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आज की पॉजिटिव खबर:7वीं पास सुभाष ने बनाई चंदन का पेस्ट तैयार करने वाली मशीन; सालाना 16 लाख रुपए का बिजनेस, विदेशों से भी आ रहे हैं ऑर्डर

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: मेघा

भगवान जगन्नाथ की चंदन यात्रा हो, इस्कॉन मंदिर की चंदन यात्रा हो, रामलला के लिए चंदन का मंदिर तैयार करना हो, या सावन के महीने में शिव जी को चंदन का लेप लगाना हो, सब में चंदन के पेस्ट की जरूरत पड़ती है। मंदिरों में चंदन का खूब इस्तेमाल होता है। चंदन का पेस्ट तैयार करने के लिए इसे घिसना पड़ता है। इसमें घंटों वक्त और उतनी ही अधिक मेहनत भी लगती है। आज की पॉजिटिव खबर में हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक अनोखी मशीन तैयार की है। इससे बहुत कम समय में चंदन का लेप तैयार हो जाता है।

महाराष्ट्र के जलगांव के शेन्दुर्णी के रहने वाले सुभाष जगताप ने यह पहल की है। अब तक वे 60 से ज्यादा मशीनें बेच चुके हैं। भारत के साथ ही विदेशों में भी उनके कस्टमर्स हैं। कई बड़े मंदिरों के लिए वे चंदन का पेस्ट तैयार करने वाला सेटअप लगा चुके हैं। फिलहाल उनकी कंपनी का टर्नओवर 16 लाख रुपए है।

18 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था

75 साल के सुभाष महाराष्ट्र के जलगांव जिले के रहने वाले हैं। अब उनके काम में उनके दोनों बेटे हाथ बंटाते हैं।
75 साल के सुभाष महाराष्ट्र के जलगांव जिले के रहने वाले हैं। अब उनके काम में उनके दोनों बेटे हाथ बंटाते हैं।

75 साल के सुभाष 7वीं पास हैं। उनके पिता रेलवे में काम करते थे और वे चाहते थे कि सुभाष भी उन्हीं के साथ काम करें, लेकिन सुभाष का मन बचपन से ही बिजनेस करने का था। वे खुद का कुछ काम करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक के बाद एक कई कामों में हाथ आजमाए। उन्होंने 18 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था।

अपने मामाजी के साथ वे मैकेनिक का काम करने लगे। वे ट्रक की बॉडी बनाने का काम करते थे। ट्रक के कल-पुर्जे सुभाष को इतने रास आए कि मशीनों को ही उन्होंने अपनी रोजी-रोटी का जरिया बना लिया। इसके बाद एक के बाद एक वे जगह बदलते गए। हालांकि मशीनों से उनका नाता नहीं छूटा।

खेत जोतने के लिए पहली बार तैयार की थी मशीन
सुभाष ने पहली बार अपने दोस्त गोपाल के लिए एक मशीन तैयार की और वहीं से उनका काम शुरू हो गया। खेत की जुताई के लिए सुभाष के दोस्त के पास बैल और ट्रैक्टर खरीदने के पैसे नहीं थे, वे चाहते थे कि सुभाष उनके लिए कोई एक मशीन बनाएं। सुभाष ने साइकिल को जुताई मशीन के रूप में तब्दील कर दिया।

तब गांव के कई लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन जैसे ही गोपाल ने इस मशीन का इस्तेमाल अपने खेत में किया, लोग उसे देखकर सरप्राइज्ड हो गए। उनके लिए यह बिलकुल नई चीज थी, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि कुछ ऐसी भी मशीन साइकिल की मदद से बनाई जा सकती है।

सुभाष ने जब पहली मशीन तैयार की थी तब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने उनकी तारीफ की थी और उन्हें सम्मानित किया था।
सुभाष ने जब पहली मशीन तैयार की थी तब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने उनकी तारीफ की थी और उन्हें सम्मानित किया था।

साइकिल से मशीन तैयार करना सुभाष के लिए टर्निंग पॉइंट था। इसके बाद लोग उनसे अपनी डिमांड के मुताबिक मशीनें बनवाने लगे। लोगों के कहने पर उन्होंने फसलों में छिड़काव के लिए मोबाइल स्प्रेयर भी बनाया, जिसके लिए उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से सम्मान भी मिला। इसके बाद उन्होंने इनोवेटिव ड्रिलिंग मशीन, प्लाईवुड कटिंग मशीन जैसे कई उपकरण बनाए।

सुभाष कहते हैं कि मशीनें बनाने का मेरा काम सही चल रहा था, लेकिन आमदनी उतनी नहीं हो रही थी, जितनी होनी चाहिए। कई बार पैसों की कमी के चलते काम रुक जाता था। हालांकि मैंने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश जारी रखी।

6 साल पहले एक मंदिर की मांग पर तैयार की मशीन

सुभाष कहते हैं कि यह मशीन बिजली से चलती है। इसमें पत्थर की एक चक्की का इस्तेमाल किया गया है।
सुभाष कहते हैं कि यह मशीन बिजली से चलती है। इसमें पत्थर की एक चक्की का इस्तेमाल किया गया है।

साल 2015 सुभाष के लिए कामयाबी लेकर आया। जलगांव के एक मंदिर की तरफ से उन्हें चंदन की लकड़ी से पेस्ट तैयार करने की मशीन बनाने का ऑफर मिला। सुभाष के लिए यह ऑफर जितना बड़ा था, उतना ही चैलेंजिंग भी। सुभाष को इस तरह की मशीन के बारे में पहले से कोई खास जानकारी नहीं थी।

काफी सोच-विचार करने के बाद उन्होंने ऑफर स्वीकार कर लिया और अपनी प्लानिंग शुरू कर दी। उनके माइंड में यह बात आई कि साउथ इंडिया में इडली-डोसा के बैटर के लिए इलेक्ट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, मुझे भी उसी तर्ज पर अपनी मशीन तैयार करनी होगी। कुछ महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने चंदन का पेस्ट तैयार करने की मशीन बना दी।

कैसे काम करती है मशीन?
यह मशीन बिजली से चलती है। इसमें पत्थर की एक चक्की का इस्तेमाल किया गया है। जिसे स्टील के एक बड़े बर्तन के ऊपर फिक्स किया गया है। इसके ऊपर स्प्रिंग से जुड़ा एक प्रेशर कंट्रोलर ह्वील लगा है। जबकि साइड में एक तरफ वाटर टैंक है और दूसरी तरफ कैंप लीवर है।

सबसे पहले पत्थर की चक्की के नीचे चंदन की सूखी लकड़ी के टुकड़े को डाला जाता है। उसके बाद उसे प्रेशर कंट्रोलर के जरिए फिट किया जाता है। इसके बाद वॉटर टैंक में पानी भरा जाता है और फिर स्वीच ऑन की जाती है। जिसके बाद कैंप लीवर के जरिए चंदन का पेस्ट निकलने लगता है।

तस्वीर में आप देख सकते हैं कि मशीन की मदद से बड़ी ही आसानी से चंदन का पेस्ट तैयार किया गया है।
तस्वीर में आप देख सकते हैं कि मशीन की मदद से बड़ी ही आसानी से चंदन का पेस्ट तैयार किया गया है।

लोगों की डिमांड के मुताबिक उन्होंने इसके दो मॉडल तैयार किए हैं। एक जम्बो और दूसरा मिनी। दोनों मशीनों की कैपिसिटी अलग-अलग है। जम्बो मशीन से एक घंटे में 5 किलो चंदन का पेस्ट तैयार होता है। जबकि मिनी मशीन से एक घंटे में 2.5 किलो चंदन का पेस्ट तैयार होता है। सुभाष को इस मशीन के लिए भी नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने सम्मानित किया है। एक मिनी मशीन की कीमत 33 हजार रुपए है। जबकि जंबो मशीन की कीमत 56 हजार रुपए है।

सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया तो आने लगे ऑर्डर
मार्केटिंग मॉडल को लेकर सुभाष कहते हैं कि हम सोशल मीडिया के जरिए मार्केटिंग कर रहे हैं। इसी के जरिए ज्यादातर ऑर्डर हमारे पास आते हैं। कुछ साल पहले मेरे बेटे स्वप्निल ने यूट्यूब पर एक चैनल तैयार किया और उस पर मशीन के वीडियो अपलोड करने लगा। इसका पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी मिला। कुछ ही दिनों में वीडियो पर 15 हजार से ज्यादा व्यूज आ गए। सोशल मीडिया के जरिए ही 2018 में हमें पहली बार विदेश से ऑर्डर मिला। हमने नेपाल की एक कंपनी के लिए मशीन तैयार की है।

ये वे मशीनें हैं जो डिलीवरी के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वे देशभर में कुरियर कंपनियों की मदद से डिलीवरी कर रहे हैं।
ये वे मशीनें हैं जो डिलीवरी के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वे देशभर में कुरियर कंपनियों की मदद से डिलीवरी कर रहे हैं।

इसके बाद उन्हें फोन के जरिए भी ऑर्डर मिलने लगे। पिछले कुछ समय में कई कॉस्मेटिक और आयुर्वेदिक कंपनियों से भी उन्हें ऑर्डर मिले हैं। उनके यहां उत्पाद बनाने के लिए जड़ी बूटियों को पीसा जाता है जिसके लिए इस तरह की मशीन की जरूरत पड़ती है। सुभाष ने अपनी इस मशीन में कुछ बदलाव करके इन कंपनियों की मदद की है। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पंढरपुर मंदिर, तमिलनाडु के श्रीरंगम मंदिर और दक्षिण भारत के कई मंदिरों के लिए उन्होंने चंदन का पेस्ट तैयार करने वाली मशीन बनाई है।

सुभाष और उनकी टीम में 7 लोग काम करते हैं। जिनमें 3 डायरेक्टर सुभाष और उनके बेटे सचिन और स्वप्निल, 2 वेल्डर और 2 लेबर काम करते हैं। कस्टमर्स के ऑर्डर प्लेस करने और 50% अमाउंट भुगतान करने के बाद सुभाष और उनकी टीम 15 दिन के अंदर कस्टमर्स तक ऑर्डर पहुंचा देती है। लोगों तक ऑर्डर पहुंचाने के लिए स्वप्निल ने जलगांव के ही कुछ कुरियर कंपनियों से टाइअप कर रखा है। पिछले साल उन्होंने 2.5 लाख रुपए की लागत से अपना एक कंप्लीट सेटअप तैयार किया है।

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