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आज की पॉजिटिव खबर:राजकोट के ये युवा अपनी पॉकेट मनी से मिटा रहे मरीजों की भूख, हर दिन 450 लोगों के घर पहुंचाते हैं टिफिन

नई दिल्ली2 वर्ष पहले

कोरोना के इस दौर में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था करना सबसे मुश्किल टास्क है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके सभी मेंबर्स पॉजिटिव हो गए हैं, तो कई लोग ऐसे हैं जो अकेले रहते हैं, उनके घर कोई खाना बनाने वाला नहीं है। ज्यादातर होटल और रेस्टोरेंट भी बंद हैं। ऐसे में मरीजों को अपनी भूख मिटाने के लिए कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच गुजरात के राजकोट जिले के रहने वाले कुछ युवाओं ने ऐसे लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने की पहल की है। ये लोग अपनी पॉकेट मनी से पैसे बचाकर सुबह-शाम इनके घर टिफिन पहुंचा रहे हैं।

गोंडल शहर के रहने वाले अनिल भी इस टीम से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि इस साल कोरोना की जब दूसरी लहर आई तो अचानक केसेज बढ़ने लगे। कई जगहों से हमें इस तरह की खबरें मिलीं कि मरीजों को वक्त पर खाना नहीं मिल रहा है। अस्पतालों के साथ-साथ जो लोग होम आइसोलेशन में हैं, उन्हें भी खाने की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे एक वक्त के लिए भी अपने लिए भोजन की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद मैंने अपने दो दोस्तों से बात की और तय किया कि हम ऐसे लोगों तक भोजन पहुंचाने का काम करेंगे।

तीन से शुरुआत की, आज 25 लोग काम करते हैं

ये युवा खुद आपस में मिलकर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए खाना तैयार करते हैं। फिर खुद ही उनके घर डिलीवरी करने भी जाते हैं।
ये युवा खुद आपस में मिलकर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए खाना तैयार करते हैं। फिर खुद ही उनके घर डिलीवरी करने भी जाते हैं।

वे कहते हैं कि शुरुआत में हम तीन लोग थे। सभी नौकरी करते हैं। हम लोग अपनी पॉकेट मनी से इनके लिए भोजन की व्यवस्था करते थे। तब हम हर दिन 200 टिफिन तैयार करते थे और मरीजों के घर पहुंचाते थे। बाद में हमारे काम के बारे में लोगों को पता चला तो वे मदद के लिए आगे आने लगे। अभी हमारी टीम में 25 लोग काम कर रहे हैं। हमने अपने ग्रुप का नाम अक्षय भारती मित्र मंडल रखा है। अभी 25 युवा इस टीम से जुड़े हैं। और रोजाना हम 25 हजार रुपए खर्च करके 450 मरीजों को दोनों टाइम का खाना खिला रहे हैं।

मेन्यू के हिसाब से हेल्दी फूड्स रखते हैं टिफिन में

कोरोना संक्रमित लोगों को किस तरह खाने का ध्यान रखना चाहिए और उन्हें क्या खाना चाहिए, इसकी जानकारी के लिए डॉक्टरों से बात करके मेन्यू तैयार किया गया है। हम सभी साथी खाना तैयार करते समय उसका ध्यान रखते हैं। अनिल बताते हैं कि दिन के वक्त जो हम खाना पहुंचाते हैं, उसमें दो तरह की सब्जी, दाल-चावल, सलाद, छाछ और रोटी होती है। वहीं रात के खाने में करी, खिचड़ी, सब्जी-रोटी के साथ-साथ सलाद भी देते हैं। हमने हर जगह अपना मोबाइल नंबर सर्कुलेट कर रखा है। जिसे जरूरत होती है, वो हमें टिफिन के लिए कॉल कर सकता है।

टीम के साथी अनिल कहते हैं कि हमने कोविड संक्रमित मरीजों के हेल्थ के लिहाज से ही टिफिन का मेन्यू तैयार किया है।
टीम के साथी अनिल कहते हैं कि हमने कोविड संक्रमित मरीजों के हेल्थ के लिहाज से ही टिफिन का मेन्यू तैयार किया है।

टिफिन की डिलीवरी के वक्त प्रोटोकॉल का रखते हैं ध्यान

वे कहते हैं- हम संक्रमण को ध्यान में रखते हुए कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करते हैं। हमने हॉस्पिटल वाइज अलग-अलग टीमें बना रखी हैं। उसके हिसाब से हम अस्पताल के मरीजों को टिफिन पहुंचा रहे हैं। जब हमारी टीम मरीजों के घर पहुंचती है तो हम परिवार के सदस्य को बाहर बुलाकर टिफिन दे देते हैं। ताकि कोई किसी तरह से कॉन्टैक्ट में नहीं आए। उनका दावा है कि गाइडलाइन का पालन करने के चलते ही टीम का कोई साथी संक्रमित नहीं हुआ है। वे कहते हैं कि आने वाले दिनों में हम मेडिकल स्टाफ के लिए टिफिन सेवा शुरू करने का प्लान बना रहे हैं।

गरीबों के लिए राशन किट भी बांट रहे हैं

खाना तैयार करने और टिफिन की पैकेजिंग को लेकर अनिल बताते हैं कि एक टिफिन पर हमारे 70 से 80 रुपए खर्च होते हैं। इसमें खाना पैक करने के लिए टिफिन के डिस्पोजेबल बर्तन, छाछ के लिए बर्तन और पानी की बॉटल का खर्च शामिल है। फिलहाल हमें राशन या किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हमारे ज्यादातर साथी नौकरी करते हैं और वे अपने पैसे से इसकी व्यवस्था में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही हम लोग गरीबों को राशन किट भी बांटने का काम करते हैं। अब तक 100 परिवारों को हम राशन किट बांट चुके हैं।

अनिल कहते हैं कि हम लोग अभी हर दिन 450 मरीजों को दोनों टाइम खाना खिला रहे हैं। इसके लिए हर दिन 25 हजार रुपए खर्च करना पड़ रहा है।
अनिल कहते हैं कि हम लोग अभी हर दिन 450 मरीजों को दोनों टाइम खाना खिला रहे हैं। इसके लिए हर दिन 25 हजार रुपए खर्च करना पड़ रहा है।

अनिल कहते हैं कि हमने अपनी टीम में सबका काम बांट रखा है। जो लोग नौकरी करते हैं, वे अपनी शिफ्ट के हिसाब से सहयोग करते हैं। ड्यूटी खत्म करने के वाद वे हमारे किचन में आ जाते हैं। कोई खाना तैयार करने में हेल्प करता है तो कोई फूड्स की पैकेजिंग और डिलीवरी में मदद करता है। ये पूरी तरह से टीम वर्क है। जो हम आगे भी करते रहेंगे, जब तक कि हालात ठीक नहीं हो जाते। वे कहते हैं कि देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग इस तरह की पहल कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को ऐसे काम करने भी चाहिए ताकि लोगों के दुख को बांटा जा सके, कम किया जा सके।

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