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ममता की कुर्सी तय करने वाले भवानीपुर में वोटिंग खत्म:20% मुस्लिम, 34% नॉन बंगाली वोटर, जानिए कैसे भवानीपुर से शुरू हुआ खेला दिल्ली में खत्म करना चाहती हैं ममता

कोलकाता2 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

पश्चिम बंगाल में तीन विधानसभा सीटों भवानीपुर, समसेरगंज और जंगीपुर में उपचुनाव के लिए गुरुवार को वोटिंग हुई। सबसे ज्यादा चर्चा में भवानीपुर सीट है क्योंकि यहां से खुद CM ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं। CM बने रहने के लिए उन्हें यह चुनाव जीतना जरूरी है। वहीं बीजेपी ने ममता के खिलाफ एडवोकेट प्रियंका टिबरेवाल को मैदान में उतारा है।

कैंपेन के आखिरी दिन बीजेपी के 80 से ज्यादा नेताओं ने भवानीपुर के एक-एक वॉर्ड में पहुंचकर प्रचार-प्रसार किया। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और स्मृति ईरानी ने भी प्रचार किया। वहीं TMC ने भी पूरी ताकत प्रचार में झोंकी। ममता ने खुद एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैलियां कीं, क्योंकि वे ऐतिहासिक जीत दर्ज करना चाहती हैं। कैंपन के दौरान ममता ने कहा- भवानीपुर सीट से फिर खेला शुरू हो रहा है और केंद्र से BJP को हटाने के साथ ही खत्म होगा।

3 पॉइंट में समझिए भवानीपुर उपचुनाव की कहानी…

मोदी के खिलाफ खुद को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने की तैयारी
भवानीपुर उपचुनाव में स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय मुद्दे उठाए गए। ममता ने PM नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को निशाने पर रखा। CBI और ED पर सवाल खड़े किए गए। वहीं BJP ने विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा को ही सबसे बड़ा मुद्दा बनाया। बंगाल में संविधान खत्म होने की बातें भी कहीं गईं।

ऐसा क्यों : रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और चुनाव विश्लेषक डॉ. विश्वनाथ चक्रवर्ती के मुताबिक इस चुनाव के बहाने ममता ने खुद को मोदी के खिलाफ एक तरह से खड़ा करने की कोशिश की है। उन्होंने कांग्रेस की भी आलोचना की। उपचुनाव के बहाने वे लोकसभा के लिए जमीन तैयार कर रही हैं। इसलिए बार-बार ये कहती नजर आईं कि भवानीपुर से फिर खेला शुरू हो रहा है, जो दिल्ली जीतकर खत्म होगा। यानी उपचुनाव के बहाने उन्होंने खुद को विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बनाने की कोशिश की है।

जीत के बड़े अंतर से सबको मैसेज देने की कोशिश
TMC ने भवानीपुर में पूरी ताकत लगाई। राज्य के कैबिनेट मंत्री वॉर्ड-वॉर्ड घूमे। ममता ने खुद ताबड़तोड़ सभाएं कीं। ऐसा इसलिए नहीं किया गया कि TMC को अपनी जीत पर संशय है, बल्कि पार्टी यहां से ऐतिहासिक अंतर से जीतना चाहती है।

ऐसा क्यों: कोलकाता के सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं कि जीत के इस अंतर के जरिए ममता देश को यह संदेश देना चाहती हैं कि नंदीग्राम में उनकी हार एक साजिश थी और वे बंगाल की सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

BJP ने ताकत तो लगाई, लेकिन मोदी-शाह दूर रहे
BJP ने भी भवानीपुर को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन ममता के लड़ने के बावजूद मोदी-शाह कैंपेन से दूर ही रहे। BJP नेता दलील दे रहे हैं कि उपचुनाव में कभी केंद्रीय नेता प्रचार नहीं करते, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि BJP जानती है कि वो भवानीपुर जीत नहीं रही, इसलिए उन्होंने प्रियंका टिबरेवाल को मैदान में उतारा और केंद्र से सिर्फ हरदीप सिंह पुरी और स्मृति ईरानी ने ही प्रचार किया।

ऐसा क्यों : BJP की कोशिश यही है कि जो 35% वोट विधानसभा चुनाव में मिले हैं, कम से कम वो बरकरार रहें, लेकिन एक्सपर्ट्स इस आंकड़े को भी कम होता देख रहे हैं। उनका मानना है कि BJP का वोट शेयर 20 से 22% पर आ सकता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के समय सिनेरियो अलग था और अभी अलग है।

चुनाव हारने वालीं ममता तीसरी CM
विधानसभा चुनाव में ममता नंदीग्राम से चुनाव लड़ी थीं और BJP के शुभेंदु अधिकारी से 1956 वोटों से हार गई थीं। इसलिए 6 महीने में उन्हें विधानसभा का चुनाव जीतना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर CM का पद छोड़ना पड़ेगा। इसलिए ममता भवानीपुर से उपचुनाव लड़ रही हैं। ममता पश्चिम बंगाल की ऐसी तीसरी CM हैं, जो खुद चुनाव हारी हैं। इससे पहले साल 1967 में प्रफुल्ल चंद्र सेन और 2011 में बुद्धदेव भट्टाचार्य भी अपनी सीट नहीं बचा सके थे।