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भास्कर एक्सप्लेनर:भारत में सिंगल डोज स्पुतनिक लाइट वैक्सीन के ब्रिजिंग ट्रायल्स को मंजूरी; अक्टूबर में हो सकती है उपलब्ध, 750 रुपए रहेगी कीमत

13 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने सिंगल डोज कोविड-19 वैक्सीन स्पुतनिक लाइट को फेज-3 ब्रिजिंग ट्रायल्स को अप्रूवल दे दिया है। यह ट्रायल्स एकाध महीने में पूरे हो सकते हैं, जिससे अक्टूबर में स्पुतनिक लाइट लगाने को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। यह वैक्सीन शुरुआत में सीमित क्वांटिटी में उपलब्ध होगी। इसकी कीमत 750 रुपए रहेगी।

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने कहा है कि रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) की पार्टनर हैदराबाद की डॉ. रेड्डी’ज लैबोरेटरी ने वैक्सीन के फेज-3 ट्रायल्स की इजाजत मांगी थी। कंपनी ने वैक्सीन को लेकर सेफ्टी, इम्युनोजेनेसिटी और एफिकेसी डेटा जमा किया है। इसके बाद SEC ने उसे ब्रिजिंग ट्रायल्स की इजाजत दे दी है।

इससे पहले सरकार ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को 12 अप्रैल को इमरजेंसी अप्रूवल दिया था। भारत समेत 65 से अधिक देशों में यह वैक्सीन लगाई जा रही है। भारत में प्राइवेट अस्पतालों के मार्फत मई में इसे आम जनता को लगाना शुरू किया गया।

आइए जानते हैं कि स्पुतनिक वी और स्पुतनिक लाइट में क्या अंतर है? यह देश में उपलब्ध बाकी वैक्सीन के मुकाबले कितनी इफेक्टिव है?

स्पुतनिक लाइट क्या है?

  • स्पुतनिक लाइट कोई नई वैक्सीन नहीं है, बल्कि रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी के दो डोज का पहला डोज ही है। दरअसल, स्पुतनिक वी के दोनों डोज में अलग-अलग वायरल वेक्टर का इस्तेमाल किया गया है।
  • रूस में यह देखा गया कि स्पुतनिक वी का पहला डोज कितना इफेक्टिव है। इसके लिए 5 दिसंबर 2020 और 15 अप्रैल 2021 के बीच रूस के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत पहला डोज लगाने के 28 दिन बाद का डेटा जुटाया गया। उसका एनालिसिस करने पर सिंगल डोज की इफेक्टिवनेस 79.4% मिली। इसे ही स्पुतनिक लाइट नाम दिया गया है। रूस ने मई में इस वैक्सीन को मंजूरी दी थी।
  • खास बात यह है कि भारत में लग रही कोवीशील्ड और कोवैक्सिन दो डोज की वैक्सीन है। और तो और, दोनों डोज लगने के बाद भी इफेक्टिवनेस 80% से कम है। लैब स्टडी और ट्रायल्स का डेटा देखें तो स्पुतनिक वी का पहला डोज यानी स्पुतनिक लाइट इससे अधिक इफेक्टिव साबित हुई है।
  • पिछले हफ्ते जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भी इमरजेंसी अप्रूवल मिल गया है। यह भी ह्यूमन एडिनोवायरस सीरोटाइप नंबर 26 (rAd26) पर बेस्ड है, जिससे स्पुतनिक लाइट भी बनी है। जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के बड़े स्तर पर ट्रायल्स हुए हैं और अमेरिका, यूरोप व WHO इसे अप्रूव कर चुके हैं।

स्पुतनिक लाइट के क्या फायदे हैं?

  • यह सिंगल डोज वैक्सीन है। यानी किसी को भी दूसरे डोज का इंतजार नहीं करना होगा। इस समय भारत में 31% आबादी को कम से कम एक डोज लगा है। वहीं, करीब 8% आबादी फुली वैक्सीनेटेड हो चुकी है। यानी इसे दोनों डोज लग चुके हैं। स्पुतनिक लाइट उपलब्ध हो जाती है तो फुली वैक्सीनेटेड आबादी का प्रतिशत तेजी से बढ़ेगा।
  • स्पुतनिक लाइट की एफिकेसी 79.4% है। वैक्सीन लगवाने वाले 100% लोगों में 10 दिन बाद ही एंटीबॉडीज 40 गुना तक बढ़ गईं। इसी तरह वैक्सीन लगवाने वाले सभी लोगों में कोरोना वायरस के S-प्रोटीन के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स डेवलप हुआ।
  • स्पुतनिक लाइट को 2 से 8 डिग्री टेम्प्रेचर पर स्टोर किया जा सकता है। इससे यह आसानी से ट्रांसपोर्ट हो सकेगी। जिन लोगों को पहले कोरोना इन्फेक्शन हो चुका है, उन पर भी यह वैक्सीन असरदार है। RDIF का दावा है कि यह वैक्सीन सभी वैरिएंट्स से लड़ सकती है।
  • स्पुतनिक लाइट लगवाने के बाद कोरोना के गंभीर असर का खतरा कम हो जाएगा। ज्यादातर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। RDIF का कहना है कि कई देशों में वैक्सीन मिक्सिंग की स्टडी के नतीजे भी उत्साह बढ़ाने वाले हैं। इस आधार पर कह सकते हैं कि स्पुतनिक लाइट को अन्य वैक्सीन के साथ भी मिक्स किया जा सकता है।

स्पुतनिक वी से स्पुतनिक लाइट कितनी अलग है?

  • देखें तो कोई अंतर नहीं है। अगर आप स्पुतनिक वी लगवा रहे हैं तो उसका पहला डोज जो असर दिखाएगा, वही स्पुतनिक लाइट का असर होगा। स्पुतनिक वी और स्पुतनिक लाइट को मॉस्को के गामालेया इंस्टीट्यूट और रशियन डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) ने मिलकर बनाया है।
  • 11 अगस्त 2020 को जब रूस ने स्पुतनिक वी को मंजूरी दी, तब यह दुनिया की पहली कोविड-19 वैक्सीन बन गई थी। यह वैक्सीन ह्यूमन एडिनोवायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म पर बनी है। मई में रूसी अधिकारियों ने कहा था कि 38 लाख लोगों के रियल-वर्ल्ड डेटा में वैक्सीन ने 97.6% इफेक्टिवनेस साबित की है। मेडिकल जर्नल लैंसेट ने भी स्पुतनिक वी को 91.6% इफेक्टिव बताया है।
  • जब आप स्पुतनिक लाइट की बात करते हैं तो रूस, यूनाइटेड अरब अमीरात, घाना और अन्य देशों में 7 हजार लोगों पर फेज-3 का क्लिनिकल ट्रायल किया गया था। गामालेया सेंटर का दावा है कि यह वैक्सीन कोरोना के सभी वैरिएंट्स पर इफेक्टिव है।

क्या सिंगल डोज वैक्सीन काफी है?

  • हां। सिंगल डोज स्पुतनिक लाइट वैक्सीन की इफेक्टिवनेस कई दो डोज वाली वैक्सीन से भी अधिक है। इससे यह बड़ी आबादी को तेजी से वैक्सीनेट करने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल डोज वैक्सीन जल्दी और ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट करने में मदद कर सकती है। लॉन्ग टर्म में यह कितनी इफेक्टिव है, इसे जानने के लिए और क्लिनिकल डेटा की जरूरत होगी।
  • देश की टॉप वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कंग का कहना है कि अगर कोई सिंगल-डोज वैक्सीन मजबूत इफेक्टिवनेस डेटा के साथ मंजूर होती है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। यह अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीनेट करने में मददगार साबित होगी। सिंगल डोज वैक्सीन की लॉन्ग टर्म इफेक्टिवनेस के लिए हमें वास्तविक दुनिया में इसके नतीजे देखने होंगे।
  • जहां तक स्पुतनिक वी का सवाल है, यह दुनिया की उन तीन वैक्सीन में से एक है, जो 90% से अधिक इफेक्टिव साबित हुई है। फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन ने ही 95% तक इफेक्टिवनेस का दावा किया है।
  • दिसंबर 2020 में रूस ने पब्लिक यूज के लिए स्पुतनिक वी को जारी किया था। यह रूस में मुख्य वैक्सीन बनी रही। स्पुतनिक लाइट अन्य देशों को भेजी गई। यह वैक्सीन 60 से अधिक देशों में लग रही है।

कोवीशील्ड और कोवैक्सिन से कितनी अलग है स्पुतनिक लाइट?

  • स्पुतनिक वी को ह्यूमन एडिनोवायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म पर बनाया है। वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने भी वायरल वेक्टर वैक्सीन बनाई है, जिसे कोवीशील्ड नाम से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भारत में बना रहा है। कोवैक्सिन को भारत बायोटेक ने इनएक्टिवेटेड कोविड-19 वैक्सीन के तौर पर बनाया है।
  • ये तीनों ही वैक्सीन दो डोज वाली हैं। इसके मुकाबले स्पुतनिक लाइट सिंगल डोज वैक्सीन है। अगर आप एफिकेसी की बात करें तो भारत में मंजूर हो चुकी स्पुतनिक वी 91.6%, कोवीशील्ड 62%-90%, कोवैक्सिन 78%, जॉनसन एंड जॉनसन 66% और मॉडर्ना 95% इफेक्टिव है।
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