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भास्कर एक्सप्लेनर:स्वेज नहर में लगा जाम 6 दिन बाद खुला, जाम से हर घंटे हो रहा था 3 हजार करोड़ का नुकसान; जानिए पहले कब-कब बने ऐसे हालात?

17 दिन पहलेलेखक: आबिद खान
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स्वेज नहर में 23 मार्च से लगा जाम छह दिन बाद सोमवार को खुल गया। नहर में फंसे 'एवर गिवन' नाम के जहाज को निकाल लिया गया है। जहाज के फंसने की वजह से नहर में यातायात बंद हो गया था, जिस वजह से हर घंटे लगभग 400 मिलियन डॉलर यानी करीब 3 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा था। नहर के बंद होने से वैश्विक व्यापार को बड़ा झटका लगने की आशंका थी।

क्यों महत्वपूर्ण है स्वेज नहर?

स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक है। पूरी दुनिया में होने वाले समुद्री कारोबार का 12% आवागमन इसी नहर से होता है। नहर बनने के बाद एशिया और यूरोप के बीच की दूरी 6000 किलोमीटर कम हो गई है। इसके साथ ही सफर में लगने वाले समय में भी लगभग 7 दिनों की कमी आई है। यही वजह है कि एशिया और यूरोप के बीच समुद्री यातायात के लिए स्वेज नहर से गुजरना सबसे फायदे भरा सौदा है। 2020 में इस नहर से 19,000 से भी ज्यादा जहाजों का आवागमन हुआ था। रोजाना यहां से लगभग 50 जहाज गुजरते हैं जिन पर 10 बिलियन डॉलर यानी करीब 73 हजार करोड़ रुपए तक का सामान लदा होता है।

क्यों रुक गया था नहर में यातायात?

'एवर गिवेन' जहाज चीन से माल लादने के बाद नीदरलैंड के पोर्ट रॉटरडैम जा रहा था। जहाज स्वेज नहर से गुजर रहा था, लेकिन तेज और धूलभरी हवा की वजह से नहर में ही फंस गया। 400 मीटर लंबे इस जहाज में 2 लाख टन से भी ज्यादा का माल लदा है। इस जहाज को 2018 में बनाया गया था, जिसे एवरग्रीन मरीन नामक कंपनी संचालित करती है। जहाज के चालक दल में 25 भारतीय भी शामिल हैं। जहाज के फंसने से नहर में यातायात पूरी तरह बंद हो गया। नहर के दोनों छोर पर करीब 150 जहाज और फंस गए। इन जहाजों में पेट्रोलियम प्रोडक्ट से लेकर खाने-पीने की चीजें लदी हुई थीं।

इसका भारत पर क्या असर?

भारत स्वेज नहर का इस्तेमाल उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और यूरोप से माल आयात और निर्यात के लिए करता है। इसमें फर्नीचर, चमड़े का सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, कपड़ा आदि शामिल हैं। भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार ये कारोबार लगभग 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होता है।

कितना पुराना है इस नहर का इतिहास?

1854 में फ्रांस के राजनयिक डि लेसेप्स ने स्वेज नहर को बनाने की योजना पर काम करना शुरू किया। 1858 में इसके लिए एक कंपनी की स्थापना की गई जिसका नाम था यूनिवर्सल स्वेज शिप कैनाल कंपनी। इस कंपनी को 99 साल के लिए नहर के निर्माण और संचालन का काम सौंपा गया। 1869 में नहर बनकर तैयार हो गई और इसे अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खोल दिया गया।

1956 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। स्वेज नहर कंपनी में ज्यादातर शेयर ब्रिटिश और फ्रेंच सरकार के थे। ऐसे में नासिर के इस कदम से दोनों देशों में बवाल मच गया। ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल ने नासिर को हटाने के लिए मिस्र पर हमला कर दिया। हालांकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की वजह से ब्रिटेन और फ्रांस को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी। इसके बाद से ही नहर पूरी तरह मिस्र के कब्जे में है।

इसके पहले कब-कब बंद रही स्वेज नहर?

  • 26 जुलाई 1956 को पहली बार नहर को बंद किया गया। वजह थी- नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा के बाद उपजा विवाद।
  • जून 1967 में इजराइल का मिस्र, सीरिया और जॉर्डन से युद्ध छिड़ गया। छह दिन चले इस युद्ध के दौरान दोनों ओर से हो रही गोलाबारी के बीच 15 जहाज स्वेज नहर के रास्ते में फंस गए। इनमें से एक जहाज डूब गया तो बाकी 14 अगले आठ साल तक कैद होकर रह गए। इस वजह से इस नहर से व्यापार 8 साल तक बंद रहा था।
  • 2004, 2006 और 2017 में जहाजों के फंसने की वजह से नहर में यातायात कुछ दिनों के लिए बाधित हो गया था।
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