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आज की पॉजिटिव खबर:UP के अभिषेक ने 2 साल पहले सोलर चरखे से बने कपड़ों का स्टार्टअप शुरू किया, अब सालाना 2 करोड़ टर्नओवर

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

उत्तरप्रदेश के सुलतानपुर के रहने वाले अभिषेक पाठक ने सोलर एनर्जी बेस्ड ग्रीनवियर स्टार्टअप की शुरुआत की है। इसके तहत वे सोलर एनर्जी से चलने वाले चरखा और मशीनों की मदद से कपड़े तैयार करते हैं। देशभर में उनके प्रोडक्ट की डिमांड है। कई बड़ी कंपनियों के साथ उन्होंने टाइअप भी किया है। महज दो साल पहले शुरू हुए इस स्टार्टअप से वे सालाना 2 करोड़ रुपए का बिजनेस कर रहे हैं। इतना ही नहीं अपनी इस पहल से 500 से ज्यादा महिलाओं को उन्होंने रोजगार भी दिया है।

32 साल के अभिषेक की शुरुआती पढ़ाई सुलतानपुर में हुई। इसके बाद उन्होंने 2011 में NIFT से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद अलग-अलग कई कंपनियों में काम किया। फैशन और फैब्रिक से जुड़े कई स्टार्टअप और प्रोजेक्ट्स के साथ अहम पदों पर काम किया।

पढ़ाई के दौरान स्थानीय कारीगरों से उनका काम समझते थे

अभिषेक बताते हैं कि निफ्ट में पढ़ाई के दौरान खादी और देशी फैब्रिक में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। इस दौरान उन्हें जब भी वक्त मिलता या छुट्टियां होतीं, वे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाते थे और वहां के स्थानीय कारीगरों से मिलते थे। उनका काम समझते थे। इस तरह कोर्स कम्प्लीट होते-होते इस फील्ड में उनकी अच्छी खासी समझ हो गई।

अभिषेक ने अपने इस स्टार्टअप के जरिए बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं को रोजगार दिया है।
अभिषेक ने अपने इस स्टार्टअप के जरिए बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं को रोजगार दिया है।

निफ्ट से पास आउट होने के बाद दिल्ली में एक होम फर्निशिंग ब्रांड के साथ जुड़ गए। यहां उन्होंने करीब 2 साल तक काम किया। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वे खुद का कोई ट्रेडिशनल टेक्सटाइल बेस्ड स्टार्टअप शुरू करेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिल सके और उनकी कारीगरी को बेहतर प्लेटफॉर्म मिल सके।

इसके बाद अपने दोस्त के साथ मिलकर उन्होंने प्रकृति नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया। इसमें वे प्रिंटेड बॉटम वियर ड्रेसेज तैयार करके उसकी मार्केटिंग करते थे। कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक चला, लेकिन बिजनेस स्किल्स नहीं होने की वजह से इसे बंद करना पड़ा।

मेले में पहली बार देखा सोलर चरखा

इसके बाद वे एक संस्थान से जुड़ गए। जहां स्क्रेप फैब्रिक की मदद से ज्वेलरी बनती थी। यहां उन्हें कई टेक्सटाइल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लीड करने का मौका मिला। इस दौरान उत्तरप्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों के स्थानीय कारीगरों के बीच जाने और उनके काम को करीब से देखने का मौका मिला।

अभिषेक गांव की महिलाओं को पहले सोलर चरखा और सोलर लूम प्रोवाइड कराते हैं। इसके बाद उनके बनाए प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं।
अभिषेक गांव की महिलाओं को पहले सोलर चरखा और सोलर लूम प्रोवाइड कराते हैं। इसके बाद उनके बनाए प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं।

इसी बीच 2016 में दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित एक ट्रेड फेयर में अभिषेक का जाना हुआ। वहां उन्होंने देखा कि सोलर चरखा की मदद से बहुत कम वक्त में फैब्रिक तैयार किए जा रहे हैं। अभिषेक को यह आइडिया पसंद आया। उन्हें लगा कि इसको लेकर काम किया जा सकता है। फिर क्या था, उन्होंने फौरन उससे जुड़े लोगों से मुलाकात की, उनका आइडिया और मॉडल को समझा।

गांवों की महिलाओं को सोलर चरखा से ट्रेंड किया

इसके बाद उन्होंने इस मॉडल पर काम करना शुरू कर दिया। वे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्थानीय कारीगरों से मिले और उन्हें सोलर चरखा के बारे में जानकारी दी। साल 2016 के अंत में अभिषेक एक गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड ऑर्गनाइजेशन भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्थान (BHKGS) के साथ जुड़ गए। इसके जरिये उन्होंने UP, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात की 3 हजार से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग दी और उन्हें सोलर चरखा मुहैया कराया। इसके बाद 2018 में केंद्र सरकार ने मिशन सोलर चरखा लॉन्च किया। इससे इस सेक्टर को और अधिक मजबूती मिली।

प्रोडक्शन बढ़ा तो खुद का स्टार्टअप शुरू किया

अभिषेक कहते हैं कि सोलर चरखे की मदद से महिलाओं का काम आसान हो गया। पहले जहां वो 8 घण्टे काम करने के बाद 100 रुपए भी नहीं कमा पाती थीं, वो 250 से 300 रुपए तक कमाने लगीं। इसके साथ ही धागों का प्रोडक्शन भी पहले के मुकाबले ज्यादा होने लगा।

सोलर चरखे से तैयार धागे खादी की तरह ही होते हैं। बस इसमें हाथ की जगह सोलर चरखे का इस्तेमाल होता है।
सोलर चरखे से तैयार धागे खादी की तरह ही होते हैं। बस इसमें हाथ की जगह सोलर चरखे का इस्तेमाल होता है।

वे कहते हैं, 'अब इन धागों को खपाने के लिए मार्केट चाहिए था। साथ ही इन्हें गारमेंट्स में कन्वर्ट करने की जरूरत थी, ताकि वैल्यू एडिशन हो सके।' अभिषेक को लगा कि यही सही वक्त है कुछ करने का और 2019 में उन्होंने ग्रीन वियर नाम से खुद के स्टार्टअप की शुरुआत की।

स्थानीय कारीगरों को सोलर लूम से जोड़ा

अभिषेक कहते हैं कि अब हमें जरूरत ऐसे लोगों की थी जो इन धागों से फैब्रिक और कपड़े तैयार कर सकें। इसके लिए मैं UP और बिहार के कुछ स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की, जो हैंडलूम की मदद से धागों से फैब्रिक बनाते थे। मैंने उन्हें सोलर लूम के बारे में जानकारी दी और उसका फायदा समझाया। उन्हें यह आइडिया अच्छा लगा और वे सोलर लूम पर काम करने के लिए राजी हो गए। इस तरह करीब 500 कारीगर मेरे साथ जुड़ गए।

कैसे काम करता है सोलर चरखा और सोलर लूम

सोलर चरखा और सोलर लूम दोनों सन लाइट से चार्ज होते हैं। एक सोलर चरखा 8 घण्टे में एक किलो धागे तैयार करता है, जबकि एक सोलर लूम 8 घण्टे में इन धागों से 24 मीटर फैब्रिक तैयार करता है। अभिषेक बताते हैं कि 1 किलो धागे से 8 मीटर फैब्रिक बनता है। यानी, तीन सोलर चरखे के काम को खपाने के लिए एक सोलर लूम की जरूरत होती है।

अभिषेक कहते हैं कि सोलर चरखे की वजह से महिलाओं को अब कम मेहनत करना पड़ता है। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ती है।
अभिषेक कहते हैं कि सोलर चरखे की वजह से महिलाओं को अब कम मेहनत करना पड़ता है। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ती है।

क्या है बिजनेस मॉडल, कैसे करते हैं मार्केटिंग

अपने काम के मॉडल को समझाते हुए अभिषेक कहते हैं कि BHKGS की तरफ से जितना भी धागों का प्रोडक्शन होता, वे उसे खरीद लेते हैं। इसके बाद वे उन धागों को UP, बिहार जैसे राज्यों में सोलर लूम से काम करने वाले स्थानीय कारीगरों को मुहैया कराते हैं।

ये कारीगर उससे फैब्रिक तैयार करते हैं। इसके बाद लखनऊ स्थित उनकी कम्पनी में इस फैब्रिक से गारमेंट्स तैयार किया जाता है और फिर उसकी मार्केटिंग होती है। अभिषेक कहते हैं कि धागे तैयार करने से लेकर गारमेंट्स बनाने तक सब कुछ सोलर बेस्ड मशीनों से ही होता है।

मार्केटिंग के लिए अभिषेक ने कई बड़ी कंपनियों से टाइअप किया है। जो उनके प्रोडक्ट सीधे खरीद लेती हैं। साथ ही लखनऊ में उनके खुद के दो रिटेल स्टोर भी हैं।इसके अलावा वे अमेजन और फ्लिपकार्ट की मदद से देशभर में अपने प्रोडक्ट की ऑनलाइन मार्केटिंग करते हैं। जल्द ही खुद का भी ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च करने वाले हैं। ग्रीनवियर को पॉवरिंग लाइवलीहुडज प्रोग्राम से सपोर्ट मिला है, जिसे CEEW और विलग्रो इनोवेशन फाउंडेशन की तरफ से चलाया जा रहा है।

इस तरह के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो यह खबर आपके काम की है

दिल्ली के रहने वाले कुनाल वैद ने देश के अलग-अलग राज्यों के स्थानीय करीगरों के साथ मिलकर एक स्टार्टअप शुरू किया है। ये कारीगर अलग-अलग वैराइटी के रेशम के धागे तैयार करते हैं। कुनाल अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इसकी मार्केटिंग करते हैं। भारत के साथ ही विदेशों में भी इन धागों की डिमांड है। कुनाल के साथ 12 हजार से ज्यादा कारीगर जुड़े हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। फिलहाल कुनाल की कंपनी का टर्नओवर 6 करोड़ रुपए है। (पढ़िए पूरी खबर)

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