भास्कर एक्सप्लेनर:पहले चीनी, अब पाकिस्तानी डिग्रियों की मान्यता रद्द; जानिए दो पड़ोसी देशों पर भारत के एक्शन की वजह

12 दिन पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

अगर आप भारतीय छात्र हैं और विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, तो पाकिस्तान को अपनी लिस्ट से बाहर रखिएगा। दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन यानी UGC और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी AICTE ने अपनी नई एडवायजरी में भारतीय छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए पाकिस्तान न जाने की सलाह दी है।

इस एडवायजरी के मुताबिक, पाकिस्तान से हासिल कोई भी डिग्री भारत में मान्य नहीं होगी और न ही इस डिग्री को भारत में नौकरी पाने के लिए योग्य माना जाएगा। पिछले ही महीने सरकार ने चीन से हायर एजुकेशन हासिल करने वालों को भी सावधान किया था।

दरअसल, चीन के कोरोना प्रतिबंधों की वजह से हजारों की संख्या में भारतीय छात्र चीन वापसी नहीं कर पा रहे हैं और उनकी पढ़ाई अधर में लटकी हुई है। साथ ही हाल ही में रूस के साथ युद्ध की वजह से भी हजारों की संख्या में देश लौटने वाले भारतीय छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। सरकार के इस फैसले को इन्हीं वजहों से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे में चलिए समझते हैं कि आखिर क्या है चीन के बाद पाकिस्तान से हासिल डिग्रियों की मान्यता रद्द करने की वजह? चीन और पाकिस्तान में हैं कितने भारतीय छात्र? पाकिस्तानी डिग्रियों पर रोक लगने से कैसे कश्मीरी छात्रों को होगा नुकसान?

पाकिस्तानी डिग्रियों की मान्यता रद्द

  • भारत में हायर एजुकेशन के रेगुलेटर्स UGC और AICTE ने 23 अप्रैल को जारी अपनी नई एडवायजरी में भारतीय छात्रों से पाकिस्तान के किसी कॉलेज या शैक्षिक संस्थान में दाखिला न लेने की सलाह दी है।
  • UGC और AICTE ने अपनी संयुक्त एडवायजरी में कहा है कि पाकिस्तान से हासिल की गई कोई भी डिग्री भारत में नौकरी पाने या हायर एजुकेशन के लिए मान्य नहीं होगी।
  • ये नियम सभी भारतीय नागरिकों और विदेश में रहने वाले भारतीयों पर लागू होगा।
  • भारत की नागरिकता पाने वाले प्रवासियों और उनके बच्चों को सशर्त इस नियम से छूट दी गई है।
  • UGC और AICTE के मुताबिक, प्रवासी और उनके बच्चे, जिन्होंने पाकिस्तान में हायर एजुकेशन हासिल किया है और उन्हें भारत ने नागरिकता प्रदान की है। ऐसे व्यक्ति गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी के बाद भारत में नौकरी की तलाश के लिए पात्र होंगे।'
  • पिछले महीने चीन में शिक्षा हासिल करने को लेकर चेतावनी जारी करने के बाद UGC और AICTE की ये किसी पड़ोसी देश से शिक्षा हासिल न करने को लेकर दूसरी ऐसी एडवायजरी थी।

पाक ने की भारत से रुख स्पष्ट करने की मांग की
UGC और AICTE द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर भारत को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि हमने इस सार्वजनिक सूचना के संदर्भ में भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। पाकिस्तान के पास भारत के इस खुले तौर पर भेदभावपूर्ण और अकथनीय कार्रवाई के जवाब में उचित उपाय करने का अधिकार सुरक्षित है।

पाकिस्तान की डिग्रियों की मान्यता रद्द, कश्मीरी छात्र होंगे प्रभावित
सरकार के पाकिस्तान से हासिल डिग्रियों की मान्यता रद्द करने का असर मुख्यत: कश्मीरी छात्रों पर पड़ेगा। दरअसल, पाकिस्तान में भारत के सबसे ज्यादा छात्र कश्मीर से ही हैं।

  • पाकिस्तान में भारतीय छात्रों की सटीक संख्या कितनी है, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है।
  • पाकिस्तान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों की संख्या 200 से 1000 तक होने का अनुमान है।
  • एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में भारत से 200 से ज्यादा छात्र पाकिस्तान में शिक्षा हासिल कर रहे थे, जिनमें से ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के थे।
  • एक रिपोर्ट के मुताबिक, J&K स्टूडेंट एसोसिएशन के फाउंडर प्रेसिडेंट नासिर खुमैनी के अनुसार, पाकिस्तान में 1000 कश्मीरी छात्र हैं।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर के ज्यादातर छात्र पाकिस्तान में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जाते हैं।

2020 में PoK में पढ़ाई न करने को लेकर जारी हुई थी चेतावनी
2020 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया यानी MCI ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के छात्रों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK से मेडिकल कोर्स नहीं करने को लेकर सावधान किया था। MCI ने अपनी एडवायजरी में कहा था कि वैसे तो जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा है, लेकिन PoK में स्थित संस्थानों को इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के तहत मान्यता नहीं प्राप्त है, ऐसे में वहां से हासिल डिग्रियां भारत में मान्य नहीं हैं।

पाक में कश्मीरी स्टूडेंट के एडमिशन के पीछे का खेल
पाकिस्तान में पढ़ाई के लिए ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के छात्र ही जाते हैं। पाकिस्तान ने इसका भी इस्तेमाल अपना एजेंडा चलाने में किया है। 2020 में पाकिस्तान ने अपने यहां के कॉलेजों में कश्मीरी छात्रों के लिए 1600 स्कॉलरशिप ऑफर की थी। तब सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान में भारतीय छात्रों को आसानी से कट्टरपंथी बनाए जाने की आशंका जताई थी। PoK के कॉलेजों में कश्मीरी छात्रों के लिए 6% आरक्षण के साथ ही पाकिस्तानी कॉलेजों में भी कुछ सीटें आरक्षित हैं।

पाकिस्तान में पढ़ाई और आतंक का कनेक्शन
पिछले साल दिसंबर में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कश्मीर में पाकिस्तान में एडमिशन के नाम पर अलगाववादियों द्वारा चलाए जा रहे एक रैकेट का भांडाफोड़ किया था।

  • पुलिस के मुताबिक, कश्मीर के अलगाववादियों ने पाकिस्तान की MBBS सीटों को कश्मीरी छात्रों को बेचकर उससे मिले पैसों को घाटी में अशांति फैलाने के लिए आतंकियों को दिए थे।
  • पुलिस के मुताबिक, इस मामले में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक नेता समेत 8 अन्य लोग शामिल थे। इन पर पाकिस्तान की MBBS समेत अन्य कोर्सेज की सीटों को कश्मीरी छात्रों को बेचने और उन पैसों का इस्तेमाल घाटी में अलगाववाद फैलाने और आतंकियों की मदद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप है।
  • अगस्त 2021 में भी जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हुर्रियत और टेटर फंडिंग के जरिए जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए पाकिस्तान में मेडिकल सीट खरीदने के मामले में 4 लोगों को अरेस्ट किया था।
  • 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने टेरर फंडिंग केस में अपनी चार्जशीट में बताया था कि कैसे कश्मीर में अलगाववादी नेताओं ने पाकिस्तान के प्रति वफादार बने रहने के लिए अपने वॉर्ड के लिए MBBS सीटों के लिए सौदेबाजी की थी।

चीन में पढ़ाई न करने को लेकर जारी हुई थी चेतावनी

  • पाकिस्तान में पढ़ाई न करने की एडवायजरी से एक महीने पहले सरकार ने चीन में पढ़ाई न करने को लेकर छात्रों को आगाह किया था। UGC के फैसले से ठीक पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारतीय छात्रों की चीनी यूनिवर्सिटीज में वापसी को लेकर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से चर्चा की थी।
  • मार्च के आखिरी हफ्ते में जारी UGC की एडवायजरी में छात्रों से चीन में पढ़ाई के लिए न जाने की अपील की गई थी। साथ ही सरकार ने चीन से हासिल ऑनलाइन डिग्रियों की मान्यता रद्द कर दी थी।
  • UGC ने अपनी एडवायजारी में कहा था कि चीन की कई यूनिवर्सिटीज ने आगामी एकैडेमिक ईयर के लिए विभिन्न डिग्रियों में एडमिशन के लिए नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
  • छात्रों के लिए ये जानना जरूरी है कि चीन ने कोरोना की वजह से सख्त यात्रा प्रतिबंध लगाते हुए नवंबर 2020 से सभी वीजा सस्पेंड कर दिए हैं।
  • इन प्रतिबंधों की वजह से बड़ी संख्या में भारतीय छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए चीन नहीं लौट पाए हैं। अब तक प्रतिबंधों में ढील नहीं दी गई है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के कॉलेजों में 20 हजार भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। कोरोना की वजह से चीन की सारी यूनिवर्सिटीज बंद हैं और ज्यादातर भारतीय छात्र देश वापस लौट चुके हैं।
  • इससे पहले चीनी अधिकारियों ने कहा था कि कोर्सेज ऑनलाइन कराए जाएंगे, लेकिन UGC ने स्पष्ट किया है कि चीन से हासिल की गई ऑनलाइन डिग्रियों को देश में मान्यता नहीं मिलेगी, अगर उनके लिए पहले से अनुमति नहीं ली गई है।
  • UGC के फैसले के बाद चीन से पढ़ाई कर रहे हजारों भारतीय मेडिकल छात्रों को डर है कि अगर उनकी पढ़ाई ऑनलाइन जारी रही तो प्रैक्टिल के अभाव में उनकी डिग्रियां अमान्य हो सकती हैं।
  • इससे पहले नेशनल मेडिकल काउंसिल यानी NMC ने 08 फरवरी को स्पष्ट किया था कि विदेश से मेडिकल पढ़ाई करने वाले ऐसे छात्र जिन्होंने मेडिकल कोर्स ऑनलाइन किया है, वे भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन यानी FMGE में बैठने के पात्र नहीं होंगे।

सरकार ने क्यों लगाई चीन और पाकिस्तान में पढ़ाई पर रोक?
हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2022 में 20 मार्च तक 1.33 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। 2021 में 4.44 लाख और 2020 में 2.59 लाख भारतीय छात्र विदेश गए थे।

तो हाल के दिनों में पहले चीन और फिर पाकिस्तानी में पढ़ाई करने से भारतीय छात्रों को रोकने की वजह क्या है?

AICTE के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे का कहना है कि विदेशों में ऐसे कई संस्थान हैं जो कि अच्छे नहीं हैं और चीन और यूक्रेन से मिला अनुभव दिखाता है कि विदेश में पढ़ने वाले बच्चे अपनी आधी पढ़ाई के बीच में फंस जाते हैं, इसलिए छात्रों और माता-पिता को सावधान करना जरूरी है।

  • जानकारों का मानना है कि चीन में पढ़ाई करने से रोकने की वजह वहां लगाए कोरोना प्रतिबंधों की वजह से 20 हजार भारतीय छात्रों की पढ़ाई बाधित होना है।
  • सरकार रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से यूक्रेन में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटने हुए मजबूर छात्रों की वजह से भी भारतीय छात्रों को विदेश में पढ़ाई का चुनाव समझदारी से करने की सलाह दे रही है।
  • दरअसल, हाल ही में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद 18 हजार भारतीय छात्र यूक्रेन में फंस गए थे, जिन्हें सरकार सुरक्षित देश वापस लेकर आई थी।
  • यूक्रेन से लौटे छात्रों की पढ़ाई बीच में ही अटक गई है। इसमें यूक्रेन से हजारों की संख्या में देश लौटे मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र भी शामिल हैं।
  • सरकार भारतीय छात्रों की पढ़ाई को बर्बाद होने से बचाने के लिए यूक्रेन जैसे एजुकेशन सिस्टम वाले उसके पड़ोसी देशों के कॉलेजों से संपर्क कर रही है, ताकि भारतीय छात्र अपनी पढ़ाई वहां से पूरी कर सकें।
  • पाकिस्तान के मामले में सरकार का ये कदम दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों की वजह से माना जा रहा है। साथ ही पाकिस्तान में इमरान सरकार गिरने से वहां के अस्थिर राजनीतिक और खस्ताहाल आर्थिक हालात को भी इसकी वजह माना जा रहा है।