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आज की पॉजिटिव खबर:25 साल के अनिल के पास जमीन नहीं है; फिर भी खेती से लाखों रुपए कमा रहे, 50 से ज्यादा घरों में लगा चुके हैं नर्सरी

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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राजस्थान के जयपुर में रहने वाले अनिल थडानी फूलों की नर्सरी तैयार करते हैं। खुद के साथ-साथ वे दूसरे घरों में भी नर्सरी लगाने का काम करते हैं। - Dainik Bhaskar
राजस्थान के जयपुर में रहने वाले अनिल थडानी फूलों की नर्सरी तैयार करते हैं। खुद के साथ-साथ वे दूसरे घरों में भी नर्सरी लगाने का काम करते हैं।

राजस्थान के जयपुर में रहने वाले अनिल थडानी के पास न खुद की जमीन है और न ही उनका फैमिली बैकग्राउंड खेती का रहा है। फिर भी वे एक सफल किसान हैं। उनके पास पांच हजार से ज्यादा फूलों और सब्जियों के प्लांट्स हैं। दो हजार से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। 50 से ज्यादा घरों को वे फूलों और सब्जियों के गार्डन के रूप में बदल चुके हैं। इसके साथ ही 100 से ज्यादा उनके रेगुलर कस्टमर्स हैं जिन्हें वे फूलों और सब्जियों के बीज सप्लाई करते हैं। अनिल ने 6 महीने से भी कम वक्त में तीन लाख से ज्यादा की कमाई की है।

अनिल के पिता एक गौशाला में काम करते हैं, जबकि उनकी मां हाउस वाइफ हैं। अनिल की शुरुआती पढ़ाई जयपुर में हुई। उसके बाद उन्होंने अजमेर से एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन और फिर इलाहाबाद से एग्रीकल्चर में ही मास्टर्स किया। 2018 में उनकी जॉब लग गई और वे एक कॉलेज में पढ़ाने लगे।

पढ़ाई के दौरान फार्मिंग से लगाव हो गया

अनिल ने 2018 में नौकरी छोड़कर खुद के घर पर ही नर्सरी लगाने की शुरुआत की। वे दूसरे किसानों को बीज प्रोवाइड कराते हैं।
अनिल ने 2018 में नौकरी छोड़कर खुद के घर पर ही नर्सरी लगाने की शुरुआत की। वे दूसरे किसानों को बीज प्रोवाइड कराते हैं।

25 साल के अनिल कहते हैं कि मेरा फैमिली बैकग्राउंड खेती का नहीं रहा, लेकिन पढ़ाई के दौरान हमें किसानों के साथ काम करने और उनके काम को समझने के लिए गांवों में भेजा जाता था। हमारे प्रोजेक्ट वर्क में भी फार्मिंग के काम थे। इसके अलावा मेरे साथ पढ़ने वाले कई दोस्त किसान फैमिली से थे। अक्सर उनसे खेती को लेकर चर्चा होती रहती थी। इसलिए फार्मिंग के प्रति मेरा लगाव बढ़ता गया।

नौकरी छोड़कर बन गए किसान
2018 में नौकरी के साथ-साथ पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अनिल ने फार्मिंग की शुरुआत की। वे उन किसानों के लिए फार्मिंग करने लगे जिनके पास अपनी जमीन थी। इसी बीच उन्हें सॉइल लेस (बिना जमीन के) फार्मिंग के बारे में पता चला और उन्होंने उस पर काम करना शुरू कर दिया।

साल 2020 में अनिल ने अपनी नौकरी छोड़ दी और नर्सरी का काम शुरू किया। उन्होंने कुछ गमले खरीदे और अपनी छत और घर की दीवारों को फूलों की नर्सरी में तब्दील कर दिया। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा वैराइटी के फूल और सब्जियां लगाईं।

इसी बीच कोरोना के चलते लॉकडाउन लग गया। घर से बाहर जाना और चीजें खरीदना बंद हो गया। इसका असर उनके काम पर भी हुआ। हालांकि, अनिल ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। जब लॉकडाउन खत्म हुआ तो उन्होंने अपनी नर्सरी में तैयार फूलों और सब्जियों के बीजों की मार्केटिंग शुरू की।

बिना जमीन के कैसे करते हैं फार्मिंग?
अनिल की खासियत है कि वह उन जगहों पर भी फार्मिंग कर रहे हैं जहां जमीन नहीं है। यानी छत और घर की दीवारों पर। अभी वे तीन तरह की फार्मिंग कर रहे हैं।

  • वर्टिकल फार्मिंग :
तस्वीर वर्टिकल फार्मिंग की है। इसमें घर की दीवारों पर फूल लगाए जाते हैं। इनडोर फार्मिंग के लिए यह बेहतर विकल्प है।
तस्वीर वर्टिकल फार्मिंग की है। इसमें घर की दीवारों पर फूल लगाए जाते हैं। इनडोर फार्मिंग के लिए यह बेहतर विकल्प है।

इस विधि में घर की दीवारों पर फार्मिंग होती है। इसके लिए गमलों से बनी एक आकृति घर की दीवारों पर लगा दी जाती है। फिर उसमें ऑर्गेनिक खाद, मिट्टी डाल दी जाती है। इसके बाद फूलों के बीज लगा दिए जाते हैं। इसकी बनावट ऐसी होती है कि एक जगह पानी डालने पर सभी गमलों में पहुंच जाता है। इनडोर उगने वाले प्लांट्स इसके लिए सबसे उपयुक्त होते हैं। इस तरह की खेती की शुरुआत 8 से 10 हजार रुपए से की जा सकती है।

  • टेरेस गार्डनिंग :
तस्वीर टेरेस गार्डनिंग की है। इसमें घर की छत या फर्श पर बैग में मिट्टी और खाद डालकर प्लांटिंग की जाती है।
तस्वीर टेरेस गार्डनिंग की है। इसमें घर की छत या फर्श पर बैग में मिट्टी और खाद डालकर प्लांटिंग की जाती है।

इस तरह की फार्मिंग में घर की छत या द्वार के फर्श का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए प्लांट्स की जरूरत के मुताबिक प्लास्टिक बैग (ग्रो बैग) लिए जाते हैं। उनमें खाद और मिट्टी डाल दी जाती है। फिर उसमें प्लांट्स लगा दिए जाते हैं। आप चाहे तो पुरानी बाल्टी या डिब्बे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह की खेती सब्जियों और फलों के लिए बेहतर होती है। छत पर आप आसानी से फलियां, बैंगन, टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियां उगा सकते हैं। अगर आपके पास ज्यादा जगह है तो आप जड़ वाली सब्जियां जैसे आलू, गाजर भी उगा सकते हैं। इस तरह की खेती की शुरुआत 3 से 5 हजार रुपए से की जा सकती है।

  • हाइड्रोपोनिक विधि :
तस्वीर हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की है। इसमें पाइप से बनी आकृति में फूलों की खेती होती है। इसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती है।
तस्वीर हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की है। इसमें पाइप से बनी आकृति में फूलों की खेती होती है। इसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती है।

इस तरह की खेती एडवांस फार्मिंग की कैटेगरी में आती है। इसमें अलग-अलग साइज के पाइप को मिलाकर एक आकृति बना दी जाती है। इस विधि में मिट्टी की जरूरत कम पड़ती है। सिर्फ वर्मीकम्पोस्ट से ही काम चल जाता है। इस उपकरण को लगाने के लिए कम से कम 5 फीट लंबी और 2.5 इंच चौड़ी जगह की जरूरत पड़ती है। इसमें एक साथ 48 पौधे उगाए जा सकते हैं। फूलों और सब्जियों की नर्सरी के लिए ये तरीका बेहतर विकल्प है। इस तरह की खेती की शुरुआत 8 से 10 हजार रुपए से की जा सकती है।

कैसे करते हैं बिजनेस?
अनिल की अपनी नर्सरी है। जहां 5 हजार से ज्यादा प्लांट्स हैं। वे किसानों के लिए फल, फूल और सब्जियों के बीज उपलब्ध कराते हैं। जयपुर, पटना सहित देश के कई बड़े शहरों में वे बीज भेजते हैं। इसके साथ ही वे फार्मिंग कंसल्टेंसी का भी काम करते हैं। वे दूसरे के घरों में नर्सरी लगाते हैं। जयपुर और पटना में 50 से ज्यादा घरों को वे नर्सरी में तब्दील कर चुके हैं। अनिल कहते हैं कि लोगों की जरूरत और डिमांड के मुताबिक हम उनके घर में नर्सरी तैयार करते हैं। इसके लिए मेरे पास अपनी टीम है। जो लोग वर्टीकल, टेरेस या हाइड्रोपोनिक फार्मिंग का सेटअप लगवाना चाहते हैं, हम उन्हें बीज से लेकर मेंटेनेंस तक की सर्विसेज प्रोवाइड कराते हैं।

अनिल उन किसानों को भी फार्मिंग की सर्विस प्रोवाइड कराते हैं जिनके पास जमीन होती है लेकिन वे खेती करने में सक्षम नहीं होते हैं।
अनिल उन किसानों को भी फार्मिंग की सर्विस प्रोवाइड कराते हैं जिनके पास जमीन होती है लेकिन वे खेती करने में सक्षम नहीं होते हैं।

इसके साथ ही वे किसानों को ट्रेनिंग भी देते हैं और उनके लिए भी सर्विस प्रोवाइड कराते हैं। जैसे किसी के पास जमीन है, लेकिन वह खेती करने में सक्षम नहीं है तो उस स्थिति में अनिल उसकी मदद करते हैं। उसकी जरूरत के मुताबिक बीज की बुआई से लेकर मार्केटिंग का काम भी उनकी टीम देखती है।

नई तकनीक से क्या है फायदा?
अनिल बताते हैं कि बिजनेस और खुद की जरूरतों के लिए भी इस तरह की तकनीक फायदेमंद है। अगर कोई अपने घर में इस तरह की फार्मिंग करता है तो बिजनेस के साथ-साथ खुद के लिए सब्जियां और फल उगा सकता है। इसमें खर्च भी बहुत ज्यादा नहीं आता है। एक कॉमन फैमिली 15 हजार खर्च करने के बाद साल भर सब्जियां प्राप्त कर सकती है। इसके साथ ही जिसके पास छत पर स्पेस है या उसका घर बड़ा है तो वह इससे कमाई भी कर सकता है। अनिल अभी हर महीने 50 हजार रुपए कमा रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर लॉकडाउन नहीं लगा होता तो कमाई और अधिक हो रही होती।

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