अल-जवाहिरी की रहस्यमयी जिंदगी:पुलिस की मार से उगल दिए थे साथियों के नाम, मिस्र से भागा तो लादेन ने अपना डॉक्टर बना लिया

17 दिन पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी

अयमान अल-जवाहिरी। इजिप्ट की एक अमीर फैमिली में पैदा हुआ, डॉक्टरी पढ़ने के बाद जिहादी बना, लादेन की मौत के बाद अल-कायदा की कमान संभाली और 71 साल की उम्र में काबुल में एक ड्रोन स्ट्राइक में मारा गया।

अल-जवाहिरी की पूरी लाइफ स्टोरी इन्हीं चार लाइनों में सिमटी है। थोड़ा करीब से देखने पर उसकी जिंदगी से रहस्य, धोखा, साजिश और हिंसा की परतें उधड़नी शुरू हो जाती हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में हम अल-जवाहिरी की पूरी कहानी लेकर आए हैं...

ओसामा बिन लादेन के साथ अल-जवाहिरी की 2001 में खींची गई तस्वीर। सफेद पगड़ी, काली-सफेद घनी दाढ़ी और माथे पर चोट के गहरे निशान वाले अल-जवाहिरी को आतंकी संगठन अल कायदा के पीछे का दिमाग माना जाता था।
ओसामा बिन लादेन के साथ अल-जवाहिरी की 2001 में खींची गई तस्वीर। सफेद पगड़ी, काली-सफेद घनी दाढ़ी और माथे पर चोट के गहरे निशान वाले अल-जवाहिरी को आतंकी संगठन अल कायदा के पीछे का दिमाग माना जाता था।

इजिप्ट की अमीर फैमिली में पैदा हुआ

अयमान मुहम्मद रबी अल-जवाहिरी 19 जून 1951 को इजिप्ट के कायरो में पैदा हुआ। उसके पिता प्रोफेसर थे, चाचा 1 हजार साल पुरानी अल-अजहर यूनिवर्सिटी के बड़े इमाम थे। जवाहिरी के नाना कायरो यूनिवर्सिटी के प्रेसिटेंड और रियाद में किंग साउद यूनिवर्सिटी के फाउंडर और डायरेक्टर थे।

अल-जवाहिरी बहुत होशियार स्टूडेंट था। बचपन से ही उसने इस्लामिक लिटरेचर पढ़ना शुरू कर दिया। वो इस्लामिक थिंकर सैयद कुत्ब के विचारों से बहुत प्रभावित था। कुत्ब दुनिया को सिर्फ दो चश्मों से देखता था- अल्लाह को मानने वाले या काफिर (वो नरम मुस्लिमों को भी काफिर मानता था।) 1966 में कुत्ब को फांसी पर लटका दिया गया।

एक तरफ मेडिकल की पढ़ाई, दूसरी तरफ अंडरग्राउंड मिलिटेंट सेल

1966 में अल-जवाहिरी ने एक मिलिटेंट सेल बनाया, जिसका मकसद इजिप्ट से सेकुलर सरकार को हटाकर इस्लामिक सरकार बनाना था। उस वक्त जवाहिरी सिर्फ 15 साल का था। शुरुआत में पांच मेंबर से शुरू हुए इस ग्रुप में 1974 तक 40 मेंबर हो गए।

अल-जवाहिरी एक तरफ कायरो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था और दूसरी तरफ मिलिटेंट ग्रुप भी चलाता था। 1974 में ग्रेजुएट होने के बाद उसने तीन साल आर्मी में सेवाएं दीं। 1978 में सर्जरी में मास्टर डिग्री हासिल की।
अल-जवाहिरी एक तरफ कायरो यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था और दूसरी तरफ मिलिटेंट ग्रुप भी चलाता था। 1974 में ग्रेजुएट होने के बाद उसने तीन साल आर्मी में सेवाएं दीं। 1978 में सर्जरी में मास्टर डिग्री हासिल की।

कट्टरता में जवाहिरी से भी एक कदम आगे थी पत्नी अज्जा

लॉरेंस राइट की किताब 'द लूमिंग टॉवरः अल-कायदा एंड द रोड टु 9/11' के मुताबिक अज्जा एक बेहद धार्मिक लड़की थी। जो बुरका पहनती थी और पूरी रात कुरान पढ़ती थी। दोनों की मुलाकात परिवारों के जरिए हुई थी, लेकिन पहली बार जवाहिरी ने अज्जा का चेहरा शादी के दिन ही देखा था। अज्जा के कहने पर शादी में न म्यूजिक था और न फोटोग्राफी।

अज्जा की कट्टरता को 2001 की एक घटना से समझ सकते हैं। अक्टूबर 2001 में अमेरिकी हमले में घायल अज्जा मलबे में दबी थी। उसने मदद लेने और मलबे से बाहर आने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया ताकि कहीं बचाने वाले उसका चेहरा न देख लें। रिपोर्ट्स के मुताबिक अज्जा और जवाहिरी के चार बेटियां और एक बेटा था।

पुलिस की मार से उगल दिए थे साथियों के नाम

अब वापस आते हैं अल जवाहिरी की कहानी पर। 1981 में इजिप्ट के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या की साजिश में अल-जवाहिरी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारी ने जवाहिरी को थप्पड़ मारा तो जवाहिरी ने भी पलटकर एक थप्पड़ मार दिया। हालांकि बाद में पुलिस की मार के सामने वो टूट गया और अपने साथियों के नाम उगल दिए।

द न्यू यॉर्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अल-जवाहिरी को अपने साथियों को धोखा देने का बहुत पछतावा था। इसलिए 1984 में जैसे ही वो जेल से बाहर आया, इजिप्ट छोड़ दिया। इसके बाद वो सऊदी अरब और पेशावर पहुंचा। यहां वो ओसामा बिन लादेन का पर्सनल डॉक्टर बन गया। इसके बाद उसकी करतूतों की कहानी को पूरी दुनिया ने जाना।

अमेरिका में 9/11 के हमले के पीछे अल-जवाहिरी का ही दिमाग था?

  • 11 सितंबर 2001 को 19 आतंकियों ने चार कॉमर्शियल प्लेन हाइजैक किए। इनमें से दो प्लेन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ और साउथ टावर से टकरा दिए गए। वहीं, तीसरा प्लेन पेंटागन पर क्रैश किया गया था। इस हमले में 93 देशों के 2,977 लोग मारे गए थे। हमला आतंकी संगठन अल कायदा ने किया था।
  • बिन लादेन को 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड के तौर पर जाना जाता है। हालांकि अमेरिका के CIA और FBI अधिकारियों का कहना है कि ये अल जवाहिरी था, जिसे बिन लादेन का दिमाग कहा जाता था। अल जवाहिरी ही सभी हमलों की जिम्मेदारी और निगरानी को अंजाम देता था।
  • 2004 में एक हार्ड डिस्क से साबित हुआ था कि 9/11 हमलों से पहले अल जवाहिरी अल कायदा की निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में था। वह बिन लादेन और शीर्ष कमांडरों के बीच सूचना का आदान-प्रदान करता था। अल जवाहिरी इराक और पाकिस्तान के अल कायदा लीडर के साथ रिश्ते बनाए रखने में भी गहराई के साथ जुड़ा था।

कुछ और बड़े हादसे जिनके पीछे था अल कायदा का दिमाग...

1993 में सोमालिया में अमेरिकी सैनिकों की हत्या करवाने में अल जवाहिरी का ही दिमाग माना जाता है। 4 अक्टूबर 1993 का दिन था। अमेरिकी रेंजर्स और सोमालिया में अल कायदा से जुड़े मिलिशिया के बीच जबरदस्त युद्ध छिड़ा था। इस दौरान मिलिशिया लीडर जनरल आइदीद के लड़ाकों ने राजधानी मोगादिशु में दो अमेरिकी हेलिकॉप्टर गिरा डाले। इसमें 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए।
1993 में सोमालिया में अमेरिकी सैनिकों की हत्या करवाने में अल जवाहिरी का ही दिमाग माना जाता है। 4 अक्टूबर 1993 का दिन था। अमेरिकी रेंजर्स और सोमालिया में अल कायदा से जुड़े मिलिशिया के बीच जबरदस्त युद्ध छिड़ा था। इस दौरान मिलिशिया लीडर जनरल आइदीद के लड़ाकों ने राजधानी मोगादिशु में दो अमेरिकी हेलिकॉप्टर गिरा डाले। इसमें 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए।
7 अगस्त 1998 को नैरोबी, केन्या और तंजानिया के दार एस सलाम में अमेरिकी दूतावासों के सामने एक साथ धमाके कराने के पीछे भी जवाहिरी का ही दिमाग था। इस हमले में 224 लोग मारे गए, जिनमें 12 अमेरिकी शामिल थे।
7 अगस्त 1998 को नैरोबी, केन्या और तंजानिया के दार एस सलाम में अमेरिकी दूतावासों के सामने एक साथ धमाके कराने के पीछे भी जवाहिरी का ही दिमाग था। इस हमले में 224 लोग मारे गए, जिनमें 12 अमेरिकी शामिल थे।
वर्ष 2000 में अदन के यमन बंदरगाह पर अल कायदा से जुड़े आतंकियों ने विस्फोटक लदी नाव से अमेरिकी युद्धपोत USS कोल पर आत्मघाती हमला किया था। हमले में अमेरिका के 17 नौसैनिक मारे गए थे।
वर्ष 2000 में अदन के यमन बंदरगाह पर अल कायदा से जुड़े आतंकियों ने विस्फोटक लदी नाव से अमेरिकी युद्धपोत USS कोल पर आत्मघाती हमला किया था। हमले में अमेरिका के 17 नौसैनिक मारे गए थे।
2005 में लंदन में हुए बम धमाकों के पीछे भी जवाहिरी का ही हाथ माना जाता है। इसमें 56 लोगों ने जान गंवाई थी। जवाहिरी ब्रिटेन को इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन बताता था।
2005 में लंदन में हुए बम धमाकों के पीछे भी जवाहिरी का ही हाथ माना जाता है। इसमें 56 लोगों ने जान गंवाई थी। जवाहिरी ब्रिटेन को इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन बताता था।

बाइडेन बोले- ढूंढकर मारा, ऑपरेशन कामयाब

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अल जवाहिरी के मारे जाने के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा- 'हमने जवाहिरी को ढूंढकर मार दिया है। अमेरिका और यहां के लोगों के लिए जो भी खतरा बनेगा, हम उसे नहीं छोड़ेंगे। हम आतंक पर अफगानिस्तान में अटैक जारी रखेंगे।'

बाइडेन ने पहले ट्वीट भी किया, 'शनिवार को मेरे निर्देश पर अमेरिका ने अफगानिस्‍तान के काबुल में हवाई हमला किया, जिसमें अल कायदा का अमीर अयमान अल जवाहिरी मारा गया। इंसाफ हो गया।'

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