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गोवा में एंटी इंकम्बेंसी के बावजूद BJP मजबूत क्यों:5 साल में कांग्रेस के 17 में से 15 विधायकों ने पार्टी छोड़ी, केजरीवाल-ममता के आने से वोट बंटना तय

पणजी15 दिन पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

करीब 11.56 लाख वोटर्स वाले गोवा में बीते 10 सालों से BJP सत्ता में है। उसके खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी भी है, इसके बावजूद दूसरी पार्टियों से अभी तक मजबूत नजर आ रही है। BJP को कोई और नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियां ही मजबूत स्थिति में लाती दिख रही हैं।

दरअसल 18 लाख पॉपुलेशन वाले देश के इस सबसे छोटे राज्य में ममता बनर्जी की TMC और अरविंद केजरीवाल की AAP ने पूरी ताकत झोंक दी है। ममता बंगाल के बाहर BJP को अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं, तो केजरीवाल भी पार्टी का दायरा बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन इन पार्टियों के गोवा में एक साथ एक्टिव होने से विपक्षी वोट बंटते नजर आ रहे हैं।

साल 2017 तक कांग्रेस ही गोवा की मुख्य विपक्षी पार्टी थी। 2017 में तो कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 17 सीटें जीती थीं, लेकिन फिर भी वो सरकार नहीं बना सकी। इस बार विपक्ष में कांग्रेस के साथ ही ममता और केजरीवाल की पार्टियां हैं। गोवा के सीनियर जर्नलिस्ट किशोर नाइक गांवकर के मुताबिक, यदि विपक्षी पार्टियां एक साथ BJP को टक्कर देतीं तो बड़ा नुकसान पहुंचा सकती थीं। अलग-अलग लड़ने से वोट बंटेंगे और फायदा BJP को होगा।

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1.BJP
मनोहर पर्रिकर के जाने के बाद BJP का यह गोवा में पहला चुनाव है। पिछले चुनाव तक पूरा मैनेजमेंट पर्रिकर देखा करते थे, लेकिन इस बार सेंट्रल लीडरशिप सब डिसाइड कर रही है। बीते 5 सालों में कांग्रेस से बड़ी संख्या में नेता BJP में शामिल हुए हैं। ऐसे में पार्टी के लिए टिकट बांटना इस बार बहुत कठिन होने वाला है।

गांवकर कहते हैं, एक तरफ BJP का खुद का कैडर है, जो सालों से पार्टी के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस से शामिल किए गए अनुभवी नेता हैं। ऐसे में जिसका भी टिकट कटेगा वो आखिरी समय में पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करेगा। बागी होने वाले नेता दूसरी पार्टियों में शामिल होकर BJP का गणित बिगाड़ सकते हैं।

हालांकि, पार्टी के लिए अच्छी बात ये है कि एंटी इंकम्बेंसी के बावजूद वो दूसरी पार्टियों से आगे नजर आ रही है, क्योंकि बूथ लेवल तक उसका संगठन बहुत मजबूत है और राज्य से लेकर केंद्र तक में सरकार है। इसका फायदा BJP को मिल रहा है।

2.AAP
अरविंद केजरीवाल की AAP ने बीते 5 सालों में ग्राउंड पर काफी काम किया है। केजरीवाल खुद ही आए दिन गोवा का दौरा कर रहे हैं। पार्टी 20 कैंडीडेट्स की लिस्ट अनाउंस भी कर चुकी है, लेकिन AAP ने अभी तक अपना CM फेस अनाउंस नहीं किया।

जबकि, अब आम आदमी जानना चाहता है कि, चुनाव जीतने के बाद उसका नेता कौन होगा। AAP के साथ दूसरी दिक्कत ये है कि, वो इसके पहले गोवा में कभी नहीं जीती। BJP जैसा मजबूत संगठन भी उनके पास नहीं है। अधिकतर नए नेताओं पर पार्टी दांव खेल रही है।

3.TMC
ममता बनर्जी की TMC कांग्रेस से आए नेताओं के भरोसे है। गोवा के पूर्व CM रहे लुईजिन्हो फलेरियो TMC में शामिल हो चुके हैं, लेकिन उन्हें पार्टी ने CM फेस अनाउंस नहीं किया है। पार्टी एडवाइजर प्रशांत किशोर कह चुके हैं कि, चुनाव के पहले पार्टी CM का चेहरा बताएगी, लेकिन TMC को अभी तक कोई भी ऐसा पॉपुलर चेहरा नहीं मिल पाया जो उसे जिता सके।

गांवकर के मुताबिक, TMC 'मोदी वर्सेज ममता' का नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है। वो यह बता रही है कि, सिर्फ ममता ही देश में एक ऐसी नेता हैं जो मोदी को टक्कर दे सकती हैं, लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर नजर नहीं आ रहा। एक खास वर्ग को छोड़ दिया जाए तो PM मोदी की पॉपुलेरिटी राज्य में बनी हुई है। कई लोग लोकल लीडरशिप से नाराज हैं, लेकिन मोदी से खुश हैं। ऐसे में BJP को मोदी मैजिक का फायदा मिल सकता है।

4.कांग्रेस
कांग्रेस ने साल 2017 में 17 विधायक जीते थे, लेकिन अब पार्टी में 2 ही विधायक रह गए हैं। इसलिए इस बार पार्टी नए चेहरों को टिकट देने वाली है। कांग्रेस को इसका फायदा भी मिल सकता है, क्योंकि सभी नए चेहरे होंगे और कांग्रेस राज्य में पहले सत्ता में भी रही है। हालांकि, सही कैंडीडेट का चुनाव नहीं हुआ तो नुकसान हो जाएगा।

गांवकर कहते हैं, कांग्रेस में समय पर निर्णय न होना ही सबसे बड़ी परेशानी है। पार्टी सही टाइम पर सही लोगों को टिकट देती है तो उसे फायदा होगा, क्योंकि कांग्रेस में सालों से सेकंड लीडरशिप को टिकट नहीं मिले थे। इस बार मौका मिला है।

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