BJP से 30 साल की दोस्ती में शिवसेना 24% सिमटी:शिवसेना की सीटें 73 से घटकर 56 हुईं, BJP का कद 42 से 106 सीटों का हो गया

2 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ 20 जून की रात बगावत की और 22 की रात 8:11 पर एक साथ दो ट्वीट किए। उन्होंने लिखा- पिछले ढाई सालों में MVA सरकार ने केवल घटक दलों को फायदा पहुंचाया और शिवसैनिकों का भारी नुकसान हुआ। पार्टी और शिवसैनिकों के अस्तित्व के लिए इस बेमेल गठबंधन से बाहर निकलना जरूरी है।

शिंदे और उनके साथी विधायकों ने इसी तर्क को बगावत की सबसे बड़ी वजह करार दिया। बागी शिवसेना विधायक दीपक केसरकर ने 27 जून को उद्धव ठाकरे के नाम लिखी खुली चिट्ठी में कहा कि BJP-शिवसेना अलायंस महाराष्ट्र को महान ऊंचाई तक ले जाएगा।

तो क्या वाकई शिवसेना और BJP का अलायंस स्वाभाविक है? हमने BJP-शिवसेना के गठबंधन की शुरुआत से लेकर अब तक के आंकड़ों को खंगाला तो समीकरण ठीक उल्टा बैठा। पिछले 33 सालों में BJP 42 से 106 सीटों पर पहुंच गई, जबकि शिवसेना अधिकतम 73 से घटकर 56 सीटों पर आ गई। यानी, महाराष्ट्र में BJP 152% बढ़ गई वहीं शिवसेना 24% सिमट गई।

आइए, भास्कर एक्सप्लेनर में BJP-शिवसेना की दोस्ती और नफा-नुकसान की पड़ताल करते हैं…

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33 साल पहले शिवसेना की सहयोगी पार्टी बनी थी BJP

हिंदुत्व की लहर के बीच BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन 33 साल पहले 1989 में हुआ था। हालांकि शिवसेना की BJP के साथ जुड़ने की शुरुआत 1984 में ही हो गई थी। उस समय शिवसेना के मनोहर जोशी समेत 2 नेताओं ने BJP के सिंबल पर मुंबई से लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए।

शिवसेना-BJP गठबंधन के पीछे का दिमाग प्रमोद महाजन का था। वे उस समय BJP के महासचिव हुआ करते थे और बाल ठाकरे से उनके काफी अच्छे संबंध थे। BJP उस वक्त देशभर में पार्टी का विस्तार कर रही थी और उसे महाराष्ट्र में एक रीजनल फोर्स की जरूरत थी। ऐसे में शिवसेना, BJP के लिए सबसे बेहतर विकल्प था, क्योंकि दोनों पार्टियों की आइडियोलॉजी बहुत हद तक एक जैसी थी।

शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के साथ पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी। 1989 के लोकसभा चुनाव के पहले पहली बार हिंदुत्व की छाया तले BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन हुआ था।
शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के साथ पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी। 1989 के लोकसभा चुनाव के पहले पहली बार हिंदुत्व की छाया तले BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन हुआ था।

1990 : शिवसेना को 52, BJP के खाते में 42 सीटें

बाला साहेब के समय में महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना हरदम बड़े भाई की भूमिका में ही रही। इसी कारण गठबंधन बनने के वक्त तय हुआ कि लोकसभा चुनाव में BJP ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि विधानसभा चुनाव में शिवसेना को ज्यादा सीटें मिलेंगी।

1990 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने कुल 288 सीटों में से 183 पर चुनाव लड़ा। वहीं BJP ने 104 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उस चुनाव में शिवसेना ने 52 और BJP ने 42 सीटें जीतीं। शिवसेना के मनोहर जोशी विपक्ष के नेता बने।

1995 : पहली बार शिवसेना-BJP गठबंधन की सरकार बनी

1995 में BJP-शिवसेना ने फिर से मिलकर चुनाव लड़ा। राम मंदिर आंदोलन के चलते हिंदुत्व की लहर चरम पर थी। दोनों को चुनाव में इसका फायदा मिला। शिवसेना ने 73 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि BJP 65 सीटें झटकने में सफल रही।

तब बाला साहेब ठाकरे ने फॉर्मूला दिया कि जिस पार्टी के पास ज्यादा सीटें होंगी, मुख्यमंत्री उसका होगा। इसी आधार पर शिवसेना के मनोहर जोशी को CM की कुर्सी मिली और BJP के गोपीनाथ मुंडे डिप्टी CM बने। हालांकि यही फॉर्मूला आगे चलकर दोनों पार्टियों के बीच विवाद की जड़ बना।

1995 में बाल ठाकरे ने जब BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई तो अपने करीबी नेता मनोहर जोशी को CM बनाया। इस दौरान बाल ठाकरे ने कहा था कि इस सरकार का रिमोट कंट्रोल मेरे हाथ में रहेगा।
1995 में बाल ठाकरे ने जब BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई तो अपने करीबी नेता मनोहर जोशी को CM बनाया। इस दौरान बाल ठाकरे ने कहा था कि इस सरकार का रिमोट कंट्रोल मेरे हाथ में रहेगा।

1999 : बहुमत के जादुई आंकड़े से 20 सीटें कम रह गईं

शिवसेना और BJP ने 1999 का चुनाव भी साथ मिलकर लड़ा। उस वक्त भी शिवसेना बड़े रोल में रही। शिवसेना ने 69 और BJP ने 56 सीटें जीतीं। हालांकि गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े 145 से 20 कम यानी 125 सीटें ही थीं।

शिवसेना को लग रहा था कि बहुमत के लिए बाकी बची सीटों का जुगाड़ हो जाएगा, लेकिन BJP ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। कहा जाता है कि उस वक्त बीजेपी के गोपीनाथ मुंडे CM का पद चाह रहे थे। BJP-शिवसेना के बीच 23 दिनों तक बातचीत चलती रही, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। आखिर में NCP और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली।

2004 : शिवसेना में बगावत के बाद BJP ने मांगा विपक्ष के नेता का पद

1999 में CM पद के लिए रस्साकशी होने के बावजूद शिवसेना और BJP ने 2004 में भी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में शिवसेना ने 62 और BJP ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की। एक बार फिर ज्यादा सीट जीतने के कारण विपक्ष के नेता का पद शिवसेना को मिला। हालांकि, 2005 में जब नारायण राणे करीब एक दर्जन विधायकों के साथ कांग्रेस में चले गए तो BJP ने शिवसेना से विपक्ष के नेता के पद पर दावा किया, लेकिन शिवसेना ने नकार दिया।

2009 : 20 साल में पहली बार शिवसेना से आगे निकली BJP

2009 में लगातार दूसरी बार BJP-शिवसेना गठबंधन को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन BJP पहली बार शिवसेना से आगे निकलने में कामयाब रही। BJP ने इस दौरान 46 और शिवसेना ने 45 सीटों पर जीत दर्ज की। इस दौरान विपक्ष के नेता का पद BJP को मिला।

2014 : 25 साल पुराना गठबंधन टूटा, फडणवीस CM बने

2014 में लोकसभा चुनाव में मोदी लहर से BJP का उत्साह चरम पर था। ऐसे में BJP ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना से ज्यादा सीटों की मांग की। सहमति नहीं बनी और 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया। वहीं NCP और कांग्रेस भी इस चुनाव में गठबंधन नहीं कर सके।

अकेले चुनाव लड़ने का फायदा BJP को मिला और उसने 122 सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि शिवसेना सभी सीटों पर लड़ने के बावजूद सिर्फ 63 सीटें जीत पाई। इस दौरान BJP नेता देवेंद्र फडणवीस CM बने। हालांकि कुछ दिन तक विपक्ष में बैठने के बाद शिवसेना सरकार में शामिल हो गई और उसे 12 मंत्रीपद मिले। बस यहां से शिवसेना बड़े भाई से छोटे भाई की भूमिका में आ गई।

2014 के चुनाव में 1989 के बाद पहली बार दोनों पार्टियों ने अपने रास्ते अलग-अलग कर लिए। बीजेपी ने 122 सीटों पर जीत हासिल की और महाराष्ट्र में पहली बार बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस सीएम बने।
2014 के चुनाव में 1989 के बाद पहली बार दोनों पार्टियों ने अपने रास्ते अलग-अलग कर लिए। बीजेपी ने 122 सीटों पर जीत हासिल की और महाराष्ट्र में पहली बार बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस सीएम बने।

2019 : चुनाव जीतने के बाद भी शिवसेना-BJP अलग हो गए

2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त एक बार फिर से दोनों पार्टियों को साथ आने की जरूरत महसूस होने लगी। फरवरी में फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार में अन्य बातों के अलावा पद और जिम्मेदारियों को समान रूप से साझा किया जाएगा। हालांकि लोकसभा के रिजल्ट से BJP एक बार फिर से शिवसेना पर दबाव बनाने में सफल रही।

विधानसभा चुनाव में इस बार BJP ने ज्यादा, जबकि शिवसेना ने कम सीटों पर चुनाव लड़ा। BJP ने इस दौरान 106 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना को 2014 से भी कम 56 सीटें ही मिलीं। इसके बाद शिवसेना ने ढाई-ढाई साल के लिए CM के फॉर्मूले का दांव चला, लेकिन BJP नहीं मानी। लिहाजा शिवसेना-BJP गठबंधन टूट गया। इसके बाद शिवसेना ने NCP और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, उद्धव ठाकरे CM बने।

शिवसेना ने शुरुआती दौर में कांग्रेस का समर्थन किया था

  • बाला साहेब ठाकरे ने मराठी मानुस के नाम पर 19 जून 1966 को शिवसेना बनाई।
  • 1970 में मुंबई की पर्ले विधानसभा सीट का उपचुनाव जीतकर वामनराव महाडिक शिवसेना के पहले विधायक बने।
  • 1971 के लोकसभा चुनाव में बाल ठाकरे ने कांग्रेस (o) के साथ गठबधंन और 3 कैंडिडेट भी उतारे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  • 1972 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 1 सीट पर जीत मिली।
  • बाल ठाकरे ने 1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल का समर्थन किया और फिर 1977 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का समर्थन किया था।
  • 1980 में शिवसेना ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और कांग्रेस का समर्थन किया।
शिवसेना के गठन के वक्त महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक थे। कहा जाता है कि वसंत राव नाइक ने शिवसेना को बढ़ावा दिया और बाल ठाकरे का भरपूर इस्तेमाल किया। इसी वजह से उस दौर में शिव सेना को कई लोग मजाक में वसंत सेना भी कहते थे।
शिवसेना के गठन के वक्त महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक थे। कहा जाता है कि वसंत राव नाइक ने शिवसेना को बढ़ावा दिया और बाल ठाकरे का भरपूर इस्तेमाल किया। इसी वजह से उस दौर में शिव सेना को कई लोग मजाक में वसंत सेना भी कहते थे।
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