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आज की पॉजिटिव खबर:18 साल के अस्थमा पेशेंट ने बनाया बेहद सस्ता एयर प्यूरीफायर, पढ़ाई के साथ अब लाखों का कारोबारी

2 महीने पहलेलेखक: सुनीता सिंह

दिल्ली दुनिया के उन शहरों में शुमार है, जहां एयर क्वालिटी बहुत खराब है। ज्यादातर घरों में एयर प्यूरीफायर लगाना मजबूरी है, लेकिन महंगा होने के कारण सभी इसे अफोर्ड नहीं कर पाते हैं। इस परेशानी को देखते हुए दिल्ली के रहने वाले कृष ने दुनिया का पहला इको-फ्रेंडली एयर प्यूरीफायर बनाया है जो 100% मेड इन इंडिया भी है।

कृष ने दूसरों की मदद करने के मकसद से मात्र 18 साल की उम्र में स्टार्टअप की शुरुआत की और अपने ब्रांड का पेटेंट करा कर उसका ट्रेडमार्क भी ले लिया। कृष आज पढ़ाई के साथ लाखों का बिजनेस संभाल रहे हैं और उन्होंने कई लोगों को रोजगार भी दिया है। आज इनके ब्रांड का प्यूरीफायर पूरे देश में बिक रहा है। दो साल में हजारों प्यूरीफायर बेचने के अलावा उन्होंने इसे कई जरूरतमंदों को डोनेट भी किया गया है।

आइये जानते हैं कृष के प्यूरीफायर आइडिया से ब्रांड बनाने तक की कहानी …

अस्थमा से परेशान हुए तो आया लोगों की मदद करने का आइडिया

नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत के साथ कृष चावला
नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत के साथ कृष चावला

20 वर्षीय कृष चावला दिल्ली के रहने वाले हैं। कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। फिलहाल कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। बचपन से कृष को अस्थमा की बीमारी थी, जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत होती थी। दिल्ली की खराब एयर क्वालिटी की वजह से उन्हें घर में भी मास्क और नेबुलाइजर की जरूरत पड़ती थी। कृष बताते हैं, “मैं घर के बाहर मास्क के बिना नहीं जा सकता था। मुझे कई बार अस्थमा का अटैक भी आया। मेरी सेहत की वजह से मेरे घर में हमेशा प्यूरीफायर ऑन रहता था, ताकि मैं बीमार न हो जाऊं। एक दिन मैं एक्सीडेंटली प्यूरीफायर को खोल दिया, तब मुझे पता चला कि इसे बनाना तो आसान है। मेरे घर में जो प्यूरीफायर लगा था, वह काफी महंगा था। मैं इंजीनियरिंग का स्टूडेंट था तो मुझे मशीनों के बारे में पता है और तब मुझे आइडिया आया की सस्ता प्यूरीफायर भी बनाया जा सकता है।”

कई रिजेक्शन के बाद तैयार किया प्यूरीफायर

बहुत ही कम उम्र में कृष ने दुनिया का पहला इको-फ्रेंडली प्यूरिफायर बनाया।
बहुत ही कम उम्र में कृष ने दुनिया का पहला इको-फ्रेंडली प्यूरिफायर बनाया।

मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर एयर प्यूरीफायर महंगे होते हैं, जिसे सब अफोर्ड नहीं कर सकते। कृष के अनुसार प्यूरीफायर में लगने वाले पार्ट बहुत महंगे नहीं होते हैं, बावजूद इसके मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर प्यूरीफायर काफी महंगे होते हैं। कृष ने मात्र 18 साल की उम्र में ये तय किया कि वो देश में ही सस्ता और अच्छा प्यूरीफायर बनाएंगे।

2017 में एयर प्यूरीफायर बनाने की शुरुआत की गई, जिसमें कुछ खास बातों पर ध्यान दिया गया। शुरुआत में प्यूरीफायर के तकरीबन 320 प्रोटोटाइप बनाए, लेकिन इनमें से कोई भी मार्केट के पैमानों पर खरा नहीं उतरा। इस काम में कृष के पिता ने भी उनको सपोर्ट किया और आखिरकार कई महीनों की मेहनत के बाद फाइनल प्रोटोटाइप तैयार किया गया जिसे ‘Breathify’ नाम से पेटेंट भी कराया और उसका ट्रेडमार्क भी लिया।

कृष बताते हैं ,”मेरे पास आईडिया तो था लेकिन किसी तरह का अनुभव नहीं था। जिस तरह का एयर प्यूरीफायर मैं बनाना चाहता था उसके लिए मुझे लगातार दो साल तक मेहनत करनी पड़ी और 2019 में ‘Breathify’ को लोगों तक पहुंचने में कामयाब रहा।”

कम उम्र में दुनिया का पहला इको-फ्रेंडली प्यूरीफायर

कृष अपने बिजनेस को बढ़ाने के साथ-साथ कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई भी कर रहे हैं।
कृष अपने बिजनेस को बढ़ाने के साथ-साथ कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई भी कर रहे हैं।

कृष का एयर प्यूरिफायर दुनिया का पहला इको-फ्रेंडली प्यूरीफायर है जो 98% प्लास्टिक फ्री है। इसे अल्ट्रा-ड्यूरेबल कंप्रेस्ड वुड से बनाया गया है। कृष बताते हैं कि प्यूरीफायर बनाने का मकसद ही लोगों को कम कीमत में प्यूरीफायर देना था वो भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना। कृष ने प्यूरीफायर बनाने के लिए कुछ पैमाने तय किये जैसे प्यूरीफायर की कीमत दूसरे ब्रांड की तुलना में बहुत कम और क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए। इसके अलावा प्लास्टिक का इस्तेमाल न के बराबर हो, ताकि पर्यावरण को भी सुरक्षित रहे।

कृष बताते हैं, “मैंने अपने ब्रांड में ‘रिवर्स एयर तकनीक’ का इस्तेमाल किया है। जिससे हवा ज्यादा से ज्यादा शुद्ध होती है। साथ ही इसमें हाई ग्रेड HEPA फिल्टर का इस्तेमाल हुआ है। इसमें तीन तरफ से हवा अंदर जाती है और शुद्ध होती रहती है। इसलिए आप इसे कहीं भी रखें, यह अपना काम करता रहेगा। यह सभी तरह के हानिकारक प्रदूषकों से आपको सुरक्षित रखता है।”

बाकी कंपनियों की तुलना में सस्ता है

कृष बिजनेस को बढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा भी करते हैं।
कृष बिजनेस को बढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा भी करते हैं।

कृष ने स्टार्टअप की शुरुआत एक लाख की लागत से छोटे स्तर पर की और आज इ-कॉमर्स के जरिये अपने प्रोडक्ट को पूरे देश में बेच रहे हैं। यही नहीं कम उम्र में तकरीबन 10 लोगों को रोजगार भी दिया है।

कृष का मकसद स्टार्टअप से लोगों की मदद करना था और वो ये करने में कामयाब भी रहे। कृष बताते हैं, “ज्यादातर ब्रांडेड प्यूरीफायर के बेसिक मॉडल की शुरुआत 15 हजार से होती है और एक लाख रुपए तक जाती है। मार्केट में ज्यादातर बिकने वाले प्यूरीफायर 30-40 हजार के होते हैं, जबकि हमारे यहां बेसिक मॉडल 4 हजार का है। ज्यादातर हमारे ब्रांड के बिकने वाले प्यूरीफायर 4 से15 हजार के होते हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की हमारा ब्रांड मार्केट में कितना किफायती है।

इसके अलावा हमारे सभी प्यूरीफायर मेड इन इंडिया है और इसलिए अगर किसी भी ग्राहक को बाद में प्यूरीफायर का फिल्टर बदलना हो तो हम तुरंत उपलब्ध करा देते हैं।”

तकरीबन 4500 प्यूरीफायर बेच चुके हैं और 500 डोनेट भी किए

कृष का स्टार्टअप 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन 2020 में उन्हें मार्केट से अच्छा रिस्पॉन्स मिला शुरू हुआ। कृष बताते हैं अब तक 5500 से ज्यादा एयर प्यूरीफायर की बिक्री हो गई है। साथ ही उन्होंने 500 से ज्यादा एयर प्यूरीफायर दिल्ली के हॉस्पिटल, स्कूल, अनाथालय और सामाजिक संगठनों को दान भी दिए हैं।

कृष कहते हैं, “मेरा उद्देश्य देश में ज्यादा से ज्यादा मिडिल क्लास फैमिली को एयर प्यूरीफायर बेचना है, ताकि कोई भी वायु प्रदूषण की वजह से बीमार न पड़े। मैंने खुद ये तकलीफ झेली है और इसलिए मैं जानता हूं कि एयर प्यूरीफायर होना कोई लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत है। ऐसे में इसकी कीमत कम होनी चाहिए।”

कृष को नीति आयोग की भी भी सराहना मिली

अपने प्यूरिफायर के बारे में नीति आयोग के CEO को बताते हुए कृष।
अपने प्यूरिफायर के बारे में नीति आयोग के CEO को बताते हुए कृष।

कृष के इस इनोवेशन और स्टार्टअप को नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत ने भी सराहा है। अमिताभ ने अपने ट्विटर पर कृष के बारे में ट्वीट कर लिखा था कि युवा उद्यमी कृष चावला 100% मेड इन इंडिया एयर प्यूरीफायर बना रहे हैं, जो प्लास्टिक फ्री है। यह आत्मनिर्भर भारत की तरफ एक बेहतर कदम है।