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आज की पॉजिटिव खबर:UP के 3 दोस्तों ने नौकरी छोड़ किसानों के लिए तैयार किया मोबाइल ऐप; 8 लाख किसान जुड़े, फोर्ब्स में मिली जगह

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

ज्यादातर किसानों को खेती के बारे में सही जानकारी नहीं होती है। मसलन खेती की मिट्टी कैसी है, उस हिसाब से किन-किन फसलों की खेती करनी चाहिए? अच्छे प्रोडक्शन के लिए क्या करना चाहिए? फसल में बीमारी लग जाए तो उसका बचाव कैसे करें? खेती के लिए जरूरी चीजें कहां से खरीदें? फसल कटने के बाद अपना प्रोडक्ट कहां बेचें? कृषि को लेकर सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं हैं, उनका लाभ कैसे लिया जा सकता है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो अमूमन हर किसान के मन में होते हैं, पर बहुत कम किसानों को ही इस तरह की जानकारी आसानी से मिल पाती है।

किसानों की इस परेशानी का हल निकाला है यूपी के मेरठ जिले में रहने वाले हर्षित गुप्ता ने। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसा ऑनलाइन ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए किसान एक्सपर्ट के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। खेती से जुड़े हर सवाल का जवाब हासिल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसान इस ऐप की मदद से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर सकते हैं। फिलहाल हर्षित के साथ देशभर के 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं। इसको लेकर उन्हें फोर्ब्स 30 की लिस्ट में भी जगह मिल चुकी है।

बचपन से ही किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे

29 साल के हर्षित बताते हैं कि वे फार्मर बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं। खेती में उनकी पहले से दिलचस्पी रही है। इसलिए उन्होंने एग्रीकल्चर से ही ग्रेजुएशन किया। इसके बाद IIM अहमदाबाद से साल 2014 में MBA की डिग्री हासिल की और एग्रीकल्चर रिलेटेड एक कंपनी से जुड़ गए। करीब एक साल तक वहां काम किया। फिर मुंबई चले गए। वहां उन्होंने एक होटल स्टार्टअप के साथ काम करना शुरू किया। हालांकि वहां भी उनका मन कुछ खास नहीं लगा। हर्षित किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे जिससे किसानों को इंटरनेट से जोड़ा जा सके, उन्हें एक मंच पर लाया जा सके और उनकी मुसीबतों को कम किया जा सके।

हर्षित गुप्ता मेरठ के रहने वाले हैं। उन्होंने IIM अहमदाबाद से MBA की पढ़ाई पूरी की। अभी वे ग्रामोफोन में काम कर रहे हैं।
हर्षित गुप्ता मेरठ के रहने वाले हैं। उन्होंने IIM अहमदाबाद से MBA की पढ़ाई पूरी की। अभी वे ग्रामोफोन में काम कर रहे हैं।

साल 2016 की शुरुआत में हर्षित ने IIM अहमदाबाद में बैचमेट रहे अपने दोस्त निशांत और तौसीफ से अपना आइडिया शेयर किया। वे दोनों भी खेती से जुड़े रहे थे, लिहाजा उन्हें यह आइडिया पसंद आया और वे हर्षित के साथ काम करने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद तीनों ने अपनी-अपनी नौकरी छोड़ दी। अब सवाल था कि इसकी शुरुआत कैसे और कहां से की जाए? किस मॉडल पर काम किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ सकें।

किसानों को उनकी भाषा में ही जानकारी दी जाए, इसलिए मध्य प्रदेश से शुरुआत की

हर्षित कहते हैं कि हम तीनों लोग यूपी से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए तय किया कि किसी हिंदी बेल्ट से ही इसकी शुरुआत की जाए। मध्य प्रदेश किसानों का हब है, यह छोटे-बड़े हर तरह के किसान रहते हैं। लिहाजा हमने काम की शुरुआत के लिए यहां के मालवा रीजन को चुना। कुछ नया और अपना आइडिया इम्प्लीमेन्ट करने से पहले हमने तय किया कि किसानों से बातचीत करेंगे। उनकी दिक्कतों को समझेंगे, उनकी जरूरतों को जानेंगे, फिर उसके मुताबिक तय करेंगे कि क्या किया जाए।

सबसे पहले इन लोगों ने मध्य प्रदेश में ग्राउंड पर जाकर किसानों से मिलना शुरू किया, उनसे बातचीत की। एग्रीकल्चर से जुड़े एक्सपर्ट हायर किए। इसके बाद किसानों की डिमांड और फीडबैक के मुताबिक हर्षित और उनके साथियों ने ऑफलाइन मोड में ही काम करना शुरू किया, क्योंकि ज्यादातर किसानों के पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं थी। वे लोग किसानों से मिलते थे, उनके खेतों पर जाते थे और उनकी दिक्कतों को दूर करते थे। इंदौर में इन लोगों ने अपना ऑफिस भी खोला, जहां से किसान खेती संबंधी प्रोडक्ट जैसे बीज, दवाएं, उपकरण खरीद सकते थे, एक्सपर्ट से मिल सकते थे।

दो साल बाद शुरू किया ग्रामोफोन नाम से मोबाइल ऐप

हर्षित बताते हैं कि हमारी टीम के लोग गांवों में जाकर किसानों से मिलते हैं। उनकी जरूरतों को समझते हैं और फिर उसका समाधान निकालते हैं।
हर्षित बताते हैं कि हमारी टीम के लोग गांवों में जाकर किसानों से मिलते हैं। उनकी जरूरतों को समझते हैं और फिर उसका समाधान निकालते हैं।

हर्षित बताते हैं कि करीब दो साल तक किसानों के साथ काम करने के बाद हमें एक ऐप की जरूरत महसूस हुई। ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों तक हम पहुंच सके और दूसरे राज्यों के किसान भी हमसे जुड़ सकें। इसके बाद हमने ग्रामोफोन नाम से एक ऐप लॉन्च किया। यह ऐप किसानों के लिए बिल्कुल मुफ्त रखा। साथ ही टोल फ्री नंबर की भी व्यवस्था की, ताकि जो किसान स्मार्टफोन यूज नहीं करते हैं, वे भी एक फोन कॉल के जरिए इससे जुड़ सकें।

इस तरह हर्षित और उनके साथियों का कारवां शुरू हुआ। धीरे-धीरे किसानों को उनके बारे में जानकारी मिलती गई और वे अपना दायरा बढ़ाते गए। 5 साल के भीतर ही उनके साथ देशभर के 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ गए। इनमें से 3 लाख से ज्यादा किसानों ने ऐप डाउनलोड किए। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान उनसे ग्राउंड लेवल पर भी जुड़े हैं। इतना ही नहीं किसानों के साथ ही व्यापारी भी ऐप पर जुड़े हैं।

कैसे करते हैं काम? किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह ऐप?

हर्षित बताते हैं कि हमारी टीम अभी ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही लेवल पर काम कर रही है। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन है, वे हमारे ऐप का इस्तेमाल करते हैं, जिनके पास स्मार्टफोन या फोन नहीं है, उनके लिए हमारी टीम ग्राउंड पर काम करती है। मध्य प्रदेश में 8 जगहों पर हमारा ग्रामोदय सेंटर है। जहां जाकर किसान अपनी हर समस्या का समाधान पा सकते हैं। हमारी टीम उनकी मदद के लिए वहां उपलब्ध रहती है। जहां तक ऐप की बात है, तो किसानों की मदद के लिए उन्होंने 5 अलग-अलग कैटेगरी बनाई है, जो इस प्रकार है...

हर्षित कहते हैं कि हमारी टीम के लोग फील्ड पर जाते रहते हैं। वे किसानों को ज्यादा से ज्यादा और बेहतर प्रोडक्शन की तरकीब सुझाते हैं।
हर्षित कहते हैं कि हमारी टीम के लोग फील्ड पर जाते रहते हैं। वे किसानों को ज्यादा से ज्यादा और बेहतर प्रोडक्शन की तरकीब सुझाते हैं।
  • ग्राम सलाह : इसमें किसान अपनी किसी भी समस्या का समाधान एग्रीकल्चर से जुड़े एक्सपर्ट से पूछ सकते हैं। जैसे किसी किसान को प्रोडक्शन को लेकर दिक्कत है, किसी को फसल की बीमारी को लेकर सलाह लेनी है, या किसी को अपनी जमीन के मुताबिक सही फसल चयन को लेकर सुझाव चाहिए, तो वह यहां उपलब्ध एक्सपर्ट से जानकारी हासिल कर सकता है। किसान चैट के जरिए या फोन के जरिए भी एक्सपर्ट से बातचीत कर सकते हैं।
  • ग्राम व्यापार : यहां किसान और व्यापारी दोनों ही जुड़े हैं। अगर किसी किसान को अपनी फसल या उत्पाद बेचना है तो वह ऐप के जरिए मार्केटिंग कर सकता है। वह अपना उत्पाद और उसकी कीमत यहां अपलोड कर सकता है। इसके बाद संबंधित व्यापारी उससे बातचीत करके वह प्रोडक्ट खरीद सकता है। इससे दोनों को ही सहूलियत होती है।
  • ग्राम बाजार : यह किसानों का अपना बाजार है। यहां किसान खेती से जुड़ा कोई भी प्रोडक्ट खरीद सकता है। अगर उसे बीज की जरूरत है, दवा की जरूरत है या किसी उपकरण की जरूरत है, तो वह यहां से खरीद सकता है। ग्रामोफोन की टीम के पास हर तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं।
  • ग्राम सभा : यह किसानों का अपना मंच है। जैसे गांवों में ग्राम सभा का कॉन्सेप्ट होता है, उसी मॉडल पर यह वर्चुअल ग्राम सभा है। यहां वर्चुअली किसान और एक्सपर्ट जुड़े होते हैं। वे आपस में बातचीत कर सकते हैं, अपनी परेशानियां साझा कर सकते हैं, बेहतर खेती के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  • सुपर फसल : किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत प्रोडक्शन को लेकर है। कई बार सारी जोर आजमाइश करने के बाद भी उतना प्रोडक्शन नहीं हो पाता है, जितना होना चाहिए। ऐसे में ग्रामोफोन की टीम किसानों के खेत की जमीन की टेस्टिंग करती है और फिर उसका ट्रीटमेंट करती है। इसके बाद उसके मुताबिक फसल की सलाह किसानों को देती है, ताकि जमीन के मुताबिक उत्पादन भरपूर हो।
ये हर्षित की टीम के सदस्य हैं। फिलहाल उनके साथ 300 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इसमें खेती से जुड़े हर तरह के एक्सपर्ट शामिल हैं, जो किसानों की मदद करते हैं।
ये हर्षित की टीम के सदस्य हैं। फिलहाल उनके साथ 300 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इसमें खेती से जुड़े हर तरह के एक्सपर्ट शामिल हैं, जो किसानों की मदद करते हैं।

ग्रामोफोन से किसान कैसे जुड़ सकते हैं?

हर्षित कहते हैं कि जिन किसानों के पास स्मार्टफोन है, वह ऐप के जरिए हमसे जुड़ सकते हैं। वे अपनी प्रोफाइल क्रिएट कर सकते हैं। इसके लिए प्रोसेस बेहद आसान है। वहीं जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, सिर्फ फीचर फोन है, वे टोल फ्री नंबर के जरिए हमसे जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही अगर किसी किसान के पास फीचर फोन भी न हों तो वह हमारे ग्रामोदय सेंटर या ऑफिस के जरिए मेंबर बन सकता है। तीनों ही प्लेटफॉर्म पर हमारी टीम हर तरह से उसकी मदद करेगी।

कैसे करते हैं कमाई, क्या है बिजनेस मॉडल?

हर्षित बताते हैं कि फिलहाल हमारा रेवेन्यू मॉडल एग्रीकल्चर से जुड़े प्रोडक्ट की मार्केटिंग पर ही फोकस है। देशभर से जुड़े किसान ऑनलाइन या ऑफलाइन लेवल पर हमसे जो प्रोडक्ट खरीदते हैं, हमारा ज्यादातर रेवेन्यू उसी से हासिल होता है। इसके साथ ही ऐप के जरिए जो किसान और व्यापारी आपस में खरीद-बिक्री करते हैं, उससे भी कुछ कमीशन हमें प्राप्त होता है। अभी सालाना 25 से 30 करोड़ रुपए हमारा टर्नओवर है। हर्षित की टीम में 300 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं।

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