भास्कर एक्सप्लेनर:सोनिया ने जिस CWC में इस्तीफा देने की बात की, जानिए कैसे नेताजी के अध्यक्ष बनने पर गांधी जी ने इसे छोड़ा था

5 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद 13 मार्च को कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक हुई थी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका ने अपने पदों से इस्तीफा देने की बात कही थी। हालांकि, CWC सदस्यों ने बहुमत से इसे खारिज कर दिया।

देखा जाए तो आजादी से पहले भी 1939 में गांधी जी के न चाहते हुए भी सुभाष चंद्र बोस इलेक्शन जीतकर कांग्रेस अध्यक्ष बन गए थे। विरोध में गांधी जी ने CWC से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नेता जी ने भी कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था।

ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या होता है CWC? इसके अधिकार क्या हैं? इसमें किन लोगों को और कैसे चुना जाता है?

क्या है कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC?

  • वर्किंग कमेटी कांग्रेस की सबसे शीर्ष कार्यकारी बॉडी है। इसका गठन दिसंबर 1920 में कांग्रेस के नागपुर सेशन के दौरान किया गया था। इस सेशन की अध्यक्षता सी विजयराघवाचार्य ने की थी।
  • पार्टी के संविधान के नियमों की व्याख्या और लागू करने का अंतिम अधिकार CWC के पास ही है। CWC में पार्टी अध्यक्ष, संसद में उसके नेता और 23 अन्य सदस्य शामिल होते हैं। इनमें से 12 ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी यानी AICC द्वारा चुने जाते हैं। वहीं अन्य सदस्यों की नियुक्ति पार्टी अध्यक्ष करता है।
  • CWC के पास पार्टी अध्यक्ष को हटाने और नियुक्त करने का पावर होता है। CWC को आमतौर पर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव या उसके बाद रीऑर्गनाइज, यानी पुनर्गठित किया जाता है। CWC को AICC के प्लेनरी सेशन के दौरान रीऑर्गनाइज किया जा सकता है या अध्यक्ष द्वारा इसके लिए सत्र बुलाया जा सकता है।
  • CWC के पास अलग-अलग समय पर पार्टी में अलग तरह की पावर रही है। 1947 में स्वतंत्रता से पहले CWC सत्ता का केंद्र थी। साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष की तुलना में अधिक सक्रिय थे।
  • 1967 के बाद जब कांग्रेस दो भागों में बंट गई थी तब CWC की पावर पहले जैसी नहीं रह गई थी। हालांकि, 1971 में इंदिरा गांधी की जीत से राज्यों के क्षत्रप कमजोर हुए और एक बार फिर से CWC सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी बन गई।

CWC का पिछला चुनाव कब हुआ था?

  • पिछले 50 वर्षों में सिर्फ 2 बार ही CWC का चुनाव हुआ है। इन दोनों ही मौकों पर नेहरू-गांधी परिवार से बाहर का शख्स सत्ता में था।
  • 1992 में AICC का प्लेनरी सेशन तिरुपति में हुआ था। उस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष रहे पीवी नरसिम्हा राव ने CWC के इलेक्शन भी कराए थे। उन्हें उम्मीद थी कि चुनाव में उनके लोग जीत जाएंगे। हालांकि, इलेक्शन के बाद अर्जुन सिंह, शरद पवार और राजेश पायलट जैसे उनके विरोधी भी जीत गए।
  • इसके बाद नरसिम्हा राव ने कहा कि इस कमेटी में कोई SC, ST या महिला नहीं है और उन्होंने सारे सदस्यों को बर्खास्त कर दिया। राव ने बाद में CWC का पुनर्गठन किया। साथ ही इसमें अर्जुन सिंह और शरद पवार को नॉमिनेटेड कैटेगरी में शामिल किया।
  • दूसरी बार CWC का इलेक्शन 1997 में कलकत्ता के प्लेनरी सेशन के दौरान सीताराम केसरी की अध्यक्षता में कराया गया था। इस इलेक्शन की काउंटिंग एक दिन बाद भी जारी रही थी। इस इलेक्शन में अहमद पटेल, जितेंद्र प्रसाद, माधव राव सिंधिया, तारिक अनवर, प्रणब मुखर्जी, आरके धवन, अर्जुन सिंह, गुलाम नबी आजाद, शरद पवार और कोटला विजया भास्कर रेड्‌डी ने जीत हासिल की।
  • इससे पहले 1969 के बॉम्बे प्लेनरी में कांग्रेस में विभाजन होने के बाद अंतिम समय में CWC चुनाव को टाल दिया गया था। इस दौरान चंद्रशेखर समेत 10 लोगों को सर्वसम्मति से सदस्य बनाया गया था।
  • अप्रैल 1998 में सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। इसके बाद से CWC सदस्यों को नामित ही किया जाता रहा है। उन्होंने इस दौरान पैट्रोनेज यानी संरक्षणवाद के कल्चर को बढ़ावा दिया।
1992 में AICC का प्लेनरी सेशन तिरुपति में हुआ था। उस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष रहे पीवी नरसिम्हा राव ने CWC के इलेक्शन भी कराए थे।
1992 में AICC का प्लेनरी सेशन तिरुपति में हुआ था। उस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष रहे पीवी नरसिम्हा राव ने CWC के इलेक्शन भी कराए थे।

पिछली बार कब और कैसे CWC में बदलाव किया गया था?

  • दिसंबर 2017 में राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। इस दौरान AICC ने राहुल को CWC को रीऑर्गनाइज यानी पुनर्गठन करने का अधिकार दिया। इसके बाद मार्च 2018 में CWC को रीऑर्गनाइज किया गया।
  • सितंबर 2010 में सोनिया गांधी फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं। इसके बाद मार्च 2011 CWC को रीऑर्गनाइज किया गया। इस दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अर्जुन सिंह और मोहसिना किदवई को CWC से हटाकर इसका आमंत्रित सदस्य बना दिया गया था।
  • CWC में उस दौरान मनमोहन सिंह, एके एंटनी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह, जर्नादन द्विवेदी, ऑस्कर फर्नांडिस, मुकुल वासनिक, बीके हरिप्रसाद, बीरेंद्र सिंह, धनीराम शांडिल्य, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, हेमू प्रोवा सैकिया और सुशीला तिरिया सदस्य थे। इस दौरान 5 पद खाली थे।
  • देखा जाए तो अभी तक सभी कांग्रेस अध्यक्षों ने अपने लोगों को CWC का सदस्य बनाया है। यह एक फैक्ट है कि अभी तक कोई भी अध्यक्ष CWC में आलोचकों को भरने का जोखिम नहीं दिखा पाया है। इसका पता पार्टी के संविधान से ही चल जाता है। जिसमें सीधे-सीधे कहा गया है कि 25 सदस्यों में से सिर्फ 12 ही चुने जाएंगे, ताकि अध्यक्ष का प्रभाव हमेशा बना रहे।

यदि चुनाव नहीं होते हैं तो CWC के सदस्यों को किस आधार पर चुना जाता है?

  • CWC का चुनाव नहीं होने पर अध्यक्ष के प्रति वफादारी के साथ ही क्षेत्रीय, जाति और संगठनात्मक यानी ऑर्गेनाइजेशनल बैलेंस को ही तवज्जो दी जाती है। देखा जाए तो इसमें जेंडर बैलेंस की हमेशा अनदेखी की जाती है।
  • इसके साथ ही बैलेंस बनाने के लिए राज्य में प्रमुख नेताओं के विरोधियों को भी इसमें जगह दी जाती है। देखा जाए तो इसमें मॉस अपील और पैसे की ताकत को कम ही तवज्जो मिली है। कई लोकप्रिय और करिश्माई नेता जैसे वाईएस राजशेखर रेड्डी जैसे लोग कभी CWC में नहीं रहे हैं।
  • 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने AICC सेशन के 4 महीने बाद CWC पर फैसला लिया था। इस दौरान उन्होंने पुराने चेहरों की जगह CWC में युवा चेहरों को तवज्जो दी थी।
  • राहुल गांधी ने इस दौरान पार्टी सेक्रेट्रिएट में युवा चेहरों को लेकर आए। इस दौरान गौरव गोगोई, आरपीएन सिंह, जितेंद्र सिंह और राजीव सातव को पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों का प्रभारी बनाया गया।
  • महासचिवों या प्रभारी की सहायता के लिए कई पूर्व युवा कांग्रेस नेताओं को सचिव के रूप में पार्टी में शामिल किया गया। इसके साथ ही उन्होंने वादा किया वे पार्टी में युवा और बुजुर्ग नेताओं को एक समान तरीके से मौका देंगे।

83 साल पहले अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के बाद भी बोस को इस्तीफा देना पड़ा था

  • 29 जनवरी 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष के इलेक्शन में सुभाष चंद्र बोस ने पट्टाभि सीता रमैया को हरा दिया था। रमैया महात्मा गांधी के उम्मीदवार थे। सुभाष को 1580 वोट मिले और सीता रमैया को 1377 वोट। गांधीजी और सरदार पटेल पूरा जोर लगाने के बाद भी पट्टाभि को जीत नहीं दिला सके।
  • बोस की जीत पर गांधी ने कहा कि सीता रमैया की हार मेरी हार है। इसका नतीजा यह हुआ कि CWC के सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया।
  • CWC के सदस्य बोस के साथ काम करने को तैयार नहीं थे। मजबूर होकर सुभाष चंद्र बोस ने भी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
  • उस दौर में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए वैसे नेता भी चुन लिए जा सकते थे जिन्हें पार्टी के सर्वोच्च नेता का अशीर्वाद प्राप्त नहीं होता था। उस समय गांधी जी पार्टी के सर्वोच्च नेता थे। यह और बात है कि चुने जाने के बाद वे उस पद पर रह नहीं पाते थे।

क्या BJP में भी CWC जैसी कोई बॉडी है?

  • कांग्रेस की ही तरह BJP में सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी है। इसे पार्लियामेंट्री बोर्ड कहते हैं। इसमें 11 मेंबर होते हैं। सभी 11 मेंबर को BJP अध्यक्ष चुनते हैं।
  • CWC के विपरीत जब भी BJP को राज्य में हुए चुनावों के बाद मुख्यमंत्री के बारे में फैसला करना होता है तो पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होती है।
  • 2013 में BJP की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में ही नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने का फैसला किया गया था।
  • CWC की तरह पार्लियामेंट्री बोर्ड भी एक पॉलिसी मेकिंग बॉडी है। हालांकि, CWC की तरह पार्लियामेंट्री बोर्ड में पार्टी की नीतियों पर शायद ही कभी चर्चा हुई हो, खासकर 2014 में BJP के सत्ता में आने के बाद से।

पार्टियों के आंतरिक लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग का क्या नियम है?

  • चुनाव आयोग ने एक आदेश के जरिए सभी दलों के लिए संगठनिक चुनाव कराना जरूरी बना दिया है। राजनीतिक पार्टियों ने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है, पर कई बार ऐसा सिर्फ खानापूर्ति के लिए होता है।
  • 1951 एक्ट के सेक्शन 29ए के तहत हर एक पार्टी को चुनाव आयोग में खुद को रजिस्टर्ड कराने की जरूरत होती है। हालांकि, सेक्शन 29ए में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके तहत आयोग पार्टियों के आंतरिक चुनावों की निष्पक्षता और वैधता यानी वैलिडिटी की जांच करे।
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