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आज की पॉजिटिव खबर:MP के अभिनव ने लॉकडाउन में दोस्त के साथ 50 हजार रुपए की लागत से खुद का स्टार्टअप शुरू किया, पहले ही साल 40 लाख रु. का टर्नओवर

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

पिछले कुछ सालों में नए स्टार्टअप की डिमांड बढ़ी है। हर सेक्टर में नए स्टार्टअप की शुरुआत हो रही है। कई युवा इस फील्ड में आ रहे हैं। हालांकि एक दिक्कत भी है। जो स्टार्टअप छोटे होते हैं या जिनका बजट कम होता है, उन्हें खुद को इस्टैब्लिश करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को स्टार्टअप शुरू करने के बाद सही मार्केट नहीं मिल पाता है और उन्हें अपना कारोबार समेटना भी पड़ता है।

इस परेशानी को कम करने के लिए मध्य प्रदेश के रहने वाले अभिनव दुबे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक स्टार्टअप की शुरुआत की है। वे छोटे-बड़े स्टार्टअप्स को मार्केटिंग से लेकर प्रमोशन तक हर स्टेज पर सपोर्ट करते हैं। अब तक वे 7 हजार से ज्यादा बिजनेस के लिए काम कर चुके हैं। एक साल के भीतर उन्होंने 40 लाख रुपए का बिजनेस किया है।

32 साल के अभिनव दुबे मध्य प्रदेश के जबलपुर से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई की है। इसके बाद अलग-अलग कंपनियों में लंबे वक्त तक काम किया है। उनके दोस्त 33 साल के प्रकाश भजंत्री महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। वे भी इंजीनियर हैं और IT सेक्टर में अच्छा-खासा उनका अनुभव रहा है।

अभिनव दुबे मध्य प्रदेश के जबलपुर से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई की है।
अभिनव दुबे मध्य प्रदेश के जबलपुर से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई की है।

अभिनव कहते हैं कि साल 2011 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद एक साल मैंने एक कंपनी में नौकरी की। फिर MBA में दाखिला लिया और पार्ट टाइम जॉब करने लगा। साल 2014 में MBA करने के बाद पुणे शिफ्ट हो गया और करीब 6 साल तक मार्केटिंग की फील्ड में काम किया। काम के दौरान मुझे नए स्टार्टअप को शुरू करने और उसकी मार्केटिंग को इस्टैब्लिश करने की अच्छी समझ हो गई थी, हमने कई ऐसे स्टार्टअप्स की मदद भी की थी।

लॉकडाउन में ऑनलाइन मार्केटिंग की डिमांड बढ़ गई

साल 2020 में कोविड के चलते जब लॉकडाउन लगा तो अभिनव जबलपुर आ गए। जबकि प्रकाश पहले से ही नौकरी छोड़कर खुद का काम कर रहे थे। अभिनव कहते हैं कि हम लोग खुद का कुछ शुरू करना चाहते थे। इसको लेकर प्लान भी कर रहे थे। हालांकि तब कुछ तय नहीं कर पाए थे। जब लॉकडाउन लगा तो ऑनलाइन मार्केटिंग की डिमांड बढ़ गई। लोग अपनी जरूरत की बुनियादी चीजों के लिए भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तरफ रुख करने लगे। तब मैंने यह महसूस किया कि ग्राउंड लेवल पर खास करके छोटे बिजनेस के लिए इस तरह के प्लेटफॉर्म की उपलब्धता न के बराबर है। यही वजह है कि उनकी ग्रोथ काफी धीमी है। अगर इस सेक्टर में कुछ काम किया जाए तो कामयाबी मिल सकती है।

50 हजार रुपए से भी कम लागत में की स्टार्टअप की शुरुआत

अभिनव की टीम में फिलहाल 25 लोग काम करते हैं। इसमें लगभग हर फील्ड के जानकार शामिल हैं।
अभिनव की टीम में फिलहाल 25 लोग काम करते हैं। इसमें लगभग हर फील्ड के जानकार शामिल हैं।

इसके बाद अभिनव ने प्रकाश से बात की और दोनों काम करने के लिए राजी हो गए। चूंकि प्रकाश IT फील्ड से आते थे तो उन्होंने खुद ही mbgcart.com नाम से अपनी वेबसाइट डेवलप की। जबकि मार्केटिंग की कमान अभिनव ने संभाल ली। तब प्रकाश फुल टाइम काम कर रहे थे और अभिनव नौकरी के साथ अपने स्टार्टअप के लिए भी काम कर रहे थे। अभिनव कहते हैं कि हमने शुरुआत बहुत ही छोटे लेवल पर की थी और ज्यादातर काम खुद ही करते थे। इसलिए 50 हजार रुपए से भी कम खर्चे में हमने जुलाई 2020 से काम करना शुरू कर दिया।

शुरुआती दौर में अभिनव और प्रकाश खुद ही मार्केटिंग करते थे। वे जबलपुर में अलग-अलग मार्केट्स में घूमकर अपनी ब्रांडिंग करते थे। छोटे स्टार्टअप और दुकानदारों से मिलते थे। इस तरह जिन्हें उनका आइडिया पसंद आया, वे उनकी सर्विस लेने लगे।

अभिनव कहते हैं कि हमारे ग्राहकों ने ही हमारी मार्केटिंग कर दी। हमें बाहर से कुछ खास करने की जरूरत नहीं पड़ी। हम जिसके लिए काम करते थे, वह दूसरे को भी हमारे बारे में जानकारी देता था। इस तरह माउथ पब्लिशिंग के जरिए हमारी मार्केटिंग होने लगी और हमारे कस्टमर्स बढ़ने लगे।

डिमांड बढ़ी तो ऑल इंडिया लेवल पर शुरू किया काम

अभिनव बताते हैं कि जबलपुर और पुणे दोनों शहरों में हमारा ऑफिस है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए देशभर में हम लोग सर्विस प्रोवाइड कर रहे हैं।
अभिनव बताते हैं कि जबलपुर और पुणे दोनों शहरों में हमारा ऑफिस है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए देशभर में हम लोग सर्विस प्रोवाइड कर रहे हैं।

अभिनव कहते हैं कि जब हमारा काम बढ़ गया और पूरी तरह सिक्योर हो गए, तो दिसंबर 2020 में मैंने नौकरी छोड़ दी और फुल टाइम काम करने लगा। जनवरी 2021 से हमने खुद का दायरा बढ़ाना शुरू किया। जबलपुर के बाद महाराष्ट्र के पुणे में अपना ऑफिस खोला और ऑल इंडिया लेवल पर काम करना शुरू कर दिया। हालांकि इस बीच कोविड की दूसरी लहर आने से हमारी रफ्तार जरूर थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन लॉकडाउन खुलते ही हम वापस ट्रैक पर लौट गए।

अब तक हम लोग सात हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स की मदद कर चुके हैं। 200 कैटेगरी में हम अपनी सर्विस प्रोवाइड करते हैं। हमारे साथ करीब 25 लोगों की टीम काम कर रही है। इसमें हर फील्ड के जानकार लोग शामिल हैं।

कैसे करते हैं स्टार्टअप्स की मदद?

अभिनव कहते हैं कि हमने 'ट्वेंटी इन वन' नाम से अपनी सर्विस शुरू की है। यानी एक बिजनेस को चलाने के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है, वैसी 20 चीजें हम अपने कस्टमर्स को प्रोवाइड करते हैं। इसमें डिजिटल मार्केटिंग, वेबसाइट और ऐप डेवलपमेंट, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्रमोशन की सुविधा है। इतना ही नहीं, हम कस्टमर्स के लिए सोशल मीडिया कंटेंट और वीडियो भी जेनरेट करते हैं, ताकि वह आसानी से अपनी मार्केटिंग कर सके।

अभिनव कहते हैं कि देश में कई ऐसे छोटे स्टार्टअप हैं, जो बढ़िया काम कर रहे हैं और उनकी सर्विस भी अच्छी है, लेकिन उनकी सही मार्केटिंग नहीं हो पा रही है।
अभिनव कहते हैं कि देश में कई ऐसे छोटे स्टार्टअप हैं, जो बढ़िया काम कर रहे हैं और उनकी सर्विस भी अच्छी है, लेकिन उनकी सही मार्केटिंग नहीं हो पा रही है।

अपनी प्रोसेसिंग फीस को लेकर अभिनव बताते हैं कि हम लोग 2500 से लेकर 10 हजार रुपए कस्टमर्स से चार्ज करते हैं। यह सालाना फीस होती है। हम एडवांस पेमेंट लेने की बजाय काम करने और कस्टमर को संतुष्ट करने के बाद ही पैसे की डिमांड करते हैं। वे बताते हैं कि हमारा टेंपलेट इतना अधिक यूजर फ्रेंडली होता है कि कोई भी कस्टमर उसे आसानी से हैंडल कर सकता है और अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव कर सकता है। इसके साथ ही हम लोग गूगल पर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का काम भी करते हैं। ताकि किसी खास एरिया में लोग अपनी जरूरत की चीजें सर्च करें तो उन्हें ऐसे स्टार्टअप की लिस्ट मिल जाए।

कस्टमर्स कैसे कॉन्टैक्ट कर सकते हैं?

अभिनव बताते हैं कि सोशल मीडिया और हमारी वेबसाइट के जरिए कोई भी हमसे कॉन्टैक्ट कर सकता है। उसे हमारी वेबसाइट पर जाकर एक फॉर्म भरना होगा। इसके बाद हमारी टीम उससे कॉन्टैक्ट करेगी। कस्टमर की जरूरतें समझने और बातचीत फाइनल होने के बाद हम लोग काम करना शुरू कर देते हैं। एक दिन या 48 घंटे के भीतर हम वेबसाइट और ऐप बनाकर कस्टमर को प्रोवाइड करा देते हैं। इतना ही नहीं, अगर किसी कस्टमर को बिजनेस शुरू करने या रजिस्ट्रेशन कराने में किसी तरह की मदद की जरूरत होती है, तो वह सुविधा भी हम प्रोवाइड कराते हैं।

अगर इस तरह के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है, तो यह स्टोरी आपके काम की है

इंदौर के रहने वाले रोहित वर्मा ने दो साल पहले हाइपर लोकल मार्केटिंग की शुरुआत की। वे अपने मोबाइल ऐप के जरिए देश के 41 शहरों में छोटे-बड़े बिजनेस की मदद कर रहे हैं। उनके ऐप की मदद से कोई भी एक क्लिक पर इन जगहों पर अपनी पसंद की दुकानें ढूंढ सकता है। उसकी पूरी डिटेल्स ऐप पर मिल जाएगी। होटल, मेडिकल, डॉक्टर, पार्क, सैलून सहित 50 से ज्यादा कैटेगरी के बिजनेस उनके साथ जुड़े हैं। (पढ़िए पूरी खबर)

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