आफताब पूनावाला का धर्म गूगल के टॉप ट्रेंड में:मुस्लिमों के खोजा समुदाय से ताल्लुक, जो कुछ सदी पहले हिंदू से मुसलमान बने थे

2 महीने पहले

श्रद्धा मर्डर केस में गिरफ्तार आफताब अमीन पूनावाला के धर्म पर भी एक बहस छिड़ी हुई है। बड़ी संख्या में लोग उसके पारसी होने के दावे कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह है उसका सरनेम 'पूनावाला'। आमतौर पर ऐसे सरनेम पारसी लगाते हैं। आफताब ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में अपना धर्म 'मानवता' लिखा था। इससे भी कंफ्यूजन बढ़ा है। लोग आफताब के इंस्टाग्राम अकाउंट से लेकर उसके धर्म को सर्च कर रहे हैं और ये गूगल पर टॉप ट्रेंड में चल रहा है।

इस पोस्ट में एक यूजर आफताब के धर्म पर सवाल उठाते हुए कह रहा है कि वो किसी भी धर्म का हो। कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
इस पोस्ट में एक यूजर आफताब के धर्म पर सवाल उठाते हुए कह रहा है कि वो किसी भी धर्म का हो। कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

आगे हम तीन पुख्ता सबूत दे रहे हैं, जिससे साफ हो जाएगा कि आफताब का धर्म मुस्लिम है और वो खोजा समुदाय से ताल्लुक रखता है...

1. इंस्टाग्राम पर आफताब का 'thehungrychokro' नाम से प्रोफाइल है। इसमें करीब 422 हफ्ते पुरानी पोस्ट में आफताब ने खुद लिखा है कि मैं मुस्लिम हूं।

2. दिल्ली के महरौली थाने में दर्ज FIR में लिखा है कि आफताब अमीन पूनावाला मुस्लिम है और मृतक श्रद्धा वॉकर हिंदू धर्म की कोली जाति की थी।

3. आफताब का परिवार मुंबई के वसई में रहता है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में उसके पड़ोसियों ने पुष्टि की है कि वो मुस्लिम है और खोजा समुदाय से ताल्लुक रखता है।

अब सवाल उठता है कि ये खोजा समुदाय क्या है? क्या ये भारत के आम मुस्लिमों से अलग होते हैं?

शिया इस्माइली कानून को मानने वाले मुसलमानों का एक समुदाय खुद को खोजा कहता है। कुछ खोजा सुन्नी इस्लाम को भी मानते हैं। इस समुदाय का एक बड़ा वर्ग गुजरात और महाराष्ट्र में रहता है। भारत के बाहर पूर्वी अफ्रीका के कुछ देशों में, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में भी बसे हुए हैं।

14वीं सदी में हिंदू धर्म से इस्लाम में कंवर्ट हुए खोजा

ब्रिटैनिका वेबसाइट के मुताबिक, खोजा एक हिंदू जाति थी। 14वीं सदी में फारसी पीर सदर-अल-दीन ने कई भारतीयों को इस्लाम धर्म में शामिल किया। कुछ को डराया धमकाया गया और कुछ के साथ जबरदस्ती भी की गई। इसमें खोजा जाति के हिंदू भी शामिल थे। ये लोग इस्लाम के शिया इस्माइली संप्रदाय से जुड़े। इसलिए ये आगा खान के अनुयायी माने जाते हैं।

19वीं सदी में भारत में इस्माइली इमामत की स्थापना की गई। इसका मकसद समुदाय को एकजुट और संगठित करना था। इसकी वजह से खोजा मुस्लिमों का एक हिस्सा छिटक गया। इनमें से कुछ इस्ना अशअरी बन गए और कुछ ने सुन्नी अपना लिया।

खोजा समुदाय के बहुत से रिचुअल्स हिंदुओं से मेल खाते हैं। संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में लिखा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1866 के अपने एक फैसले में इस्माइली खोजा समुदाय को आधा मुस्लिम और आधा हिंदू माना था। इस समुदाय की कुछ महिलाएं अभी भी स्वामी नारायण की पूजा करती हैं। बच्चों के पैदा होने के छठवें दिन छठी की रस्म की जाती है, जो आमतौर पर मुस्लिमों में नहीं होती।

खोजा महिला की तस्वीर। इसे 1928 में राव बहादुर एम वी धुरंधर ने बनाया था। गौर करने वाली बात है कि इसमें महिला बुर्के या नकाब में नहीं है।
खोजा महिला की तस्वीर। इसे 1928 में राव बहादुर एम वी धुरंधर ने बनाया था। गौर करने वाली बात है कि इसमें महिला बुर्के या नकाब में नहीं है।

मुस्लिमों में खोजा को एक प्रगतिशील समुदाय माना जाता है। पूरी दुनिया में इनकी संख्या करीब 6.5 लाख बताई जाती है। इसमें करीब 5 लाख लोग भारत में ही रहते हैं। अलग-अलग तरह के बिजनेस में तो ये आगे हैं ही, साथ ही डॉक्टर, इंजीनियर और लॉयर भी बड़ी संख्या में बन रहे हैं।

श्रद्धा के पिता नहीं चाहते थे कि बेटी मुसलमान के साथ रहे

दिल्ली के छतरपुर के एक आम से फ्लैट में रहने वाले आफताब नाम के लड़के पर आरोप है कि उसने श्रद्धा नाम की अपनी लिव-इन पार्टनर का न सिर्फ कत्ल किया, बल्कि लाश को 35 टुकड़ों में काटकर जंगल में फेंक दिया। उसने लाश को बाथरूम में काटा, घर के फ्रिज में कटा सिर रखा।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए श्रद्धा के पिता विकास कहते हैं, ‘बेटी के साथ जो उसने किया, उसे भी वैसी ही सजा मिले। मैं नहीं चाहता था कि बेटी मुसलमान के साथ रहे। मैंने आफताब को लेकर उसे शुरू से ही मना किया था, लेकिन वो मानी ही नहीं। मैं पहले तो आफताब से कभी नहीं मिला था, लेकिन जब मेरी पत्नी की मौत हुई, उस दौरान वो आता-जाता था।’

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