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आज की पॉजिटिव खबर:अभय की बनाई मशीन फसल की सुरक्षा और जानवरों के हमले रोकने में कारगर, सालाना 1.5 करोड़ टर्नओवर

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

किसानों के लिए उनकी फसल की सुरक्षा सबसे बड़ा इश्यू है। कई बार जंगली जानवर उनकी फसल नष्ट कर देते हैं। इस वजह से उन्हें इकोनॉमिक लेवल पर नुकसान तो होता ही है, साथ ही फसल की रखवाली में उनका अच्छा खासा वक्त भी जाया होता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली में रहने वाले 24 साल के अभय शर्मा ने एक पहल की है। उन्होंने एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो अपनी साउंड के जरिए जानवरों को खेत में घुसने से रोकती है। इतना ही नहीं उन्होंने एक स्मार्ट स्टिक भी बनाई है, जो फॉरेस्ट गार्ड्स और आम लोगों को बड़े जानवरों के हमले से बचाती है।

इसकी वे ऑफलाइन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मार्केटिंग कर रहे हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी उनके प्रोडक्ट की अच्छी खासी डिमांड है। नेपाल, भूटान, मलेशिया सहित कई देशों में उन्होंने अपने प्रोडक्ट भेजे हैं। फिलहाल उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए है।

गांवों में जंगली जानवर फसलों को नष्ट कर दे रहे थे

अभय शर्मा एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बचपन से वे नेचर लवर रहे हैं और जंगलों की सैर करना उनका शौक रहा है। इस मशीन को तैयार करने के आइडिया को लेकर वे बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान 2016-17 में उत्तराखंड के एक गांव में उनका जाना हुआ। वहां उन्होंने देखा कि किसानों और जंगली जानवरों के बीच एक तरह से जंग छिड़ी है। जानवर फसल और किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि किसान जानवरों को निशाना बनाते हैं। इससे किसान और जानवरों दोनों को ही नुकसान पहुंचता है।

अभय बताते हैं कि इस मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह इंसान या जानवर, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।
अभय बताते हैं कि इस मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह इंसान या जानवर, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।

अभय कहते हैं कि इसे देखने के बाद मेरे मन में आइडिया आया कि हमें इस तरह का प्रोडक्ट तैयार करना चाहिए, जिससे ये समस्या भी दूर हो जाए और किसी को नुकसान भी नहीं पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अपनी बड़ी बहन के साथ मिलकर काम करना शुरू किया। इंटरनेट की मदद ली, अलग-अलग तरह के इक्विपमेंट और कॉन्सेप्ट के बारे में जानकारी जुटाई और घर पर ही करीब 10 हजार रुपए की लागत से एक मशीन तैयार की और उसे एक खेत में इंस्टॉल कर दिया। इसका अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला, मशीन की साउंड सुनते ही जानवर भाग खड़े होने लगे।

पढ़ाई के साथ-साथ स्टार्टअप को लेकर काम करते रहे

अभय कहते हैं कि तब हमारे दिमाग में इस प्रोडक्ट को लेकर बिजनेस का कोई आइडिया नहीं था, लेकिन इस मशीन को देखने के बाद कई लोगों ने हमसे कॉन्टैक्ट किया और इसकी डिमांड की। तब हमें रियलाइज हुआ कि इसे कमर्शियल लेवल तक ले जाया जा सकता है। इसके बाद हम लोगों की डिमांड के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करने लगे। कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। हम पढ़ाई भी करते रहे और साथ में अपने प्रोजेक्ट को लेकर काम भी करते रहे। इस तरह धीरे-धीरे हमारे पास पैसे इकट्ठे होते रहे।

अभय अपने इस प्रोडक्ट की मार्केटिंग देशभर में कर रहे हैं। भारत के बाहर भी उन्होंने कई देशों में अपने प्रोडक्ट बेचे हैं।
अभय अपने इस प्रोडक्ट की मार्केटिंग देशभर में कर रहे हैं। भारत के बाहर भी उन्होंने कई देशों में अपने प्रोडक्ट बेचे हैं।

अभय के मुताबिक जब फॉरेस्ट गार्ड्स को इस मशीन के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने अभय से कॉन्टैक्ट किया। खुद के लिए ऐसी मशीन की डिमांड की जिससे जंगली जानवर उन पर हमला नहीं कर सकें और रात को जंगल में ड्यूटी करते वक्त उन्हें सहूलियत मिले। इसके बाद अभय ने रिसर्च वर्क शुरू किया और साल 2019 में एक स्मार्ट स्टिक तैयार की, जिसकी मदद से जंगली जानवरों के हमले को कंट्रोल किया जा सके।

भारत के साथ विदेशों में भी मार्केटिंग कर रहे हैं

साल 2019 में अभय की इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी हो गई। नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने तय किया कि अब आगे इसी प्रोजेक्ट को लेकर काम करना है। इसके बाद गाजियाबाद में उन्होंने क्यारी नाम से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की और लोगों की डिमांड के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करने लगे। हालांकि शुरुआत में बहुत अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। महीने में एक दो ऑर्डर ही आ रहे थे। इसके बाद अभय ने मार्केटिंग का दायरा बढ़ाया। कई शहरों में खुद के डीलर्स तैयार किए, सप्लाई चेन डेवलप की, ताकि छोटे-छोटे शहरों में भी लोगों तक प्रोडक्ट पहुंच सके। इससे उनकी कंपनी को अच्छी-खासी ग्रोथ मिली।

इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन मार्केटिंग पर फोकस किया। सोशल मीडिया पर अपनी कंपनी के नाम से पेज बनाया और प्रोडक्ट की फोटो-वीडियो अपलोड करने लगे। अपने प्रोडक्ट के बारे में ब्लॉग लिखने लगे। इसका उन्हें फायदा भी मिला और ग्राहकों की संख्या बढ़ गई। भारत के साथ ही दूसरे देशों में भी उनके प्रोडक्ट की डिमांड होने लगी।

अभय के मुताबिक इस प्रोडक्ट की वजह से किसानों को काफी सहूलियत मिल रही है। उनकी फसलें नष्ट होने से बच रही हैं।
अभय के मुताबिक इस प्रोडक्ट की वजह से किसानों को काफी सहूलियत मिल रही है। उनकी फसलें नष्ट होने से बच रही हैं।

फिलहाल हर महीने उनके पास एक हजार से ज्यादा प्रोडक्ट के ऑर्डर्स आ रहे हैं। आम किसानों के साथ ही कई राज्यों की सरकारों ने भी उनसे प्रोडक्ट खरीदे हैं। अभय के टीम में 10 लोग काम करते हैं। जो प्रोडक्ट तैयार करने से लेकर मार्केटिंग और डिलीवरी में मदद करते हैं।

क्या है मशीन की खासियत? कैसे बड़े-बड़े जंगली जानवरों से बचाती है?

फिलहाल अभय दो तरह के प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं। एक स्मार्ट स्टिक जो खतरनाक जंगली जानवरों के हमले से बचाती है। दूसरी एनाइडर्स जो जानवरों से फसलों की सुरक्षा करती है। स्मार्ट स्टिक इलेक्ट्रिक से चार्ज होती है। एक बार चार्ज होने के बाद यह 5-6 दिनों तक काम करती है। इसमें तीन तरह की लाइट लगी है। जिसे सेल्फ एडजस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें स्टन गन और पैनिक बटन लगा है। इससे सेल्फ डिफेंस और जानवरों को भगाने में मदद मिलती है। बड़े से बड़े जानवर डरकर पीछे भाग जाते हैं। इसकी कीमत 8 हजार रुपए से शुरू होती है। सबसे अच्छी बात है कि इसे आसानी से कैरी किया जा सकता है।

इसी तरह एनाइडर्स सोलर एनर्जी से चार्ज होता है। यह पोर्टेबल होता है और आसानी से एक खेत से दूसरे खेत में लगाया जा सकता है। यह 100 फीट से लेकर 300 फीट तक के एरिया को कवर करता है। यह अपने साउंड की मदद से जंगली जानवरों को खेत में जाने से रोकता है। इसे धूप, बारिश या मौसम के किसी भी प्रकोप से नुकसान नहीं पहुंचता है। इसकी भी कीमत 8 हजार रुपए से शुरू होती है।

यह स्मार्ट स्टिक है। मुख्य रूप से यह जंगलों में ड्यूटी करने वालों के लिए है। इसकी मदद से बड़े जानवरों के हमलों से बचा जा सकता है।
यह स्मार्ट स्टिक है। मुख्य रूप से यह जंगलों में ड्यूटी करने वालों के लिए है। इसकी मदद से बड़े जानवरों के हमलों से बचा जा सकता है।

खेती-किसानी से जुड़े स्टार्टअप को लेकर आपकी दिलचस्पी है तो यह स्टोरी आपके काम की है

किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रोडक्ट को सुरक्षित रखना होता है। खास कर के हरी सब्जियां और फल। ये बहुत जल्द खराब हो जाते हैं। ज्यादातर किसानों के पास अपने प्रोडक्ट को सुरक्षित स्टोर करने की जगह नहीं होती है। इस वजह से उन्हें अपने प्रोडक्ट औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाले विकास झा ने एक पहल की है। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसा सब्जी कूलर तैयार किया है, जो बिना इलेक्ट्रिक और फ्यूल के हफ्ते के सातों दिन हरी सब्जियों और फलों को सुरक्षित रख सकता है। इससे किसानों को अच्छा-खासा फायदा हो रहा है। पिछले दो सालों से विकास देशभर में इसकी मार्केटिंग कर रहे हैं। फिलहाल उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए है। (पूरी खबर पढ़िए)