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भास्कर एक्सप्लेनर:US में कोरोना की पहली दवा के तौर पर रेमडेसिविर मंजूर, पर जान बचाने में वह भी नाकाम; जानें क्यों?

एक महीने पहले
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  • FDA ने मंजूरी दी, लेकिन WHO उस पर सहमत नहीं
  • दो-तीन हफ्तों में विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा WHO

अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पिछले हफ्ते कोरोना के इलाज के लिए पहली दवा के तौर पर रेमडेसिविर को मंजूरी दे दी है। यह दवा शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए डिजाइन की गई है। अब यह पहली दवा है जिसे FDA ने इस इंफेक्शन का इलाज करने के लिए मंजूरी दी है।

जब से महामारी शुरू हुई तब से ही इस दवा के इफेक्टिव होने पर बहस चल रही है। इस दवा को इबोला का इलाज करने के लिए डिजाइन किया गया था, जिसका कोरोना से कोई लेना-देना नहीं था। FDA के अप्रूवल के बाद भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दोहराया कि जान बचाने में रेमडेसिविर का कोई लेना-देना नहीं है। लिहाजा, ट्रीटमेंट में सावधानी बरतें। आइए जानते हैं कि US-FDA और WHO के विरोधी बयानों के मायने क्या हैं? FDA का अप्रूवल कैसा होता है?

सबसे पहले, इस ट्रीटमेंट पर FDA ने क्या कहा है?

  • FDA ने एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर को अस्पतालों में भर्ती वयस्कों और ऐसे बच्चों के इलाज के लिए अप्रूव किया है, जिनका वजन 40 किलो से ज्यादा है। एजेंसी ने साफ किया है कि यह दवा अस्पतालों या स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में ही दी जानी चाहिए, जहां एक्यूट केयर मुहैया कराने की क्षमता हो।
  • FDA के अप्रूवल से पहले कोरोनावायरस का कोई भी ट्रीटमेंट प्लान नहीं था। मई में एजेंसी ने रेमडेसिविर के लिए इमरजेंसी यूज अथॉराइजेशन (EUA) जारी किया था। यानी गंभीर मरीजों के लिए ही रेमडेसिविर का इस्तेमाल किया गया था। अगस्त में EUA को इसका दायरा बढ़ाया और सामान्य लक्षणं में भी यह दिया जाने लगा।

FDA का दवा को मंजूरी देने का तरीका क्या है?

  • FDA ने मई में जारी गाइडलाइंस में कहा था कि कोरोना से बचाने या इलाज के लिए दवा का रैंडमाइज्ड, प्लेसेबो-कंट्रोल्ड, डबल-ब्लाइंड ट्रायल्स होना चाहिए। इससे आने वाले डेटा के आधार पर इवैल्यूएशन होना चाहिए।
  • नई दवा को मंजूरी देने के लिए दो अहम शर्तें होती हैं- इफेक्टिवनेस और सेफ्टी। किसी दवा को अप्रूवल देने से पहले US-FDA बेनेफिट-रिस्क असेसमेंट करती है। यह पूरी तरह से साइंटिफिक स्टैंडर्ड्स पर बेस्ड होता है। रेमडेसिविर को भी इस प्रॉसेस से गुजरना पड़ा।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज (NIAID) ने अपने ट्रायल्स में देखा कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई वह 11 दिन में ठीक हो गए। सामान्य तौर पर मरीजों को 15-16 दिन लग रहे थे। इसका मतलब है कि रेमडेसिविर रिकवरी टाइम को 5 दिन कम कर देता है।
  • गिलीड ने दूसरे और तीसरे ट्रायल को स्पॉन्सर किया। इसमें भी सेफ्टी और इफेक्टिवनेस की जांच की गई। जिन लोगों में लक्षण गंभीर किस्म के नहीं थे, उन्होंने 5 दिन के ट्रीटमेंट प्लान को सपोर्ट किया। वहीं, गंभीर मरीजों में रिजल्ट एक जैसे ही आए।

FDA कोरोना के कितने तरह के ट्रीटमेंट्स की स्टडी कर रहा है?

  • FDA इस समय पांच अलग-अलग ट्रीटमेंट तरीकों का स्टडी कर रहा है। इसमें रेमडेसिविर जैसी एंटीवायरल दवाएं शामिल हैं जो शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकती है। इस तरह की दवाएं HIV, हर्प्स और हेपेटाइटिस C समेत अन्य रोगों में इस्तेमाल होती हैं।
  • अन्य ट्रीटमेंट्स में इम्यूनोमोड्युलर्स (इम्यून रिस्पॉन्स को नियंत्रित रखते हैं), एंटीबॉडी थैरेपी (एंटीबॉडी बढ़ाने पर फोकस), सेल थैरेपी (सेल्युलर इम्युनोथैरेपी) और जीन थैरेपी (जीन के एक्सप्रेशन में हस्तक्षेप कर प्रोडक्ट्स बनाना) शामिल है।

कोरोना के खिलाफ रेमडेसिविर कैसे काम करता है?

  • जब कोरोनावायरस शरीर में प्रवेश करता है तो वह जेनेटिक मटेरियल रिलीज करता है। वह बॉडी के मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते हुए बढ़ता है। जब मरीज को रेमडेसिविर दी जाती है तो वह वायरस को चकमा देता है और शरीर के मैकेनिज्म को रेप्लिकेट करता है। इससे वायरस को बढ़ने का अवसर नहीं मिलता और उसका बढ़ना रुक जाता है।

WHO इसे मंजूरी क्यों नहीं दे रहा? वह क्यों आगाह कर रहा है?

  • रेमडेसिविर को US-FDA के अप्रूवल के बाद WHO की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने पूरी दुनिया के ड्रग रेग्युलेटर्स से कहा है कि इस दवा का बहुत कम या कोई फायदा नहीं है। इस बात के पक्के सबूत हैं। इस वजह से इसे अप्रूवल देने में जल्दबाजी न करें।
  • दरअसल, WHO ने सबसे बड़े सॉलिडेरिटी ट्रायल्स किए थे और कोरोना मरीजों में रेमडेसिविर के असर को परखा था। इसमें यह कहा गया था कि न तो सेहत में कोई सुधार आया और न ही अस्पताल में भर्ती के उनके दिन इससे कम हुए।
  • WHO ने 22 मार्च से 4 अक्टूबर के बीच ट्रायल किया था। इसमें 6 WHO क्षेत्रों के 30 देशों में 405 अस्पतालों में 11,266 मरीजों पर यह ट्रायल किया गया। इसमें पाया गया कि रेमडेसिविर का कोरोना मौतों, वेंटिलेटर पर रखने का पीरियड और अस्पताल में भर्ती के दिनों पर कोई असर नहीं पड़ा।
  • FDA का अप्रूवल गिलीड के अपने ट्रायल के रिजल्ट्स के आधार पर है। इसमें 1062 लोगों पर ट्रायल्स हुए। कहा कि रेमडेसिविर रिकवरी टाइम को पांच दिन तक कम कर सकता है। ऑक्सीजन सपोर्ट ले रहे मरीजों में मौत का खतरा भी कम करता है।
  • WHO ने यह भी साफ किया है कि दो-तीन हफ्तों में वह रेमडेसिविर को लेकर स्थिति साफ करेगा। दरअसल, FDA के अप्रूवल के बाद वह दोबारा इस ट्रीटमेंट प्लान पर सोच रहा है। अगले हफ्ते गिलीड साइंसेस के दावों का आकलन करने के लिए मीटिंग भी बुलाई है।

भारत में रेमडेसिविर को लेकर क्या स्थिति है?

  • भले ही WHO ने रेमडेसिविर को लेकर आगाह किया हो, भारत में इसका इमरजेंसी इस्तेमाल धडल्ले से हो रहा है। इसकी तो डिमांड और सप्लाई को लेकर भी हालात खराब है। कई राज्यों में इसकी कमी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
  • कहा जा रहा था कि US-FDA के अप्रूवल के बाद भारत में इसकी कीमतें बढ़ेंगी। फिलहाल ऐसा दिख नहीं रहा। रेमडेसिविर की कीमत 2,900 रुपए से लेकर 5,000 रुपए प्रति डोज तक जा रही है। शुरुआत में इसकी कीमत 25 हजार रुपए तक गई थी। ब्लैक मार्केटिंग भी शुरू हो गई थी।
  • सिप्ला, हीटरो, डॉ. रेड्डी'ज, जुबिलिएंट लाइफसाइंसेस और जायडस कैडिला ने मई में रेमडेसिविर के जेनेरिक वर्जन को बनाने का लाइसेंस पाया था। इस समय भारतीय बाजारों में यह उपलब्ध है। कुछ राज्यों में सरकारों ने भी इसे कोरोना ट्रीटमेंट प्लान में शामिल कर रखा है।

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