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भास्कर एक्सप्लेनर:वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे आज; 7 फैक्ट्स के साथ जानिए इसके बारे में सबकुछ

एक महीने पहले
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तंजानिया के जंगल में दो शावक। फोटोः पराग कुलकर्णी - Dainik Bhaskar
तंजानिया के जंगल में दो शावक। फोटोः पराग कुलकर्णी

पूरी दुनिया हर साल 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस या वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे मनाती है। दुनियाभर की सरकारें इस दिन वन्यजीवों की सुरक्षा और वनस्पतियों की लुप्त हो रही प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करती है।

2014 में हुई शुरुआतः 3 मार्च 1973 को लुप्त हो रही जंगली फल-फूलों के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड को प्रतिबंधित करने के यूनाइटेड नेशंस के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी दिन की याद में 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 63वें सत्र में तय हुआ कि हर साल 3 मार्च को वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे मनाया जाए। पहला वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे 2014 में मना था। 2021 के लिए वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे पर जंगलों में रहने वाले लोगों और वन्यप्राणियों के साथ जीवनयापन की थीम रखी गई है। न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर पर इस बार कोविड-19 की वजह से वर्चुअल ग्लोबल इवेंट आयोजित होगा।

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पराग कुलकर्णी ने अफ्रीका के नदुतु कंजर्वेशन एरिया सेरेंगेटी में खींची यह तस्वीर भास्कर को उपलब्ध कराई है। ए.ओ. स्मिथ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पराग शौकिया फोटोग्राफर हैं, जिन्होंने कोई बेसिक ट्रेनिंग नहीं ली है।
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पराग कुलकर्णी ने अफ्रीका के नदुतु कंजर्वेशन एरिया सेरेंगेटी में खींची यह तस्वीर भास्कर को उपलब्ध कराई है। ए.ओ. स्मिथ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पराग शौकिया फोटोग्राफर हैं, जिन्होंने कोई बेसिक ट्रेनिंग नहीं ली है।

7 पॉइंट्स में जानिए दुनिया में वन्यजीवन के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं-

1. 10 लाख प्रजातियां खतरे में
पशुओं और पौधों की 10 लाख से ज्यादा प्रजातियां खत्म होने की कगार पर हैं। इस पर नजर रखने वाली संस्था IPBES के मुताबिक, इंसानों के इतिहास में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनी है।

2. 1970 के बाद दो-तिहाई घट गए जानवर
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, 1970 और 2016 के बीच जानवरों की संख्या 68% तक घट गई है। यानी 1970 के मुकाबले आज धरती पर जानवर दो-तिहाई कम हैं।

पराग ने यह तस्वीर कर्नाटक के नागरहोल नेशनल पार्क एंड टाइगर रिजर्व में खींची थी।
पराग ने यह तस्वीर कर्नाटक के नागरहोल नेशनल पार्क एंड टाइगर रिजर्व में खींची थी।

3. अमेरिका के ट्रॉपिकल इलाकों में सबसे बड़ी गिरावट
WWF की स्टडी कहती है कि अमेरिका के ट्रॉपिकल इलाकों में 1970 के बाद के 50 साल में जानवरों की संख्या में 94% तक गिरावट आई है। यह दुनियाभर में सबसे ज्यादा है।

4. तेजी से घट रही हैं प्रजातियों की संख्या
अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी की स्टडी कहती है कि 6 करोड़ वर्ष पहले जब इंसान नहीं थे, तब के मुकाबले आज 1,000 गुना ज्यादा तेजी से प्रजातियों की संख्या घट रही है। यह रिपोर्ट बताती है कि जो रह गया है, उसे बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।

बांधवगढ़ नेशनल पार्क में पानी पीता बाघ। फोटोः पराग कुलकर्णी
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में पानी पीता बाघ। फोटोः पराग कुलकर्णी

5. ताजे पानी में रहने वाले जानवरों की प्रजातियों में गिरावट सबसे तेज
WWF की ही रिपोर्ट का दावा है कि ताजे पानी में रहने वाले जानवरों की नस्लों में सबसे तेजी से कमी हुई है। 1970 से 2018 के बीच औसतन 84% की गिरावट आई है। 2016 के मुकाबले दो साल में यह आंकड़ा 1% रह गया।

ताडोबा नेशनल पार्क में पेड़ पर आराम करता तेंदुआ। फोटोः पराग कुलकर्णी
ताडोबा नेशनल पार्क में पेड़ पर आराम करता तेंदुआ। फोटोः पराग कुलकर्णी

6. खेती में चली गई जंगलों की ज्यादातर जमीन
IPBES के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका में 1980 से 2000 के बीच 10 करोड़ हैक्टेयर जंगल खत्म हो गए।

7. पक्षियों की प्रजातियों के लिए बढ़ा खतरा
IPBES की रिपोर्ट कहती है कि घरेलू पक्षियों की संख्या में 2016 से 3.5% तक की कमी आई है। लुप्त हो रहे 23% पक्षियों पर क्लाइमेट चेंज का असर दिख रहा है।

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