आफताब को दिया जाएगा नशे का इंजेक्शन:आधी बेहोशी में पूछे जाएंगे 50 सवाल; नार्को में जरा सी चूक से कोमा या मौत

18 दिन पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी

श्रद्धा मर्डर केस में आरोपी आफताब का नार्को टेस्ट आज नहीं होगा। नार्को टेस्ट से पहले उसके पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट और नार्को टेस्ट। कैसे जरा-सी चूक आफताब को कोमा में पहुंचा सकती है या उसकी मौत भी हो सकती है...

सवाल-1: आफताब के नार्को टेस्ट से पहले हो रहा ये पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है?

जवाबः फोरेंसिक साइकोलॉजी डिवीजन के हेड डॉ. पुनीत पुरी ने बताया कि नार्को टेस्ट से पहले आफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाएगा। इसके लिए कोर्ट की मंजूरी मिल गई है। पॉलीग्राफ टेस्ट नार्को टेस्ट से अलग होता है। इसमें आरोपी को बेहोशी का इंजेक्शन नहीं दिया जाता। बल्कि कार्डियो कफ जैसी मशीनें लगाई जाती हैं। इनके जरिए ब्लड प्रेशर, नब्ज, सांस, पसीना, ब्लड फ्लो को मापा जाता है। इसके बाद आरोपी से सवाल पूछे जाते हैं। झूठ बोलने पर वो घबरा जाता है, जिसे मशीन पकड़ लेती है।

इस तरह का टेस्ट पहली बार 19वीं सदी में इटली के अपराध विज्ञानी सेसारे लोम्ब्रोसो ने किया था। बाद में 1914 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक विलियम मैरस्ट्रॉन और 1921 में कैलिफोर्निया के पुलिस अधिकारी जॉन लार्सन ने भी ऐसे उपकरण बनाए।

सवाल-2: नार्को टेस्ट क्या है और इसमें सच कैसे बाहर आता है?

जवाबः शातिर क्रिमिनल बचने के लिए अकसर झूठी कहानियां बनाते हैं। पुलिस को गुमराह करते हैं। इनसे सच उगलवाने के लिए नार्को टेस्ट किया जाता है।

नार्को टेस्ट में साइकोएस्टिव दवा दी जाती है, जिसे ट्रुथ ड्रग भी कहते हैं। जैसे- सोडियम पेंटोथल, स्कोपोलामाइन और सोडियम अमाइटल। सोडियम पेंटोथल कम समय में तेजी से काम करने वाला एनेस्थेटिक ड्रग है। इसका इस्तेमाल सर्जरी के दौरान बेहोश करने में सबसे ज्यादा होता है।

ये केमिकल जैसे ही नसों में उतरता है, शख्स बेहोशी में चला जाता है। बेहोशी से जागने के बाद भी आरोपी आधी बेहोशी में रहता है। इस हालत में वो जानबूझकर कहानी नहीं गढ़ सकता, इसलिए सच बोलता है।

सवाल-3: क्या नार्को टेस्ट से जान भी जा सकती है?

जवाबः नार्को टेस्ट में जो ड्रग दिया जाता है, वो भी बेहद खतरनाक होता है। जरा सी चूक से मौत भी हो सकती है या आरोपी कोमा में जा सकता है।

यही वजह है कि नार्को टेस्ट से पहले आरोपी की मेडिकल जांच की जाती है, जिससे बड़ी बीमारी का पता चल सके। अगर आरोपी को मनोवैज्ञानिक, ऑर्गन से जुड़ी या कैंसर जैसी कोई बड़ी बीमारी है तो उसका नार्को टेस्ट नहीं किया जाता।

नार्को टेस्ट अस्पताल में इसलिए करवाया जाता है, क्योंकि कुछ गड़बड़ होने पर इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल इलाज किया जा सके। व्यक्ति की सेहत, उम्र और जेंडर के हिसाब से नार्को टेस्ट की दवाइयां दी जाती हैं।

आफताब का नार्को टेस्ट दिल्ली के अंबेडकर अस्पताल में होगा। पूछताछ के वक्त वहां आरोपी के जवाब का एनालिसिस करने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट, मनोवैज्ञानिक, ऑडियो-वीडियोग्राफर और सहायक नर्सिंग स्टाफ के अलावा सीनियर पुलिस अफसर मौजूद रहेंगे।

सवाल-4: नार्को टेस्ट में आफताब से क्या उगलवाया जाएगा?

जवाबः नार्को टेस्ट के दौरान आधी बेहोशी में आरोपी को पहले आसपास की सामान्य चीजें दिखाई जाती हैं। जैसे- उसका घर, परिवार वाले, फल-फूल वगैरह। इसके बाद उसे केस से जुड़ी तस्वीर दिखाई जाती है और फिर बॉडी का रिएक्शन चेक किया जाता है। अगर दिमाग और शरीर की प्रतिक्रिया में फर्क होता है तो पता चल जाता है कि व्यक्ति घटना की सच्चाई बताएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आफताब से 50 से ज्यादा सवालों का पैटर्न तैयार कर लिया गया है। इसमें पूरी घटना के सिलसिले को जोड़ने की कोशिश होगी। आफताब के जवाब के आधार पर पुलिस सबूत जुटा सकती है।

सवाल-5: कोर्ट में नार्को टेस्ट की लीगल वैलिडिटी क्यों नहीं है?

जवाबः नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक दवा के इस्तेमाल के बाद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कोई आरोपी सिर्फ सच ही बोले।

एनेस्थीसिया की स्थिति में कोई शख्स अपनी इच्छा से स्टेटमेंट नहीं देता है और इस समय वह अपने होशो-हवास में भी नहीं होता है। इसीलिए कोर्ट में कानूनी तौर पर साक्ष्य के लिए नार्को टेस्ट रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाता है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि नार्को टेस्ट रिपोर्ट की मदद से बाद में खोजी गई किसी भी जानकारी को सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किए जाने की अनुमति होगी।

सवाल-6: पहले कौन से मामलों में नार्को टेस्ट हुआ और उसमें क्या निकला?

जवाबः हमने ऐसे 5 चर्चित केस निकाले हैं जिनमें नार्को टेस्ट की जरूरत पड़ी। पढ़िए, उनकी कहानी…

केस-1: अरुण कुमार टिक्कू मर्डर केस

सिमरन सूद अपने पति विजय पलांदे के साथ। विजय ने ही अरुण का मर्डर किया था।
सिमरन सूद अपने पति विजय पलांदे के साथ। विजय ने ही अरुण का मर्डर किया था।

क्या था मामलाः साल 2005 में मॉडल सिमरन सूद की मुलाकात अनुज से हुई। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती मजबूत हो गई। इस दौरान सिमरन के पति विजय पलांदे ने अनुज के फ्लैट पर अपने दो दोस्तों को ठहरा दिया। अनुज के पिता अरुण कुमार टिक्कू को जब इसकी भनक लगी तो वो समझ गए कि सिमरन और उसका पति फ्लैट पर कब्जा करना चाहते हैं। सिमरन और उसके पति ने घर हड़पने की साजिश का खुलासा होने के बाद एक प्लान बनाया। उन्होंने अपने साथियों की मदद से अरुण कुमार टिक्कू की हत्या कर दी।

नार्को टेस्ट में खुलासाः इस केस में आरोपी विजय पुलिस के सवालों का सही जवाब नहीं दे रहा था। ऐसे में नार्को टेस्ट की मदद से बाद में खोजे गए साक्ष्यों के जरिए दो चीजों का पता चला- पहला ये कि हत्या को कब और कैसे अंजाम दिया गया। दूसरा ये कि हत्या के बाद शव को कहां और कैसे फेंका गया था।

मौजूदा स्टेटस: 2017 में विजय पलांदे को इस केस में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

केस- 2: कुर्ला सीरियल रेप और मर्डर

कुर्ला सीरियल रेप और मर्डर का दोषी अजमेरी शेख
कुर्ला सीरियल रेप और मर्डर का दोषी अजमेरी शेख

क्या था मामलाः 19 जून 2010 को कुर्ला की सुनसान इमारत में 9 साल की एक बच्ची का शव मिला। जांच में पता चला कि मर्डर से पहले इस नाबालिग लड़की का रेप हुआ है। इससे पहले 9 फरवरी और 7 मार्च को भी इसी तरह कुर्ला में दो और नाबालिगों की रेप के बाद हत्या हुई थी। पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लग रहा था। इस मामले में 70 से ज्यादा लोगों के DNA सैंपल लेकर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे गए। फिर DNA टेस्ट के आधार पर अजमेरी शेख को हिरासत में लिया गया, लेकिन 90 दिन तक पुलिस सबूत जुटाने में असफल रही तो कोर्ट से उसे बेल मिल गई थी।

नार्को टेस्ट में खुलासाः नार्को टेस्ट के जरिए पुलिस कुर्ला सीरियल रेप और मर्डर मामले में सबूत जुटा सकी। इसके बाद एक बार फिर से अजमेरी शेख को गिरफ्तार किया गया था।

केस का वर्तमान स्टेटस: 2015 में कोर्ट ने सबूतों के आधार पर उसे दोषी बताकर उम्रकैद की सजा सुनाई।

केस-3: आरुषि मर्डर केस

आरुषि के बचपन की तस्वीर, जिसमें वो अपने माता-पिता के साथ दिख रही है। जिन्हें बाद में बेटी की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था।
आरुषि के बचपन की तस्वीर, जिसमें वो अपने माता-पिता के साथ दिख रही है। जिन्हें बाद में बेटी की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था।

क्या था मामलाः 15 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 में 14 साल की लड़की आरुषि की रहस्यमयी मौत हो गई। हत्या के बाद घटना को अंजाम देने वालों ने सभी सबूत मिटा दिए थे। आरुषि के पिता ने बेटी की हत्या के आरोप में नौकर हेमराज के खिलाफ केस दर्ज कराया। जांच में पुलिस को आरुषि के पिता राजेश तलवार के घर से ही हेमराज का भी शव मिला। इसके बाद शक के आधार पर पुलिस ने आरुषि के माता-पिता को हिरासत में ले लिया। पुलिस के हाथ अब भी कोई मजबूत सबूत नहीं लगे थे। इसी वजह से आरुषि के पिता राजेश तलवार और उनके नौकरों को बरी कर दिया गया। फिर जनवरी 2010 में पुलिस को नौकर हेमराज के दोस्त कृष्णा के नार्को टेस्ट की इजाजत मिल गई।

नार्को टेस्ट में खुलासाः नार्को टेस्ट के बाद इस केस का एंगल ही बदल गया। पुलिस ने इसके आधार पर तीन बातें पता कीं। पहला- आरुषि और नौकर हेमराज दोनों की हत्या राजेश तलवार और उनकी पत्नी ने ही की है। दूसरा- दंपती ने अपनी प्रतिष्ठा और इज्जत के लिए नौकर की हत्या की। तीसरा- हथियार बरामद करने में भी पुलिस सफल रही।

केस का वर्तमान स्टेटस: 26 नवंबर 2013 को विशेष CBI अदालत ने आरुषि-हेमराज के दोहरे हत्याकांड में राजेश और नूपुर तलवार को IPC की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

केस-4: हैदराबाद ट्विन ब्लास्ट केस

ये तस्वीर 25 अगस्त 2007 में हैदराबाद के गोकुल घाट में हुए धमाके की है।
ये तस्वीर 25 अगस्त 2007 में हैदराबाद के गोकुल घाट में हुए धमाके की है।

क्या था मामलाः 25 अगस्त 2007, हैदराबाद के गोकुल घाट में एक जबरदस्त धमाका हुआ। इसके कुछ देर बाद यहीं लुंबिनी पार्क में भी एक और विस्फोट हुआ। इन दोनों ही घटनाओं में 42 लोग मारे गए, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। इस मामले में करीब एक दर्जन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, लेकिन पुलिस के सामने असली चुनौती मुजरिम तक पहुंचने की थी।

नार्को टेस्ट में खुलासाः पुलिस ने अब्दुल कलीम और इमरान खान के नार्को टेस्ट के लिए कोर्ट से इजाजत ली। इसके बाद पुलिस असली मुजरिम तक पहुंच गई। 3 आरोपियों को सजा मिली, जबकि 2 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

केस का स्टेटस: सितंबर 2018 में मेट्रोपॉलिटन सेशन कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन (IM) के एक आतंकी तारिक अंजुम को इस मामले में दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा दो अन्य आरोपियों अनीक शफीक सैय्यद और अकबर इस्माइल चौधरी को सजा-ए-मौत दी गई है।

केस-5: तेलगी केस

अब्दुल करीम तेलगी (बीच में)।
अब्दुल करीम तेलगी (बीच में)।

क्या था मामलाः साल 2003 की बात है। मीडिया में खबर आई कि ट्रेन में मूंगफली बेचने वाले ने देश का सबसे बड़ा घोटाला किया है, तो हर कोई हैरान रह गया। महाराष्ट्र की राजनीति में तहलका मचाने वाले इस घोटाले का नाम स्टैम्प पेपर स्कैम था। इसके मुख्य आरोपी का नाम था- अब्दुल करीम तेलगी। तेलगी एक बड़े गैंग को ऑपरेट करता था। पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद इस पूरे मामले में खुलासे के लिए नार्को टेस्ट कराने का फैसला किया।

नार्को टेस्ट में खुलासा: नार्को टेस्ट में सरगना अब्दुल करीम तेलगी ने NCP सुप्रीमो शरद पवार, पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल के नाम लिए थे। उसने कहा कि इन दोनों लोगों को उसने पैसे दिए हैं। जबकि इससे पहले जब तेलगी ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया तो उसमें पवार या भुजबल का नाम नहीं लिया था। साल 2003 में कराए गए नार्को टेस्ट को साल 2006 में टीवी चैनलों पर दिखाया गया था।

केस का वर्तमान स्टेटस: 20 हजार करोड़ के इस घोटाले में तेलगी को 30 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि 2017 में जेल में ही उसकी मौत हो गई।

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