• Hindi News
  • Db original
  • A Woman Who Has Lost Her Husband, Is An Open Bottle Of Perfume, Which Can Disorient Even The Men Of The House With The Fragrance

बात बराबरी की:पति को खो चुकी औरत, इत्र की वो खुली बोतल है, जो खुशबू से भले घर के मर्दों को भी भटका दे

नई दिल्ली11 दिन पहलेलेखक: मृदुलिका झा
  • कॉपी लिंक

चीन में तब मिंग साम्राज्य का दौर था। 1400 ईसवी का वो वक्त, जब चीनी मसालों से लेकर इत्र की खुशबू दुनिया को मदहोश कर रही थी। पैसे बरस रहे थे। घर महलों में बदल रहे थे। कुल मिलाकर, सबकुछ आगे बढ़ रहा था। सिवाय औरतों के। स्त्री-शरीर की पवित्रता पर उन दिनों भारी जोर था। पुरुष जहरीली चाय पीकर एकबारगी बच जाए, लेकिन मिलावटी औरत पाकर उसकी मौत तय है। तो औरत की शुद्धता की जांच के दसियों तरीके खोज निकाले गए। कैसे पता करें कि आपकी प्रेमिका या भावी पत्नी अनछुई है।

उन्हीं दिनों चीनी भाषा में एक किताब आई- Za Shi Mi Zhong, यानी रहस्यों की तह तक कैसे पहुंचे। रहस्य यानी औरत का शरीर। इसे अंतरिक्ष से भी ज्यादा रहस्यमयी और खौफनाक माना गया। इस भेद को खोलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया गया। चलिए, पवित्रता का पता लग गया। अब ये कैसे तय हो कि शादीशुदा औरत अपने पति के लिए वफादार है! या फिर विधवा औरत अपनी वर्जिनिटी खो चुकने का फायदा नहीं उठा रही! इसे रोकने के भी तरीके ढूंढ निकाले गए।

रेशम-मसाले बेचने के लिए घूमते व्यापारियों ने दुनिया के ओने-कोने खंगालकर चेस्टिटी बेल्ट खोज डाली। ये धातु की वो बेल्ट थी, जो औरतों की देह के निचले हिस्से को ताले में बंद रखती। मोटी भाषा में कहें तो लोहे का बना अंतर्वस्त्र, जिसपर ताला लगा होता। इसकी एक चाभी भी होती। महिला अगर शादीशुदा हो तो ये चाबी पति के पास होती। सैर पर या लंबी यात्रा पर निकला पति अपनी स्त्री पर ताला मढ़कर जाता ताकि वो उसके लौटने तक पवित्र बनी रह सके। विधवाओं के मामले में ये चाबी धार्मिक गुरु या महिलाओं की मुखिया के पास हुआ करती।

विधवा पवित्रता पर इतना जोर था कि मिंग साम्राज्य ने कई अवॉर्ड्स बना डाले, जो उन विधवाओं को मिलते, जो पति की मौत के बाद ताउम्र बिसूरती रहें। जो औरत जितना ज्यादा रोएगी-कलपेगी, वो उतनी ही शुद्ध मानी जाएगी। अगर कोई खुदकुशी कर ले, तब तो और बढ़िया। उसके नामपर इनाम दिए जाते। तो हुआ ये कि उन चार सौ सालों में विधवाओं की आत्महत्या की दर तेजी से बढ़ी। पवित्रता का दबाव औरतों की जान लेने लगा।

ये तो 1400 ईसवी का किस्सा है। अब बात करते हैं 21वीं सदी की। इन दिनों मुल्क में पत्थरबाजियों का दौर चल रहा है। इस बीच एक बेहद खूबसूरत तस्वीर आई- नाजुक ऐसी जैसे मुल्तान की लंबी सुराही। पूल के नीले पानी में एक्ट्रेस मंदिरा बेदी अपने मित्र आदित्य मोटवानी के साथ खिलखिला रही हैं। पूल है, तो तो जाहिर है कि दोनों ने उसी तरह के कपड़े पहने हुए हैं। तस्वीर के साथ मंदिरा ने प्यारा-सा कैप्शन भी दिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसके बाद तो जैसे हंगामा मच गया।

ट्रोल्स हैरानी जताने लगे कि मंदिरा इतनी खुश कैसे हैं, जबकि पति की मौत को सालभर ही बीता है! गुस्सा जताने लगे कि औरतें मतलबी होती हैं, जो तुरंत ही अपने मरे हुए पति को भूल जाती है! कुछ इसी तरह की ट्रोलिंग टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे की भी हुई थीं, जब पूर्व प्रेमी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी खुशरंग तस्वीरें डाली थीं। बता दें कि दोनों का अलगाव सुशांत की मौत से 4 साल पहले हो चुका था, इसके बाद भी लोग चाहते थे उनकी मौत के बाद एक्ट्रेस सब छोड़-छाड़कर सफेद जामा पहनकर बैठ जाएं और रो-रोकर पपोटे सुजा लें।

नाइजीरिया का एक शहर है- इनुगु। एक वक्त पर यहां की नदियां साइंस का वो लैब हुआ करती थीं, जो औरतों की पवित्रता पर ISO का ठप्पा लगातीं। पति की मौत के बाद विधवा को एक कमरे में बंद कर दिया और खिड़की से ही खाना-पानी दिया जाता। तीन हफ्तों बाद उसे नदी तक ले जाया जाता, जहां सिर के बाल छीलते हुए शपथ लेनी पड़ती थी कि पति को वो पूरे मन से चाहती थी और उसकी मौत में उसकी बद्दुआओं का कोई हाथ नहीं। नदी की लहरों के ऊपर-नीचे होने से विधवा की नीयत का पता लग जाता और उसी मुताबिक उसकी सजा तय होती थी।

पति को खो चुकी औरत, इत्र की वो खुली बोतल है, जो हर हाल में मर्दों को रास्ते से भटकाएगी। तो ऐसी बोतल का मुंह जोर से बंद कर, उसे रसोई के सबसे कोने वाले आले में रखा जाने लगा। तरीके खोजे गए- फिर चाहे वो विधवा के सिर मूंडकर उसका मनपसंद खाना छुड़वा देना हो, या फिर तीन महीने तक घर के एक कमरे में बंद रखकर जबरन सोग मनवाना।

दूसरी तरफ बीवी को खो चुका मर्द मेले में भटके बच्चे जैसा मासूम होता है, जिसे देखकर कलेजा फट जाए। अकेला मर्द बेचारा क्या-क्या संभाले! चलिए, जैसे-तैसे दफ्तर चला भी जाए, लेकिन लौटेगा तो खाएगा क्या! संझा-बत्ती कौन करेगा! बच्चे कौन संभालेगा! और सबसे जरूरी बात- एसी कमरे में पैर डुलाकर लौटने के बाद पांवों में जो टीस उठेगी, उसपर तेल मालिश कौन करेगा! तो मां से लेकर चाचियां-मामियां-फूफियां सब की सब जुट पड़ती हैं कि भली-सी लड़की खोजकर लड़के की दोबारा शादी कर दी जाए।

साथी की मौत के बाद शादी के पैटर्न को समझने के लिए प्यू रिसर्च सेंटर ने एक सर्वे किया। साल 2014 में हुए इस सर्वे में पता चला कि पत्नी की मौत के बाद 64% से ज्यादा पुरुष दोबारा शादी कर लेते हैं, वहीं केवल 52% महिलाएं ही दोबारा रिश्ते में जाने की सोचती हैं, वो भी काफी वक्त के बाद।

अमेरिकी लेखक डेनियल एम ऑर्टबर्ग ने अलग-अलग अखबारों के लिए लंबे समय तक रिलेशनशिप काउंसलर का काम किया। एक इंटरव्यू में वे बताते हैं कि उनके पास ऐसी औरतों के खत आते, जिन्होंने ताजा-ताजा अपने पति को खोया था। वे परेशान थीं कि पति की मौत के बाद उन्हें कोई सदमा नहीं लगा! वे समझना चाहती थीं कि साथी के जाने के बाद भी अगर उनके भीतर सजने-घूमने का चाव बाकी है, तो क्या ये उन्हें कमतर औरत बना देता है!

डेनियल कहते हैं- ये सवाल किसी मर्द की तरफ से कभी नहीं आया। शायद मर्द जानते हैं कि औरत का जाना मोटे पर्स से छुट्टा खोने से कुछ ज्यादा नहीं।