सिद्धू मूसेवाला के आखिरी गाने से घबराई सरकार:SYL और खालिस्तान पर बागी तेवर दिखाए, 72 घंटे में 2.7 करोड़ views; SYL है क्या?

5 महीने पहलेलेखक: अनुराग आनंद

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के ठीक 24 दिन बाद यानी 23 जून 2022 को यूट्यूब पर ‘SYL’ के नाम से उनका सॉन्ग रिलीज हुआ। रिलीज होने के महज 72 घंटे के अंदर इस गाने को यूट्यूब पर 2.7 करोड़ ज्यादा लोगों ने देखा। इसके बाद यूट्यूब ने केंद्र सरकार से कानूनी शिकायत मिलने की बात कहकर ‘SYL’ सॉन्ग को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया।

ऐसे में आज भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि सिद्धू मूसेवाला के सॉन्ग में ऐसा क्या था कि मरने के बाद भी उनके गाने ने केंद्र सरकार की धड़कनें बढ़ा दी? आखिर पंजाब और हरियाणा के बीच ‘SYL’ यानी सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद क्या है?

मूसेवाला ‘SYL’ सॉन्ग में पानी, खालिस्तानी और हत्या की बात करते हैं
23 जून 2022 को यूट्यूब पर रिलीज हुए सिद्धू मूसेवाला के सॉन्ग 'SYL' में पंजाबी इतिहास और पहचान लौटाने की बात की गई है। इसके साथ ही मूसेवाला गाने में चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल लौटाने की बात भी करते हैं। वह कहते हैं कि पानी तो भूल जाओ, हम एक बूंद नहीं देंगे जब तक कि हमें हमारी संप्रभुता नहीं दोगे।

इसी गाने में आगे 1990 के सतलुज-यमुना नहर की उस घटना का जिक्र होता है, जिसमें 2 इंजीनियरों की हत्या कर दी गई थी। अपने इस सॉन्ग में मूसेवाला ने दोनों इंजीनियरों के हत्यारे बलविंदर सिंह जटाना की तारीफ की थी।

इसके साथ ही किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को लाल किला पर फहराए गए सिख झंडे, 1984 के सिख दंगे, पंजाब के सिख बंदियों और खालिस्तान समर्थक आतंकियों की बात भी इस गाने में की गई थी। यही वजह है कि रिलीज होने के बाद ही यह गाना वायरल होने लगा। बाद में केंद्र सरकार के निर्देश पर इस गाने के वीडियो को यूट्यूब ने हटा दिया है।

66 साल पुराना है पंजाब और हरियाणा के बीच ‘SYL’ नहर विवाद
पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लड़ाई कोई नई नहीं है, बल्कि यह 66 साल पुरानी है। बात 1955 की है, जब नॉर्थ इंडिया के राज्यों जैसे- पंजाब, जम्मू कश्मीर और राजस्थान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते में पेप्सू यानी आज के हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कुछ क्षेत्र भी शामिल थे। हालांकि जल बंटवारे को लेकर किया गया यह समझौता आने वाले समय में सफल नहीं रहा।

इसके बाद जब 1 नवंबर 1966 को हरियाणा राज्य पंजाब से अलग हुआ तो इसके साथ ही दोनों राज्यों के बीच जल विवाद का मामला गहरा गया। बाद में इसे खत्म करने के लिए दोनों राज्यों के बीच 214 किलोमीटर लंबा जल मार्ग सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने पर सहमति बनी।

इसके तहत सतलुज नदी को नहर के जरिए यमुना नदी से जोड़ा जाना था। इस नहर का 122 किलोमीटर लंबा हिस्सा पंजाब में जबकि 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में बनाया जाना था। दोनों राज्य सरकारों ने 1981 में इंदिरा गांधी की मौजूदगी में इस नहर के बचे हुए काम को 1983 से पहले पूरा करने का वादा किया था।

1976 में पंजाब ने नहर नहीं बनाया तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
हरियाणा और पंजाब दोनों ही राज्यों को मिलकर इस 214 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण करना था। पंजाब में 30 किलोमीटर ज्यादा नहर का हिस्सा था, इसलिए हरियाणा सरकार को नहर बनाने के लिए कुछ पैसा पंजाब सरकार को देना था। हरियाणा ने 1976 में ही एक करोड़ रुपए की पहली किश्त पंजाब सरकार को दे दी थी। इसके बाद 2006 तक करीब 192 करोड़ रुपए पंजाब को SYL नहर बनाने के लिए दिया था।

वहीं, हरियाणा ने अपने हिस्से की नहर का निर्माण 1980 में करीब 250 करोड़ रुपए खर्च करके पूरा कर लिया था। पंजाब ने इस नहर को बनाने में ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं लिया। जिससे दोनों राज्यों के बीच विवाद बढ़ा तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।

इंदिरा गांधी जब SYL नहर के शिलान्यास के लिए पहुंची थी तो अखबारों में कुछ इस तरह से विज्ञापन प्रकाशित किया गया था।
इंदिरा गांधी जब SYL नहर के शिलान्यास के लिए पहुंची थी तो अखबारों में कुछ इस तरह से विज्ञापन प्रकाशित किया गया था।

1982 में इंदिरा गांधी ने किया था SYL नहर का शिलान्यास
8 अप्रैल 1982 को पटियाला जिले के कपूरी गांव में एक शिलान्यास समारोह आयोजित करके सतलुज-यमुना लिंक नहर के निर्माण का शुभारंभ किया गया। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन तभी संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के नेतृत्व में शिरोमणि अकाली दल ने नहर के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया।

इस हिंसक आंदोलन को देखते हुए राजीव गांधी ने लोंगोवाला के साथ समझौता किया। फिर तय हुआ कि हर हाल में पंजाब नहर का काम दो साल में पूरा करेगा। यह भी तय हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के एक जज के नेतृत्व में दोनों राज्यों के बीच पानी की हिस्सेदारी तय होगी।

1990 में 2 इंजीनियरों को उग्रवादियों ने उतारा मौत के घाट
लोंगोवाल से समझौता होने के कुछ दिन बाद ही उनकी हत्या हो गई। यही नहीं 23 जुलाई 1990 को नहर पर काम कर रहे दो सीनियर इंजीनियरों समेत 35 मजदूरों को उग्रवादियों ने मार डाला था। इस घटना को अंजाम देने वाले के तौर पर बलविंदर सिंह जटाना का नाम आगे आया था। सिद्धू मूसेवाला के गाना में इसी जटाना की तारीफ की गई थी।

सिद्धू मूसेवाला के गाने 'SYL' में जिस हत्यारोपी बलविंदर सिंह जटाना के नाम का इस्तेमाल किया गया है। उसकी तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
सिद्धू मूसेवाला के गाने 'SYL' में जिस हत्यारोपी बलविंदर सिंह जटाना के नाम का इस्तेमाल किया गया है। उसकी तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

1990 के बाद पिछले 32 सालों से नहर के निर्माण का काम बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2002 और जून 2004 में नहर के बाकी बचे हिस्से को पूरा करने का आदेश दिया था। इसके बाद 2004 में पंजाब विधानसभा ने एक कानून पास कर हरियाणा के साथ हुए समझौते को ही तोड़ दिया। इतना ही नहीं, हरियाणा से मिले 192 करोड़ रुपए को भी पंजाब ने लौटाकर नहर बनाने के अपने वादे को तोड़ दिया।

‘SYL’ नहर पर पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद की वजह क्या है?
भले ही पंजाब से हरियाणा के अलग होने के बाद दोनों राज्यों के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर को लेकर सहमति रही हो। लेकिन, 24 मार्च 1976 को जब केंद्र सरकार ने पंजाब के 7.2 एमएएफ यानी 72 करोड़ एकड़ फीट पानी में से 35 करोड़ एकड़ फीट पानी हरियाणा को देने की अधिसूचना जारी की तो बवाल मच गया। पंजाब के किसान सरकार के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर आए।

इसी समय से पंजाब और हरियाणा के बीच SYL नहर से पानी बंटवारे को लेकर विवाद रहा है। एक तरफ हरियाणा इस नहर के आधे पानी पर अपना हक जताता रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पंजाब रिपेरियन वाटर राइट्स के तहत नदी और नहर के करीब बसने वाले लोगों का इस पर पूरा अधिकार बताते हुए हरियाणा को आधा पानी देने से मना करता रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के प्रयास के बावजूद दोनों राज्यों के बीच SYL नहर से पानी बंटवारे को लेकर कोई फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है।

‘SYL’ गाने को हटाने पर अब यूट्यूब ने दी है सफाई
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक सिद्धू मूसेवाला के सॉन्ग को हटाए जाने पर यूट्यूब प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से की गई कानूनी शिकायत के बाद इस सॉन्ग को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि जब सरकारें एक तय कानूनी प्रक्रिया को अपनाते हुए किसी वीडियो पर शिकायत करती हैं, तो उस वीडियो का रिव्यू किया जाता है। इस दौरान कम्यूनिटी गाइडलाइन को तोड़ने वाले वीडियो को हटा दिया जाता है। हालांकि यूट्यूब ने अब तक सार्वजनिक तौर पर मूसेवाला के सॉन्ग को हटाने के पीछे कोई वजह नहीं बताई है।