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बात बराबरी की:अपने मन मुताबिक कपड़े पहने औरत तभी महफूज है, जब उसका सामना मर्दों की बजाय किसी रोबोट से हो

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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क्या आपने कभी सुना है कि किसी औरत ने राह चलते पुरुष को इसलिए टोका हो क्योंकि उसकी शर्ट का ऊपरी बटन खुला हुआ था? या फिर पुरुषों पर फब्तियां कसी गई हों क्योंकि उन्होंने पूरी पैंट के बजाय शॉर्ट्स पहने हों, लेकिन औरतों के साथ ऐसा होता है और रोज होता है। भले ही उन्होंने खुद को सिर से लेकर पैर तक ढांप रखा हो या फिर नए फैशन की ड्रेस पहने हों। औरतों की देह तो छोड़िए, उनके लंबे बाल या फिर गुलाबी रंगत लिए नाखून तक देखकर पुरुषों का दिमाग काबू खो देता है। इसके बाद जो होता है, उस पर बेचारे पुरुषों का बस नहीं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ने अपने दिमाग में खूब गुनने-बुनने के बाद ‘रोबोट’ वाला तर्क दिया। एक अमेरिकी टीवी चैनल से इंटरव्यू के दौरान इमरान फरमाते हैं- 'अगर कोई महिला बेहद कम कपड़े पहने होगी तो इसका असर पुरुषों पर होगा जब तक कि वे रोबोट न हों। मेरे मुताबिक ये एक सामान्य समझ है।' वे यहीं नहीं रुके, बल्कि बताया कि अगर प्रलोभन बढ़ेगा तो इसका कुछ न कुछ नतीजा तो जरूर होगा।

मुल्क के सबसे ताकतवर ओहदे पर बैठे शख्स की बात सरासर झूठ भी नहीं है। पुलिस, लॉ और जस्टिस कमीशन ऑफ पाकिस्तान का डेटा बताता है कि पाक में रोज बलात्कार के 11 मामले दर्ज होते हैं। ये वे मामले हैं, जहां औरतें पुलिस तक जाने और मुंह खोलकर अपने साथ हुआ हादसा बताने की हिम्मत करती हैं। बीते 5 सालों में वहां रेप के लगभग 22 हजार मामले आए। यानी औरतें थाने पहुंची और पुलिस की घूरती नजरों समेत चुभते सवालों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया, ताकि अपराधी को सजा मिल सके, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सरकारी डेटा के मुताबिक 22 हजार अपराधियों में से केवल 77 लोगों को सजा मिली। यानी कुल 0.3%।

वजह साफ है- रेप का शिकार हुई औरतों ने भी कुछ न कुछ गलती तो की होगी। उनके कपड़े भड़काऊ रहे होंगे। या फिर कुछ ज्यादा ही सादी टांगें दिखती रहीं होंगी। या उंगलियां ठीक से ढंकी नहीं होंगी। नए फैशन के बाल कटवा रखे होंगे। या फिर इतनी ढंक-ओढ़कर रहती होंगी कि देखने का जी चाह जाए।

अब औरतें होंगी तो चाहे कपड़े कम पहनें या नहीं, ज्यादातर पुरुषों का ध्यान अपने मकसद से भटकेगा ही। यही कारण है कि ग्रीक दार्शनिक अरस्तु ने खेल-कूद के लिए बनी दर्शक-दीर्घा में भी औरतों के आने को गलत बता दिया। अपनी किताब पॉलिटिक्स में वे कहते हैं- ‘औरत पूरी तरह से बेकार होती है। वे इतना भ्रम और भटकाव लाती हैं, जितना दुश्मन भी न कर सके।' अरस्तु समेत ढेर सारे वजनदार पुरुषों के कहने के साथ ही औरतों को कई किलो के कपड़ों से लाद दिया गया। इतना कि कई परतों वाले कपड़ों को पहनने-खोलने में ही दिन का बड़ा हिस्सा चला जाए। बाकी हिस्सा इस मगजमारी में कि कपड़ों के साथ किन गहनों का मेल बिठाना है।

कपड़ों के समंदर में डूबी औरतें कविता नहीं करतीं। परखनलियों में तेज गंध वाले रसायन नहीं मिलातीं। वे केवल पुरुषों के तय किए कपड़ों में सज-धजकर उनका इंतजार करती हैं। ताकि पुरुष जब जंगल जैसी खूंखार दुनिया से लड़कर रात को घर लौटे तो मुलायम तकिए की तरह वे उसे आराम दे सकें।

कपड़े ही नहीं, औरत की देह पर सजी हर चीज इस तरह से तैयार हुई, जो उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक सकें। जो उन्हें पुरुषों के कदम से कदम मिलाने से रोक पाएं। ऊंची एड़ी की सैंडल भी इसी कतार का हिस्सा है। साल 2013 में पेरिस के मशहूर फैशन डिजाइनर क्रिश्चियन लॉबोटाइन ने एक इंटरव्यू में कहा था- हाई हील्स में खूबसूरत औरत की चाल धीमी हो जाती है। इससे मर्दों को उसे ज्यादा देर तक निहारने का मौका मिल पाता है। क्रिश्चियन ने आगे जोड़ा- वैसे भी औरतों को भागकर कहां जाना है। भागमभाग वाले सारे काम तो पुरुषों ने ही संभाले हुए हैं।

औरत अगर भागेगी, तो शायद पुरुषों की पहुंच से बाहर हो जाए। पकड़ में न आने वाली औरत काफी खतरनाक होती है। वे सोच पाती हैं। मुंह खोलकर विरोध कर पाती हैं। और जरूरत पड़े तो हाथ-पैरों की वर्जिश भी कर पाती हैं। यही कारण है कि औरतों को टनों भारी कपड़ों-गहनों से लाद दिया गया ताकि उनके पैर जमीन में धंसे रहें। इसके बाद भी पुरुषों का मन डोलता रहा। अपनी हिंसा को वे प्रलोभन का नाम देते रहे। कहीं 11 महीने की बच्ची किसी को उकसाती रही तो कहीं 82 साल की महिला ने खुद पास आने का आमंत्रण दिया।

तो ऐसे में कोई हैरानी नहीं, जो पड़ोसी मुल्क के पीएम ने ऐसा बयान दे दिया। हैरानी है तो इस बात पर कि कैसे दुनिया में अब तक वह जलजला नहीं आया, जो सब तहस-नहस कर दे। ताकि हजारों साल बाद एक नई धरती फिर आकार ले, हरियाली और प्रेम से भरी, जहां औरत-मर्द साथी हों। जहां आजाद औरत की तलाश में कोई मुहिम न चलानी पड़े।

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