एक गला काटता रहा, दूसरा वीडियो बनाता रहा:उदयपुर में टेलर का मर्डर रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस, जानिए हत्यारों को फांसी क्यों तय है?

5 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

‘इसे देखना बहुत ही भयानक है, मेरी सलाह है कि कृपया वीडियो न देखें।’

ये बयान राजस्थान पुलिस का है। इस बयान में जिस वीडियो का जिक्र है, वो उदयपुर के टेलर कन्हैया लाल की नृशंस हत्या का है। 28 जून की दोपहर रियाज और गौस नाम के शख्स कपड़ा सिलाने के बहाने पहुंचे और कन्हैया लाल का गला काट दिया। बर्बर हत्या और बाद में हत्या की जिम्मेदारी लेने का वीडियो भी बनाया।

फिलहाल रियाज और गौस राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में हैं। राजस्थान के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि इन्हें चार दिन में फांसी पर लटकाया जाए। भास्कर एक्सप्लेनर में हम बताएंगे कि उदयपुर में हुई टेलर की नृशंस हत्या क्यों ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस है। इस मामले में रियाज और गौस को फांसी मिलना क्यों तय है?

रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ कैसे तय होता है?

रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की कोई परिभाषा नहीं है, लेकिन ऐसे मामले जिनमें विक्टिम को कोई मौका दिए बिना, पूर्व नियोजित, क्रूर, निर्दयी तरीके से हत्या हो और अपराध की घिनौनी प्रकृति नजर आए, वो अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर की कैटेगरी में आता है।

रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस को समझने के लिए दैनिक भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से बात की। विराग ने इसे समझाते हुए कहा, ‘भारत में हत्या के मामलों में आजीवन कारावास या मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन मौत की सजा के लिए रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी बनी।’

विराग ने कहा, ‘अपराध शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण मेंस रिया (Mens rea) है। ये एक लीगल टर्म है, जो किसी व्यक्ति के अपराध करने के इरादे को दिखाता है। इसे आसान भाषा में समझें तो कोई व्यक्ति सोच-समझकर आपराधिक मानसिकता से हत्या को अंजाम देता है, इसका मतलब है कि व्यक्ति को अपने अपराध की पूरी जानकारी थी।’

उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की हत्या के बाद रियाज और गौस ने सोशल मीडिया में वीडियो पोस्ट करते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली और हथियार भी लहराए।
उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की हत्या के बाद रियाज और गौस ने सोशल मीडिया में वीडियो पोस्ट करते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली और हथियार भी लहराए।

उदयपुर के हत्यारों को फांसी मिलना तय क्यों है?

विराग गुप्ता का कहना है, ‘उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की हत्या रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस में आती है, क्योंकि आरोपियों ने पहले धमकी दी, फिर नृशंस हत्या की, हत्या का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया में पोस्ट किया। ये दिखाता है कि जानबूझकर आपराधिक मानसिकता के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। इसके अलावा इस घटना ने सामाजिक ताने-बाने पर बड़ा आघात पहुंचाया है। लोग इस बर्बर हत्या से स्तब्ध है, इसलिए भी ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर है।’

उदयपुर घटना के हत्यारों को फांसी की सजा इसलिए भी हो सकती हैं, क्योंकि इस घटना को आतंकी वारदात माना जा रहा है। सरकार इसे आंतकी घटना मान रही है और इसीलिए इसकी जांच NIA को सौंपी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक खुफिया एजेंसिया इसे 'इस्लामिक आंतकवाद' की तरह देख रही हैं।

विराग का कहना है, ''इस मामले में फास्ट ट्रैक ट्रायल चलने पर अगर निचली अदालत उन्हें जल्द से जल्द फांसी दे देती है, तब भी ये मामला विचार के लिए हाई कोर्ट के पास जाएगा। ऐसे में उन्हें तुरंत फांसी मिलना मुश्किल है।''

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NIA को सौंपी गई जांच, हत्यारों के ISIS से भी कनेक्शन

उदयपुर में कन्हैया लाल की नृशंस हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय एक्शन में आ गया है और इस मामले की जांच का जिम्मा NIA को सौंपा है। 29 जून को गृह मंत्री अमित शाह के ऑफिस ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि NIA को पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है। इस केस में किसी संगठन और अंतरराष्ट्रीय भूमिका की भी गहन जांच-पड़ताल की जाएगी।

इसके तार खतरनाक आतंकी संगठन ISIS से जोड़े जा रहे हैं। इस घटना में शामिल एक आरोपी 2021 में कम से कम तीन मौकों पर मुजीब अब्बासी के संपर्क में था, जिसका हाल ही में ISIS के साथ संपर्क होने का खुलासा हुआ था। इसी वजह से इन हत्यारों के खिलाफ एंटी-टेरर लॉ अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA भी लगाया गया है। UAPA के तहत दोषी पाए जाने पर मौत की सजा का प्रावधान है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के मामले की जांच NIA को सौंपी है। NIA पता लगाएगी कि क्या इस हत्या का कोई इंटरनेशनल लिंक है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के मामले की जांच NIA को सौंपी है। NIA पता लगाएगी कि क्या इस हत्या का कोई इंटरनेशनल लिंक है।

1980 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था रेयरेस्ट ऑफ रेयर सिद्धांत

विराग ने कहा कि पहली बार रेयरेस्ट ऑफ रेयर अपराध का सिद्धांत सुप्रीम कोर्ट ने 1980 में बच्चन सिंह बनाम पंजाब सरकार के केस के दौरान किया था। मौत की सजा कब दी जानी चाहिए? इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य के मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘मौत की सजा तब दी जानी चाहिए, जब समाज की सामूहिक अंतरात्मा इतनी स्तब्ध हो जाए कि वह उनकी व्यक्तिगत राय के बावजूद कोर्ट से मौत की सजा दिए जाने की उम्मीद करे।’

मौत की सजा के मामले में अपराध को कई ऐंगल से देखा जाना चाहिए। जैसे- हत्या करने का तरीका, हत्या करने का मकसद, अपराध की असामाजिक या सामाजिक रूप से घृणित प्रकृति और हत्या के शिकार की भयावहता और व्यक्तित्व। मौत की सजा उन मामलों में दी जाती है, जब कोर्ट को लगता है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा अपर्याप्त है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्या के तरीके (गला काटने) और इसका वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट करने जैसी बातें, हत्यारों के तार आतंकी संगठन ISIS से जुड़े होने की ओर इशारा कर रही हैं। हत्यारों में से एक का संपर्क ISIS से बताया जा रहा है। NIA अपनी जांच में इस कनेक्शन का भी पता लगाएगी।

उदयपुर टेलर हत्याकांडः अब तक क्या-क्या हुआ?

  • 28 जून की दोपहर कन्हैयालाल उदयपुर के धानमंडी इलाके में मौजूद अपनी दुकान पर टेलर का काम कर रहे थे। तभी अचानक मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस कपड़े सिलवाने के बहाने पहुंचे और जब कन्हैयालाल उनमें से एक की नाप ले रहे थे तो दूसरे ने उनके ऊपर एक बड़े छुरे से हमला कर दिया और दिनदहाड़े ही कन्हैयालाल का सिर कलम कर दिया गया।
  • हत्यारों ने इस नृशंस हत्या का वीडियो भी बनाया और इसे सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली और इसे इस्लाम के अपमान का बदला लेने की कार्रवाई बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी धमकी जारी की।
  • 28 जून की शाम उदयपुर में तालिबानी तरीके से टेलर की हत्या करने वाले आरोपी गौस मोहम्मद और रियाज जब्बार 170 किमी दूर राजसमंद जिले के भीम इलाके से पकड़े गए। दोनों ने भागने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार पुलिस के बिछाए जाल में फंस गए। हत्यारों के पकड़े जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। आरोपियों के हत्थे चढ़ते ही पुलिस ने उन्हें जमकर पीटा।
  • राज्य सरकार ने पीड़ित के परिजनों के लिए 31 लाख रुपए मुआवजे के साथ ही परिवार के दो सदस्यों को नौकरी देने का ऐलान किया है।
  • इस घटना के बाद उदयपुर समेत राज्य के अन्य हिस्सों में फैले सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए राजस्थान सरकार ने एक महीने के लिए पूरे राज्य में धारा-144 लागू कर दी है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
  • कुछ हफ्तों पहले कन्हैयालाल को मोहम्मद साहब पर टिप्पणी करने वाली सस्पेंडेड बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में अरेस्ट किया गया था। हालांकि कन्हैयालाल ने दावा किया था कि ये पोस्ट उसके 8 साल के बेटे ने किया था, जिसे बाद में डिलीट भी कर दिया गया था।

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