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ओमिक्रॉन पर ब्रिटेन के डॉ. नारायण की चेतावनी:2021 से अलग नहीं होगा 2022, नए वैरिएंट पर वैक्सीन 50% ही इफेक्टिव

नईदिल्ली2 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

साल 2022, 2021 से कुछ बहुत ज्यादा अलग नहीं रहने वाला। अभी तक जो डेटा सामने आया है, उससे पता चल रहा है कि ओमिक्रॉन जैसे नए वैरिएंट पर वैक्सीन 50 से 60 फीसदी ही इफेक्टिव है।

यह कहना है, ब्रिटेन स्थित ग्लोबल हेल्थ अलायंस के फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. रजय नारायण का। डॉ. नारायण के मुताबिक भारत में जिस तरह पोलियो का टीका हर साल लगता है वैसे ही अगले कुछ समय तक कोरोना का टीका भी समय-समय पर लगते रह सकता है। मौजूदा हालात में बूस्टर डोज देना जरूरी हो गया है। डॉ. नारायण ने ओमिक्रॉन से जुड़े तमाम सवालों के जवाब दिए। पढ़िए इंटरव्यू के प्रमुख अंश।

सवाल : क्या ओमिक्रोन को लेकर बेवजह की दहशत फैलाई जा रही है, जबकि इससे अभी तक एक भी डेथ नहीं हुई है और हॉस्पिटल में भी केस नहीं जा रहे हैं ?
जवाब: ओमिक्रॉन को लेकर अभी लिमिटेड डेटा है। अभी तक जिन भी देशों में इसके केस डिटेक्ट हो रहे हैं उनमें अच्छी बात ये है कि कोई सीरियस प्रॉब्लम सामने नहीं आ रही। सर्दी, खांसी, बुखार ही हो रहा है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस वैरिएंट से कोई गंभीर बीमारी नहीं होगी। साउथ अफ्रीका में दहशत इसलिए फैली क्योंकि वहां करीब 30 फीसदी आबादी को ही वैक्सीन लगी थी। ऐसे में केस एकदम से बढ़े तो लोगों में पैनिक हो गया, लेकिन सभी को माइल्ड डिजीज ही हैं।

सवाल: साउथ अफ्रीका सहित दूसरे देशों ने ओमिक्रॉन को लेकर क्या लापरवाहियां कर दीं, जिन्हें भारत को नहीं करना चाहिए?
जवाब: भारत को अब बहुत तेज गति से अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम को आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि यहां अभी तक करीब 32 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन लग पाई है। जबकि यूके में तो 32 फीसदी लोगों को तीसरा यानी बूस्टर डोज दिया जा चुका है।
यूके में 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को बूस्टर दिया जा रहा है। 12 से 15 साल के बीच की उम्र वाले बच्चों को सेकेंड डोज भी दिया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि 40 से 50 हजार डेली के केस आ रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटलाइजेशन नहीं हो रहा है, क्योंकि वायरस के खिलाफ अधिकतर लोगों में एक लेवल की इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है।

सवाल: क्या कोई ऐसा देश है, जिसने इस वैरिएंट के खिलाफ कुछ बहुत अच्छा कर दिया, जो दूसरे देशों के लिए मिसाल बन सकता है?
जवाब: ऑस्ट्रेलिया, यूके ने बहुत अच्छा काम किया है। ऑस्ट्रेलिया में तो एक केस आने पर पूरे शहर को ही सील कर दिया गया। यूके में वैक्सीनेशन के लिए लंबी कतारें लगी हैं, क्योंकि सरकार यहां लोगों को यह समझाने में कामयाब हुई कि बिना वैक्सीन के कोरोना से बचाव मुश्किल है। देखिए कोरोना का अभी तक भी कोई तय इलाज नहीं है। एंटी वायरल ड्रग्स देकर ही इन्फेक्शन रोका जाता है।

सवाल: भारत में अभी तक 31% पॉपुलेशन ही फुली वैक्सीनेटेड है, तो क्या यह वैरिएंट भारत में तीसरी लहर ला सकता है?
जवाब: भारत में यदि वैक्सीनेशन नहीं बढ़ाया गया तो हालात गंभीर हो सकते हैं। वैक्सीनेशन नहीं होने पर ये भी हो सकता है कि कोई नया वैरिएंट भारत में ही पैदा हो जाए। इसलिए भारत में बूस्टर डोज भी शुरू कर देने चाहिए। यूके में तो अब थर्ड डोज भी तीन महीने के अंदर ही दिया जा रहा है। इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए ये करना जरूरी है।

सवाल: क्या ऐसा भी हो सकता है कि भविष्य में ऐसे वैरिएंट आएं, जिन पर वैक्सीन इफेक्टिव ही न हो?
जवाब: इसके चांस बहुत कम हैं कि वैक्सीन एकदम ही असरकारक नहीं रहे, लेकिन नए वैरिएंट वैक्सीन के असर को कमजोर तो कर ही रहे हैं। मॉडर्ना, फाइजर ने नए फॉर्मूले पर काम करना शुरू कर दिया है। वे ओमिक्रॉन के हिसाब से नई वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं। शायद चार से छ हफ्तों में नई वैक्सीन आ भी जाए।

अलग-अलग कंपनियों ने वैक्सीन के 90% तक प्रभावी होने का दावा किया था, लेकिन यह 70 से 80 फीसदी ही इफेक्टिव है। 20 परसेंट तो कोविड का चांस है ही। ओमिक्रॉन के मामले में तो यह शायद 50 से 60 फीसदी ही इफेक्टिव है। हालांकि इसे लेकर पूरा डेटा आने में अभी एक से दो हफ्ते का वक्त लग सकता है।

सवाल: ओमिक्रॉन के बीच साल 2022 में क्या सिनेरियो रह सकता है?
जवाब: मैं यह दावे से कह सकता हूं कि 2022, 2021 से कुछ बहुत ज्यादा अलग नहीं होगा। जब तक पूरी आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक ये सब चलता रहेगा। फ्लू की वैक्सीन यूके में हर साल लगवानी पड़ती है। मैं भी हर साल लेता हूं। हर साल टीके में वायरस के हिसाब से थोड़ा बहुत बदलाव किया जाता है।
शायद इसी तरह अगले कुछ सालों तक कोविड की वैक्सीन हर साल लेनी पड़ेगी। जब तक सभी में इम्यूनिटी डेवलप नहीं हो जाती, तब तक ये सिलसिला चलता रहेगा। शायद एक साल तो ये सब चलेगा ही।

सवाल: भविष्य में आने वाले वैरिएंट से बचने के लिए भारत को क्या करना जरूरी है?
जवाब: भारत को अपनी हेल्थ पर खर्चे को जीडीपी के 5% तक ले जाना चाहिए, क्योंकि वायरस तो आते रहेंगे। ऐसे में आप हमेशा सब कुछ बंद करके बच नहीं सकते क्योंकि इससे आपकी इकोनॉमी बैठ जाएगी। आपको हेल्थ का बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। जिससे वायरस आए भी तो बिना कुछ बंद किए, उसे कंट्रोल किया जा सके।

रिसर्च में ये साबित हो चुका है कि 6 महीने से ज्यादा किसी भी वैक्सीन की वैलिडिटी नहीं होती। बूस्टर डोज पर आपको जाना ही होगा। बूस्टर डोज की वैलिडिटी कितने दिनों की होगी, ये अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन कम से कम 4 महीने तो इसका असर रहेगा ही, यह अभी तक माना जा रहा है।