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तीसरी लहर का पीक 3-4 हफ्तों में आएगा:ओमिक्रॉन दिल्ली-मुंबई के बाद छोटे शहरों में फैलेगा, शुरू के 20 से 25 दिन स्पीड बहुत तेज रहेगी

नईदिल्ली5 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गुरुवार सुबह तक ओमिक्रॉन के ढाई हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं। दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों केस तेजी से सामने आ रहे हैं। महामारी एक्सपर्ट चंद्रकांत लहारिया के मुताबिक अगले 3-4 हफ्ते इन शहरों के लिए टेंशन वाले होंगे। इसके बाद केस एकदम से कम होने लगेंगे।

जब यहां केस कम होंगे, तब छोटे शहरों में तेजी से बढ़ने लगेंगे और अगले 3-4 हफ्ते छोटे शहरों के लिए चिंता वाले होंगे। इन शहरों के बाद वायरस गांव में कोहराम मचा सकता है। लहारिया कहते हैं, ओमिक्रॉन का पैटर्न यह बताता है कि यह शुरुआत के 3-4 हफ्तों में बहुत तेजी से फैलता है, फिर एकदम से कम हो जाता है।

राहत की बात ये है कि इससे संक्रमित हुए सभी मरीजों को अस्पताल में एडमिट करने की नौबत नहीं आ रही है। जैसे, मुंबई में ओमिक्रॉन संक्रमित 10 मरीजों में से 9 एसिम्प्टोमेटिक हैं। मतलब 10 में से 1 में ही लक्षण नजर आते हैं, वो भी माइल्ड होते हैं। अधिकतर संक्रमित घर में ही ठीक हो जा रहे हैं। हालांकि जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है, उन्हें यह ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।

1 हजार लोगों पर 1.4 बेड्स, 1445 लोगों पर 1 डॉक्टर

चंद्रकांत लहारिया ने आगे बताया कि पहले लॉकडाउन के दौरान 23 मार्च 2020 को हमारे पास 10,180 आइसोलेशन बेड और 2,168 ICU बेड की कैपेसिटी थी। अब करीब एक साल बाद हमारे पास 18,03,266 आइसोलेशन बेड और 1,24,598 ICU बेड्स की कैपेसिटी है।

उन्होंने कहा कि PM केयर्स और कोविड-19 इमरजेंसी रिस्पॉन्स एंड हेल्थ सिस्टम प्रिपेयर्डनेस पैकेज-II से राज्यों को 1.14 लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स प्रोवाइड करवाए जा रहे हैं। 1374 अस्पतालों में 958 लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक्स और मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम इंस्टॉल करने के लिए फंड सेंक्शन किया जा चुका है।

हालांकि सरकारी डेटा यह भी बताता है कि 1 हजार लोगों पर 1.4 बेड्स और 1445 लोगों पर 1 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। 31 मार्च 2020 तक प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (PHC) पर 6.8 एलोपैथिक डॉक्टर्स की कमी थी। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स (CHCs) पर 76.1% स्पेशलिस्ट्स की कमी थी।

डेल्टा के मुकाबले अब हमारी तैयारी ज्यादा
लहारिया का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन के मामले में हमारी तैयारी काफी ज्यादा है। इस वैरिएंट को जल्दी डिटेक्ट भी कर लिया गया। अब लॉकडाउन की जरूरत नहीं। सिर्फ जरूरी रेस्ट्रिक्शंस लगाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर्स पर स्टाफ, मेडिसिन और जरूरी इक्विपमेंट्स होने चाहिए, ताकि केस बढ़ने पर शुरुआत में ही मरीजों को कंट्रोल किया जा सके।

लहारिया कहते हैं कि वायरस अब सब जगह है, इसलिए लॉकडाउन लगाने का कोई फायदा नहीं। लॉकडाउन लगाने से हम सिर्फ वायरस की स्पीड कम कर सकते हैं, उसे खत्म नहीं कर सकते। इसके बजाय जहां केस बढ़ रहे हैं, वहां के लोगों को मास्क लगाना चाहिए। ट्रैवल बहुत जरूरी होने पर ही करना चाहिए। भीड़ वाले इलाकों में नहीं जाना चाहिए और जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई, उन्हें तुरंत वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए।