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भास्कर एक्सप्लेनर:चीन में 3 बच्चे पैदा करने वालों को मिलेंगी कई तरह की छूट, दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश को ऐसा क्यों करना पड़ा?

2 महीने पहलेलेखक: आबिद खान

चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने चाइल्ड पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। चीन ने अब थ्री-चाइल्ड पॉलिसी को मंजूरी दी है। यानी, चीन के लोग अब तीन बच्चे तक पैदा कर सकते हैं। सरकार ने कहा है कि वो तीन बच्चे पैदा करने वालों को विशेष आर्थिक प्रोत्साहन भी देगी।

चीन में लंबे समय से चाइल्ड पॉलिसी में बदलाव की मांग उठ रही थी। अपनी सख्त वन-चाइल्ड पॉलिसी की वजह से दुनियाभर में चीन की आलोचना भी होती रही है। इसी वजह से चीन ने 2016 में वन-चाइल्ड की जगह टू-चाइल्ड पॉलिसी लागू की थी। अब इसमें फिर से बदलाव किया गया है।

समझते हैं चीन की थ्री-चाइल्ड पॉलिसी क्या है? चीन को ये फैसला क्यों लेना पड़ा? क्या भारत में भी जनसंख्या नियंत्रण पॉलिसी की जरूरत है?

सबसे पहले समझिए चीन ने क्या फैसला लिया है?
चीन की सरकार ने 20 अगस्त को थ्री-चाइल्ड पॉलिसी को मंजूरी दी है। यानी, अब चीन के लोग तीन बच्चे पैदा कर सकेंगे। इसी साल मई में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने दो बच्चों की नीति में छूट देते हुए सभी पेरेंट्स को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी। 20 अगस्त को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्टैंडिंग कमेटी ने इस नीति को पास कर दिया है।

साथ ही पेरेंट्स ज्यादा बच्चे पैदा करें, इसलिए सरकार ने लोगों को आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया है। इस नए बिल में सरकार फाइनेंस, टैक्स, इंश्योरेंस, एजुकेशन, हाउसिंग और नौकरी जैसे कई क्षेत्रों में पेरेंट्स की मदद भी करेगी ताकि पेरेंट्स पर बच्चों की परवरिश का ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।

चीन ने ये फैसला क्यों लिया है?

देश में घटती युवा और बढ़ती बुजुर्ग आबादी

वन चाइल्ड पॉलिसी लागू करने के बाद चीन में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 26 करोड़ से भी ज्यादा हो गई है। अगले 10 साल में चीन की करीब एक चौथाई आबादी 65 साल से ज्यादा उम्र की होगी। देश में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इससे चीन के पास काम करने वाले युवाओं की कमी हो गई है। इस संकट से निपटने के लिए चीन को रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाना पड़ा है, ताकि काम करने वाले लोगों की कमी न हो।

इसी तरह चीन में काम करने वाली युवा आबादी लगातार कम हो रही है। 2010 तक चीन में 15-59 साल तक के उम्र की आबादी 70% से ज्यादा थी, जो 2020 में 63.4% ही रह गई है।

घटती जन्म दर
दुनिया के बड़े देशों में चीन की जन्म दर सबसे कम है और ये आंकड़ा लगातार कम हो रहा है। 2016 में चीन में 1.8 करोड़ बच्चे पैदा हुए थे। 2019 में ये आंकड़ा 1.4 करोड़ पर आ गया। वहीं, 2020 में ये आंकड़ा कम होकर 1.2 करोड़ पर आ गया है, जो 1960 के बाद सबसे कम है। 1960 में भयंकर सूखे की वजह से चीन में जन्म दर घट गई थी।

घटती जनसंख्या
वर्ल्ड बैंक का मानना है कि 2030-40 तक चीन की जनसंख्या पीक पर होगी, लेकिन उसके बाद चीन की जनसंख्या में गिरावट आने लगेगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन में आने वाले एक दशक में ही जनसंख्या में गिरावट आने लगेगी। 2100 तक चीन की आबादी करीब 1 अरब ही रह जाएगी, जो अभी 1.44 अरब है।

11 मई 2021 को जारी चीन की जनसंख्या के आंकड़ों में 2011 से 2020 के बीच चीन की जनसंख्या वृद्धि दर 5.38% रही। 2010 में यह 5.84% थी।

बढ़ता लिंगानुपात
चीन ने जब सख्त वन-चाइल्ड पॉलिसी लागू की तो लोगों को डर लगने लगा कि उनका एक बच्चा भी कहीं लड़की न हो जाए। इस वजह से देश में कन्या भ्रूण हत्या में भारी इजाफा हुआ। लोग गैरकानूनी तरीके से गर्भपात कराने लगे। नतीजा ये हुआ कि देश में लिंगानुपात बढ़ने लगा।

चीन ने क्यों लागू की थी वन चाइल्ड पॉलिसी?
चीन ने 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी इंट्रोड्यूस की थी। 1980 से इसे लागू कर दिया गया। तब चीन की आबादी 98.61 करोड़ थी और लगातार बढ़ रही थी। चीन को डर था कि बढ़ती आबादी देश के विकास में बाधा बन सकती है। इस वजह से ये पॉलिसी लागू की गई थी। इस दौरान लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक भी किया गया और सख्ती भी की गई। 1 से ज्यादा बच्चे होने पर लोगों पर फाइन लगाया गया, नौकरी से निकाला गया, महिलाओं को जबरन गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया और पुरुषों की जबरन नसबंदी की गई।

2016 तक चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू रही। माना जाता है कि इस दौरान चीन ने 40 करोड़ बच्चों को जन्म से रोका। इसका नुकसान ये हुआ कि देश में वृद्ध लोगों की आबादी बढ़ती रही और युवा आबादी कम हो गई। इस वजह से 2016 में थोड़ी छूट देते हुए टू-चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई।

क्या भारत में भी सख्त जनसंख्या नीति लागू करने की जरूरत है?
आबादी के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2027 तक भारत चीन को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा।

  • पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे ए.आर. नंदा कहते हैं कि चीन में जहां सबसे पहले इस तरह का कानून लागू हुआ उसे इसका बहुत नुकसान हुआ। खासतौर पर कन्या भ्रूण हत्या में बहुत इजाफा हुआ। इससे हो रहे नुकसान की वजह से चीन को पहले एक से दो और अब दो से तीन बच्चों की छूट देनी पड़ी।
  • जुलाई 2020 में लेंसेट ने जनसंख्या से जुड़ी एक स्टडी पब्लिश की थी। इस स्टडी में बताया गया था कि 2048 में भारत की आबादी 160 करोड़ हो जाएगी, जो कि पीक होगा, लेकिन साल 2100 तक भारत की आबादी 109 करोड़ होगी जो 2048 के आंकड़ों के लिहाज से 32% कम होगी।
  • लेंसेट की इसी स्टडी में बताया गया है कि भारत में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में लगातार गिरावट हो रही है। लेंसेट का अनुमान है कि 2040 तक भारत का TFR 1.29 तक पहुंच जाएगा। यानी, इस दौरान आबादी में तेजी से गिरावट होगी।
  • देश के ज्यादातर राज्यों में TFR 2.1 या उससे कम हो चुका है, जो UN के मुताबिक किसी भी आबादी के रिप्लेसमेंट पॉपुलेशन का स्टैंडर्ड है। यानी, हमारे देश की जनसंख्या वृद्धि की दर सही दिशा में जा रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे कुछ ही राज्य हैं, जहां TFR 2.1 से ज्यादा है। हालांकि, इन राज्यों में भी TFR तेजी से कम हो रहा है। आने वाले तीन से चार साल में यहां भी TFR 2.1 तक पहुंच जाएगा।

भारत में किन-किन राज्यों में लागू है जनसंख्या नीति?
राजस्थान देश का पहला राज्य है, जहां जनसंख्या नियंत्रण को लेकर इस तरह का कोई कानून पास हुआ। 1992 में वहां की राज्य सरकार इस पर कानून लेकर आई। 2000 की शुरुआत में कई और राज्यों ने भी इस पर कानून बनाए और लागू किए।

2017 में असम जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने वाला सबसे नया राज्य बना। अब तक 12 राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा कानून बन चुका है, लेकिन चार राज्यों ने इसे लागू करने के बाद वापस ले लिया।

इन राज्यों में जनसंख्या नीति लागू करने के क्या असर हुए?
भारत में ओडिशा में ये कानून करीब 28 साल से लागू है। वहां, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को इससे नुकसान हुआ है। ये लोग राज्य की पंचायत राज व्यवस्था की चुनाव प्रक्रिया से भी दूर हो गए। वहीं जिन राज्यों में ये पॉलिसी लागू की गई है, वहां इसकी इफेक्टिविटी को लेकर कभी कोई रिपोर्ट नहीं जारी की गई।

2006 में पूर्व IAS ऑफिसर निर्मला बुच ने इस पॉलिसी को लागू करने वाले पांच राज्यों पर स्टडी की थी। इस स्टडी में बताया गया कि दो बच्चों का नियम आने के बाद इन राज्यो में सेक्स-सिलेक्टिव और अनसेफ अबॉर्शन बढ़े हैं।

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