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भास्कर एक्सप्लेनर:क्या है अमेरिका का फीनिक्स घोस्ट ड्रोन, जिससे यूक्रेन डोनबास में रूसी सेना को कर सकता है तबाह

8 दिन पहलेलेखक: नीरज सिंह

इस साल फरवरी में रूसी सेना का विशाल काफिला यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे के लिए आगे बढ़ रहा था। हालांकि, कुछ ही हफ्ते में यह दिखने लगा कि रूसी सेना आगे नहीं बढ़ पा रही है। जबकि लड़ाकू विमानों, टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के मामलों में रूसी सेना के आगे यूक्रेनी सेना कहीं नहीं ठहरती। ऐसे में बड़ा सवाल था कि ऐसा कौन-सा हथियार है, जिसने रूस के काफिले को रोक रखा है। इसका जवाब है यूक्रेन के शक्तिशाली ड्रोन।

अब अमेरिका ने यूक्रेन को नया आत्मघाती फीनिक्स घोस्ट ड्रोन दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ड्रोन यूक्रेन के डोनबास इलाके में रूसी सेना के लिए काल बन सकता है।

ऐसे में आइए जानते हैं कितना खतरनाक है अमेरिका का फीनिक्स घोस्ट ड्रोन? यूक्रेन ने अब तक किन ड्रोन के जरिए रूस के हवाई हमलों को रोके रखा है। यूक्रेन के लिए कितने कारगर साबित हुए हैं ड्रोन?

इन सवालों के जवाब जानने से पहले चलिए एक पोल में हिस्सा लेते हैं...

कितना खतरनाक है फीनिक्स घोस्ट ड्रोन, जिसे अमेरिका ने यूक्रेन को दिया है?

अमेरिका ने रूस से मुकाबला करने के लिए यूक्रेन को एकदम नया आत्मघाती फीनिक्स घोस्ट ड्रोन देने का ऐलान किया है। अमेरिका यूक्रेन को ऐसे 120 से ज्यादा ड्रोन देगा। इस ड्रोन की खासियत इसका आत्मघाती होना है। यानी यह रूसी अड्डों, टैंकों, सैनिकों या विमानों को बर्बाद करने के बाद खुद भी शहीद हो जाएगा। फीनिक्स घोस्ट को अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़ी कंपनी आइवेक्स एयरोस्पेस ने अमेरिकी वायु सेना के साथ मिलकर तैयार किया है। हालांकि, अभी तक फीनिक्स घोस्ट ड्रोन की कोई फोटो जारी नहीं की है।

पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी के मुताबिक, इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है। यूक्रेन के डोनबास इलाके में सबसे पहले इसका यूज हो सकता है, क्योंकि यह मैदानी इलाकों के लिए काफी मारक है। किर्बी का कहना है कि यूक्रेन के डोनबास इलाके में रूसी हमले को रोकने के लिए यह सबसे सटीक हथियार है। इस ड्रोन को विशेष रूप से यूक्रेनी सेना की जरूरत को देखते हुए डिजाइन किया गया है।

क्या फीनिक्स घोस्ट ड्रोन अमेरिकी स्विचब्लेड ड्रोन जैसा है?

नया ड्रोन पुराने स्विचब्लेड ड्रोन की तरह है, जिसे अमेरिकी कंपनी एयरोवाइरोन्मेंट ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के लिए 2012 में बनाया था। स्विचब्लेड ड्रोन लॉइटरिंग वेपंस की श्रेणी में आता है। ये वो हथियार हैं, जो दुश्मन के इलाके में मंडराते रहते हैं और तभी हमला करते हैं जब कोई टारगेट नजर आता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ये मिसाइल और ड्रोन का मिक्स है।

इस ड्रोन को बिना किसी खास टारगेट के लॉन्च कर दिया जाता है, वे एक इलाके के ऊपर मंडराते रहते हैं। फिर कंट्रोल स्टेशन से ऑपरेटर इस ड्रोन को एक टारगेट सौंपता है और वे हमला कर देते हैं। इनमें सेंसर लगे होते हैं, जो सामने पड़ने वाले टारगेट की शिनाख्त कर लेते हैं। स्विचब्लेड 300 मॉडल 10 किलोमीटर दूर तक जा सकता है और 15 मिनट तक हवा में रह सकता है। स्विचब्लेड 600 मॉडल 40 किलोमीटर दूर तक जा सकता है और 40 मिनट तक हवा में रह सकता है।

यूक्रेन किस स्ट्रैटिजी के साथ ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा‌?

यूक्रेन पर हमले की शुरुआत में रूस को उम्मीद थी कि कीव के एयरस्पेस पर उसका नियंत्रण हो सकेगा। हालांकि, यूक्रेन ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा था और ऐसे में रूस अब तक कीव के एयरस्पेस पर नियंत्रण नहीं कर पाया। एक्सपर्ट बताते हैं कि यूक्रेन रूसी सेना के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से ड्रोन को काम पर लगा रहा है।

एंटी-टैंक मिसाइल वाले रूसी टैंकों को नष्ट करने के लिए यूक्रेन ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इंफ्रारेड कैमरे वाले ड्रोन टैंकों के इंजन की गर्मी से उनके ठिकाने का पता लगा लेते हैं। ये आसान है, क्योंकि रूसी सैनिक ठंड से बचने के लिए टैंकों के इंजन चालू रख रहे हैं। यूक्रेनी सेना बम गिराने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है।

यूक्रेनी सेना ड्रोन के इस्तेमाल की अपनी काबिलियत का बेहतर प्रदर्शन कर अपने से कई गुना बड़ी रूसी सेना को आगे बढ़ने से रोक सकी है। इसी वजह से रूसी सेना अब तक यूक्रेनी हमलों का जवाब देने में सुस्त रही है।

आइए जानते हैं कि यूक्रेन रूस के खिलाफ किन प्रमुख घातक ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है…

बेयरेकतार टीबी-2 ड्रोन : रूस के ट्रेन, टैंक और जंगी जहाज को तबाह किया

यूक्रेन के पास तुर्की में बने बड़े बेयरेकतार टीबी-2 ड्रोन हैं, जो घातक हमला करने में सक्षम हैं। इस ड्रोन से यूक्रेन ने रूस की तेल से भरी पूरी ट्रेन उड़ा दी। ये ट्रेन रूस की सेना को ईंधन सप्लाई करने जा रही थी। यूक्रेन ने बेयरेकतार के जरिए ही फरवरी में रूसी सेना का विशाल काफिला कीव में नहीं आने दिया था। इस दौरान बेयरेकतार ने रूस के हजारों टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह कर दिया था।

यही नहीं, खार्किव के पास भी इस ड्रोन ने रूस की सेना में भीषण तबाही मचाई है। रूस की सेना के एक पूरे कॉलम को इसने नष्ट कर दिया है।

सैटेलाइट से ली गईं ये दो तस्वीरें हैं। पहली में रूसी सेना के टैंकरों का काफिला नजर आ रहा है, जबकि दूसरी में बेयरेकतार से की गई तबाही नजर आ रही है।
सैटेलाइट से ली गईं ये दो तस्वीरें हैं। पहली में रूसी सेना के टैंकरों का काफिला नजर आ रहा है, जबकि दूसरी में बेयरेकतार से की गई तबाही नजर आ रही है।

स्विचब्लेड ड्रोन : इतना सटीक कि एक व्यक्ति को भी निशाना बना सकता है

यूक्रेन के पास अमेरिका का स्विचब्लेड ड्रोन भी है, जो इतना सटीक है कि एक व्यक्ति तक को निशाना बना सकता है। अमेरिका ने यूक्रेन को ऐसे लगभग 300 ड्रोन भी दिए हैं। यूक्रेन रूस के खिलाफ युद्ध में इसका इस्तेमाल भी कर रहा है।

एक बड़े ड्रोन से उलट स्विचब्लेड की लॉन्चिंग के लिए ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है। मिसाइल से अलग ये आपको टारगेट की शिनाख्त का वक्त देता है और सतर्क करता है और फिर मिसाइल ड्रोन निशाने पर वार करता है। स्विचब्लेड ड्रोन को कैमीकाजे यानी आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है, क्योंकि वो लक्ष्य से टकराकर खुद भी नष्ट हो जाते हैं।

क्या अमेरिकी हथियारों के चलते ही अफगानिस्तान में हारा था रूस?

हां, 1986 से 1988 तक चले अफगान युद्ध की शुरुआत में रूस के हवाई हमले ने अफगानिस्तान के मुजाहिद्दीन को काफी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, इसके बाद जब मुजाहिद्दीन को कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलें मिलीं तो युद्ध का पूरा सिनैरियो ही बदल गया था। असल में यह अमेरिकी स्टिंगर मिसाइलें थीं।

अमेरिका ने इस युद्ध में अफगान मुजाहिद्दीनों को 1000 स्टिंगर मिसाइलें यूज करने के लिए दी थीं। इस दौरान अफगानिस्तान की तरफ से 340 स्टिंगर मिसाइलें दागी गई थीं, जिसने रूस के 269 विमानों को मार गिराया था। अफगानिस्तान में रूस के हार की वजह यही स्टिंगर मिसाइलें बनीं थीं। अमेरिका ने रूस के हमले के खिलाफ यूक्रेन को स्टिंगर मिसाइलें भी दी हैं। इन मिसाइलों के जरिए यूक्रेन ने रूस के 71 हेलिकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों को मार गिराया है।

ऐसे में एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका का आत्मघाती फीनिक्स घोस्ट ड्रोन रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन के लिए जीत का हथियार बन सकता है।

क्या रूस के पास भी घातक ड्रोन हैं?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक रूस ड्रोन पर ज्यादा निर्भर नहीं है। हालांकि, रूसी सेना ड्रोन का इस्तेमाल करती है। रूसी सेना का मुख्य ड्रोन ओरलान-10 है। सेंट पीट्सबर्ग के सेंटर फॉर स्पेशल टेक्नोलॉजी ने इस छोटे से टोही और निगरानी ड्रोन को बनाया गया है।

इसके डैनों का फैलाव 10 फीट। टोही सिस्टम अपने डिजाइन में सरल है। एरियल फोटोग्राफी के लिए कैनन ईओएस-डी सीरीज वाले कैमरे इस्तेमाल किए जाते हैं। थर्मल इमेजिंग और वीडियो कैमरे भी इसमें हैं।

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