• Hindi News
  • Db original
  • Aaj Ki Positive Khabar : How To Start Dragon Fruit Farming, Know All About To It's Process And Marketing In India

आज की पॉजिटिव खबर:गुजरात के इंजीनियर ने रिटायरमेंट के बाद ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की; सालाना 8 लाख रु. कमाई, जानिए आप कैसे कर सकते हैं शुरुआत

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

कॉमर्शियल फार्मिंग के लिए ड्रैगन फ्रूट एक बेहतर ऑप्शन है। कम लागत और कम वक्त में इससे अधिक कमाई की जा सकती है। पिछले कुछ सालों में इसकी डिमांड बढ़ी है और लोग इसकी फार्मिंग भी कर रहे हैं। खास कर कोरोना के बाद इसका इस्तेमाल इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में किया जा रहा है। गुजरात के सूरत में रहने वाले जसवंत पटेल रिटायरमेंट के बाद पिछले 4 साल से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उनके पास अलग-अलग वैराइटी के 7 हजार से ज्यादा ड्रैगन फ्रूट के प्लांट हैं, जिसकी मार्केटिंग वे गुजरात के साथ ही एमपी, राजस्थान और बाकी राज्यों में कर रहे हैं। इससे वे हर साल 8 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

68 साल के जसवंत गवर्नमेंट इंजीनियर रहे हैं। नौकरी के दौरान ही खेती को लेकर उनकी दिलचस्पी जागी। इसके बाद 2007 में उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर पॉली हाउस तैयार किया। इसमें उन्होंने मेडिसिनल फ्लावर्स लगाए। कुछ साल तक तो अच्छी मार्केटिंग हुई, देश के कई राज्यों में उन्होंने अपने प्रोडक्ट भेजे, लेकिन मार्केट में चाइनीज फ्लावर्स के आने के बाद उनके प्रोडक्ट की डिमांड घट गई। धीरे-धीरे आमदनी कम होने लगी, ऊपर से पॉली हाउस को मैनेज करने में पैसे ज्यादा लग रहे थे। लिहाजा उन्होंने यह काम बंद कर दिया।

68 साल के जसवंत गवर्नमेंट इंजीनियर रहे हैं। पहले उन्होंने पॉली हाउस की शुरुआत की थी, लेकिन उसमें कुछ खास कामयाबी नहीं मिली।
68 साल के जसवंत गवर्नमेंट इंजीनियर रहे हैं। पहले उन्होंने पॉली हाउस की शुरुआत की थी, लेकिन उसमें कुछ खास कामयाबी नहीं मिली।

15 प्लांट के साथ ट्रायल किया, सफल हुए तो खेती शुरू की

जसवंत कहते हैं कि 2014 में रिटायर होने के बाद मुझे कुछ नया करने के लिए वक्त मिल गया। कुछ दिनों तक मैंने अलग-अलग प्लांट के बारे में रिसर्च किया और फिर तय किया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती करेंगे। हालांकि तब इसका कॉन्सेप्ट बिल्कुल नया था और बहुत कम किसान इसकी खेती करते थे। इसलिए मैंने भी 15 प्लांट के साथ शुरुआत की ताकि अगर कामयाबी न भी मिले तो नुकसान कम हो, लेकिन किस्मत अच्छी रही और प्रोडक्शन अच्छा हुआ।

6 एकड़ जमीन पर खेती, 7 हजार से ज्यादा प्लांट

इसके बाद 2017 में जसवंत ने कॉमर्शियल लेवल पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। उन्होंने देश की अलग-अलग जगहों से अच्छी वैराइटी के प्लांट मंगाए और करीब 6 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। दो साल बाद यानी 2019 में उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा। उनके ज्यादातर प्लांट तैयार हो गए और फ्रूट निकलने लगे। इसके बाद वे सूरत और आसपास के इलाकों में इसकी मार्केटिंग करने लगे। मदद के लिए कुछ लोगों को उन्होंने अपनी टीम में शामिल कर लिया।

जसवंत कहते हैं कि हम सोशल मीडिया के जरिए देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। बड़े व्यापारी हमसे थोक में प्रोडक्ट खरीदते हैं।
जसवंत कहते हैं कि हम सोशल मीडिया के जरिए देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। बड़े व्यापारी हमसे थोक में प्रोडक्ट खरीदते हैं।

जसवंत कहते हैं कि फिलहाल हमारे पास 1800 पोल हैं। एक पोल पर करीब 4 प्लांट लगते हैं। इस तरह 7 हजार से ज्यादा प्लांट अभी हमारे पास हैं। इसके साथ ही हमने हाल ही में ट्रैली सिस्टम से भी 500 प्लांट लगाए हैं। इसमें प्लांट को एक पाइप के सहारे लाइन से लगाया जाता है। इससे जगह की बचत होती है। अगर वैराइटी की बात करें तो हमारे पास अभी कुल 7 वैराइटी हैं। इनमें थाईलैंड, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया की वैराइटीज हैं। हमारे पास रेड, यलो और व्हाइट तीनों ही तरह के प्लांट हैं।

सोशल मीडिया से मार्केटिंग, बड़े ऑडर्स के लिए एडवांस बुकिंग

जसवंत बताते हैं कि हमने 'फलक फ्रूट फार्म' नाम से अपनी कंपनी रजिस्टर की है। सोशल मीडिया पर इसी नाम से हमारा अकाउंट है। इसके माध्यम से लोग हमें ऑर्डर करते हैं। सूरत और आसपास के लोग हमारे फार्म पर ही आकर प्रोडक्ट ले जाते हैं। कोरोना के बाद कई बड़ी कंपनियां सीधे हमारे फार्म से फ्रूट लेकर जाती हैं। इसके अलावा हमारी टीम के लोग कूरियर के जरिए देशभर में प्रोडक्ट की डिलीवरी कर रहे हैं।

अगर किसी को थोक में या ज्यादा मात्रा में फ्रूट चाहिए तो उसके लिए एडवांस बुकिंग करनी होती है। कई होटल वाले और दवा बनाने वाली कंपनियां एडवांस बुकिंग करती हैं। पिछले साल हमें 8 लाख रुपए का मुनाफा हुआ है। अगले साल दोगुना मुनाफा होने की उम्मीद है, क्योंकि तब लगभग सभी प्लांट से फ्रूट निकलने लगेंगे।

हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है।
हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती?

पहले ऐसा माना जाता था कि ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत में नहीं हो सकती। यह अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत में आता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत में भी बड़े लेवल पर इसका प्रोडक्शन हो रहा है। गुजरात तो इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम 'कमलम' रखा है। इसके अलावा यूपी, एमपी, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होने लगी है।

ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए बीज अच्छे किस्म का होना चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। बरसात को छोड़कर पूरे साल इसके बीज लगाए जा सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। बस हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि पानी या जलजमाव वाली जगह न हो। महीने में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है। मार्च से जुलाई के बीच प्लांटिंग करना ज्यादा बेहतर होता है।

प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसके लिए सीमेंट के खंभे की भी जरूरत होती है। एक खंभे के साथ तीन-चार प्लांट लगाए जा सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट बढ़ता है उसे रस्सी से बांधते जाते हैं। एक-सवा साल बाद प्लांट तैयार हो जाता है। दूसरे साल से फ्रूट निकलने लगते हैं। हालांकि तीसरे साल से ही अच्छी मात्रा में फल का प्रोडक्शन होता है।

इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री के बीच हो तो प्रोडक्शन बढ़िया होता है। बेहतर प्रोडक्शन के लिए हमें ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। खाद को प्लांट की जड़ के पास अच्छी तरह से मिट्टी में मिला देना चाहिए। इसके साथ ही जीवामृत का भी रेगुलर छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए ड्रिप इरिगेशन ज्यादा बेहतर तरीका होता है।

कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग?

ड्रैगन फ्रूट की खेती की ट्रेनिंग स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से ली जा सकती है। इसके साथ ही इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) जो देश में कई शहरों में स्थित है, वहां से भी ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके साथ ही ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों से भी इसके बारे में जानकारी ली जा सकती है। इसके अलावा इंटरनेट की मदद से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। इसकी खेती को लेकर कई लोगों ने वीडियो तैयार किए हैं। कई संस्थान सेमिनार और वर्कशॉप भी आयोजित करवाते रहते हैं।

हर साल 8 लाख कमा सकते हैं मुनाफा

छोटे लेवल पर 100 से 200 प्लांट के साथ इसकी खेती की शुरुआत की जा सकती है। अगर बजट की बात करें तो शुरुआत में करीब एक लाख रुपए की लागत आएगी। जब आपकी फसल तैयार हो जाए, फ्रूट निकलने लगे और मार्केट में डिमांड हो तो आप इसका दायरा बढ़ा सकते हैं। सबसे चैलेंजिंग काम मार्केट में जगह बनाना होता है। जिसका मार्केटिंग नेटवर्क अच्छा है, बड़े शहरों और सुपर मार्केट तक पहुंच है, उसके लिए तो बल्ले-बल्ले है।

हालांकि अब छोटे शहरों में भी ड्रैगन फ्रूट की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। अगर आप 200 प्लांट के साथ खेती करते हैं तो साल में एक टन फ्रूट का आसानी से प्रोडक्शन कर सकते हैं। एक किलो फ्रूट की कीमत 200 से 300 रुपए के बीच होती है। यानी 2-3 लाख रुपए की मार्केटिंग कर सकते हैं। अगर आप एक एकड़ जमीन में खेती करते हैं तो करीब एक हजार प्लांट लगेंगे, जिससे 10 टन सालाना फ्रूट निकलेगा। इस तरह आप 10 लाख रुपए तक की मार्केटिंग कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि एक बार प्लांटिंग के बाद इसमें फिर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है। हर साल बस मेंटेनेंस की जरूरत होती है। एक प्लांट की लाइफ 25 साल तक होती है।

बड़े काम की चीज है ड्रैगन फ्रूट

आजकल बड़े-बड़े सुपर मार्केट में ड्रैगन फ्रूट की डिमांड है। इन दिनों बड़ी-बड़ी कंपनियां ड्रैगन फ्रूट खरीदकर उससे प्रोसेसिंग के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम सहित कई प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं। बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों में भी लोग इसे अपना रहे हैं। कोरोना में ज्यादातर लोगों ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसके साथ ही कोलेस्ट्रॉल लेवल घटाने के लिए, हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में भी इसका उपयोग होता है।

खबरें और भी हैं...