भास्कर एक्सप्लेनर:क्या है सैनिकों को अंधा बनाने वाला पुतिन का लेजर हथियार, जानिए कैसे 5 सेकेंड में ड्रोन को कर देता है भस्म

एक महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

आपने स्टार वार्स जैसी साइंस फिक्शन फिल्मों में कई बार लेजर हथियारों से ड्रोन और मिसाइलों को जलाकर भस्म करते देखा होगा। अब यह सिर्फ कल्पना मात्र नहीं रह गया है, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में इसका पहली बार यूज करना शुरू कर दिया है। रूस ने यूक्रेन में कई ड्रोन और मिसाइलों को अपने लेजर हथियार जदीरा के जरिए भस्म करने का दावा किया है। कई एक्सपर्ट का कहना है कि इससे यूक्रेनी सैनिकों को अंधा किया जा सकता है।

यूक्रेन ने अब तक अमेरिका समेत पश्चिमी देशों से मिले ड्रोन के जरिए ही रूस की सेना को रोकने में सफलता हासिल की है। इसी के चलते रूस ने अपने नेक्स्ट जेनरेशन हथियारों की यूक्रेन में तैनाती शुरू कर दी है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि लेजर हथियार आखिर होते कैसे हैं? किस तरह के हथियारों को जलाकर भस्म करने में सक्षम होते हैं? दुनिया और किन देशों के पास लेजर हथियार हैं?

इन सवालों के जवाब जानने से पहले चलिए एक पोल में हिस्सा लेते हैं...

यूक्रेन में रूस कौन से लेजर हथियारों का यूज कर रहा है?
देखा जाए तो व्यापक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैंड का यूज करने वाले नए लेजर हथियार अब ट्रैडीशनल हथियारों की जगह ले रहे हैं। रूस ने भी यूक्रेन युद्ध में नए हथियारों के इस्तेमाल का दावा किया है। रूस ने कहा है कि लेजर हथियार यूक्रेन में ड्रोन जलाकर भस्म कर रहे हैं।

यह दावा ऐसे समय किया गया है जब अमेरिका समेत पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियारों के जरिए जबरदस्त मदद कर रहे हैं। देखा जाए तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पहली बार 2018 लेजर हथियार ‘पेरेसवेट’ का जिक्र किया था। यह नाम मध्ययुग के ऑर्थोडॉक्स योद्धा मोंक एलेक्जेंडर परेसवेट के नाम पर रखा गया है। परेसवेट की युद्ध के दौरान मौत हो गई थी।

रूस के डिप्टी PM और मिलिट्री डेवलपमेंट के इंचार्ज यूरी बोरिसोव ने मॉस्को में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पेरेसवेट की व्यापक तौर पर तैनाती शुरू हो चुकी है और यह हथियार पृथ्वी से 1500 किलोमीटर दूर मौजूद सैटेलाइटों को अंधा बना सकता है।

रूस ने यूक्रेन में अपना नया और अधिक ताकतवर लेजर हथियार ‘जदीरा’ तैनात किया है। बोरिसोव ने बताया कि मई की शुरुआत में जदीरा परीक्षण किया गया था। बोरिसोव ने बताया कि जहां पेरेसवेट सैटेलाइट को अंधा बना देता है, वहीं जदीरा ड्रोन और मिसाइलों को जलाकर खाक कर देने में माहिर है।

बोरिसोव से जब पूछा गया कि क्या इन लेजर हथियारों का यूक्रेन में यूज किया जा रहा है, इस पर उन्होंने कहा कि जदीरा के पहले प्रोटोटाइप का इस्तेमाल यूक्रेन में हो रहा है। लेजर हथियार इंफ्रारेड लाइट की बीम यानी किरण भेजकर अपने टारगेट को तब तक गर्म करता है जब तक कि वह जलकर खाक न हो जाए।

कितने खतरनाक हैं रूस के लेजर हथियार?
2017 में जदीरा के बारे में रूसी मीडिया ने कहा था कि न्यूक्लियर कार्पोरेशन रोसातोम ने इसे बनाने में मदद की है और यह भौतिकी के नए सिद्धांतों पर आधारित हथियार बनाने के कार्यक्रम के तहत बनाया गया है। जदीरा 5 किलोमीटर दूर मौजूद ड्रोन और मिसाइलों को 5 सेकेंड के भीतर जलाकर भस्म कर देने में माहिर है। वहीं, पेरेसवेट पृथ्वी से 1500 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइटों को अंधा बना सकता है।

पेरेसवेट इसलिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि सैटेलाइट के जरिए ही परमाणु हथियारों को ले जाने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल की निगरानी की जाती है। साथ ही यह फाइटर जेट के पायलट को अंधा कर सकता है।

ऑस्ट्रेलियन आर्मी के रिटायर्ड मेजर जनरल ने बताया कि जादिरा जैसे लेजर हथियार ड्रोन के साथ ही यूक्रेन के तोपखाने में तबाही मचा सकते हैं और यूक्रेनी सैनिकों को अंधा कर सकते हैं। हालांकि, इंटरनेशनल कन्वेंशन के तहत यह प्रतिबंधित है।

कुछ मिलिट्री एक्सपर्ट बताते हैं कि ड्रोन के खिलाफ लेजर हथियार काफी कारगर हो सकते हैं। यह कितना इफेक्टिव होगा यह मौसम पर निर्भर करता है। यानी अच्छे मौसम में यह पूरी तरह से काम करता है, जबकि कोहरा, बारिश और बर्फ होने पर यह लेजर बीम अपने टारगेट से भटक सकती है। कुछ एक्सपर्ट लेजर हथियार की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। कहा जा रहा है कि लेजर हथियार एक बार में सिर्फ एक जगह ही निशाना लगा सकते हैं और मिसाइल डिफेंस सिस्टम उनसे ज्यादा असरदार हैं, जो एक साथ कई हथियारों को निशाना बना सकते हैं।

क्या भारत, अमेरिका, चीन और इजराइल के पास भी लेजर हथियार है?
भारत :
2021 की शुरुआत में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी DRDO के लेजर वेपन डायरेक्शनली अनरिस्ट्रिक्टेड रे गन अरे, यानी DURGA-2 बनाने की बात सामने आई थी। इस लेजर वेपन का यूज थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों कर सकेंगी।

अमेरिका : अमेरिकी नौसेना ने सबसे पहली बार ‘लॉज’ नामक लेजर वेपन को 2014 में बनाया था। इसे USS पेंस पर तैनात किया गया था। जनरल अटॉमिक्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम और बोइंग मिलकर अमेरिका का सबसे पावरफुल लेजर हथियार बना रही हैं। यह लेजर हथियार 300 किलोवाट का होगा। इससे किसी ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट को पलक झपकते ही मार गिराया जा सकेगा।

इजराइल : इजराइल ने इस साल अप्रैल में पहली बार लेजर मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इसे ‘आयरन बीम’ नाम दिया गया है। आयरन बीम ने ड्रोन, मोर्टार, रॉकेट और एंटी टैंक मिसाइलों को अपने एक ही वार में तबाह कर दिया था। इजराइल के प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने बताया था कि इसमें सबसे अच्‍छी बात यह रही है कि इसके एक वार में खर्च केवल 267 रुपए ही आएगा।

चीन : चीन ने भी इस साल अपने जे-20 फाइटर जेट को लेजर हथियारों से लैस करने की घोषणा की है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति रूस के लेजर हथियारों का मजाक क्यों उड़ा रहे हैं?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने लेजर हथियारों के बारे में चल रही खबरों की तुलना दूसरे वर्ल्ड वॉर में नाजियों के वंडर वेपन से कर उनका मजाक बनाया है। जेलेंस्की ने कहा कि इससे और साफ हो गया है कि इस लड़ाई में उनके लिए कोई उम्मीद नहीं है। जिस विलक्षण हथियार के बारे में कहा जा रहा है कि वह इतना ताकतवर है कि युद्ध का रुख बदल देगा, उसका इतना प्रचार यही दिखाता है।

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि पूरी ताकत से लड़ी जा रही लड़ाई के तीसरे महीने में हम देख रहे हैं कि रूस अपने वंडर वेपन की खोज करने में जुटा है। यह सब साफ दिखाता है कि उनका मिशन पूरी तरह से नाकाम है।

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