो इस सैलून की मैनेजर है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि 5 में से 4 सीटें खाली हैं। Source: Nyt

2. 33 वर्षीय फोटोग्राफर स्टानिस्लावा ने बताया कि उसने जन्मदिन की पार्टी दी थी। इस दौरान कुछ सामान ले जाने के लिए जब वह पुरुष साथियों की तलाश करने लगी तो उसे महसूस हुआ कि उसके आसपास अब कम पुरुष रह गए हैं।

3. लिजा नाम की एक महिला ने बताया कि उसके पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में वकील थे। उन्हें जंग लड़ने की कोई तरकीब नहीं आती थी, लेकिन एक रोज पुलिस ने उन्हें सेना में भर्ती होने का नोटिस थमा दिया। इसके बाद उसके पति ने देश छोड़ने का फैसला किया। वह इकलौती ऐसी महिला नहीं हैं, जिसके पति इन दिनों अपने परिवार को छोड़कर दूसरे देश जा रहे हैं। ऐसे परिवार की संख्या लाखों में है।

अब अगले ग्राफिक्स में जानिए कितने रूसी सैनिकों की जंग में अब तक मौत हुई है...

पलायन की वजह से टिकटें फुल, ट्रैफिक संभालना मुश्किल
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक मॉस्को से इस्तांबुल, येरेवन, ताशकंद और बाकू के लिए अगले हफ्ते की डायरेक्ट फ्लाइट्स की सभी टिकटें बिक चुकी हैं। इनमें से 3 शहर येरेवन, ताशकंद और बाकू क्रमश: अर्मेनिया, उज्बेकिस्तान और अजरबैजान की राजधानियां हैं, जबकि इस्तांबुल तुर्की का सबसे बड़ा शहर है। ये सभी देश रूसियों को वीजा-फ्री एंट्री देते हैं।

वहीं मॉस्को से दुबई की फ्लाइट की कीमत 3.70 लाख रूबल यानी 5 लाख रुपए से ज्यादा हो गई है, जो आम तौर पर 30 हजार से 2 लाख रुपए तक होती है।

रूस-जॉर्जिया और रूस-मंगोलिया बॉर्डर पर बड़ी संख्या में रूसियों के पहुंचने से सीमा पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। फिनलैंड यूरोपीय यूनियन का एकमात्र देश है, जो रूसियों को वीजा-फ्री एंट्री देता है।

फिनलैंड सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, रातों-रात सीमा पार कर फिनलैंड पहुंचने वाले रूसी नागरिकों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। तस्वीर में फिनलैंड की सीमा पर रूसी लोगों की गाड़ियों की लाइन लगी दिख रही है।।
फिनलैंड सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, रातों-रात सीमा पार कर फिनलैंड पहुंचने वाले रूसी नागरिकों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। तस्वीर में फिनलैंड की सीमा पर रूसी लोगों की गाड़ियों की लाइन लगी दिख रही है।।

रूस पहले से ही पुरुषों की कमी से जूझ रहा है
जंग के बाद जिस तरह से रूस में पुरुषों की संख्या में लगातार कमी हो रही है ये रूस के लिए और भी ज्यादा चिंता की वजह है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2018 में रूसी फेडरल स्टेट स्टैटिक्स सर्विस ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया था कि रूस की कुल जनसंख्या 14.69 करोड़ है। इसमें 6.81 करोड़ पुरुषों की जनसंख्या है जबकि 7.88 करोड़ महिलाओं की जनसंख्या है। ऐसे में साफ है कि पुरुषों की संख्या में कमी का सीधा असर देश के सभी सेक्टर पर पड़ना तय है।

कारोबार पर पड़ रहा है पुरुषों की कमी का असर
राजधानी मॉस्को में पुरुषों की कमी को देखते हुए सोमवार को मॉस्को के मेयर ने इस बात का ऐलान किया कि अब राजधानी से पुरुषों को जंग में नहीं भेजा जाएगा, लेकिन तब तक काफी देर हो गई थी।

मॉस्को के कई बिजनेस या तो महिलाएं संभाल रही हैं या फिर पूरी तरह से ठप हो गए हैं। देश में मंदी के हालात हैं। होटल, रेस्टोरेंट, मॉल व अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में 30% की कमी आई है।

NYT और कॉमर्सेंट अखबार के मुताबिक रूस के सबसे बड़े कर्ज देने वाले बैंक ने सितंबर में 529 शाखाएं बंद कर दीं। शहर के मॉल और चौराहे खाली नजर आ रहे हैं।

अब तक हमने रूस की बात की अब जानिए यूक्रेन में कैसे हालात हैं?
रूस की तरह ही यूक्रेन में भी जंग लड़ने वाले पुरुषों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। डीडब्लू रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के शहरों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। सड़कों और बाजारों में पुरुष न के बराबर नजर आते हैं। देश में रहने वाले ज्यादातर पुरुष या तो सीमा पर हैं या फिर अपने व्यवसाय में लगे हैं। इसे दो बातों से समझा जा सकता है…

पहला: यूक्रेन सरकार ने महिलाओं और बच्चों को देश छोड़कर जाने की इजाजत तो दी है, लेकिन पुरुषों के देश छोड़ने पर पूरी तरह से पाबंदी है।

दूसरा: रूस की तरह ही यूक्रेन में भी 18 से 60 साल के उम्र के पुरुषों की सेना में भर्ती की जा रही है। यही नहीं अपनी इच्छा से यूक्रेन और बाहरी देशों के पुरुष भी वॉलंटियर सैनिक के तौर पर सेना में शामिल हो रहे हैं।

रूस की तरह ही यूक्रेन में भी पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की आबादी
वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स के मुताबिक 2021 में यूक्रेन की कुल आबादी 4.34 करोड़ थी। इसमें 2 करोड़ पुरुष जबकि 2.34 करोड़ महिलाओं की आबादी थी।

यही वजह है कि घर, बिजनेस के अलावा जंग के मैदान में भी यूक्रेन की महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सेना में इस वक्त कुल 50,000 महिलाएं हैं। इनमें 10,000 से ज्यादा महिलाएं लड़ाई के दौरान फ्रंटलाइन पर मोर्चा संभाल रही हैं जबकि बाकी सैन्य आपूर्ति, मेडिकल सहायता और खुफिया सूचनाओं के लिए काम करती हैं।

यूक्रेन के सैनिकों की मौत पर दोनों देशों का अलग-अलग दावा
जिस तरह रूस के सैनिकों की मौत को लेकर 4 संस्थाओं ने अलग-अलग दावा किया है। उसी तरह से यूक्रेन के सैनिकों की मौत को लेकर भी दोनों देशों का अलग-अलग दावा है...

  • 22 अगस्त 2022 को यूक्रेन के सेना प्रमुख वालेरी जालुज्नी ने कहा कि जंग में अब तक यूक्रेन के 9,000 जवानों की मौत हुई है।
  • वहीं, जंग शुरू होने के 2 महीने बाद अप्रैल 2022 में ही रूस ने यूक्रेन के 23,000 से ज्यादा सैनिकों के मौत की बात कही थी।

इस पूरी स्टोरी में हमने दोनों देशों में होने वाले सैनिकों की कमी और जबरन पुरुषों के सेना में भर्ती की बात की है। ऐसे में चलते-चलते एक ग्राफिक्स में दोनों देशों के सैनिकों की संख्या भी जान लेते हैं…

भास्कर एक्सप्लेनर के नॉलेज बढ़ाने वाले कुछ और ऐसे ही रोचक आर्टिकल हम नीचे पेश कर रहे हैं...

1.

23 अक्टूबर यानी रविवार को रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने दावा किया कि यूक्रेन ऑपरेशन फॉल्स फ्लैग की तैयारी कर रहा है और वो ‘डर्टी बम’ से हमला कर सकता है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ये डर्टी बम क्या है, जिससे रूस भी खौफ में है? आइए, भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं…​​​​​​

पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें-- यूक्रेन का ‘डर्टी बम’ क्या है: जिसके हमले की आशंका से डरा हुआ है रूस

2.

14 अक्टूबर यानी शुक्रवार को बंगाल की खाड़ी में INS अरिहंत पनडुब्बी तैनात थी। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के ट्रिगर दबाते ही इस पनडुब्बी से K-15 SLBM मिसाइल लॉन्च हुई, जिसने 750 किलोमीटर दूर टारगेट को तबाह कर दिया। रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब पानी के अंदर से भी परमाणु हमला करने में सक्षम है। इस तरह भारत दुनिया का छठा ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ देश बन गया है। अब पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- पानी के अंदर से परमाणु हमला कर सकता है भारत:रेंज में चीन-पाक के कई अहम शहर; सिर्फ 6 देशों के पास है ये टेक्नोलॉजी

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